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  • ब्रिक्स सम्मेलन में दिखेगा मध्य प्रदेश का सांस्कृतिक वैभव: 125 कलाकार देंगे ‘अमृतस्य मध्य प्रदेश’ की भव्य प्रस्तुति

    ब्रिक्स सम्मेलन में दिखेगा मध्य प्रदेश का सांस्कृतिक वैभव: 125 कलाकार देंगे ‘अमृतस्य मध्य प्रदेश’ की भव्य प्रस्तुति


    भोपाल भोपाल में चल रहा ब्रिक्स सांस्कृतिक सम्मेलन 2026 अब अपने तीसरे दिन में प्रवेश कर चुका है और शुक्रवार को राजधानी में संस्कृति और कला का अंतरराष्ट्रीय संगम देखने को मिलेगा। ब्रिक्स सदस्य और भागीदार देशों के संस्कृति मंत्री भोपाल पहुंच रहे हैं जहां उनका पारंपरिक अंदाज में स्वागत किया जा रहा है। सम्मेलन के तीसरे दिन का सबसे बड़ा आकर्षण शाम को आयोजित होने वाला ब्रिक्स सांस्कृतिक महोत्सव 2026 होगा। इस विशेष आयोजन में भारत के साथ ब्रिक्स सदस्य और भागीदार देशों के प्रख्यात संगीतकार और कलाकार एक मंच पर नजर आएंगे। कार्यक्रम की शुरुआत सर्वे भवन्तु सुखिनः के मंगल आह्वान से होगी जिसके बाद कलर्स ऑफ इंडियन म्यूजिक के जरिए हिंदुस्तानी और कर्नाटक शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा को प्रस्तुत किया जाएगा। इसके बाद ब्रिक्स पीस सॉन्ग पीस इज द लैंग्वेज ऑफ द लैंड के जरिए अलग अलग देशों की संगीत परंपराओं को एक सूत्र में पिरोया जाएगा।

    इस सांस्कृतिक महोत्सव में बेलारूस ब्राजील चीन मिस्र इथियोपिया इंडोनेशिया ईरान रूस सऊदी अरब दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात की संगीत विरासत की झलक देखने को मिलेगी। आर्केस्ट्रा की प्रस्तुतियों में पीस टू ऑल हार्मनी टू ऑल और क्रेस्केंडो ऑफ यूनिटी जैसे कार्यक्रम विशेष आकर्षण होंगे। इन प्रस्तुतियों का उद्देश्य अलग अलग संस्कृतियों को संगीत के माध्यम से एक दूसरे से जोड़ना और शांति तथा आपसी सहयोग का संदेश देना है। कार्यक्रम कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर मिंटो हॉल में आयोजित किया जाएगा जहां अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के साथ कला प्रेमियों को भी भारतीय और वैश्विक सांस्कृतिक विविधता का अनुभव मिलेगा।

    शाम के कार्यक्रम का एक और बड़ा आकर्षण मध्य प्रदेश सरकार के संस्कृति विभाग की विशेष प्रस्तुति अमृतस्य मध्य प्रदेश एक अलौकिक सांस्कृतिक महायात्रा होगी। प्रसिद्ध कोरियोग्राफर मैत्रेयी पहाड़ी के निर्देशन में 125 से अधिक कलाकार मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक आध्यात्मिक और लोक परंपराओं को नृत्य और संगीत के माध्यम से मंच पर जीवंत करेंगे। प्रस्तुति की शुरुआत ॐ की अनादि ध्वनि से होगी और इसके जरिए भीमबेटका सांची और खजुराहो जैसे विश्व धरोहर स्थलों से लेकर चित्रकूट के राम पथ गमन और उज्जैन के संदीपनि आश्रम की कृष्ण लीला तक की सांस्कृतिक यात्रा कराई जाएगी। ग्वालियर ओरछा और मांडू के ऐतिहासिक किलों की गाथा के साथ महेश्वरी और चंदेरी के वस्त्र शिल्प तथा बैगा मटकी और बधाई जैसे लोक नृत्यों को भी प्रस्तुति में शामिल किया गया है।

