Tag: CRPF

  • सोनमर्ग अटल टनल के पास CRPF वाहन हादसे का शिकार, छह जवान घायल; प्राथमिक उपचार के बाद कैंप में भर्ती, श्रीनगर-लेह हाईवे पर सुरक्षा व्यवस्था बरकरार

    सोनमर्ग अटल टनल के पास CRPF वाहन हादसे का शिकार, छह जवान घायल; प्राथमिक उपचार के बाद कैंप में भर्ती, श्रीनगर-लेह हाईवे पर सुरक्षा व्यवस्था बरकरार


    नई दिल्ली ।
    जम्मू-कश्मीर के गांदरबल जिले में श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित सोनमर्ग अटल टनल के समीप शुक्रवार को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) का एक वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में वाहन में सवार छह जवान घायल हो गए। दुर्घटना के तुरंत बाद स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा बलों की टीम मौके पर पहुंची तथा घायलों को सुरक्षित बाहर निकालकर प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया गया। इसके बाद सभी घायल जवानों को आगे की चिकित्सकीय देखभाल के लिए निकटवर्ती सीआरपीएफ कैंप भेज दिया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार सीआरपीएफ का वाहन श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग पर नियमित आवाजाही के दौरान सोनमर्ग सुरंग के पास सड़क से फिसलकर पलट गया। दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए संबंधित अधिकारियों ने जांच शुरू कर दी है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि हादसा सड़क की स्थिति, मौसम अथवा किसी तकनीकी कारण से हुआ। अधिकारियों का कहना है कि विस्तृत जांच के बाद ही दुर्घटना के वास्तविक कारणों की पुष्टि की जा सकेगी।

    हादसे के बाद राहत और बचाव कार्य तेजी से चलाया गया। सुरक्षा बलों और स्थानीय प्रशासन के समन्वय से घायलों को बिना किसी देरी के चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई गई। चिकित्सकों की निगरानी में सभी जवानों का उपचार जारी है और उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार किसी भी जवान को गंभीर जीवन-घातक चोट नहीं आई है, हालांकि सभी का आवश्यक चिकित्सकीय परीक्षण किया जा रहा है।

    श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग रणनीतिक दृष्टि से देश के सबसे महत्वपूर्ण मार्गों में गिना जाता है। इसी मार्ग के जरिए लद्दाख क्षेत्र तक सैन्य और नागरिक आपूर्ति सुनिश्चित की जाती है। सोनमर्ग अटल टनल के आसपास का इलाका भी सुरक्षा और सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में इस मार्ग पर सुरक्षा बलों की नियमित आवाजाही बनी रहती है और वाहनों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए विशेष सतर्कता बरती जाती है।

    यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब सीआरपीएफ ने वर्ष 2026 की पहली छमाही में अभियानों के दौरान उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इस अवधि में बल को किसी भी अभियान के दौरान जवानों की शहादत का सामना नहीं करना पड़ा। लगातार चल रहे आतंकवाद-रोधी और आंतरिक सुरक्षा अभियानों के बीच यह उपलब्धि सुरक्षा बल के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विशेष रूप से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा स्थिति में आए सुधार के बाद अभियान संबंधी हताहतों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।

    देश के सबसे बड़े अर्धसैनिक बलों में शामिल सीआरपीएफ के जिम्मे जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद-रोधी अभियान, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा अभियान, पूर्वोत्तर राज्यों में उग्रवाद विरोधी अभियान तथा विभिन्न राज्यों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने जैसे महत्वपूर्ण दायित्व हैं। ऐसे में जवानों की सुरक्षित आवाजाही और परिचालन क्षमता बनाए रखना बल की प्राथमिकताओं में शामिल है। सोनमर्ग के निकट हुई यह दुर्घटना सुरक्षा संचालन के दौरान सड़क सुरक्षा और वाहन संचालन से जुड़े पहलुओं पर भी ध्यान केंद्रित करती है। फिलहाल घायल सभी जवानों का उपचार जारी है और संबंधित एजेंसियां दुर्घटना के कारणों की विस्तृत जांच में जुटी हैं।

  • POK में मारा गया पुलवामा हमले का मास्टरमाइंड, हमजा बुरहान की गोली मारकर हत्या

    POK में मारा गया पुलवामा हमले का मास्टरमाइंड, हमजा बुरहान की गोली मारकर हत्या



    नई दिल्ली। 2019 के चर्चित पुलवामा आतंकी हमला के मुख्य साजिशकर्ताओं में शामिल आतंकी हमजा बुरहान की पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) में हत्या कर दी गई है। ‘डॉक्टर’ के नाम से पहचाने जाने वाले हमजा को मुजफ्फराबाद के पास अज्ञात बंदूकधारियों ने गोलियों से भून डाला। हमले में उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमजा बुरहान का असली नाम अर्जुमंद गुलजार डार था और वह जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के रत्नीपोरा का रहने वाला था। बताया जा रहा है कि वह पिछले कई वर्षों से POK में एक स्कूल टीचर की फर्जी पहचान के साथ रह रहा था। इसी आड़ में वह आतंकी नेटवर्क, ट्रेनिंग कैंप और घुसपैठ गतिविधियों को संचालित कर रहा था।

