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  • ग्लोबल टेंशन से बाजार में बिकवाली, सेंसेक्स-निफ्टी लाल निशान में बंद..

    ग्लोबल टेंशन से बाजार में बिकवाली, सेंसेक्स-निफ्टी लाल निशान में बंद..

    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को निवेशकों के लिए दिन कमजोर साबित हुआ। बाजार खुलने से लेकर बंद होने तक दबाव बना रहा और अंत में प्रमुख इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए। दिनभर की ट्रेडिंग में लगातार बिकवाली देखने को मिली, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही लाल निशान में आ गए।

    कारोबार के अंत में सेंसेक्स में करीब 416 अंकों की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी भी नीचे फिसल गया। शुरुआती कारोबार में ही बाजार की कमजोरी के संकेत मिल गए थे, जो पूरे दिन जारी रहे। निवेशकों ने जोखिम से बचने के लिए सतर्क रुख अपनाया, जिससे बाजार पर दबाव और बढ़ गया।

    इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता मानी जा रही है। अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों के चलते निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई है। विशेष रूप से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है। तेल की कीमतें 100 डॉलर के आसपास पहुंचने से उभरते बाजारों पर दबाव बढ़ता है।

    तेल की कीमतों में उछाल का सीधा असर महंगाई और कंपनियों की लागत पर पड़ता है, जिससे उनके मुनाफे पर असर पड़ने की आशंका रहती है। इसी कारण निवेशकों ने शेयरों में खरीदारी कम कर दी और बिकवाली का रुख अपनाया।

    सेक्टरवार बात करें तो बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज, आईटी और ऑटो सेक्टर में सबसे ज्यादा कमजोरी देखने को मिली। कई बड़े शेयरों में गिरावट के कारण पूरे बाजार पर नकारात्मक असर पड़ा। हालांकि कुछ एनर्जी और मेटल शेयरों में हल्की खरीदारी जरूर देखने को मिली, लेकिन वह बाजार को संभाल नहीं सकी।

    मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में शुरुआत में स्थिरता दिखी, लेकिन बाद में ये भी दबाव में आ गए। इससे यह साफ हुआ कि केवल बड़े शेयर ही नहीं बल्कि व्यापक बाजार भी वैश्विक संकेतों से प्रभावित हुआ है।

    एशियाई बाजारों में भी आज मिश्रित रुख रहा, जहां कुछ बाजारों में गिरावट देखने को मिली और कुछ में हल्की मजबूती रही। वैश्विक स्तर पर अनिश्चित माहौल के कारण निवेशक फिलहाल सतर्कता बरत रहे हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। ऐसे माहौल में निवेशकों को सोच-समझकर और दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ ही फैसले लेने की सलाह दी जा रही है।

  • आपूर्ति संकट की आशंका से कच्चे तेल में उछाल, Brent Crude करीब 3% चढ़ा

    आपूर्ति संकट की आशंका से कच्चे तेल में उछाल, Brent Crude करीब 3% चढ़ा


    नई दिल्ली।  वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में मंगलवार को जबरदस्त उछाल देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रेंट क्रूड करीब 2.81% की तेजी के साथ 103.03 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, वहीं वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) भी 2.80% बढ़कर 95.03 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता नजर आया। यह तेजी से ऐसे समय आया है जब वैश्विक बाजार पहले से ही अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है और निवेशक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंतित हैं।

    होर्मुज जलदमरूमध्य बना संकट की जड़

    कच्चे तेल की कीमतों में उछाल की सबसे बड़ी वजह होर्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना है। यह फारस की खाड़ी में स्थित एक बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जिससे दुनिया के कुल कच्चे तेल व्यापार का लगभग 20% हिस्सा चढ़ता है। ऐसे में इस मार्ग में किसी भी तरह की मौजूदगी वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए बड़ा खतरा बन जाती है। मौजूदा हालात में ईरान और यूनाइटेड स्टेट्स और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के कारण इस मार्ग पर असर पड़ा है, जिससे सप्लाई बाधित हुई है।

    एक महीने में 50% से ज्यादा बढ़ने का दा
    विशेषज्ञों के अनुसार, बीते एक महीने में कच्चे तेल की सप्लाई में 50% से ज्यादा की तेजी से दर्ज की जा चुकी है। इसका मुख्य कारण पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और सप्लाई बढ़ने पर खतरा है। इस तेजी का सीधा असर वैश्विक महंगाई और ट्रांसपोर्टेशन लागत पर पड़ सकता है, जिससे कई देशों की इकोनॉमी प्रभावित होने की आशंका है।

    भारत ने तेज की कूटनीतिक कोशिशें
    भारत ने स्थिति को संभालने के लिए सक्रिय कदम उठाए हैं। भारत लगातार ईरान से बातचीत कर रहा है ताकि होर्मुज मार्ग से भारतीय जहाजों की आवाजाही बहाल हो सके।

    इसी कोशिश के तहत ईरान ने दो भारतीय एलपीजी जहाजों—शिवालिक और नंदा देवी-को लौटने की अनुमति दे दी है।

    शिवालिक गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर डॉक कर चुका है

    नंदा देवी कांडला पोर्ट पर पहुंचने वाला है

    इससे देश में एलपीजी सप्लाई को राहत मिलने की उम्मीद है।

    से भी आ रहा बड़ा बहाव

    इसके अलावा यूनाइटेड अरब अमीरात से भारतीय जहाज ‘जग लाडकी’ 80,000 टन से ज़्यादा कच्चा तेल लेकर भारत के लिए रवाना हो चुका है। यह खेप इस हफ़्ते भारत पहुंचने की उम्मीद है, जिससे घरेलू सप्लाई में और बढ़ोतरी होगी।

    एशियाई अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़
    विश्लेषकों का दबाव है कि खाड़ी क्षेत्र से कच्चे तेल के आयात पर ज़्यादा निर्भरता के कारण भारत समेत एशियाई देश इस संकट से सबसे ज़्यादा प्रभावित हो सकते हैं। ऊर्जा दरों में तेज़ी से महंगाई, ट्रांसपोर्टेशन लागत और इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन पर दबाव बढ़ सकता है।

    आगे क्या
    अगर होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थिति सामान्य नहीं होती है, तो कच्चे तेल की दरों में और उछाल देखने को मिल सकता है। अगर बाज़ार की नज़र पश्चिम एशिया के हालात और वैश्विक सप्लाई पर बनी हुई है। इस बीच, सरकारें और कंपनियां वैकल्पिक सेवाओं चेन और रणनीतियों पर काम कर रही हैं ताकि ऊर्जा संकट के प्रभाव को कम किया जा सके।