    भोपाल की झीलों उज्जैन के बाबा महाकाल ओंकारेश्वर के अध्यात्म और मां नर्मदा की महाआरती के जरिए मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को विदेशी मेहमानों के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। इसी प्रस्तुति के माध्यम से अतिथियों को सिंहस्थ कुंभ 2028 का आध्यात्मिक निमंत्रण भी दिया जाएगा। कार्यक्रम के बाद मध्य प्रदेश सरकार की ओर से रात्रिभोज का आयोजन होगा जिसमें मेहमानों को प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद भी चखाया जाएगा। लंच और डिनर के मेन्यू में दाल बाफले निमोना रिकमच गुइया की सब्जी चंबल का थोपा चंदिया बड़ा तथा कोदो और कुटकी जैसे मिलेट आधारित व्यंजन शामिल किए गए हैं। अंतरराष्ट्रीय मेहमानों की पसंद को ध्यान में रखते हुए पश्चिमी और ओरिएंटल व्यंजन भी परोसे जाएंगे।

    8 अगस्त को भारत की अध्यक्षता में तीसरी ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की बैठक होगी जिसमें सांस्कृतिक विरासत संग्रहालय रचनात्मक अर्थव्यवस्था सांस्कृतिक आदान प्रदान क्षमता निर्माण और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। बैठक के अंत में ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की घोषणा को अपनाया जाएगा जो भविष्य में सांस्कृतिक सहयोग के लिए साझा रोडमैप तैयार करेगी। इसके बाद विदेशी प्रतिनिधिमंडल सांची जाएगा जहां वे सांची स्तूप और बौद्ध विरासत का अवलोकन करेंगे। चेतियागिरी मंदिर में दर्शन के साथ योग और ध्यान सत्र भी होगा तथा शाम को 3D प्रोजेक्शन मैपिंग और लाइट एंड साउंड शो के जरिए बौद्ध इतिहास और कला को प्रदर्शित किया जाएगा। 9 अगस्त को इच्छुक विदेशी प्रतिनिधियों के लिए भीमबेटका शैलाश्रय के भ्रमण की व्यवस्था की गई है। इस तरह भोपाल में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन केवल कूटनीतिक संवाद का मंच नहीं बल्कि भारत और विशेष रूप से मध्य प्रदेश की समृद्ध संस्कृति को दुनिया के सामने रखने का बड़ा अवसर बन गया है।

  • भोपाल में रंग पंचमी का भव्य जुलूस: पिचकारी वाला अनोखा निमंत्रण और मुख्यमंत्री की सराहना

    भोपाल में रंग पंचमी का भव्य जुलूस: पिचकारी वाला अनोखा निमंत्रण और मुख्यमंत्री की सराहना



    भोपाल राजधानी भोपाल इस बार 8 मार्च को होने वाले रंग पंचमी पर्व के लिए पहले से ही उत्साह और उमंग से सराबोर हो गई है। श्री हिंदू उत्सव समिति के तत्वावधान में आयोजित इस साल के रंग पंचमी जुलूस (चल समारोह) को विशेष और ऐतिहासिक बनाने की तैयारियां जोर-शोर से शुरू कर दी गई हैं। समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने बताया कि इस बार के आयोजन के लिए प्रकाश मालवीय को संयोजक बनाया गया है, जिन्होंने शहर के विभिन्न समाजों, एसोसिएशनों और समितियों के पदाधिकारियों को एक अनोखे अंदाज में निमंत्रित किया है।

    इस बार के निमंत्रण पत्र की खासियत यह है कि इसे पिचकारी के आकार में तैयार किया गया है, जिसमें पूरी जानकारी पिचकारी पर ही अंकित है। समिति ने इस अनोखे कार्ड की प्रतियां मुख्यमंत्री मोहन यादव को भी भेंट की, जिन्हें यह अभिनव प्रयास बहुत पसंद आया और उन्होंने इसका खुले दिल से स्वागत किया।

    रंग पंचमी का जुलूस केवल उत्सव का प्रदर्शन नहीं बल्कि यह सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक गौरव और पारंपरिक लोक रंगों का जीवंत अनुभव भी है। प्रकाश मालवीय ने बताया कि इस वर्ष जुलूस में ढोल-ताशों की गूंज, घोड़ी की आकर्षक प्रस्तुति, सुसज्जित झांकियां, डीजे की धुनें और रंग-गुलाल की बौछारें शामिल होंगी, जो पूरे शहर को उत्सवधर्मी माहौल में रंगों से सराबोर कर देंगी।

    समिति का कहना है कि यह जुलूस केवल आनंद और मनोरंजन का माध्यम नहीं बल्कि शहरवासियों को आपसी मेल-जोल और सांस्कृतिक भागीदारी का संदेश देने का अवसर भी है। पिछले वर्षों की तरह इस बार भी जुलूस का मार्ग विभिन्न प्रमुख क्षेत्रों से होकर गुजरेगा, ताकि अधिकतम लोग इस पारंपरिक उत्सव का आनंद ले सकें।

