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  • कच्चे तेल की कीमत 116 डॉलर के पार, फिर भी 24 अक्टूबर को पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर..

    कच्चे तेल की कीमत 116 डॉलर के पार, फिर भी 24 अक्टूबर को पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर..

    नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का सिलसिला जारी है। शनिवार, 24 अक्टूबर 2026 की सुबह ब्रेंट क्रूड ऑयल का भाव बढ़कर 116.27 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। इससे एक दिन पहले इसकी कीमत 114.52 डॉलर प्रति बैरल थी। इस तरह एक दिन के भीतर कच्चे तेल के भाव में 1.75 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी के बावजूद भारत में शनिवार को पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया।

    देश में पेट्रोल और डीजल के दैनिक खुदरा भाव तेल विपणन कंपनियों की ओर से जारी किए जाते हैं। 24 अक्टूबर को जारी दरों के अनुसार, प्रमुख शहरों में ईंधन की कीमतें पहले के स्तर पर बनी रहीं। हालांकि, अलग-अलग राज्यों में करों, स्थानीय निकाय कर और अन्य शुल्कों में अंतर होने के कारण पेट्रोल-डीजल के दाम शहर और राज्य के हिसाब से अलग-अलग हैं।

    हाल के दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी भी हुई थी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पेट्रोल के दाम में 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत में 2.71 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया गया था। इसके बाद अब 24 अक्टूबर को दोनों ईंधनों के भाव में कोई नया बदलाव नहीं हुआ है।

    राजधानी दिल्ली में शनिवार को पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर की दर से उपलब्ध रहा। आर्थिक राजधानी मुंबई में पेट्रोल की कीमत 111.21 रुपये प्रति लीटर और डीजल का भाव 97.83 रुपये प्रति लीटर दर्ज किया गया।

    कोलकाता में एक लीटर पेट्रोल के लिए 113.47 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं, जबकि डीजल 99.82 रुपये प्रति लीटर पर बिक रहा है। चेन्नई में पेट्रोल की कीमत 107.87 रुपये प्रति लीटर और डीजल का भाव 99.66 रुपये प्रति लीटर रहा। इन महानगरों में ईंधन की कीमतों में अंतर स्थानीय कर व्यवस्था और अन्य लागतों के कारण बना हुआ है।

    अन्य प्रमुख शहरों की बात करें तो लखनऊ में पेट्रोल 101.86 रुपये और डीजल 95.36 रुपये प्रति लीटर रहा। चंडीगढ़ में पेट्रोल 101.54 रुपये और डीजल 89.47 रुपये प्रति लीटर की दर से उपलब्ध था। पटना में पेट्रोल की कीमत 113.37 रुपये और डीजल का भाव 99.36 रुपये प्रति लीटर दर्ज किया गया।

    तिरुवनंतपुरम में पेट्रोल 115.49 रुपये और डीजल 104.40 रुपये प्रति लीटर रहा। बेंगलुरु में पेट्रोल की कीमत 111.68 रुपये और डीजल 99.56 रुपये प्रति लीटर दर्ज की गई। भुवनेश्वर में पेट्रोल 108.97 रुपये और डीजल 100.68 रुपये प्रति लीटर पर उपलब्ध रहा।

    वहीं, हैदराबाद में पेट्रोल 115.69 रुपये और डीजल 103.82 रुपये प्रति लीटर रहा। जयपुर में पेट्रोल की कीमत 113.19 रुपये और डीजल का भाव 98.25 रुपये प्रति लीटर दर्ज किया गया। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि अलग-अलग शहरों में वाहन चालकों को ईंधन के लिए अलग-अलग राशि चुकानी पड़ रही है।

    कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के बीच घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल के भाव स्थिर रहने से वाहन चालकों को शनिवार को तत्काल कोई अतिरिक्त कीमत नहीं चुकानी पड़ी। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव में आगे होने वाले बदलावों पर नजर बनी हुई है। फिलहाल 24 अक्टूबर की जारी दरों के अनुसार, देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई नया संशोधन नहीं किया गया है।

  • मध्य पूर्व में युद्ध का खतरा बढ़ने से कच्चा तेल छह महीने के उच्चतम स्तर पर, ब्रेंट 116 डॉलर पार

    मध्य पूर्व में युद्ध का खतरा बढ़ने से कच्चा तेल छह महीने के उच्चतम स्तर पर, ब्रेंट 116 डॉलर पार

    नई दिल्ली । मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और अमेरिका तथा ईरान के बीच संभावित सैन्य टकराव की आशंकाओं ने अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल बाजार में हलचल बढ़ा दी है। शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को कच्चे तेल की कीमतें छह महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं। ब्रेंट क्रूड का भाव 116 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया, जबकि अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत भी 102 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई। क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों और तेल आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता को कीमतों में तेजी की प्रमुख वजह माना जा रहा है।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में कारोबार के दौरान ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स की कीमत 2.60 प्रतिशत बढ़कर 116.13 डॉलर प्रति बैरल हो गई। यह 30 अप्रैल के बाद इसका सबसे ऊंचा स्तर रहा। वहीं, अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई क्रूड का भाव लगभग 2.90 प्रतिशत बढ़कर 102.56 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। दोनों प्रमुख मानकों में तेजी ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ते दबाव को रेखांकित किया।

