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  • ट्रंप, ईरान और चीन को लेकर ब्रह्मा चेलानी का बड़ा दावा: क्या बदल रही है वैश्विक राजनीति?

    ट्रंप, ईरान और चीन को लेकर ब्रह्मा चेलानी का बड़ा दावा: क्या बदल रही है वैश्विक राजनीति?




    नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ Brahma Chellaney ने हाल में एक श्रृंखला में ऐसे दावे किए हैं, जिनमें अमेरिका, ईरान, चीन और कैरेबियन क्षेत्र की भू-राजनीति को लेकर गंभीर टिप्पणियां शामिल हैं।इन दावों के अनुसार वैश्विक शक्ति संतुलन तेजी से बदल रहा है और अमेरिका की विदेश नीति नई दिशा में जा रही है।

    ट्रंप और वैश्विक रणनीति पर दावा
    दावों में कहा गया है कि Donald Trump कथित तौर पर ईरान संकट के बीच नई रणनीतिक दिशा अपना रहे हैं। इसमें:

    मध्य पूर्व और कैरेबियन क्षेत्र में अमेरिका की सक्रियता बढ़ना

    क्यूबा और वेनेजुएला जैसी सरकारों पर दबाव की नीति

    सत्ता परिवर्तन (regime change) जैसी पुरानी रणनीतियों की वापसी का संकेत

    हालांकि ये सभी दावे विश्लेषण और टिप्पणी पर आधारित हैं, किसी आधिकारिक अमेरिकी नीति दस्तावेज से इनकी पुष्टि नहीं हुई है।

    क्यूबा और कैरेबियन तनाव का संदर्भ
    चेलानी के अनुसार कैरेबियन क्षेत्र में तनाव के पीछे ये कारक बताए गए हैं:

    क्यूबा के खिलाफ आर्थिक और ऊर्जा प्रतिबंधों का विस्तार

    समुद्री नाकेबंदी और तेल आपूर्ति पर रोक के आरोप

    सैन्य गतिविधियों और निगरानी में वृद्धि

    इन घटनाओं को क्षेत्रीय संकट और मानवीय दबाव से जोड़कर देखा जा रहा है, लेकिन इन दावों पर अलग-अलग पक्षों की राय भिन्न है।

    चीन पर रणनीतिक टिप्पणी
    अपने एक अन्य विश्लेषण में चेलानी ने कहा कि:

    अमेरिका अब चीन को केवल प्रतिद्वंदी नहीं बल्कि “समकक्ष महाशक्ति” के रूप में देख रहा है

    वैश्विक शक्ति संतुलन बहुध्रुवीय (multipolar) बनता जा रहा है

    एशिया में खासकर जापान और अन्य देशों के लिए चीन-अमेरिका संबंध महत्वपूर्ण तनाव कारक बन रहे हैं

    इस संदर्भ में China को लेकर वैश्विक रणनीतिक प्रतिस्पर्धा की चर्चा और तेज हो गई है।

    कितना तथ्य, कितना विश्लेषण?
    यह समझना जरूरी है कि:

    ये दावे मुख्यतः विश्लेषणात्मक टिप्पणियों और भू-राजनीतिक व्याख्या पर आधारित हैं

    इनमें कई बातें “प्रोजेक्शन” या “जियोपॉलिटिकल थ्योरी” के रूप में प्रस्तुत की गई हैं

    आधिकारिक अमेरिकी या अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने इन सभी बिंदुओं की पुष्टि नहीं की है

  • क्यूबा के राष्ट्रपति की दो टूक…. बोले- US ने सैन्य कार्रवाई की तो उनका देश जवाब देने को तैयार….

    क्यूबा के राष्ट्रपति की दो टूक…. बोले- US ने सैन्य कार्रवाई की तो उनका देश जवाब देने को तैयार….


    हवाना।
    क्यूबा के राष्ट्रपति मिगेल डियाज-कैनेल (Cuban President Miguel Diaz-Canel) ने गुरुवार को कहा कि क्यूबा (Cuba) नहीं चाहता कि अमेरिका (America) उस पर सैन्य कार्रवाई करे। उन्होंने कहा, अगर ऐसा होता है तो उनका देश लड़ने के लिए तैयार है। डियाज-कैनेल ने यह बात एक रैली में कही, जिसमें सैकड़ों लोग शामिल हुए थे। यह रैली क्यूबा की क्रांति के 65 साल पूरे होने पर आयोजित की गई थी, जब क्यूबा ने खुद को समाजवादी देश घोषित किया था।

    डियाज-कैनेल ने कहा, यह बेहद चुनौतीपूर्ण समय है और हमें एक बार फिर गंभीर खतरों का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा, जैसे 16 अप्रैल 1961 को थे। इन खतरों में (संभावित) सैन्य हमला भी शामिल है। हम यह नहीं चाहते, लेकिन इससे बचने के लिए तैयारी करना हमारा कर्तव्य है और अगर यह टालना संभव न हो, तो हमें इसे हराना होगा।


    अमेरिकी राष्ट्रपति ने क्या चेतावनी दी?

