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  • पतंग, तिल-गुड़ और खिचड़ी की खुशबू से महका भोपाल, भोजपाल पतंग महोत्सव ने रचा इतिहास

    पतंग, तिल-गुड़ और खिचड़ी की खुशबू से महका भोपाल, भोजपाल पतंग महोत्सव ने रचा इतिहास


    भोपाल। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर इस वर्ष भोपाल में एक नया और यादगार अध्याय जुड़ गया जब शहर में पहली बार भोजपाल पतंग महोत्सव का आयोजन किया गया। भेल स्थित जम्बूरी मैदान में आयोजित इस भव्य आयोजन ने पूरे शहर को पारंपरिक उल्लास और सामूहिक आनंद से भर दिया। बुधवार को हुए इस महोत्सव में 10 हजार से अधिक लोग अपने परिवार बच्चों और मित्रों के साथ शामिल हुए और खुले आसमान के नीचे रंग-बिरंगी पतंगों के साथ पर्व की खुशियां मनाईं।सुबह 10 बजे से शुरू हुआ यह पतंग महोत्सव शाम 5 बजे तक पूरे उत्साह और उमंग के साथ चला। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया आसमान में उड़ती सैकड़ों पतंगों ने जम्बूरी मैदान को एक जीवंत कैनवास में बदल दिया। बच्चों की किलकारियां युवाओं का जोश महिलाओं की मुस्कान और बुजुर्गों की उत्सुक भागीदारी ने इस आयोजन को एक पारिवारिक उत्सव का रूप दे दिया।

    इस आयोजन का श्रेय भोजपाल महोत्सव मेला समिति को जाता है जिसने शहर की सांस्कृतिक परंपराओं को सहेजने और सामूहिक उत्सव की भावना को मजबूत करने के उद्देश्य से इस पहल की। समिति की ओर से लगभग 2000 पतंगें और माझा नि:शुल्क वितरित किया गया ताकि हर वर्ग के लोग बिना किसी आर्थिक या अन्य बाधा के इस पर्व का आनंद ले सकें। पतंगबाजी के साथ-साथ महाप्रसादी के रूप में दो क्विंटल तिल-गुड़ के लड्डू और करीब 10 हजार लोगों के लिए खिचड़ी की व्यवस्था की गई जिसने मकर संक्रांति की मिठास और भी बढ़ा दी।

    कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि सांसद आलोक शर्मा और विशिष्ट अतिथि भोपाल भाजपा जिला अध्यक्ष रविंद्र यति की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ। आयोजन समिति के अध्यक्ष सुनील यादव संयोजक विकास वीरानी महामंत्री हरीश कुमार राम सहित समिति के अन्य पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने पूजा-अर्चना और दीप प्रज्वलन कर महोत्सव की औपचारिक शुरुआत की। इसके बाद अतिथियों ने स्वयं लोगों को पतंग और माझा वितरित कर आयोजन का उत्साह दोगुना कर दिया।सुरक्षा को लेकर आयोजन में विशेष सावधानी बरती गई। चाइनीज मांझे के उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया था। आयोजन समिति के अध्यक्ष सुनील यादव ने स्पष्ट किया कि केवल सूती और सुरक्षित धागे की ही अनुमति दी गई ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचा जा सके। नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए आयोजन स्थल पर समिति के सदस्य और पुलिस टीम लगातार तैनात रही।

    आयोजन समिति के सदस्यों के अनुसार भोजपाल पतंग महोत्सव केवल पतंग उड़ाने का कार्यक्रम नहीं था बल्कि यह पारिवारिक मेल-जोल सामाजिक सौहार्द और पारंपरिक पर्वों की सामूहिक खुशी को साझा करने का एक मंच बना। बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति ने यह साबित कर दिया कि शहरवासियों ने इस पहल को पूरे दिल से अपनाया है।समिति ने भविष्य में भी इस तरह के सांस्कृतिक और पारंपरिक आयोजनों को निरंतर आयोजित करने का संकल्प जताया है ताकि भोपाल की पहचान एक ऐसे शहर के रूप में और मजबूत हो सके जहां परंपरा उत्सव और सामाजिक सहभागिता एक साथ जीवंत रहती है।