    साप्ताहिक प्रदर्शन के लिहाज से भी कच्चे तेल की कीमतों में मजबूती दिखाई दी। ब्रेंट क्रूड में सप्ताह के दौरान लगभग छह प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। इसके साथ ही इसमें लगातार तीसरे सप्ताह तेजी बनी रही। दूसरी ओर, डब्ल्यूटीआई क्रूड के वायदा भाव में साप्ताहिक आधार पर करीब 3.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई। कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के पीछे भू-राजनीतिक परिस्थितियों और संभावित आपूर्ति व्यवधानों को महत्वपूर्ण कारक माना जा रहा है।

    बाजार में तेजी की एक प्रमुख वजह अमेरिका और ईरान के बीच दोबारा युद्ध शुरू होने की आशंका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि अमेरिका फिलहाल ईरान के साथ बातचीत नहीं कर रहा है। उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि जल्द ही कुछ बड़ा हो सकता है। उनके बयान के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

    इसी बीच, अमेरिका और इजरायल की सैन्य तैयारियों को लेकर सामने आई रिपोर्टों ने भी बाजार की चिंताएं बढ़ाई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देशों ने एक सीमित लेकिन सघन सैन्य अभियान की तैयारी के तहत अभ्यास तेज किए हैं। इसमें ईरान के पश्चिमी पड़ोसी इराक के ऊपर से उड़ान भरने जैसी गतिविधियां भी शामिल बताई गई हैं। इन अभ्यासों का उद्देश्य संभावित हमले की रणनीतियों का पूर्वाभ्यास करना बताया गया है।

    रिपोर्ट में संभावित लक्ष्यों के रूप में ईरान के ऊर्जा केंद्रों, परमाणु सुविधाओं तथा मिसाइलों और ड्रोन के भंडार का उल्लेख किया गया है। हालांकि, इन संभावित लक्ष्यों को लेकर किसी वास्तविक सैन्य कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है। फिर भी, ऐसी परिस्थितियों में तेल उत्पादक क्षेत्र से आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बाजार में कीमतों को ऊपर ले जा सकती है।

    दूसरी ओर, ईरान की सेना की ओर से भी कड़ा रुख सामने आया है। ईरान के सेना प्रमुख ने कहा है कि अपनी क्षमताओं को मजबूत करने के बाद देश की सेना युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार है। इस बयान ने क्षेत्रीय तनाव की गंभीरता को और उजागर किया है।

    इसके अतिरिक्त, सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों के लगातार हमलों के कारण भी तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। मध्य पूर्व वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यहां सैन्य संघर्ष बढ़ने या तेल परिवहन में बाधा आने की आशंका से बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। फिलहाल ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई दोनों के भाव में तेजी के बीच निवेशकों की नजर क्षेत्र के घटनाक्रम और संभावित आपूर्ति प्रभावों पर बनी हुई है।

  • कमजोर वैश्विक संकेतों और महंगे कच्चे तेल से शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 366 अंक टूटा और निफ्टी भी फिसला

    कमजोर वैश्विक संकेतों और महंगे कच्चे तेल से शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 366 अंक टूटा और निफ्टी भी फिसला

    नई दिल्ली । घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 को कारोबार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई। कमजोर वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी की चिंताओं ने निवेशकों की धारणा पर दबाव बनाया। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 366.36 अंक यानी 0.50 प्रतिशत गिरकर 73,343.33 पर खुला। वहीं, एनएसई निफ्टी 50 ने 123.60 अंक यानी 0.54 प्रतिशत की गिरावट के साथ 22,687.75 के स्तर पर कारोबार शुरू किया।

    कारोबार के दौरान बाजार में बिकवाली का दबाव और बढ़ा। सेंसेक्स दिन के शुरुआती कारोबार में 73,005.11 के निचले स्तर तक पहुंच गया। दूसरी ओर, निफ्टी 50 ने 22,554.85 का न्यूनतम स्तर छुआ। निफ्टी में 22,700 का स्तर टूटने से बाजार की कमजोरी को लेकर चिंता बढ़ी। व्यापक बाजार में भी गिरावट देखने को मिली और मिडकैप तथा स्मॉलकैप शेयर दबाव में रहे।

    निफ्टी मिडकैप सूचकांक में 1.04 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप सूचकांक में 0.91 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। क्षेत्रवार कारोबार में ऑटोमोबाइल, धातु और स्वास्थ्य सेवा से जुड़े शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी दिखाई दी। निफ्टी ऑटो, निफ्टी मेटल और निफ्टी हेल्थकेयर सूचकांकों में 0.98 प्रतिशत तक की गिरावट रही। निफ्टी फार्मा भी 0.78 प्रतिशत कमजोर हुआ। इसके अलावा एफएमसीजी, रियल्टी, सीमेंट और वित्तीय क्षेत्र के शेयरों में भी बिकवाली का दबाव रहा।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में बड़ी कंपनियों के शेयरों का प्रदर्शन मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों की तुलना में बेहतर रहा है। व्यापक बाजार में ऊंचे मूल्यांकन को लेकर चिंताएं बढ़ने के कारण निवेशकों का रुझान अपेक्षाकृत आकर्षक मूल्यांकन वाले बड़े शेयरों की ओर हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के समय में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों की तेजी को कंपनियों की कमाई के बजाय बाजार में उपलब्ध तरलता से भी समर्थन मिला था। ऐसे में ऊंचे मूल्यांकन वाले शेयरों में सुधार की संभावना बनी हुई है।

    कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड का ऊंचे स्तर पर बने रहना भी घरेलू बाजार के लिए चुनौती माना जा रहा है। ब्रेंट क्रूड वायदा एक प्रतिशत से अधिक चढ़कर लगभग 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। तेल महंगा होने से महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका रहती है, जिसका असर निवेशकों की कारोबारी धारणा पर पड़ सकता है।

