Tag: Crude Oil Price Surge

  • मिडिल ईस्ट तनाव से कच्चे तेल में उछाल, होर्मुज स्ट्रेट संकट का बड़ा असर!

    मिडिल ईस्ट तनाव से कच्चे तेल में उछाल, होर्मुज स्ट्रेट संकट का बड़ा असर!


    नई दिल्ली। वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में शुक्रवार को 1% से ज्यादा की तेजी देखने को मिली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और Strait of Hormuz में सप्लाई बाधित होने की आशंका ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। यह जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम तेल सप्लाई रूट्स में से एक है, जहां किसी भी तरह की रुकावट का सीधा असर वैश्विक बाजार पर पड़ता है।

    ब्रेंट और WTI में तेजी

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 1.13% बढ़कर 97.01 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। वहीं WTI क्रूड 1.39% की बढ़त के साथ 99.24 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड करता नजर आया।

    गौरतलब है कि इससे पहले बुधवार को तेल की कीमतों में करीब 20% की गिरावट आई थी और यह 100 डॉलर के नीचे आ गया था। अब दोबारा तेजी ने बाजार में अनिश्चितता को और बढ़ा दिया है।

    Multi Commodity Exchange पर भी दिखा असर

    भारतीय बाजार में Multi Commodity Exchange (MCX) पर क्रूड ऑयल फ्यूचर्स (20 अप्रैल डिलीवरी) करीब 2.43% बढ़कर 9,150 रुपये प्रति बैरल तक पहुंच गया। यह तेजी घरेलू बाजार में भी वैश्विक संकेतों का असर दर्शाती है।

    सीजफायर के बावजूद तनाव बरकरार

    हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के सीजफायर की घोषणा हुई है, लेकिन जमीन पर हालात अभी भी पूरी तरह शांत नहीं हैं। Israel द्वारा Lebanon में जारी हमले और Iran की गतिविधियों ने स्थिति को जटिल बना रखा है।

    बताया जा रहा है कि Iran ने Strait of Hormuz को बंद कर दिया है, जिससे शिपिंग गतिविधियां सामान्य स्तर के 10% से भी कम रह गई हैं। शिपिंग कंपनियां भी स्थिति स्पष्ट होने तक इस मार्ग से जहाज भेजने में सतर्कता बरत रही हैं।

    Donald Trump की चेतावनी

    इस बीच, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने चेतावनी दी है कि अगर सीजफायर का पालन नहीं हुआ तो बड़े स्तर पर सैन्य कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इसकी संभावना फिलहाल कम है।

    उन्होंने दोहराया कि Iran को परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी और Strait of Hormuz को खुला और सुरक्षित रखने के लिए अमेरिका तैयार है।

    आगे क्या संकेत?

    Asian Development Bank (ADB) के अनुसार, मौजूदा हालात को देखते हुए निकट भविष्य में तेल की कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं। हालांकि, यदि भू-राजनीतिक तनाव कम होता है, तो बाजार में धीरे-धीरे स्थिरता लौट सकती है।

  • Gold & Petrol Diesel Price Today: सोना हुआ सस्ता, पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर

    Gold & Petrol Diesel Price Today: सोना हुआ सस्ता, पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर


    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में Iran और United States के बीच बढ़ते तनाव का असर अब ग्लोबल मार्केट पर साफ दिखने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, लेकिन भारत में फिलहाल पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर बने हुए हैं, जिससे आम जनता को राहत मिली है।

    सोना हुआ सस्ता, दो दिन बाद टूटी तेजी
    लगातार दो दिनों की स्थिरता के बाद आज सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। राजधानी Delhi में 24 कैरेट सोना ₹10 सस्ता होकर ₹1,50,800 प्रति 10 ग्राम 22 कैरेट सोना ₹10 सस्ता होकर ₹1,38,240 प्रति 10 ग्राम पिछले दो दिनों में 24 कैरेट सोना ₹280 और 22 कैरेट ₹260 तक सस्ता हो चुका है। सरकार द्वारा इंपोर्ट प्राइस में कटौती का असर भी कीमतों पर देखा जा रहा है।