  • वंदे मातरम् के 150 वर्ष: देशभर में भारतीय सेना के विशेष बैंड कार्यक्रम, देशभक्ति की धुनों से गूंजेंगे शहर

    वंदे मातरम् के 150 वर्ष: देशभर में भारतीय सेना के विशेष बैंड कार्यक्रम, देशभक्ति की धुनों से गूंजेंगे शहर



    नई दिल्ली
    । राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ को ऐतिहासिक और यादगार बनाने के लिए भारतीय सेना ने देशभर में विशेष बैंड परफॉर्मेंस आयोजित करने की व्यापक योजना बनाई है। यह आयोजन केवल एक सांगीतिक प्रस्तुति नहीं होगा बल्कि राष्ट्र की एकता सांस्कृतिक विरासत और देशभक्ति की भावना को सशक्त करने का प्रयास भी होगा। सेना के ये विशेष कार्यक्रम 19 से 26 जनवरी 2026 तक देश के प्रमुख शहरों में आयोजित किए जाएंगे।भारतीय सेना के अनुसार प्रत्येक बैंड परफॉर्मेंस लगभग 45 मिनट की होगी और इन्हें दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे के बीच आयोजित किया जाएगा। इन कार्यक्रमों में मिलिट्री बैंड और आर्मी सिम्फनी बैंड द्वारा वंदे मातरम् सहित कई देशभक्ति गीतों की प्रस्तुति दी जाएगी। संगीत के माध्यम से आम जनता को राष्ट्र के इतिहास बलिदान और एकता की भावना से जोड़ना इन आयोजनों का मुख्य उद्देश्य है।

    इन विशेष प्रस्तुतियों के लिए देश के लगभग हर क्षेत्र को शामिल किया गया है। बिहार में पटना और गया उत्तर प्रदेश में लखनऊ और प्रयागराज उत्तराखंड में देहरादून छत्तीसगढ़ में रायपुर ओडिशा में गोपालपुर और कर्नाटक में बेंगलुरु में सेना के बैंड कार्यक्रम होंगे। मध्य प्रदेश में जबलपुर महाराष्ट्र में मुंबई और पुणे तेलंगाना में हैदराबाद हिमाचल प्रदेश में शिमला राजस्थान में जयपुर और लद्दाख के कारगिल जैसे सामरिक और ऐतिहासिक महत्व वाले स्थानों को भी इस आयोजन में शामिल किया गया है।राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इंडिया गेट पर 18 जनवरी 2026 को आर्मी सिम्फनी बैंड की विशेष प्रस्तुति होगी जिसे इस श्रृंखला का प्रमुख आकर्षण माना जा रहा है। वहीं पश्चिम बंगाल के नैहाटी में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा जो वंदे मातरम् के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की जन्मस्थली है। इस आयोजन को सांस्कृतिक और भावनात्मक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    भारतीय सेना का कहना है कि इन कार्यक्रमों का उद्देश्य नई पीढ़ी को राष्ट्रीय गीतों और स्वतंत्रता संग्राम के सांस्कृतिक पक्ष से जोड़ना है। सेना के अधिकारियों के अनुसार संगीत एक ऐसा माध्यम है जो बिना शब्दों के भी देशप्रेम और एकता का संदेश देता है। यही कारण है कि इन प्रस्तुतियों को सार्वजनिक और निःशुल्क रखा गया है ताकि अधिक से अधिक लोग इसमें भाग ले सकें।विशेषज्ञों और शिक्षाविदों का मानना है कि ऐसे आयोजन युवाओं में राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करते हैं और उन्हें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ते हैं। सेना के इन कार्यक्रमों में विभिन्न सांस्कृतिक और शैक्षिक संस्थानों की सहभागिता भी सुनिश्चित की जा रही है जिससे यह आयोजन केवल सैन्य नहीं बल्कि एक व्यापक राष्ट्रीय उत्सव का रूप ले सके।