    सूत्रों के अनुसार, मुजफ्फराबाद के घने जंगल वाले इलाके में अज्ञात हमलावरों ने उसे निशाना बनाया। हमलावरों ने उस पर अंधाधुंध फायरिंग की, जिससे कई गोलियां लगने के कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई। फिलहाल हमलावरों की पहचान नहीं हो सकी है।

    हमजा आतंकी संगठन अल-बद्र का प्रमुख कमांडर था और वह जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी नेटवर्क के साथ भी सक्रिय रूप से जुड़ा हुआ था। भारत सरकार ने वर्ष 2022 में उसे UAPA के तहत आधिकारिक तौर पर आतंकवादी घोषित किया था। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की पुलवामा हमले से जुड़ी चार्जशीट में भी उसका नाम प्रमुख साजिशकर्ताओं में शामिल था।

    बताया जाता है कि हमजा पाकिस्तान जाकर आतंकी संगठन अल-बद्र में शामिल हुआ था और बाद में उसका कमांडर बन गया। वह पाकिस्तान से ही जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने, युवाओं को संगठन में भर्ती करने और फंडिंग जुटाने का काम करता था।

    गृह मंत्रालय के अनुसार, हमजा युवाओं को आतंकवादी गतिविधियों के लिए उकसाने और आतंकी संगठनों के लिए आर्थिक मदद जुटाने में भी सक्रिय था। पुलवामा हमले के अलावा उसे कई अन्य आतंकी घटनाओं का भी मास्टरमाइंड माना जाता था।

    14 फरवरी 2019 को हुए पुलवामा हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे। उस दिन जवानों का काफिला जम्मू से श्रीनगर जा रहा था, तभी पुलवामा के लेथपोरा इलाके में विस्फोटकों से भरी एक कार जवानों की बस से टकरा गई थी। धमाका इतना भीषण था कि बस के परखच्चे उड़ गए थे। इस आत्मघाती हमले को स्थानीय आतंकी आदिल अहमद डार ने अंजाम दिया था, जबकि इसकी जिम्मेदारी जैश-ए-मोहम्मद ने ली थी।

    एनआईए की विस्तृत जांच में मसूद अजहर, अब्दुल रऊफ असगर, उमर फारूक और हमजा बुरहान समेत कई आतंकियों को इस हमले की साजिश में शामिल पाया गया था। अब हमजा की मौत को आतंकी नेटवर्क के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

    हालांकि, उसकी हत्या किसने और किन कारणों से की, इसे लेकर अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। सुरक्षा एजेंसियां पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

  • पीएम मोदी की अपील का असर: CRPF-ITBP ने शुरू की ईंधन बचत मुहिम, पेट्रोल-डीजल बजट में 10% कटौती

    पीएम मोदी की अपील का असर: CRPF-ITBP ने शुरू की ईंधन बचत मुहिम, पेट्रोल-डीजल बजट में 10% कटौती



    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से देशवासियों से पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील का असर अब सुरक्षा बलों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) ने ईंधन की खपत कम करने के लिए बड़े कदम उठाए हैं, जिनमें वाहनों के उपयोग से लेकर प्रशासनिक यात्राओं तक में सख्त बदलाव शामिल हैं।

    CRPF ने सबसे बड़ा फैसला लेते हुए अपने पूरे वाहनों के ईंधन बजट में 10 प्रतिशत की कटौती लागू कर दी है। इसके तहत अब किसी भी अधिकारी को एक से अधिक सरकारी वाहन उपलब्ध नहीं कराया जाएगा। साथ ही मुख्यालय ने सभी इकाइयों से ईंधन बचत के नए सुझाव भी मांगे हैं ताकि संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सके।

    सबसे दिलचस्प बदलाव ग्राउंड लेवल पर देखने को मिल रहा है, जहां CRPF ने तय किया है कि जिन इलाकों में संभव होगा, वहां मोटरसाइकिल पेट्रोलिंग की जगह साइकिल से गश्त की जाएगी। इसका उद्देश्य न सिर्फ ईंधन की बचत करना है, बल्कि जवानों की फिटनेस को भी बेहतर बनाना है। हालांकि यह नियम संवेदनशील और उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में लागू नहीं होगा।

    इसी तरह ITBP ने भी सख्त कदम उठाते हुए अपने अधिकारियों के सभी विदेशी दौरों पर फिलहाल रोक लगा दी है। साथ ही प्रशासनिक कार्यों और स्थिर तैनाती वाले क्षेत्रों में वाहनों के उपयोग को भी सीमित करने का निर्देश जारी किया गया है, ताकि अनावश्यक ईंधन खपत को रोका जा सके।

    दोनों सुरक्षा बलों ने यह स्पष्ट किया है कि ईंधन बचत के इन उपायों का असर किसी भी हालत में देश की सुरक्षा और ऑपरेशनल तैयारियों पर नहीं पड़ेगा। आतंकवाद-रोधी अभियानों और सीमा सुरक्षा जैसी अहम ड्यूटी में लगे वाहनों को इस कटौती से पूरी तरह बाहर रखा गया है।