    तकनीकी विश्लेषकों के मुताबिक, निफ्टी के लिए 22,590 का स्तर महत्वपूर्ण समर्थन माना जा रहा है। यदि सूचकांक इस स्तर के ऊपर टिकता है, तो बाजार में सुधार की संभावना बनी रह सकती है। हालांकि, तेजी के मजबूत संकेत के लिए निफ्टी का 22,840 के स्तर से ऊपर लौटना जरूरी बताया गया। हालिया गिरावट और 22,700 के स्तर के नीचे कारोबार ने बाजार में संभावित सुधार को लेकर सतर्कता बढ़ाई है।

    इस बीच, बुधवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में लगभग 1,022 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की। घरेलू संस्थागत निवेशकों ने भी करीब 1,614 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध खरीदारी की। इसके बावजूद शुरुआती कारोबार में बाजार गिरावट से नहीं उबर सका।

    एशियाई बाजारों में भी कमजोरी रही। जापान का निक्केई, हांगकांग का हैंगसेंग और दक्षिण कोरिया का कोस्पी शुरुआती कारोबार में दो प्रतिशत तक गिर गए। इसके विपरीत, अमेरिकी बाजारों में बुधवार को तेजी दर्ज की गई थी। प्रौद्योगिकी शेयरों में मजबूती के कारण नैस्डैक लगभग एक प्रतिशत बढ़कर बंद हुआ, जबकि एसएंडपी 500 में 0.58 प्रतिशत की बढ़त रही। कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ी कंपनियों के बेहतर कारोबारी नतीजों ने अमेरिकी बाजारों को समर्थन दिया था।

  • ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर के पार पहुंचा, मिडिल ईस्ट तनाव और रूस की सप्लाई चिंता से बढ़ी ईंधन महंगाई की आशंका

    ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर के पार पहुंचा, मिडिल ईस्ट तनाव और रूस की सप्लाई चिंता से बढ़ी ईंधन महंगाई की आशंका

    नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेज उछाल देखने को मिला है। शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड का भाव 3.7 प्रतिशत बढ़कर 109.86 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। कारोबार के दौरान इसकी कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई। मई के बाद यह इसका सबसे ऊंचा स्तर है। वहीं, अमेरिकी कच्चे तेल डब्ल्यूटीआई की कीमत में भी तेजी दर्ज की गई और यह 3.5 प्रतिशत बढ़कर 101.41 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस तेजी के बाद भारत समेत कई देशों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ गई है।

    कच्चे तेल की कीमतों में इस उछाल के पीछे मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव और रूस से तेल की आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता प्रमुख कारण हैं। ऊर्जा ठिकानों के आसपास हमलों की खबरों और होर्मुज जलडमरूमध्य के क्षेत्र में बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजार में आपूर्ति बाधित होने की आशंका पैदा की है। कारोबारियों को चिंता है कि यदि इस क्षेत्र में तेल की आवाजाही प्रभावित होती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की उपलब्धता पर दबाव बढ़ सकता है।

    होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इसके आसपास तनाव बढ़ने से तेल परिवहन और आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित होने का खतरा रहता है। इस रास्ते से होने वाली आवाजाही में किसी भी तरह की बाधा का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर पड़ सकता है। इसी वजह से क्षेत्रीय तनाव के घटनाक्रम पर तेल बाजार की नजर बनी हुई है।

    रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष भी तेल की कीमतों को प्रभावित करने वाले कारकों में शामिल है। दोनों देशों के बीच युद्ध के दौरान रिफाइनरियों और ऊर्जा ठिकानों पर हुए हमलों से तेल की आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। यदि रूस की रिफाइनिंग क्षमता या निर्यात व्यवस्था प्रभावित होती है, तो बाजार में तेल और उससे बनने वाले ईंधन की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है।

    रूस से डीजल की आपूर्ति को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। वैश्विक बाजार में ईंधन की उपलब्धता बढ़ाने के लिए रूस से डीजल की आपूर्ति से संबंधित प्रस्तावों पर चर्चा हो रही है। हालांकि, अमेरिका में इस संबंध में प्रस्तावित समझौते का विरोध करने के लिए सांसदों ने विधेयक पेश किया है। इसके साथ ही रूस की रिफाइनरियों पर हमलों के कारण वहां से होने वाली आपूर्ति को लेकर भी सवाल बने हुए हैं। इन परिस्थितियों ने बाजार में अनिश्चितता बढ़ाई है।

    भारत के लिए कच्चे तेल की कीमतों में तेजी महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने से भारत का आयात बिल बढ़ सकता है। इसका असर अर्थव्यवस्था, महंगाई और ईंधन की लागत पर पड़ने की आशंका रहती है। पेट्रोल और डीजल परिवहन व्यवस्था से लेकर वस्तुओं की ढुलाई तक कई क्षेत्रों की लागत को प्रभावित करते हैं।

    हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम तुरंत बढ़ जाएंगे। घरेलू कीमतों पर रुपये और डॉलर की विनिमय दर, तेल कंपनियों की लागत तथा सरकार की नीतियों सहित कई कारकों का प्रभाव पड़ता है। इसलिए फिलहाल केवल वैश्विक कीमतों में तेजी के आधार पर घरेलू ईंधन की कीमतों में तत्काल बढ़ोतरी का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

    आगे कच्चे तेल की कीमतों का रुख मुख्य रूप से मध्य पूर्व के हालात और रूस से आपूर्ति की स्थिति पर निर्भर करेगा। यदि तनाव बढ़ता है और सप्लाई प्रभावित रहती है, तो कीमतों में और तेजी आ सकती है। वहीं, परिस्थितियों में सुधार और आपूर्ति सामान्य होने पर बाजार को राहत मिल सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार की दिशा भारत में ईंधन की कीमतों को लेकर बनी चिंताओं के लिए महत्वपूर्ण रहेगी।