    देश के बड़े शहरों में सोने का भाव
    Mumbai: ₹1,50,650 (24K), ₹1,38,090 (22K)
    Kolkata: ₹1,50,650 (24K), ₹1,38,090 (22K)
    Chennai: ₹1,52,630 (24K), ₹1,39,910 (22K)
    Bengaluru: ₹1,50,650 (24K), ₹1,38,090 (22K)
    Lucknow: ₹1,50,800 (24K), ₹1,38,240 (22K)
    Patna: ₹1,50,700 (24K), ₹1,38,140 (22K)

    चांदी भी सस्ती, 4 दिन बाद आई गिरावट
    चांदी की कीमतों में भी गिरावट देखने को मिली है। दिल्ली में चांदी ₹100 सस्ती होकर ₹2,49,900 प्रति किलो पर पहुंच गई है Mumbai और Kolkata में भी लगभग यही भाव है Chennai में चांदी सबसे महंगी ₹2,54,900 प्रति किलो है

    कच्चे तेल में उछाल, सप्लाई को लेकर चिंता
    ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। Strait of Hormuz में बढ़ते तनाव के चलते सप्लाई प्रभावित होने की आशंका है। ब्रेंट क्रूड $96.73 प्रति बैरल WTI क्रूड $96.99 प्रति बैरल पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर, जानें आपके शहर का रेट कच्चे तेल की कीमत बढ़ने के बावजूद भारत में ईंधन के दाम नहीं बढ़े हैं

    Delhi: पेट्रोल ₹94.77 | डीजल ₹87.67
    Mumbai: पेट्रोल ₹103.54 | डीजल ₹90.03
    Chennai: पेट्रोल ₹101.06 | डीजल ₹91.50
    Kolkata: पेट्रोल ₹105.86 | डीजल ₹92.02
    Bengaluru: पेट्रोल ₹102.96 | डीजल ₹88.95
    Hyderabad: पेट्रोल ₹107.46 | डीजल ₹97.00

    घर बैठे ऐसे चेक करें ताजा रेट
    आप SMS के जरिए भी अपने शहर का पेट्रोल-डीजल रेट जान सकते हैं: IOCL: RSP भेजें 9224992249 पर BPCL: RSP भेजें 9223112222 पर HPCL: HP Price भेजें 9222201122 पर विशेषज्ञों के अनुसार सोना, चांदी और कच्चे तेल की कीमतें आगे Iran-United States के बीच तनाव, ग्लोबल आर्थिक आंकड़े और RBI की नीतियों पर निर्भर करेंगी।

  • मध्य पूर्व तनाव और ट्रंप की चेतावनी के चलते कच्चे तेल की कीमतों में 3 प्रतिशत से ज्यादा की उछाल

    मध्य पूर्व तनाव और ट्रंप की चेतावनी के चलते कच्चे तेल की कीमतों में 3 प्रतिशत से ज्यादा की उछाल


    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और डोनाल्ड ट्रंप की सख्त चेतावनी के बीच वैश्विक तेल बाजार में उथल-पुथल तेज हो गई है। मंगलवार को कच्चे तेल की कीमतों में 3 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई, जिससे बाजार में अस्थिरता और बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में भू-राजनीतिक घटनाक्रम तेल की कीमतों की दिशा तय करेंगे।

    ब्रेंट और WTI क्रूड में जोरदार उछाल

    वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड वायदा 1.69% यानी 1.86 डॉलर की बढ़त के साथ 111.63 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं WTI क्रूड में 3% से ज्यादा यानी 4.15 डॉलर की तेजी आई और यह 116.56 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया।यह तेजी दिन के शुरुआती कारोबार में ही देखने को मिली, जिससे साफ है कि निवेशकों में तनाव को लेकर चिंता बढ़ी हुई है।

