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  • भारतीय आमों की मिठास से मजबूत होंगे वैश्विक रिश्ते, नितिन नवीन ने 82 देशों के राजनयिकों को भेजे खास उपहार

    भारतीय आमों की मिठास से मजबूत होंगे वैश्विक रिश्ते, नितिन नवीन ने 82 देशों के राजनयिकों को भेजे खास उपहार


    नई दिल्ली। भारतीय आमों की एसोसिएशन अब अंतरराष्ट्रीय संबंधों में भी नई गर्माहट पैदा हो रही है। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने नई दिल्ली में 82 देशों के विशेषज्ञों को भारतीय आमों के विशेष प्रीमियम उपहार बॉक्स वितरित किए हैं। इसका पहला उद्देश्य भारत की समृद्ध कृषि विरासत, सांस्कृतिक पहचान और मेहमाननवाजी की परंपरा को वैश्विक मंच पर और मजबूत बनाना है।

    विशेष रूप से तैयार किए गए इन बॉक्स में देश के चार प्रसिद्ध आम बादाम-केसर आम, दशहरी आम, बंगनपल्ली आम और लंगड़ा आम-शामिल की टोकरी। ये सभी सॉसेज अपने विशिष्ट स्वाद, सुगंध और क्षेत्रीय पहचान के लिए देश-दुनिया में प्रसिद्ध हैं।

    आम के साथ भेजे गए अपने व्यक्तिगत संदेश में नितिन नवीन ने भारतीय संस्कृति में आम के महत्व का उल्लेख करते हुए इसमें मित्रता, भाईचारा, मित्रतावादी और समृद्ध कृषि परंपरा का प्रतीक बताया। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह छोटा-सा भारत और विभिन्न देशों के बीच सहयोग और मजबूत बनाने में योगदान देगा।

    सांस्कृतिक अन्वेषण का अनोखा उदाहरण

    विशेषज्ञ इस पहल को ‘कल्चरल डिप्लोमेसी’ यानी सांस्कृतिक पोर्टफोलियो का प्रभावशाली उदाहरण मान रहे हैं। भारत लंबे समय से योग, आयुर्वेद, संविधान और सांस्कृतिक विरासत के माध्यम से दुनिया से जुड़ा हुआ है। अब हम भी वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय भारतीय फल के माध्यम से सहयोग और सहयोग का संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं।

    भारतीय आमों की खास पहचान

    गिर केसर (गुजरात)
    गिर केसर आम अपने शानदार केसरिया गूदे, स्वादिष्ट स्वाद और अनोखे स्वाद के लिए प्रसिद्ध है। साल इसे 2011 में जीआई टैग मिला था।

    मलिहाबादी दशहरी (उत्तर प्रदेश)

    मलिहाबादी दशहरी आम की सब्जी, बिना रेशम वाले गुड़े और शहद जैसी मिठास के लिए जाना जाता है। इसे 2009 में जीआई टैग प्राप्त हुआ था।

    बंगानगर (आंध्र प्रदेश)

    बंगनापल्ली आम के आकार में बड़ा, गाजर के रंग का और बिना रेशों वाला आम है। इसे 2017 में जीआई टैग मिला।

    बनारसी लंगड़ा (वाराणसी)

    बनारसी लंगड़ा आम का रस बाहर भी हरा रहता है, जबकि अंदर का गूदा रसदार और स्वाद में मीठा-खट्टा होता है। इसे 2023 में जीआई टैग से सम्मानित किया गया। भारत दुनिया के सबसे बड़े आम उत्पादकों में शामिल है और इसके कई साझेदार अंतरराष्ट्रीय बाजार में विशेष पहचान रखते हैं। सबसे पहले भारतीय आमों की वैश्विक ब्रांडिंग के साथ-साथ भारत की कृषि शक्ति और सांस्कृतिक विरासत को भी नई पहचान की उम्मीद है।
  • मोदी की विदेश यात्रा में भारतीय विरासत की झलक, स्लोवाकिया को मिले थेवा, हिमरू और डोकरा आर्ट गिफ्ट्स

    मोदी की विदेश यात्रा में भारतीय विरासत की झलक, स्लोवाकिया को मिले थेवा, हिमरू और डोकरा आर्ट गिफ्ट्स

