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  • पीएम मोदी ने मेलोनी को भेंट किया शिरुई लिली सिल्क स्टोल, भारत की सांस्कृतिक विरासत ने जीता अंतरराष्ट्रीय मंच पर दिल

    पीएम मोदी ने मेलोनी को भेंट किया शिरुई लिली सिल्क स्टोल, भारत की सांस्कृतिक विरासत ने जीता अंतरराष्ट्रीय मंच पर दिल

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी पांच देशों की यात्रा के दौरान इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जुड़े विशेष उपहार भेंट किए, जिसने एक बार फिर भारत की पारंपरिक कला और हस्तशिल्प की वैश्विक पहचान को मजबूती दी है। इस यात्रा के दौरान दिए गए उपहार केवल औपचारिक भेंट नहीं थे, बल्कि उनमें भारत की विविधता, परंपरा और सांस्कृतिक गहराई की झलक भी स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

    पीएम मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री को मूगा सिल्क स्टोल और शिरुई लिली सिल्क स्टोल भेंट किया, जो भारत के अलग-अलग क्षेत्रों की विशिष्ट कारीगरी और प्राकृतिक सौंदर्य को दर्शाते हैं। मूगा सिल्क असम की ब्रह्मपुत्र घाटी से आने वाला एक दुर्लभ और प्रतिष्ठित प्राकृतिक रेशम है, जिसे इसकी सुनहरी चमक और मजबूती के लिए जाना जाता है। यह सिल्क बिना किसी कृत्रिम रंग के तैयार किया जाता है और समय के साथ इसकी चमक और भी निखरती जाती है, जो इसे अत्यंत खास बनाता है।

    वहीं शिरुई लिली सिल्क स्टोल मणिपुर के शिरुई काशोंग पर्वत की धुंध भरी वादियों से प्रेरित है। इस क्षेत्र में पाया जाने वाला शिरुई लिली फूल अपनी दुर्लभता और अद्वितीय सुंदरता के लिए जाना जाता है। हल्के गुलाबी और सफेद रंग की पंखुड़ियों वाला यह फूल स्थानीय समुदाय की सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं का प्रतीक माना जाता है। इस स्टोल में न केवल इस फूल की सुंदरता को दर्शाया गया है, बल्कि वहां की लोककथाओं और सांस्कृतिक भावनाओं को भी बारीकी से उकेरा गया है।

    भारत द्वारा दिए गए इन उपहारों का एक खास पहलू यह भी है कि इनमें भारत और इटली की सांस्कृतिक समानताओं की झलक भी दिखाई देती है। इटली में भी लिली फूल को पवित्रता और सौंदर्य का प्रतीक माना जाता है, जिससे दोनों देशों के बीच एक अनोखा सांस्कृतिक जुड़ाव और समझ विकसित होती है। यह प्रतीकात्मक समानता दोनों देशों के संबंधों को और अधिक गहरा बनाती है।

    इसके अलावा पीएम मोदी ने इटली के राष्ट्रपति को आगरा की प्रसिद्ध पच्चीकारी कला से बना मार्बल इनले वर्क बॉक्स और भारतीय शास्त्रीय संगीत के महान कलाकारों की सीडी भी भेंट की। यह उपहार भारत की कला, संगीत और शिल्प परंपरा का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो सदियों से भारतीय संस्कृति की पहचान बने हुए हैं।

    आगरा की पच्चीकारी कला, जिसे मार्बल इनले वर्क भी कहा जाता है, विश्व प्रसिद्ध है और इसका ऐतिहासिक संबंध भी भारत और इटली की कला परंपराओं से जुड़ा हुआ माना जाता है। यह कला दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान का एक महत्वपूर्ण उदाहरण भी प्रस्तुत करती है।