  • गोल्डमैन सैश ने ब्रेंट क्रूड का अनुमान बढ़ाकर 90 डॉलर प्रति बैरल किया, पश्चिम एशिया में तनाव से तेल आपूर्ति पर दबाव

    गोल्डमैन सैश ने ब्रेंट क्रूड का अनुमान बढ़ाकर 90 डॉलर प्रति बैरल किया, पश्चिम एशिया में तनाव से तेल आपूर्ति पर दबाव


    नई दिल्ली ।
    वैश्विक निवेश फर्म गोल्डमैन सैश ने दिसंबर 2026 के लिए ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत का अनुमान बढ़ाकर 90 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है। इससे पहले यह अनुमान 85 डॉलर प्रति बैरल था। नए अनुमान के मुताबिक कच्चे तेल की संभावित औसत कीमत में करीब 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और तेल आपूर्ति से जुड़े जोखिमों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। इसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए निवेश फर्म ने अपने पूर्वानुमान में बदलाव किया है।

    नई रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर 2026 के लिए ब्रेंट क्रूड का अनुमान बढ़ाने की प्रमुख वजह आपूर्ति संबंधी जोखिमों के कारण कीमतों में शामिल अतिरिक्त जोखिम प्रीमियम का धीरे-धीरे कम होना है। यह जोखिम प्रीमियम फिलहाल 20 डॉलर प्रति बैरल से कुछ अधिक बताया गया है। हालांकि, दिसंबर के लिए 90 डॉलर प्रति बैरल का नया अनुमान मौजूदा कीमत करीब 103 डॉलर प्रति बैरल से लगभग 13 प्रतिशत कम है। इसका अर्थ है कि निवेश फर्म को आगे चलकर कीमतों में कुछ नरमी आने की संभावना भी दिखाई दे रही है।

    गोल्डमैन सैश ने वर्ष 2027 के लिए ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत का अनुमान 80 डॉलर प्रति बैरल पर बरकरार रखा है। इस अनुमान में खाड़ी देशों से तेल आपूर्ति में संभावित बदलाव, आपूर्ति संबंधी जोखिमों और जोखिम प्रीमियम में कमी की गति को ध्यान में रखा गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, यदि खाड़ी देशों से तेल की आपूर्ति उम्मीद से अधिक तेजी से बढ़ती है, तो इससे कीमतों पर दबाव पड़ सकता है। दूसरी ओर, जोखिम प्रीमियम लंबे समय तक ऊंचा रहने पर तेल की कीमतों को समर्थन मिल सकता है।

    तेल की कीमतों के आकलन में कम भंडार, आपूर्ति में संभावित बाधाओं और ब्याज दरों के प्रभाव को भी शामिल किया गया है। इन परिस्थितियों का असर तेल की भौतिक खरीद और भंडार दोबारा भरने की गतिविधियों पर पड़ सकता है। इसके अलावा, वित्तीय जोखिम से बचाव के लिए किए जाने वाले हेजिंग सौदे भी बाजार की गतिविधियों को प्रभावित कर सकते हैं। इन सभी कारकों के आधार पर भविष्य में कच्चे तेल की कीमतों का अनुमान लगाया गया है।

    रिपोर्ट में अमेरिकी कच्चे तेल वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) के लिए भी अनुमान दिया गया है। इसके मुताबिक, दिसंबर 2026 में डब्ल्यूटीआई की औसत कीमत 81 डॉलर प्रति बैरल और वर्ष 2027 में 73 डॉलर प्रति बैरल रह सकती है। ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई की अनुमानित कीमतों के बीच अंतर अपेक्षाकृत अधिक है। रिपोर्ट में इसकी एक वजह अमेरिका से यूरोप तक तेल की ढुलाई पर आने वाली ज्यादा लागत को बताया गया है।

    पश्चिम एशिया में फरवरी के आखिर में युद्ध शुरू होने के समय ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 70 डॉलर प्रति बैरल थी। इसके बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की ढुलाई में बाधाएं आने के कारण कीमत बढ़कर 125 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई। दुनिया के कुल तेल शिपमेंट का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है। ऐसे में यहां शिपिंग प्रभावित होने से वैश्विक तेल आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है।

    गोल्डमैन सैश ने संभावित जोखिमों का आकलन करते हुए कहा है कि यदि वर्ष 2027 में खाड़ी देशों का औसत तेल उत्पादन फरवरी 2026 के स्तर से प्रतिदिन 50 लाख बैरल कम रहता है, तो ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत करीब 125 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। रिपोर्ट में तेल संबंधी बुनियादी ढांचे को नुकसान, समुद्री परिवहन पर बढ़ते हमलों और लंबे समय तक बने रहने वाले जोखिम प्रीमियम को कीमतों में संभावित बढ़ोतरी के प्रमुख कारणों में शामिल किया गया है।

  • रुपये की गिरावट रोकने के लिए RBI के नए कदम, तेल कंपनियों को सीधे डॉलर और फॉरेक्स सौदों पर सख्ती

    रुपये की गिरावट रोकने के लिए RBI के नए कदम, तेल कंपनियों को सीधे डॉलर और फॉरेक्स सौदों पर सख्ती