    उन्होंने यह बात ऐसे समय में कही, जब दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है। अमेरिका की ऊर्जा नाकेबंदी के कारण क्यूबा का संकट और गहरा गया है। इस हफ्ते की शुरुआत में ट्रंप ने कहा था कि ईरान के साथ जंग खत्म होने के बाद उनका प्रशासन क्यूबा पर फोकस कर सकता है। उन्होंने कहा, हम इसे खत्म करने के बाद क्यूबा की ओर भी जा सकते हैं। उन्होंने क्यूबा को ‘विफल देश’ बताया और कहा कि यह लंबे समय से खराब तरीके से चलाया जा रहा है।

    जनवरी के शुरुआत में ट्रंप ने पहले भी क्यूबा में दखल की धमकी दी थी, जब अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला पर हमला किया और वहां से आने वाले तेल की आपूर्ति रोक दी। कुछ हफ्तों बाद ट्रंप ने उन देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी दी, जो क्यूबा को तेल बेचते हैं या उपलब्ध कराते हैं। ट्रंप और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के माता-पिता 1950 के दशक में क्रांति से पहले क्यूबा से प्रवास कर गए थे। दोनों ने क्यूबा की सरकार को अक्षम और दमनकारी बताया है।

    डियाज-कैनेल ने उन पर आरोप लगाया कि वे एक ऐसा ‘कहानी’ बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जिसका कोई आधार नहीं है। उन्होंने कहा, क्यूबा असफल देश नहीं है। क्यूबा एक घिरा हुआ देश है। क्यूबा एक ऐसा देश है, जो कई तरह के हमलों का सामना कर रहा है। इनमें आर्थिक युद्ध, कड़ी नाकेबंदी और ऊर्जा नाकेबंदी शामिल हैं।

    उन्होंने कहा, क्यूबा एक ऐसा देश है जिसे धमकाया जाता रहा है, लेकिन वह झुकता नहीं है। हर चीज के बावजूद समाजवाद की वजह से क्यूबा एक ऐसा देश है, जो संघर्ष करता है, आगे बढ़ता है और याद रखिए, यह देश जीतकर रहेगा।

    क्यूबा और अमेरिका दोनों ने माना है कि तनाव कम करने के लिए बातचीत चल रही है। लेकिन इसके बारे में कोई जानकारी साझा नहीं की गई है। क्यूबा के राष्ट्रपति ने क्रांति से मिली उपलब्धियों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि देश की समाजवादी व्यवस्था के कारण निशुल्क शिक्षा मिली है, जिससे हजारों पेशेवर तैयार हुए। लेकिन अब संकट के कारण उनमें से कई लोगों को देश छोड़ना पड़ा है।

  • वेनेजुएला के बाद अब ट्रंप की क्यूबा को धमकी, कहा-समझौता कर ले नहीं तो परिणआम भुगतने तैयार

    वेनेजुएला के बाद अब ट्रंप की क्यूबा को धमकी, कहा-समझौता कर ले नहीं तो परिणआम भुगतने तैयार

    वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के करीबी सहयोगी क्यूबा को रविवार को एक और चेतावनी जारी की। वेनेजुएला में अमेरिका के हवाई हमलों और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अपदस्थ किए जाने के बाद क्यूबा में बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन भड़कने की आशंका है। ऐसे में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि या तो क्यूबा अमेरिका के साथ समझौता कर ले नहीं तो उसे परिणआम भुगतने के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने कहा, क्यूबा समय रहते फैसला कर ले, कहीं ऐसा ना हो कि देर हो जाए।

    वेनेजुएला के तेल का प्रमुख खरीदार रहा क्यूबा अब इसकी खेप से वंचित हो गया है, क्योंकि अमेरिकी सेना वेनेजुएला के तेल उत्पादों के उत्पादन, शोधन और वैश्विक वितरण को नियंत्रित करने के प्रयासों के तहत टैंकर को जब्त करना जारी रखे हुए है। ट्रंप ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, ‘क्यूबा लंबे समय से वेनेजुएला के तेल और धन का इस्तेमाल कर रहा था और बदले में उसे सुरक्षा प्रदान कर रहा था, लेकिन अब और नहीं! क्यूबा को अब न तो तेल मिलेगा और न ही धन।’