    नई द‍िल्‍ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया विदेश यात्रा एक बार फिर भारत की सांस्कृतिक कूटनीति और वैश्विक मंच पर बढ़ती सॉफ्ट पावर का उदाहरण बनकर सामने आई है फ्रांस में जी7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के बाद पीएम मोदी अपने दो दिवसीय दौरे पर स्लोवाकिया पहुंचे जहां उन्होंने न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत किया बल्कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी दुनिया के सामने प्रस्तुत किया स्लोवाकिया की आजादी के बाद यह पहला अवसर था जब किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने इस देश का दौरा किया और इस यात्रा को ऐतिहासिक माना जा रहा है यहां प्रधानमंत्री मोदी को सर्वोच्च नागरिक सम्मान से भी सम्मानित किया गया जो दोनों देशों के संबंधों की मजबूती का प्रतीक है

    इस दौरे के दौरान पीएम मोदी ने स्लोवाकिया के नेताओं और शीर्ष अधिकारियों को भारत की पारंपरिक धरोहर से जुड़े विशेष उपहार भेंट किए जिनमें प्राचीन भारतीय चिकित्सा ज्ञान का प्रतिनिधित्व करने वाली सुश्रुत संहिता और चरक संहिता प्रमुख रूप से शामिल थीं सुश्रुत संहिता को सर्जरी के क्षेत्र में विश्व की सबसे पुरानी और महत्वपूर्ण कृतियों में गिना जाता है जिसमें चिकित्सा विज्ञान और शल्य चिकित्सा की उन्नत तकनीकों का विस्तृत वर्णन मिलता है वहीं चरक संहिता आयुर्वेद का एक आधारभूत ग्रंथ है जो स्वास्थ्य रोग और मानव शरीर की संरचना को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझाता है इन ग्रंथों के माध्यम से भारत ने यह संदेश दिया कि उसका ज्ञान केवल प्राचीन नहीं बल्कि आज भी वैश्विक स्वास्थ्य और चिकित्सा प्रणाली के लिए प्रासंगिक है

    इसके अलावा पीएम मोदी ने स्लोवाकिया के राष्ट्रपति को भारत की विविध हस्तशिल्प परंपराओं से जुड़े उपहार भी भेंट किए जिनमें प्रतापगढ़ की प्रसिद्ध थेवा कला से बने कफलिंक शामिल थे थेवा कला रंगीन कांच पर सोने की महीन नक्काशी से बनाई जाती है और इसे राजस्थान की दुर्लभ और अनोखी शिल्प परंपरा माना जाता है यह कला न केवल सौंदर्य का प्रतीक है बल्कि भारतीय कारीगरों की बारीक कारीगरी और धैर्य को भी दर्शाती है

    साथ ही हिमरू सिल्क टाई और पॉकेट स्क्वायर भी भेंट किए गए जो महाराष्ट्र के औरंगाबाद की पारंपरिक बुनाई कला का प्रतिनिधित्व करते हैं हिमरू कपड़ा अपनी हल्की चमक मुलायम बनावट और सुंदर पैटर्न के लिए जाना जाता है और इसे शाही संरक्षण में विकसित किया गया था

    पीतल का डोकरा एंटीलोप सेट भी इस सूची में शामिल था जो छत्तीसगढ़ ओडिशा झारखंड और पश्चिम बंगाल के आदिवासी कारीगरों की प्राचीन धातु कला को दर्शाता है यह कला लॉस्ट वैक्स कास्टिंग तकनीक से बनाई जाती है और हर मूर्ति अपने आप में अनोखी होती है इसके साथ ही पीएम मोदी ने स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री को कश्मीर की प्रसिद्ध सिल्क कारपेट भी भेंट किया जो बारीक डिजाइन और महीनों से लेकर वर्षों तक चलने वाली कारीगरी का उत्कृष्ट उदाहरण है

    इन सभी उपहारों के माध्यम से भारत ने न केवल अपनी सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित किया बल्कि यह भी संदेश दिया कि भारतीय हस्तशिल्प और ज्ञान परंपरा वैश्विक स्तर पर अपनी अलग पहचान रखती है यह यात्रा केवल कूटनीतिक बैठकें या औपचारिक चर्चाओं तक सीमित नहीं रही बल्कि इसने भारत की सांस्कृतिक शक्ति और वैश्विक संबंधों में उसकी बढ़ती भूमिका को भी मजबूती से सामने रखा