    नई दिल्ली ।डॉलर के मुकाबले रुपये में जारी कमजोरी को थामने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने विदेशी मुद्रा बाजार से जुड़े कई कदम उठाए हैं। केंद्रीय बैंक का उद्देश्य डॉलर की अतिरिक्त मांग कम करना और रुपये पर पड़ रहे दबाव को नियंत्रित करना है। इसके तहत सरकारी तेल कंपनियों को सीधे डॉलर उपलब्ध कराने की व्यवस्था के साथ विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों के नियम भी सख्त किए गए हैं। इन उपायों से रुपये को राहत मिलने की उम्मीद है, हालांकि इसकी मजबूती की गारंटी नहीं दी जा सकती।

    रुपये पर दबाव बढ़ने के पीछे महंगे कच्चे तेल, डॉलर की बढ़ती मांग और विदेशी निवेशकों की ओर से भारतीय बाजार से पैसा निकालने जैसे कारण बताए गए हैं। भारत को विदेशों से कच्चा तेल खरीदने के लिए बड़ी मात्रा में डॉलर की जरूरत होती है। ऐसे में तेल कंपनियों की डॉलर मांग का असर विदेशी मुद्रा बाजार पर पड़ सकता है। RBI की नई व्यवस्था इसी मांग को सीधे पूरा करने और बाजार में अतिरिक्त दबाव घटाने की कोशिश है।

    इस व्यवस्था के तहत इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम जैसी सरकारी तेल कंपनियां अपनी रोजाना की डॉलर जरूरत सीधे RBI से पूरी कर सकेंगी। यह व्यवस्था 12 अक्टूबर 2026 से लागू होने की जानकारी दी गई है। अब तक तेल कंपनियां विदेशों से कच्चा तेल खरीदने के भुगतान के लिए बाजार से डॉलर खरीदती थीं। बड़ी कंपनियों की एक साथ बढ़ी मांग से डॉलर की उपलब्धता और रुपये की विनिमय दर पर दबाव पड़ सकता है। केंद्रीय बैंक से सीधे डॉलर मिलने पर बाजार में उनकी खरीद की जरूरत कम हो सकती है।

    RBI ने विदेशी मुद्रा से जुड़े डेरिवेटिव सौदों पर भी सीमाएं सख्त की हैं। जिन सौदों के पीछे वास्तविक लेनदेन या जरूरत नहीं होती, उनमें डॉलर से जुड़ी पोजिशन लेने की सीमा 100 मिलियन डॉलर से घटाकर 5 मिलियन डॉलर कर दी गई है। इसके अलावा, रुपये से संबंधित कुछ रद्द किए गए विदेशी मुद्रा अनुबंधों को दोबारा बुक करने पर रोक लगाने का फैसला भी किया गया है। इन बदलावों का उद्देश्य बाजार में अनावश्यक गतिविधियों को सीमित करना है।

    विदेशी मुद्रा जोखिम से बचाव के कुछ सौदों के लिए बैंकों को 20 प्रतिशत राशि रिजर्व के रूप में रखने का नियम भी लागू किया गया है। यह व्यवस्था पात्र विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों पर लागू होगी। दो मिलियन डॉलर से अधिक के कुछ हेजिंग सौदे इससे प्रभावित हो सकते हैं। इससे कंपनियों के लिए विदेशी मुद्रा में होने वाले उतार-चढ़ाव से बचाव की लागत बढ़ने की आशंका है। स्टील, ऑटोमोबाइल, केमिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों की कंपनियों पर इसका असर पड़ सकता है।

    रुपये की आगे की चाल को लेकर कुछ बैंकर्स ने डॉलर के मुकाबले 95 से 95.50 के स्तर का अनुमान जताया है। हालांकि, यह बाजार का अनुमान है, निश्चित परिणाम नहीं। यदि कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो भारत का आयात बिल बढ़ सकता है और डॉलर की मांग पर दबाव बना रह सकता है। इसी तरह, अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढ़ने या वहां निवेश पर बेहतर रिटर्न मिलने से विदेशी निवेशक भारतीय बाजारों से पैसा निकाल सकते हैं। इसके विपरीत, विदेशी पोर्टफोलियो निवेश बढ़ने पर डॉलर की आवक को समर्थन मिल सकता है।

    RBI रुपये को स्थिर रखने के साथ आर्थिक विकास की रफ्तार पर भी प्रतिकूल असर नहीं पड़ने देना चाहता। ब्याज दरों में बड़ी बढ़ोतरी से होम लोन, कार लोन और कारोबारी कर्ज महंगे हो सकते हैं। इससे कंपनियों की लागत और लोगों के खर्च पर असर पड़ने की आशंका रहती है। इसलिए केंद्रीय बैंक ने फिलहाल डॉलर की मांग और विदेशी मुद्रा बाजार में सट्टेबाजी को नियंत्रित करने वाले उपायों पर जोर दिया है। रुपये को स्थायी राहत कितनी मिलेगी, यह कच्चे तेल की कीमतों, डॉलर की मजबूती और विदेशी निवेशकों के फैसलों पर निर्भर करेगा।

  • भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 1045 अंक टूटा और निफ्टी 52 हफ्तों के निचले स्तर पर बंद

    भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 1045 अंक टूटा और निफ्टी 52 हफ्तों के निचले स्तर पर बंद

    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार के कारोबार में भारी गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 1,045.46 अंक यानी 1.44 प्रतिशत फिसलकर 71,593.24 पर बंद हुआ। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 371.25 अंक यानी 1.64 प्रतिशत की गिरावट के साथ 22,231.80 पर बंद हुआ। पूरे कारोबारी सत्र के दौरान बाजार पर बिकवाली का दबाव बना रहा और प्रमुख सूचकांक लगातार कमजोरी में रहे।