    कुछ ही दिनों में 60% से ज्यादा चढ़ा तेल

    मध्य पूर्व में संघर्ष शुरू होने के बाद से तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड 27 फरवरी को 72.48 डॉलर से बढ़कर 9 मार्च को 119.50 डॉलर तक पहुंच गया, यानी करीब 60% की तेजी। साल 2026 में अब तक तेल की कीमतों में लगभग 90% तक उछाल देखा जा चुका है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ता जा रहा है।

    ट्रंप की चेतावनी से बढ़ी चिंता

    तेल की कीमतों में यह तेजी उस समय आई, जब डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर कड़ा रुख अपनाया।ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट को खोलने के लिए समयसीमा तय करते हुए चेतावनी दी कि अगर ऐसा नहीं हुआ, तो “तेहरान पर बड़ा हमला” किया जा सकता है। उन्होंने यहां तक कहा कि ईरान को “एक रात में खत्म किया जा सकता है।”

    होर्मुज स्ट्रेट: तेल सप्लाई की लाइफलाइन

    होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण तेल सप्लाई रूट्स में से एक है। यहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का करीब 20% गुजरता है। 28 फरवरी से चल रहे संघर्ष के कारण इस रूट पर असर पड़ा है, जिससे सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है और कीमतों में उछाल देखने को मिल रहा है।

    ईरान का सख्त रुख, सीजफायर से इनकार

    रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने सीजफायर के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है और संघर्ष जारी रखने का फैसला किया है। इससे स्थिति और गंभीर होती जा रही है और बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।

    शेयर बाजार पर भी असर

    तेल की कीमतों में तेजी और वैश्विक संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार भी दबाव में नजर आया। सेंसेक्स और निफ्टी में करीब 1% की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, अमेरिका का वॉल स्ट्रीट हल्की बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख देखने को मिला।

    आगे क्या? बाजार की नजर भू-राजनीति पर

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ता है, तो तेल की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं। वहीं, किसी समझौते की स्थिति में कीमतों में राहत मिल सकती है।

    मध्य पूर्व तनाव और ट्रंप की चेतावनी के चलते कच्चे तेल की कीमतों में 3% से ज्यादा उछाल आया है। होर्मुज स्ट्रेट पर असर और ईरान के सख्त रुख से वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई है।

  • ऑयल मार्केट में हलचल: कीमतों में जोरदार उछाल, साल के उच्चतम स्तर के पास

    ऑयल मार्केट में हलचल: कीमतों में जोरदार उछाल, साल के उच्चतम स्तर के पास


    नई दिल्ली पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ नजर आने लगा है। सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की 3 प्रतिशत से अधिक की तेज बढ़त दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड 3.66 प्रतिशत पैमाना 116.70 डॉलर प्रति पाउंड इंट्रा-डे हाई रीच तक पहुंच गया, जो 52 सामान्य के करीब है। वहीं डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 3 प्रतिशत से अधिक उछालकर 103 डॉलर प्रति शेयर के पार पहुंच गया।

    पश्चिम एशिया तनाव बना सबसे बड़ा कारण

    तेल की इस तेजी की मुख्य वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है। विशेष रूप से यमन के होती विद्रोहियों के इस संघर्ष में शामिल हैं और इजराइल पर हमले के बाद हमले और हमले हुए हैं। हूती ग्रुप ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि जब तक उनके सहयोगी आतंकवादी हमले जारी रखेंगे, तब तक वे भी कार्रवाई करेंगे। इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है।

    अक्रियाशील होने का खतरा

    विशेषज्ञ का मानना ​​है कि अगर यह तनाव लंबे समय तक जारी रहता है, तो कच्चे तेल की विषाक्तता प्रभावित हो सकती है। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य में अहम समुद्री मील का पत्थर पर प्रभाव का खतरा है, जहां से दुनिया की बड़ी मात्रा में तेल की आपूर्ति होती है।
    मार्च महीने में ही ब्रेंट क्रूड के बाजार में 50 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है, जो संकेत देता है कि अनिश्चितता और जोखिम लगातार बढ़ रहे हैं।