  • पीएम मोदी की गिफ्ट डिप्लोमेसी में सबसे खास बनी ‘भगवद गीता’, कई राष्ट्राध्यक्षों को उनकी भाषा में दी सौगात

    पीएम मोदी की गिफ्ट डिप्लोमेसी में सबसे खास बनी ‘भगवद गीता’, कई राष्ट्राध्यक्षों को उनकी भाषा में दी सौगात


    नई दिल्ली ।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राएं अक्सर राजनीतिक और कूटनीतिक चर्चाओं के साथ-साथ उनकी अनोखी ‘गिफ्ट डिप्लोमेसी’ को लेकर भी सुर्खियों में रहती हैं। हाल ही में इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को दिया गया खास उपहार चर्चा का विषय बना, लेकिन इसके पीछे एक और ऐसी सांस्कृतिक सोच है जिसे प्रधानमंत्री मोदी वर्षों से वैश्विक मंच पर मजबूती से प्रस्तुत करते आए हैं। यह सोच भारतीय संस्कृति, परंपरा और आध्यात्मिक विरासत को दुनिया तक पहुंचाने की है, जिसमें ‘श्रीमद्भगवद्गीता’ सबसे अहम भूमिका निभाती रही है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 में देश की कमान संभालने के बाद से कई अंतरराष्ट्रीय दौरों पर विदेशी नेताओं को भारतीय संस्कृति से जुड़े विशेष उपहार भेंट किए हैं। इनमें ‘भगवद गीता’ सबसे ज्यादा खास रही। खास बात यह रही कि उन्होंने जिस भी देश के राष्ट्राध्यक्ष को गीता भेंट की, वह उसी देश की भाषा में प्रकाशित प्रति थी। इससे न केवल भारतीय संस्कृति का सम्मान बढ़ा, बल्कि दूसरे देशों के नेताओं के साथ भावनात्मक और सांस्कृतिक जुड़ाव भी मजबूत हुआ।

    प्रधानमंत्री मोदी जब अपने पहले अमेरिकी दौरे पर गए थे, तब उन्होंने तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को ‘भगवद गीता’ की एक विशेष प्रति भेंट की थी। यह उपहार केवल एक धार्मिक पुस्तक नहीं बल्कि भारत की आध्यात्मिक विरासत और दर्शन का प्रतीक माना गया। उस दौरान यह संदेश भी स्पष्ट हुआ कि भारत अपनी सांस्कृतिक पहचान को दुनिया के सामने गर्व के साथ प्रस्तुत करना चाहता है।

    इसके बाद जापान यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने जापान के सम्राट अकिहितो और तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे को जापानी भाषा में लिखी ‘भगवद गीता’ भेंट की थी। इस कदम को भारत और जापान के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में बेहद खास माना गया। प्रधानमंत्री मोदी की यह पहल दिखाती है कि वे केवल राजनीतिक रिश्तों तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि संस्कृति और विचारों के जरिए भी देशों के बीच गहरे संबंध बनाना चाहते हैं।

    रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को भी प्रधानमंत्री मोदी रूसी भाषा में लिखी ‘भगवद गीता’ की प्रति भेंट कर चुके हैं। उस दौरान उन्होंने कहा था कि गीता के विचार और संदेश पूरी दुनिया के लाखों लोगों को प्रेरित करते हैं। प्रधानमंत्री मोदी कई मंचों से यह बात दोहरा चुके हैं कि गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं बल्कि जीवन प्रबंधन, कर्तव्य और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देने वाला ग्रंथ है।

    प्रधानमंत्री मोदी का मानना है कि ‘भगवद गीता’ के संदेश केवल व्यक्ति के जीवन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह राष्ट्र निर्माण और नीतियों की दिशा तय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कई मौकों पर गीता के श्लोकों और विचारों का उल्लेख करते हुए कहा है कि अन्याय और असत्य के खिलाफ खड़े होना ही सच्चे धर्म का मार्ग है।

    विशेषज्ञ मानते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी की यह सांस्कृतिक कूटनीति भारत की सॉफ्ट पावर को दुनिया में मजबूत करने का प्रभावशाली माध्यम बन चुकी है। गिफ्ट डिप्लोमेसी के जरिए भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान को जिस तरह वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया गया है, उसने भारत की छवि को नई मजबूती दी है।