    भोपाल के नागरिक और उत्सव प्रेमी इस भव्य आयोजन के लिए पहले से ही उत्साहित हैं। पिचकारी जैसे अनोखे निमंत्रण पत्र और जुलूस की तैयारियों ने रंग पंचमी को और भी खास और यादगार बना दिया है। शहर के लोग अब 8 मार्च का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, जब पूरा भोपाल रंगों, संगीत और उत्साह से भरपूर माहौल में झूम उठेगा।

  • इंदौर में होली पर टेपा सम्मेलन हास्य व्यंग्य कवियों की प्रस्तुति सब्जियों की माला से अनोखा सम्मान

    इंदौर में होली पर टेपा सम्मेलन हास्य व्यंग्य कवियों की प्रस्तुति सब्जियों की माला से अनोखा सम्मान


    Indoreहोली के रंगों के बीच इंदौर में इस बार हंसी और व्यंग्य का ऐसा समागम सजा जिसने लोगों को देर रात तक ठहाके लगाने पर मजबूर कर दिया। मल्हारगंज मेनरोड स्थित नेमीनाथ चौराहे पर आयोजित टेपा सम्मेलन ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि त्योहार केवल रंग और गुलाल तक सीमित नहीं होते बल्कि वे सांस्कृतिक अभिव्यक्ति और सामाजिक जुड़ाव का भी बड़ा माध्यम हैं।

    Indore में आयोजित इस खास आयोजन में शहरभर से लोग जुटे और मंच पर सजे हास्य व्यंग्य के रंगों का भरपूर आनंद लिया। सम्मेलन में सरिता सरोज विभा सिंह गोविंद शर्मा राजेश लोटपोट ब्रजकिशोर पटेल और अकबर ताज जैसे चर्चित कवियों ने अपनी प्रस्तुतियों से माहौल को जीवंत बनाए रखा। समसामयिक मुद्दों सामाजिक विसंगतियों और राजनीतिक हालात पर किए गए हल्के फुल्के कटाक्षों ने दर्शकों को सोचने पर भी मजबूर किया और हंसी से लोटपोट भी कर दिया।

    कार्यक्रम की सबसे खास बात रही सम्मान का अनोखा अंदाज। जहां आमतौर पर मंचों पर महंगी शॉल और फूलों के गुलदस्ते भेंट किए जाते हैं वहीं यहां अतिथियों को टाट की शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। फूलों की जगह सब्जियों की माला पहनाई गई सिर पर झाड़ू से बनी टोपी सजाई गई और गोभी के पत्तों से तैयार गुलदस्ता भेंट किया गया। इस व्यंग्यात्मक लेकिन सादगी भरे सम्मान ने मंच और पंडाल दोनों में मौजूद लोगों को खूब गुदगुदाया।

    यह आयोजन श्री एक पहल संस्था द्वारा पिछले डेढ़ दशक से लगातार किया जा रहा है और हर वर्ष इसकी लोकप्रियता बढ़ती जा रही है। इस बार कार्यक्रम में समाजसेवी सुभाष खण्डेलवाल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे जबकि नवीन गोधा प्रमुख अतिथि के तौर पर मंच पर मौजूद थे। अध्यक्षता योगेन्द्र महंत ने की और विशेष अतिथियों में नारायण अग्रवाल वीरेन्द्रजी गुप्ता सरदारमल जैन और नितेश जैन आरोन शामिल रहे।

    देर रात तक चले इस सम्मेलन में श्रोता अपनी सीटों से टस से मस नहीं हुए। हर कविता पर तालियों की गड़गड़ाहट और ठहाकों की गूंज माहौल को उत्साह से भर देती रही। मंच संचालन भी रोचक और चुटीले अंदाज में किया गया जिससे कार्यक्रम की ऊर्जा लगातार बनी रही।

    होली के इस आयोजन में उत्साह उस समय और बढ़ गया जब भारत की टी 20 टीम के सेमीफाइनल में पहुंचने की खबर आई। कई दर्शक मोबाइल पर मैच का स्कोर देखते हुए भी कवियों की प्रस्तुतियों का आनंद लेते रहे। रंगों के इस पर्व पर हंसी का यह आयोजन लोगों के लिए यादगार बन गया।

    टेपा सम्मेलन ने यह संदेश दिया कि त्योहार केवल परंपराओं का निर्वाह नहीं बल्कि समाज को जोड़ने और सकारात्मक ऊर्जा फैलाने का अवसर भी होते हैं। जब रंगों के साथ हास्य और व्यंग्य का संगम हो जाए तो त्योहार की खुशी कई गुना बढ़ जाती है और यही इस आयोजन की सबसे बड़ी सफलता रही।