    कुल मिलाकर प्रधानमंत्री मोदी द्वारा दिए गए ये सांस्कृतिक उपहार केवल औपचारिक भेंट नहीं, बल्कि भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत, शिल्प कौशल और परंपराओं को विश्व मंच पर प्रस्तुत करने का एक प्रभावशाली माध्यम बने हैं, जिससे भारत-इटली संबंधों को एक नई सांस्कृतिक गहराई मिली है।

  • आज से श्रीलंका में भगवान बुद्ध के पवित्र देवनीमोरी अवशेषों की ऐतिहासिक प्रदर्शनी

    आज से श्रीलंका में भगवान बुद्ध के पवित्र देवनीमोरी अवशेषों की ऐतिहासिक प्रदर्शनी


    नई दिल्ली । भगवान बुद्ध के पवित्र देवनीमोरी अवशेष आज से श्रीलंका में श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए प्रदर्शित किए जाएंगे। यह ऐतिहासिक अवशेष इंडियन एयरफोर्स के विशेष विमान सी 130जे के माध्यम से नई दिल्ली से कोलंबो पहुंचाए गए हैं। पवित्र अवशेषों को कोलंबो के प्रसिद्ध गंगारामया मंदिर में रखा गया है, जहां हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।

    कोलंबो स्थित भारतीय हाई कमीशन ने जानकारी दी है कि ये पवित्र अवशेष 4 से 11 फरवरी तक गंगारामया मंदिर में सुरक्षित रखे जाएंगे। सार्वजनिक पूजा और दर्शन की शुरुआत 5 फरवरी से होगी। 11 फरवरी 2026 को यह पवित्र धरोहर वापस भारत लाई जाएगी। यह देवनीमोरी अवशेषों का पहला अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक प्रदर्शन माना जा रहा है।यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस घोषणा का हिस्सा है, जिसके तहत भारत अपनी बौद्ध विरासत को विश्व के साथ साझा कर रहा है। इसका उद्देश्य सीमाओं के पार सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों को मजबूत करना है। भारत सरकार की इस पहल को बौद्ध समुदायों के बीच ऐतिहासिक और भावनात्मक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    श्रीलंका में इस प्रदर्शनी के दौरान बड़ी संख्या में बौद्ध भिक्षु, स्थानीय श्रद्धालु और अंतरराष्ट्रीय तीर्थयात्री पहुंचने की उम्मीद है। सभी को भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों के दर्शन और श्रद्धांजलि देने का दुर्लभ अवसर मिलेगा।भारतीय हाई कमीशन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक हालिया भाषण का वीडियो साझा करते हुए कहा कि भारत वियतनाम से मंगोलिया और थाईलैंड से रूस तक अपनी बौद्ध विरासत को साझा करता रहा है। जैसे ही देवनीमोरी अवशेष श्रीलंका पहुंचेंगे, यह स्पष्ट होगा कि भारत भगवान बुद्ध के शांति और करुणा के संदेश के जरिए दुनिया को कैसे जोड़ रहा है।

    इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि हाल के महीनों में भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष जहां भी प्रदर्शित किए गए, वहां आस्था और भक्ति की लहर देखने को मिली।भारत में श्रीलंका की हाई कमिश्नर महिशिनी कोलोन ने इस पहल को श्रीलंका के लिए एक अनोखा आशीर्वाद बताया। उन्होंने कहा कि यह अवशेषों का पहला अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन है और इसके लिए भारत सरकार तथा सभी सहयोगी संस्थाओं का आभार व्यक्त किया।

    गौरतलब है कि जनवरी की शुरुआत में नई दिल्ली के राय पिथौरा कल्चरल कॉम्प्लेक्स में भगवान बुद्ध से जुड़े पवित्र पिपराहवा अवशेषों की अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी का उद्घाटन भी प्रधानमंत्री मोदी ने किया था। उस अवसर पर उन्होंने बौद्ध विरासत स्थलों के विकास और युवा पीढ़ी को बौद्ध मूल्यों से जोड़ने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई थी।