    200 डॉलर तक पहुंच संभव है

    कुछ वैश्विक अनुमानों के अनुसार, यदि दरें और विशेषताएं हैं तो कच्चे तेल की कीमत 200 डॉलर प्रति शेयर तक पहुंच सकती है। यह स्थिति ग्लोबल इंडस्ट्री के लिए बड़ा झटका साबित हो सकती है।

    भारत पर उत्खनन दबाव

    भारत जैसे राष्ट्र के लिए यह स्थिति विशेष रूप से चिंता का विषय है, क्योंकि देश में 85 से 90 प्रतिशत तेल कोटा के लिए मान्यता पर प्रतिबंध है। सरकारी कच्चे तेल से शेयरों में बढ़ोतरी हो सकती है, कंपनी के शेयरों पर असर पड़ सकता है और चालू खाते में भी बढ़ोतरी हो सकती है।

    वैश्विक शेयर प्रभावकारी

    तेल के स्टॉक में तेजी का असर वैश्विक शेयर पर भी देखने को मिला। अमेरिकी उद्यमों में गिरावट दर्ज की गई, वहीं एशियाई बाजारों में भी गिरावट जारी है। इसका असर भारत के शेयर बाजार पर भी पड़ा है, जहां बीएसई सेंसेक्स और निफ्टी 50 दोनों ही शुरुआती कारोबार में गिरावट के साथ खुले हैं।

  • गंभीर ऊर्जा संकट: होर्मुज से 8-10 मिलियन बैरल तेल सप्लाई ठप, कीमतों में आएगी तेजी

    गंभीर ऊर्जा संकट: होर्मुज से 8-10 मिलियन बैरल तेल सप्लाई ठप, कीमतों में आएगी तेजी

    नई दिल्ली। ईरान युद्ध के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार गंभीर संकट में है। एस एंड पी ग्लोबल के CERAWeek सम्मेलन में दुनिया की बड़ी तेल और गैस कंपनियों के सीईओ ने चेतावनी दी कि होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से रोजाना 8–10 मिलियन (80–100 करोड़) बैरल तेल और वैश्विक एलएनजी सप्लाई का लगभग 20% हिस्सा बाजार से गायब हो गया है। इसके चलते जेट फ्यूल, डीज़ल और पेट्रोल की आपूर्ति में अभूतपूर्व संकट उत्पन्न हुआ है और यह संकट एशिया से लेकर यूरोप तक फैल चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि कीमतों में दीर्घकालिक उछाल अब लगभग तय है।

    कंपनियों और विशेषज्ञों की चेतावनी

    कॉनोकोफिलिप्स के सीईओ रयान लांस ने कहा कि इतनी बड़ी मात्रा में तेल और गैस को बाजार से हटाने के गंभीर परिणाम अपरिहार्य हैं। कुवैत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन के सीईओ शेख नवाफ अल-सबाह ने इसे खाड़ी तेल उत्पादकों के खिलाफ आर्थिक नाकेबंदी करार देते हुए कहा कि ईरान ने होर्मुज को बंद कर वैश्विक अर्थव्यवस्था को बंधक बना दिया है। स्वतंत्र विश्लेषक पॉल सैंकी ने स्थिति को 1973 के अरब ऑयल एम्बार्गो के बाद सबसे गंभीर बताया।

    एलएनजी आपूर्ति दबाव में

    चेनीयर के सीईओ जैक फुस्को ने बताया कि कंपनी पूरी क्षमता पर उत्पादन कर रही है, लेकिन अमेरिका से एशिया तक एलएनजी पहुंचाने में 28 दिन लगते हैं। ऐसे में कतर पर निर्भर एशियाई देशों को तुरंत राहत मिलना मुश्किल है। जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ वली नसर के अनुसार ईरान युद्धविराम नहीं बल्कि व्यापक समझौता चाहता है, जिसमें होर्मुज पर नियंत्रण, आर्थिक मुआवजा और सुरक्षा गारंटी शामिल हैं।

