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  • मल्टीस्टारर फिल्म में अजीब कहानी और अनोखा कॉन्सेप्ट, फिर भी बॉक्स ऑफिस पर नहीं चला जा

    मल्टीस्टारर फिल्म में अजीब कहानी और अनोखा कॉन्सेप्ट, फिर भी बॉक्स ऑफिस पर नहीं चला जा


    नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार ने अपने करियर से जुड़ा एक पुराना और दिलचस्प किस्सा साझा किया है, जो उनकी मल्टीस्टारर फिल्म ‘जानी दुश्मन: एक अनोखी कहानी’ से जुड़ा है। यह फिल्म अपने समय की सबसे बड़ी स्टारकास्ट वाली फिल्मों में शामिल थी, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर यह उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाई।

    अक्षय कुमार ने बताया कि फिल्म की शूटिंग के दौरान एक ऐसा अप्रत्याशित मोड़ आया, जब उनके किरदार की कहानी में मौत दिखाई गई थी, लेकिन आगे की शूटिंग के लिए उन्हें दोबारा बुलाना पड़ा। वजह यह थी कि एक अन्य कलाकार उस दिन शूट पर नहीं पहुंच सका था, जिसके चलते कहानी में बदलाव करना पड़ा और उनके किरदार को फिर से शामिल कर लिया गया।

    इस तरह अक्षय कुमार को कुछ अतिरिक्त दिनों तक शूटिंग करनी पड़ी, जिसे उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में याद किया। उन्होंने कहा कि उस दौर में फिल्म निर्माण की प्रक्रिया काफी अलग थी और कई बार परिस्थितियों के अनुसार तुरंत बदलाव करने पड़ते थे।

    फिल्म ‘जानी दुश्मन’ अपने अनोखे कॉन्सेप्ट और फैंटेसी आधारित कहानी के लिए जानी जाती है, जिसमें बदले और रहस्यमयी घटनाओं को बड़े पैमाने पर दिखाया गया था। फिल्म में कई बड़े कलाकार एक साथ नजर आए थे, जिससे इसकी चर्चा रिलीज से पहले ही काफी बढ़ गई थी।

    हालांकि इतनी बड़ी स्टारकास्ट और भव्य प्रस्तुति के बावजूद फिल्म दर्शकों को ज्यादा प्रभावित नहीं कर पाई और बॉक्स ऑफिस पर असफल साबित हुई। लेकिन समय के साथ यह फिल्म अपने अलग अंदाज और विचित्र दृश्यों के कारण एक कल्ट फिल्म के रूप में पहचानी जाने लगी।

    अक्षय कुमार ने यह भी कहा कि उस समय फिल्मों में कहानी की वास्तविकता से ज्यादा मनोरंजन और कल्पनाशीलता पर जोर दिया जाता था, जिसके कारण कई बार ऐसे अनोखे और असामान्य सीन देखने को मिलते थे।

    आज भी यह फिल्म अपनी अलग पहचान और दिलचस्प किस्सों के कारण चर्चा में रहती है और बॉलीवुड के उन प्रयोगात्मक प्रोजेक्ट्स में गिनी जाती है, जिन्होंने भले ही बॉक्स ऑफिस पर सफलता न पाई हो, लेकिन दर्शकों की यादों में अपनी जगह बना ली है।

  • अनुराग कश्यप का गुस्सा बना ‘गुलाल’, 8 साल की मेहनत के बाद बनी कल्ट फिल्म..

    अनुराग कश्यप का गुस्सा बना ‘गुलाल’, 8 साल की मेहनत के बाद बनी कल्ट फिल्म..


    नई दिल्ली: बॉलीवुड के ऑफ-बीट और बोल्ड निर्देशक अनुराग कश्यप हमेशा अपनी कहानियों के लिए चर्चित रहे हैं। लेकिन उनकी एक खास फिल्म ऐसी है जो उनके जीवन के गुस्से और समाज में व्याप्त असमानताओं का नतीजा बनी। यह फिल्म है गुलाल जिसे बनाने में पूरे 8 साल लगे और यह आज भी दर्शकों की पसंदीदा फिल्मों में शामिल है।

    गुलाल की कहानी की शुरुआत हुई साल 2001 में। उस वक्त अनुराग कश्यप जीवन के ऐसे पड़ाव पर थे जब उन्हें हर चीज़ पर गुस्सा आता था। उन्होंने कहा कि उस साल सेंसर बोर्ड ने उनकी फिल्म को पांच सर्टिफिकेट देने से मना कर दिया था और उन्हें महसूस हुआ कि वे हर चीज़ से नाराज हैं-चाहे वह नए राज्य बनना हो या प्यार में पड़ने की घटनाएं। इसी गुस्से और असंतोष ने उन्हें गुलाल बनाने की प्रेरणा दी।फिल्म की कहानी उन्हें तब मिली जब अभिनेता पंकज सारस्वत ने उन्हें राजा चौधरी से मिलवाया। राजा ने कॉलेज पॉलिटिक्स पर लिखी एक कहानी साझा की जिसे अनुराग ने पृष्ठभूमि देने का निर्णय लिया। इसके लिए वे जयपुर गए और वहां कई राजपरिवारों के सदस्यों से मुलाकात की। इन मुलाकातों ने फिल्म की कहानी को वास्तविकता और इतिहास से जोड़ने में मदद की।

    गुलाल की रिसर्च में अनुराग कश्यप ने इतिहासकार शारदा द्विवेदी रोमिला थापर और कई अन्य लेखकों के लेख पढ़े। उन्होंने भारत गणराज्य में राजपूतों की भूमिका और पटियाला रिपोर्ट जैसी ऐतिहासिक जानकारियों को फिल्म की कहानी में समाहित किया। इस तरह फिल्म की पटकथा तैयार हुई।फिल्म का संगीत भी खास रहा। जब अनुराग कश्यप फिल्म लिख रहे थे तब पीयूष मिश्रा ने संगीत की दुनिया में अपनी छाप छोड़ी। उन्होंने फिल्म के लिए ऐसे गाने लिखे जो आज भी याद किए जाते हैं। शुरुआत में प्रोड्यूसर नहीं मिलने की वजह से फिल्म का निर्माण अटक गया लेकिन बाद में जी मोशन पिक्चर्स ने फिल्म को उठाया और आखिरकार यह रिलीज हो सकी।

    गुलाल बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रही लेकिन इसके बावजूद इसने दर्शकों के बीच कल्ट फिल्म का दर्जा पा लिया। इसकी कहानी राजनीति और संगीत आज भी फिल्म प्रेमियों को आकर्षित करते हैं। IMDb पर इस फिल्म को 8 रेटिंग मिली है जो इसे और भी खास बनाती है।गुलाल सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि अनुराग कश्यप के गुस्से शोध और जुनून का परिणाम है। 8 साल की मेहनत और सामाजिक और राजनीतिक विषयों पर तीव्र नजर ने इसे भारतीय सिनेमा की यादगार फिल्मों में शामिल कर दिया।