    कारोबार के दौरान निफ्टी ने 22,179.90 का न्यूनतम स्तर छुआ। यह उसका 52 हफ्तों का निचला स्तर रहा। बाजार में गिरावट का असर केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी कमजोरी देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1,500.10 अंक यानी 2.53 प्रतिशत गिरकर 57,882.50 पर रहा। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स भी 456.85 अंक यानी 2.34 प्रतिशत की गिरावट के साथ 19,050.10 पर बंद हुआ।

    गुरुवार को लगभग सभी प्रमुख सेक्टर सूचकांक लाल निशान में बंद हुए। निफ्टी मेटल में 3.55 प्रतिशत, निफ्टी रियल्टी में 3.16 प्रतिशत और निफ्टी एनर्जी में 2.82 प्रतिशत की गिरावट रही। निफ्टी कमोडिटीज 2.81 प्रतिशत, निफ्टी मीडिया 2.79 प्रतिशत, निफ्टी इंडिया डिफेंस 2.76 प्रतिशत और निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग 2.61 प्रतिशत नीचे रहे। इसके अलावा निफ्टी ऑयल एंड गैस में 2.52 प्रतिशत और निफ्टी ऑटो में 2.49 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

    निफ्टी पीएसई 2.40 प्रतिशत, निफ्टी हेल्थकेयर 2.33 प्रतिशत और निफ्टी फार्मा 2.32 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए। बाजार के प्रमुख शेयरों में आईटीसी, इंडिगो, पावर ग्रिड, बीईएल, एनटीपीसी, मारुति सुजुकी, टाटा स्टील, अल्ट्राटेक सीमेंट, एलएंडटी, भारती एयरटेल, एशियन पेंट्स, बजाज फिनसर्व, सन फार्मा, एचडीएफसी बैंक, इटरनल और एचयूएल प्रमुख गिरावट वाले शेयरों में रहे। दूसरी ओर टेक महिंद्रा, एक्सिस बैंक और इन्फोसिस बढ़त के साथ बंद हुए।

    बाजार में गिरावट की प्रमुख वजहों में कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, रुपये की कमजोरी और विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली बताई गई। कच्चे तेल की कीमत 103 डॉलर प्रति बैरल बताई गई, जबकि डॉलर के मुकाबले रुपया 97 के स्तर पर रहा। इन परिस्थितियों के बीच बाजार के सभी प्रमुख सेक्टरों में बिकवाली देखने को मिली। मेटल और रियल्टी सेक्टर में सबसे ज्यादा कमजोरी रही।

    हालांकि, बाजार में गिरावट के बीच कुछ शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। दूसरी तिमाही के शुरुआती नतीजों में अच्छा प्रदर्शन करने वाली कुछ कंपनियों के शेयरों में मजबूती देखी गई। सेन्को गोल्ड का शेयर कारोबार के दौरान 11.9 प्रतिशत तक चढ़ा, हालांकि बाद में बाजार का रुख कमजोर होने से इसकी बढ़त कम हो गई। वहीं पीएनजीएस रेवा डायमंड ज्वेलरी के शेयरों में लगातार चौथे दिन तेजी बनी रही। कंपनी की ओर से इस सप्ताह मजबूत नतीजे जारी किए जाने के बाद उसके शेयरों में यह तेजी देखने को मिली। कुल मिलाकर गुरुवार का कारोबारी सत्र भारतीय शेयर बाजार के लिए तेज गिरावट वाला रहा और निफ्टी 52 हफ्तों के निचले स्तर तक पहुंच गया।

  • आरबीआई नीति, तिमाही नतीजे और पश्चिम एशिया तनाव से अगले सप्ताह शेयर बाजार की दिशा पर निवेशकों की नजर रहेगी

    आरबीआई नीति, तिमाही नतीजे और पश्चिम एशिया तनाव से अगले सप्ताह शेयर बाजार की दिशा पर निवेशकों की नजर रहेगी

    नई दिल्ली । छोटे कारोबारी सप्ताह में भारतीय शेयर बाजार पर वैश्विक दबाव हावी रहा और प्रमुख सूचकांक महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तरों से नीचे फिसल गए। अब अगले सप्ताह बाजार की दिशा पर आरबीआई की मौद्रिक नीति समीक्षा, दूसरी तिमाही के कॉरपोरेट नतीजे और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव का प्रभाव देखने को मिल सकता है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के संकेत मिलने पर भारतीय बाजार में राहतभरी तेजी देखने को मिल सकती है। इसके विपरीत आरबीआई की नीति, महंगाई को लेकर उसका रुख और आर्थिक वृद्धि के अनुमान घरेलू ब्याज दरों तथा वित्तीय बाजारों के लिए महत्वपूर्ण संकेत देंगे।

    पिछले सप्ताह बाजार में कमजोरी की शुरुआत पहले कारोबारी दिन से ही हो गई थी। सोमवार को सेंसेक्स में 1.52 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और अगले दो कारोबारी सत्रों में भी कमजोरी बनी रही। गुरुवार को सेंसेक्स 0.79 प्रतिशत और गिर गया। साप्ताहिक आधार पर सेंसेक्स 1,670.84 अंक टूटकर 71,909.70 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 3 प्रतिशत से अधिक गिरकर 22,421.95 पर आ गया। विश्लेषकों के अनुसार, बाजार में यह गिरावट जारी करेक्शन के दौर को दर्शाती है।