    पूर्व अमेरिकी रक्षा मंत्री जिम मैटिस ने कहा कि यह संघर्ष फिलहाल गतिरोध में है, लेकिन आगे बढ़ सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिकी नौसेना के लिए होर्मुज से ओमान की खाड़ी तक समुद्री मार्गों की सुरक्षा करना बेहद चुनौतीपूर्ण होगा।

    तेल कीमतें तीन साल के उच्चतम स्तर पर

    सीएनबीसी के अनुसार, युद्ध और तनाव बढ़ने के बीच तेल की कीमतें लगातार उछल रही हैं। 28 फरवरी को अमेरिकी कच्चा तेल 49% बढ़कर 99.64 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड 55% बढ़कर 112.57 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो तीन साल का उच्चतम स्तर है।

    सरकारें सुरक्षित कर रही हैं अपना भंडार

    टोटलएनर्जी के सीईओ पैट्रिक पुइयाने ने कहा कि जेट फ्यूल की कीमत 200 डॉलर प्रति बैरल और डीज़ल 160 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुकी है। रूस और चीन ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर रोक लगा दी है, जबकि थाईलैंड में पेट्रोल राशनिंग शुरू हो गई है। अप्रैल तक यूरोप में भी कमी का असर दिखाई दे सकता है।

    खाड़ी अर्थव्यवस्थाओं पर गंभीर असर

    पॉल सैंकी ने चेतावनी दी है कि यह संकट खाड़ी देशों के आर्थिक मॉडल को चुनौती दे सकता है। इराक, कतर, यूएई और संभावित रूप से सऊदी अरब की जीडीपी में 30% तक गिरावट आ सकती है। जिम मैटिस ने कहा कि अमेरिका ने खाड़ी सहयोगियों से बिना परामर्श युद्ध शुरू किया और अब इससे आसानी से बाहर नहीं निकल सकता। उन्होंने जोर दिया कि इस युद्ध के अंत का फैसला ईरान के हाथ में भी है।

  • पश्चिम एशिया संकट का असर: कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त बढ़ोतरी

    पश्चिम एशिया संकट का असर: कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त बढ़ोतरी


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बीच गुरुवार को कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया। इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज पर ब्रेंट क्रूड का अप्रैल कॉन्ट्रैक्ट 111.78 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जो पिछले बंद भाव से 4.10 प्रतिशत अधिक था। वहीं, न्यूयॉर्क मैक्स एक्सचेंज पर वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) अप्रैल कॉन्ट्रैक्ट में 3.37 प्रतिशत की बढ़त के साथ 99.57 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

    तेल की कीमतों में तेजी का कारण ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर इजरायल के हमले को माना जा रहा है। यह क्षेत्र विश्व का सबसे बड़ा गैस फील्ड है। जवाब में ईरान ने कतर के प्रमुख वैश्विक गैस हब, रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी पर हमला किया। कतर के विदेश मंत्रालय और एनर्जी विभाग ने पुष्टि की है कि मिसाइल हमले से बड़े स्तर पर नुकसान हुआ और आग बुझाने के लिए आपातकालीन बचाव दल तुरंत तैनात किए गए। सभी कर्मचारी सुरक्षित हैं और किसी के हताहत होने की कोई खबर नहीं है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में यह उछाल भारत सहित अन्य तेल आयातक देशों पर असर डाल सकता है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का करीब 90 प्रतिशत कच्चा तेल विदेश से आयात करता है। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर चिंता बढ़ा दी है।

    इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरानी एनर्जी इन्फ्रास्ट्रक्चर पर किसी भी अतिरिक्त हमले का विरोध किया। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर कहा कि इजरायल ने साउथ पार्स गैस क्षेत्र के एक प्रमुख प्लांट पर हमला किया, जिससे केवल प्लांट का अपेक्षाकृत छोटा हिस्सा ही क्षतिग्रस्त हुआ।