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने लिखा, ‘मैं उन्हें कड़ी सलाह देता हूं कि वे बहुत देर होने से पहले समझौता कर लें।’ हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि वह किस तरह के समझौते की बात कर रहे हैं। क्यूबा सरकार ने कहा है कि पिछले वीकेंड मादुरो को पकड़ने के लिए चलाए गए अमेरिकी अभियान में उसके 32 सैन्यकर्मी मारे गए। क्यूबा की दो मुख्य सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े ये कर्मी क्यूबा और वेनेजुएला के बीच हुए समझौते के तहत वेनेजुएला की राजधानी काराकास में तैनात थे।

    ट्रंप ने कहा, ‘वेनेजुएला को अब उन गुंडों और जबरन वसूली करने वालों से सुरक्षा की जरूरत नहीं है, जिन्होंने उन्हें इतने वर्षों तक बंधक बनाकर रखा था। अब वेनेजुएला के पास अमेरिका है, जो (निस्संदेह!) दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेना है। हम उनकी रक्षा जरूर करेंगे।’
    वेनेजुएला ऑपरेशन के बाद कैसे बदले समीकरण

    क्यूबा की अर्थव्यवस्था वेनेजुएला पर निर्भर है। वेनेजुएला से ही क्यूबा को पैसा और ईंधन मिलता है। बदले में क्यूब वेनेजुएला को मेडिकल फैसिलिटी और एक्सपर्ट देता है। ट्रंप दबाव डाल रहे हैं कि वेनेजुएला अमेरिका को तेल सप्लाई करे और ऐसे में क्यूबा बदहाल हो जाएगा। डोनाल्ड ट्रंप की नजर अब क्यूबा पर भी है।
    क्यूबा पर कई बार कब्जे की कोशिश कर चुका है अमेरिका

    पहली बार नहीं जब किसी अमेरिकी राष्ट्रपति की नजर क्यूबा पर है.। क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति फिदेल कास्त्रों और अमेरिका की दुश्मनी काफी लंबी चली। क्यूबा के ही खुफिया विभाग ने कहा था कि अमेरिका ने सैकड़ों बार क्यूबा की सरकार गिराने और कब्जा करने का प्रयास किया। कई बार फिदेल कास्त्रो को मारने का प्लान भी बनाया गया।

    अमेरिका ने क्यूबा से निर्वासित लोगों की फौज तैयार कर दी थी और ऑपरेशन चलाया था लेकिन यह ऑपरेशन तीन दिन में ही फेल हो गया।
    1961-62 का ऑपरेशन मॉन्गूज

    राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी के कार्यकाल में क्यूबा में ऑपरेशन मॉन्गूज चलाया गया था। वहीं फिदेल कास्त्रो को मारने के लिए कई तरह के प्लान बनाए गए। इसमें उनकी सिगार में विस्फोट करवाने का प्लान भी शामिल था। इसके अलावा फिदेल कास्त्रो के मिल्कशेक में जहर मिलवाने का प्रयास किया गया। उनके डाइविंग सूट में जानलेवा केमिकल लगाए गए।
    पूर्व प्रेमिका से हत्या का प्लान

    अमेरिका ने फिदेल कास्त्रो की पूर्व प्रेमिका को भी उनकी हत्या करने के लिए राजी कर लिया था। उससे कास्त्रो को जहर देने को कहा गया था। हालांकि इस बात का पता कास्त्रो को चल गया और उन्होंने खुद ही पूर्व प्रेमिका को पिस्तौल दे दी और कहा कि मुझे शूट कर दो। उनकी प्रेमिका ने ऐसा करने से इनकार कर दिया। 1975 की चर्च कमेटी ने बताया था कि 1960 से 65 के बीच अमेरिका ने कम से कम 8 बार फिदेल कास्त्रो को मरवाने का प्लान बनाया था।

    क्यूबा के एक पूर्व अधिकारी फैबियान एस्कलांते के मुताबिक अमेरिका ने फिदेल कास्त्रो को मरवाने के 638 प्रयास किए. इनमें से 184 बार निक्सन के कार्यकाल में उनपर हमला करवाने का प्रयास किया गया।