    तकनीकी संकेतकों के स्तर पर भी बाजार में कमजोरी बनी हुई है। निफ्टी लगातार आठवें सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुआ है। इसका साप्ताहिक आरएसआई करीब 31.06 पर है, जो 50 के तटस्थ स्तर से काफी नीचे है और कमजोर मोमेंटम का संकेत देता है। हालांकि आरएसआई अब ओवरसोल्ड जोन के करीब पहुंच रहा है, जिससे निचले स्तरों पर बीच-बीच में तकनीकी रिकवरी की संभावना बन सकती है। तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, 22,800 और 23,000 के स्तर निफ्टी के लिए निकट अवधि में प्रमुख प्रतिरोध रहेंगे। इन स्तरों के ऊपर टिकाऊ बढ़त मिलने पर बिकवाली का दबाव कम हो सकता है। दूसरी ओर 22,350 और 22,180 के स्तर प्रमुख सपोर्ट माने जा रहे हैं।

    बाजार की धारणा पर फिलहाल वैश्विक परिस्थितियों का प्रभाव अधिक है। अमेरिका में बॉन्ड यील्ड्स में बढ़ोतरी, महंगाई को लेकर चिंता और ऊंची ऊर्जा कीमतों ने निवेशकों को सतर्क रखा है। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड्स बढ़ने से उभरते बाजारों में निवेश का आकर्षण भी प्रभावित हो रहा है। हालांकि घरेलू अर्थव्यवस्था से जुड़े संकेतक अपेक्षाकृत मजबूत बने हुए हैं। अगस्त में भारत की औद्योगिक उत्पादन वृद्धि बढ़कर 8 प्रतिशत हो गई, जबकि जुलाई में संशोधित आंकड़ा 7.4 प्रतिशत था। विनिर्माण क्षेत्र में 9 प्रतिशत तथा बिजली और गैस आपूर्ति में 12.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

    ऊर्जा बाजार का रुख भी अगले सप्ताह महत्वपूर्ण रहेगा। हाल के दिनों में ब्रेंट क्रूड अपने ऊंचे स्तरों से नीचे आया है, क्योंकि हॉर्मुज जलडमरूमध्य से कच्चे तेल की आपूर्ति युद्ध-पूर्व स्तरों के करीब पहुंचने लगी है। इससे ऊर्जा कीमतों को कुछ राहत मिली है। इसके साथ ही अमेरिका से आने वाले महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़ों पर भी निवेशकों की नजर रहेगी। नॉन-फार्म पेरोल्स और आईएसएम मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई जैसे आंकड़े वैश्विक बाजारों की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं और इसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ सकता है। कुल मिलाकर आरबीआई नीति समीक्षा, दूसरी तिमाही के नतीजे, पश्चिम एशिया की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतें और अमेरिकी आर्थिक आंकड़े अगले सप्ताह बाजार के प्रमुख ट्रिगर रहेंगे।

  • कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से भारतीय बाजार को सहारा, सेंसेक्स 564 अंक चढ़ा, फार्मा और एफएमसीजी शेयरों में तेजी

    कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से भारतीय बाजार को सहारा, सेंसेक्स 564 अंक चढ़ा, फार्मा और एफएमसीजी शेयरों में तेजी

    नई दिल्ली ।कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, वैश्विक बॉन्ड यील्ड में गिरावट और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार सोमवार को बढ़त के साथ बंद हुआ। कारोबार के दौरान सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में तेजी देखने को मिली। फार्मा, हेल्थकेयर, रियल्टी और एफएमसीजी जैसे प्रमुख सेक्टरों के शेयरों में खरीदारी का रुझान रहा।

    बाजार बंद होने पर बीएसई सेंसेक्स 564.03 अंक यानी 0.76 प्रतिशत की बढ़त के साथ 74,858.99 अंक पर पहुंच गया। इससे पहले सेंसेक्स पिछले कारोबारी सत्र के 74,294.96 अंक के स्तर से 240.21 अंक यानी 0.32 प्रतिशत ऊपर 74,535.18 अंक पर खुला था। दिन के कारोबार में सेंसेक्स ने 74,987.40 अंक का उच्चतम स्तर भी छुआ, जो पिछले बंद स्तर से 692.43 अंक यानी 0.93 प्रतिशत अधिक था।

    निफ्टी 50 में हालांकि कारोबार की शुरुआत मामूली कमजोरी के साथ हुई। यह पिछले बंद 23,346.40 अंक की तुलना में 16.20 अंक फिसलकर 23,330.20 अंक पर खुला। बाद में इसमें तेजी आई और यह 120.40 अंक यानी 0.51 प्रतिशत चढ़कर 23,466.80 अंक के दिन के उच्चतम स्तर तक पहुंच गया। अंत में निफ्टी 67.90 अंक यानी 0.29 प्रतिशत बढ़कर 23,414.30 अंक पर बंद हुआ।

    व्यापक बाजार में दबाव देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.29 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.07 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इससे संकेत मिला कि सोमवार के कारोबार में तेजी मुख्य रूप से बड़े शेयरों तक सीमित रही।

    सेक्टरवार कारोबार में निफ्टी फार्मा, हेल्थकेयर, रियल्टी, एफएमसीजी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडेक्स ने बेहतर प्रदर्शन किया। इसके विपरीत निफ्टी मेटल, पीएसयू बैंक और ऑटो इंडेक्स में कमजोरी रही।

    निफ्टी 50 के प्रमुख लाभ वाले शेयरों में इटरनल, एचसीएल टेक, आईटीसी, सन फार्मा, मैक्स हेल्थ, टाइटन, एचडीएफसी लाइफ और एसबीआई लाइफ शामिल रहे। दूसरी ओर भारती एयरटेल, बजाज फाइनेंस, पावरग्रिड, विप्रो, ग्रासिम, इंफोसिस और टाटा स्टील में गिरावट दर्ज की गई।