    एनर्जी इन्फ्रास्ट्रक्चर पर हमले के बाद क्षेत्रीय तनाव बढ़ गया है और ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। इसके प्रभाव से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बनी हुई है, जिससे वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और कीमतों को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है।

  • कच्चे तेल की कीमतों में उछाल पर Donald Trump बोले- अमेरिका के लिए अच्छा मौका

    कच्चे तेल की कीमतों में उछाल पर Donald Trump बोले- अमेरिका के लिए अच्छा मौका


    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और तेल आपूर्ति में आई बाधाओं के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है। इस स्थिति से कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है और कई सरकारें ईंधन की खपत कम करने के उपाय तलाश रही हैं। इसी बीच Donald Trump ने कहा है कि तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से अमेरिका को आर्थिक रूप से फायदा हो रहा है। उनका कहना है कि क्योंकि United States दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है, इसलिए तेल महंगा होने पर उसे ज्यादा आय प्राप्त होती है।

    ट्रुथ सोशल पर ट्रंप ने रखी अपनी बात
    ट्रंप ने यह टिप्पणी अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर की। उन्होंने लिखा कि जब वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो अमेरिका को इससे काफी मुनाफा होता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि Iran को परमाणु हथियार हासिल करने से रोका जाए, क्योंकि इससे मध्य पूर्व और पूरी दुनिया की सुरक्षा को गंभीर खतरा हो सकता है। ट्रंप ने अपने बयान में यह भी दावा किया कि वे किसी भी हालत में ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देंगे।

    गैस की बढ़ती कीमतों को बताया नियंत्रण में
    ट्रंप ने बुधवार को ओहियो में एक कार्यक्रम के दौरान भी ईंधन की बढ़ती कीमतों पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि गैस की कीमतें जितनी बढ़ने की आशंका थी, उतनी नहीं बढ़ी हैं। उन्होंने भरोसा जताते हुए कहा कि आने वाले समय में कीमतें इतनी कम हो जाएंगी कि लोगों को इसकी चिंता भी नहीं रहेगी। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बनी हुई है।

    आईईए ने दी तेल आपूर्ति संकट की चेतावनी
    इस बीच International Energy Agency (आईईए) ने चेतावनी दी है कि ईरान से जुड़े हमलों और क्षेत्रीय संघर्षों के कारण दुनिया को तेल आपूर्ति में बड़ी बाधा का सामना करना पड़ सकता है। एजेंसी का कहना है कि यह इतिहास की सबसे बड़ी आपूर्ति बाधाओं में से एक साबित हो सकती है। स्थिति को संभालने के लिए आईईए के सदस्य देशों ने बुधवार को एक अहम फैसला लिया। इसके तहत 32 सदस्य देशों ने अपने आपातकालीन भंडार से लगभग 40 करोड़ बैरल तेल बाजार में जारी करने पर सहमति जताई है, ताकि वैश्विक बाजार में आपूर्ति की कमी को पूरा किया जा सके।

    आपातकालीन भंडार से तेल जारी करने का फैसला
    आईईए के सदस्य देशों के पास कुल मिलाकर 1.2 अरब बैरल से अधिक का आपातकालीन तेल भंडार मौजूद है। इसके अलावा उद्योगों के पास भी सरकारी नियमों के तहत लगभग 60 करोड़ बैरल अतिरिक्त तेल का भंडार उपलब्ध है।
    यह समन्वित रूप से तेल भंडार जारी करने का आईईए के इतिहास में छठा मौका है। इससे पहले 1991, 2005, 2011 और 2022 में भी इसी तरह के कदम उठाए गए थे। गौरतलब है कि International Energy Agency की स्थापना 1974 में वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से की गई थी।