    वैश्विक बाजार के लिए कच्चे तेल की कीमतों में नरमी भी अहम संकेत रही। सऊदी अरब से शिपमेंट में सुधार की उम्मीदों के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत 2.25 प्रतिशत घटकर 101.5 डॉलर प्रति बैरल रह गई। तेल की कीमतों में गिरावट से महंगाई और ऊर्जा लागत को लेकर बाजार की चिंताओं को कुछ राहत मिली।

    भारतीय शेयरों में विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधि में भी बदलाव देखने को मिला। लगातार सात कारोबारी सत्रों की बिकवाली के बाद शुक्रवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 599 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध खरीदारी की। घरेलू संस्थागत निवेशकों ने भी खरीदारी जारी रखी और सत्र के दौरान 1,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया।

    बाजार में सकारात्मक माहौल को वैश्विक स्तर पर अमेरिका और चीन के बीच प्रस्तावित बातचीत तथा अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत की संभावनाओं से भी समर्थन मिला। हालांकि, आने वाले समय में भू-राजनीतिक घटनाक्रम और ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण बनी रहेंगी।

  • अमेरिका में महंगाई बढ़ने से फेड की ब्याज दर बढ़ाने की आशंका, सोने और चांदी की कीमतों पर बढ़ा दबाव

    अमेरिका में महंगाई बढ़ने से फेड की ब्याज दर बढ़ाने की आशंका, सोने और चांदी की कीमतों पर बढ़ा दबाव

    नई दिल्ली ।अमेरिका में उम्मीद से अधिक महंगाई के आंकड़े सामने आने के बाद वैश्विक बाजार में सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव बढ़ गया है। बाजार में यह धारणा मजबूत हुई है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व इस सप्ताह ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। ब्याज दर बढ़ने की आशंका के बीच निवेशकों ने बिना ब्याज देने वाली कीमती धातुओं में बिकवाली बढ़ाई है।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड करीब 4,340 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। दिन के दौरान इसमें लगभग 0.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इससे पहले पिछले सप्ताह सोने की कीमत में कुल 1.8 प्रतिशत की कमजोरी आई थी। चांदी भी करीब 0.8 प्रतिशत गिरकर 64 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गई। प्लैटिनम और पैलेडियम की कीमतों में भी नरमी देखी गई।

    घरेलू बाजार में सोमवार को गणेश चतुर्थी के अवसर पर एमसीएक्स के सोना और चांदी वायदा कारोबार का सुबह का सत्र बंद रहा। एमसीएक्स पर कारोबार शाम 5 बजे से रात 11:30 बजे तक होने की जानकारी दी गई है। अक्टूबर डिलीवरी वाला सोना वायदा करीब 1,52,655 रुपये प्रति 10 ग्राम और सितंबर डिलीवरी वाली चांदी करीब 2,34,886 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर रही।

    अमेरिका में शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, खाद्य और ऊर्जा की कीमतों को हटाकर मापी जाने वाली कोर उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई अगस्त में मासिक आधार पर 0.3 प्रतिशत बढ़ी। यह बाजार की उम्मीदों से अधिक रही। आंकड़ों से संकेत मिला कि महंगाई पर अभी पूरी तरह नियंत्रण नहीं पाया जा सका है।

    महंगाई के इन आंकड़ों के बाद बाजार में फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दर बढ़ाए जाने की संभावना मजबूत हुई है। कारोबारी सितंबर की बैठक में ब्याज दर बढ़ने की करीब 88 प्रतिशत संभावना देख रहे हैं। ऊंची ब्याज दरें आम तौर पर सोने जैसी ऐसी परिसंपत्तियों के लिए नकारात्मक मानी जाती हैं, जिनसे ब्याज आय नहीं होती।

    इस बीच पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और समुद्री आपूर्ति मार्गों पर जोखिम के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भी तेज उछाल देखा गया है। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है। तेल आपूर्ति से जुड़े जोखिमों ने ऊर्जा महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ाई हैं।

    यमन में हौथी बलों के महत्वपूर्ण बंदरगाहों पर कब्जे की बात भी सामने आई है। ये बंदरगाह उस महत्वपूर्ण तटीय क्षेत्र के पास हैं, जो वैश्विक समुद्री तेल व्यापार के एक बड़े हिस्से से जुड़ा है। रविवार को होर्मुज जलडमरूमध्य में ड्रोन हमलों और एक व्यापारिक पोत पर हमले के बाद सऊदी अरब ने अपनी पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन को अस्थायी रूप से बंद कर दिया। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, घटना में एक व्यक्ति की मौत हुई और तीन लोग घायल हुए।

    विश्लेषकों के मुताबिक, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें वैश्विक महंगाई को बढ़ा सकती हैं। इससे केंद्रीय बैंकों पर सख्त मौद्रिक नीति बनाए रखने का दबाव बढ़ सकता है। इसी वजह से निवेशकों ने फिलहाल सोने और चांदी में नई खरीदारी से दूरी बनाई है।

    अब बाजार की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीति बैठक और ब्याज दर संबंधी फैसले पर है। यदि फेड दरें बढ़ाता है और आगे भी सख्त रुख के संकेत देता है, तो कीमती धातुओं पर दबाव बना रह सकता है। हालांकि पश्चिम एशिया का भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता सोने को सुरक्षित निवेश के तौर पर कुछ समर्थन दे सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में सोने और चांदी की दिशा फेड के फैसले तथा कच्चे तेल की कीमतों से प्रभावित होने की संभावना है।