    होर्मुज जलडमरूमध्य से प्रभावित हुई आपूर्ति
    आईईए के कार्यकारी निदेशक Fatih Birol ने हाल ही में सदस्य देशों की एक विशेष बैठक बुलाई थी, जिसमें पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति और तेल आपूर्ति पर उसके असर का आकलन किया गया। बैठक के बाद ही आपातकालीन भंडार जारी करने का निर्णय लिया गया।

    दरअसल, 28 फरवरी से शुरू हुए पश्चिम एशिया के संघर्ष के कारण Strait of Hormuz के रास्ते तेल आपूर्ति प्रभावित हो गई है। यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। मौजूदा हालात में कच्चे तेल और रिफाइंड उत्पादों का निर्यात संघर्ष से पहले के स्तर के 10 प्रतिशत से भी कम रह गया है।

  • मिडिल ईस्ट में बढ़ती आग, वैश्विक बाजार पर वार-क्रूड ऑयल की कीमतों में जोरदार तेजी

    मिडिल ईस्ट में बढ़ती आग, वैश्विक बाजार पर वार-क्रूड ऑयल की कीमतों में जोरदार तेजी

    नई दिल्ली। इजरायल-ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को झकझोर दिया है। सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में 7 प्रतिशत से अधिक की तेज उछाल दर्ज की गई। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद निवेशकों ने संभावित आपूर्ति संकट का अंदेशा जताया, जिससे तेल के दाम रिकॉर्ड ऊंचाई की ओर बढ़ने लगे।

    ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई में जोरदार तेजी
    अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent Crude के वायदा भाव बढ़कर 82.37 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए, जो जनवरी 2025 के बाद का उच्चतम स्तर है। ब्रेंट 7.60 प्रतिशत चढ़कर 78.41 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा। वहीं अमेरिकी West Texas Intermediate (डब्ल्यूटीआई) क्रूड के वायदा भाव 7.19 प्रतिशत उछलकर 71.86 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गए।

    होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट की आशंका
    रिपोर्ट्स के मुताबिक, Iran ने रणनीतिक Strait of Hormuz से गुजरने वाले नौवहन को सीमित करने के संकेत दिए हैं। यह वही मार्ग है, जिससे दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल का परिवहन होता है। भारत के 40 प्रतिशत से अधिक कच्चे तेल का आयात भी इसी रास्ते से होता है। ऐसे में आपूर्ति बाधित होने की आशंका ने बाजार में जोखिम प्रीमियम बढ़ा दिया है।

    ओपेक का दांव, क्या थमेगी रफ्तार?
    इसी बीच OPEC ने अगले महीने से उत्पादन बढ़ाने पर सहमति जताई है। सऊदी अरब और रूस के नेतृत्व में सदस्य देश प्रतिदिन 2.06 लाख बैरल अतिरिक्त उत्पादन करेंगे। हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि यदि भू-राजनीतिक तनाव गहराता है तो यह बढ़ोतरी कीमतों को स्थिर रखने के लिए पर्याप्त नहीं होगी।

    भारत पर सीधा असर
    विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत अपनी जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। कीमतों में हर 1 डॉलर की वृद्धि से भारत का वार्षिक आयात बिल करीब 2 अरब डॉलर बढ़ जाता है। इससे महंगाई, चालू खाते का घाटा और रुपये पर दबाव बढ़ सकता है। अधिक तेल कीमतें परिवहन लागत, समुद्री बीमा और ऊर्जा आधारित उद्योगों पर अतिरिक्त बोझ डाल सकती हैं।

    90 से 100 डॉलर का खतरा
    बाजार जानकारों का कहना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान जारी रहता है तो ब्रेंट 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जा सकता है। व्यापक क्षेत्रीय युद्ध की स्थिति में यह 100 डॉलर के स्तर को भी पार कर सकता है। फिलहाल बाजार का रुख कंपनियों की तिमाही आय से ज्यादा तेल की चाल पर निर्भर नजर आ रहा है। तनाव कम होने, नेतृत्व पर स्पष्टता आने और समुद्री मार्ग सुरक्षित रहने की ठोस गारंटी मिलने तक तेल बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।