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  • आरबीआई की समयसीमा से पहले मजबूत हुआ रुपया, डॉलर के मुकाबले दिखाई मजबूती!

    आरबीआई की समयसीमा से पहले मजबूत हुआ रुपया, डॉलर के मुकाबले दिखाई मजबूती!


    नई दिल्ली। शुक्रवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूती के साथ खुला। शुरुआती कारोबार में रुपया करीब 10 पैसे चढ़कर 92.57 प्रति डॉलर पर पहुंच गया, जबकि पिछले सत्र में यह 92.66 पर बंद हुआ था। बाजार में यह मजबूती मुख्य रूप से Reserve Bank of India (RBI) की ओर से तय की गई समयसीमा के चलते देखने को मिली।

    बैंकों की पोजीशन अनवाइंडिंग से मिला सपोर्ट

    10 अप्रैल बैंकों के लिए ऑफशोर नॉन-डिलिवरेबल फॉरवर्ड (NDF) मार्केट में अपनी अतिरिक्त पोजीशन खत्म करने की आखिरी तारीख है। इसी कारण बैंकों ने अपनी आर्बिट्रेज पोजीशन कम करनी शुरू कर दी, जिससे रुपए को सपोर्ट मिला।

    मार्च में RBI ने निर्देश दिया था कि बैंकों की रुपए में नेट ओपन पोजीशन हर दिन के अंत में 100 मिलियन डॉलर से अधिक नहीं होनी चाहिए। हालांकि बैंकों ने इस सीमा में ढील की मांग की थी, लेकिन केंद्रीय बैंक ने इसे सख्ती से लागू रखा।

    बाजार में ‘वेट एंड वॉच’ का माहौल

    विश्लेषकों का मानना है कि जब तक RBI की ओवरनाइट पोजीशन लिमिट को लेकर और स्पष्टता नहीं मिलती, तब तक बाजार सतर्क बना रहेगा। कुछ विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि डेडलाइन के बाद रुपए में बड़ी गिरावट की आशंका फिलहाल उतनी मजबूत नहीं है, जितनी बताई जा रही है।

    कच्चे तेल की कीमतों पर भी नजर

    इस बीच, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी निवेशकों के रडार पर है। ब्रेंट क्रूड करीब 97 डॉलर प्रति बैरल और WTI क्रूड 99 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रहा है।

    घरेलू बाजार में Multi Commodity Exchange (MCX) पर कच्चे तेल के वायदा भाव ने इंट्रा-डे में 9,222 रुपये का स्तर छुआ, जो 3% से ज्यादा की बढ़त दर्शाता है। तेल की कीमतों में तेजी आमतौर पर रुपए पर दबाव डालती है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है।

    RBI गवर्नर का बयान

    इस हफ्ते की शुरुआत में RBI गवर्नर Sanjay Malhotra ने कहा था कि विदेशी मुद्रा बाजार में लगाए गए कुछ प्रतिबंध अस्थायी हैं। इनका उद्देश्य बाजार में बढ़ती अस्थिरता को नियंत्रित करना है। उन्होंने यह भी बताया कि हाल के समय में विदेशी मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ा है, जिसका एक कारण बैंकों द्वारा किए गए आर्बिट्रेज ट्रेड्स भी रहे हैं।

    आगे क्या संकेत?

    रुपए की चाल आगे RBI की नीतियों, वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक हालात पर निर्भर करेगी। फिलहाल डेडलाइन से पहले रुपया मजबूत जरूर हुआ है, लेकिन आगे की दिशा को लेकर बाजार सतर्क बना हुआ है। RBI की डेडलाइन से पहले बैंकों की पोजीशन अनवाइंडिंग के चलते रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ, हालांकि आगे बाजार की दिशा अभी भी अनिश्चित बनी हुई है।

  • भारतीय रुपया रिकॉर्ड तेजी के साथ 93.10 डॉलर पर बंद, 13 साल का रुझान बदलता नजर

    भारतीय रुपया रिकॉर्ड तेजी के साथ 93.10 डॉलर पर बंद, 13 साल का रुझान बदलता नजर


    नई दिल्ली। डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपए में गुरुवार को 13 वर्षों में सबसे बड़ी तेजी देखने को मिली और इसके चलते अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले रुपया 93.10 के स्तर पर बंद हुआ।

    डॉलर के मुकाबले रुपए में तेजी की वजह आरबीआई द्वारा भारतीय मुद्रा में सट्टेबाजी को कम करने के लिए कदम उठाना है।

    हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने रुपए में तेज गिरावट को रोकने के लिए घरेलू और विदेशी मार्केट्स में नियमों को सख्त किया है।

    एक विश्लेषक ने कहा,“अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भाषण के बाद रिस्क सेंटीमेंट में सुधार के कारण रुपए में तेजी आई। उनके भाषण ने तनाव बढ़ाने के बजाय बातचीत का संकेत दिया गया, जिससे बाजार में तेजी आई। हालांकि, अनिश्चितता का स्तर अभी भी ऊंचा बना हुआ है, जिससे मुद्रा बाजारों में अस्थिरता बनी हुई है।”

    तीन दिन की छुट्टी के बाद कारोबार फिर से शुरू होने पर रुपया दिन के दौरान 1.7 प्रतिशत तक बढ़कर 93.25 पर पहुंच गया, जो सितंबर 2013 के बाद से डॉलर के मुकाबले रुपए की सबसे मजबूत वृद्धि है।

    केंद्रीय बैंक ने हाल ही में बैंकों को निवासी और अनिवासी दोनों ग्राहकों को रुपए के नॉन-डिलीवरी वाले फॉरवर्ड जारी करने से रोक दिया है, और कंपनियों को रद्द किए गए फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट्स को पुनः बुक करने से भी प्रतिबंधित कर दिया है।

    इससे पहले उठाए गए कदमों में बैंकों की रुपए में नेट ओपन पॉजिशन को 100 मिलियन डॉलर तक सीमित करना और संबंधित पक्षों के साथ विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों पर रोक लगाना शामिल था।

    इन कदमों का उद्देश्य मुद्रा बाजार में सट्टेबाजी की गतिविधियों को कम करना और रुपए को स्थिर करना है।

    विश्लेषकों ने कहा कि भारत का मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार, जो 700 अरब डॉलर से अधिक है, अस्थिरता से सुरक्षा प्रदान करता है और केंद्रीय बैंक को जरूरत पड़ने पर हस्तक्षेप करने की गुंजाइश देता है।

    वैश्विक बाजार के कमजोर संकेतों के बावजूद रुपए में उछाल आया। आज एशियाई बाजारों में गिरावट देखी गई, जापान का निक्केई, हांगकांग का हैंग सेंग और दक्षिण कोरिया का कोस्पी जैसे प्रमुख सूचकांक 3 प्रतिशत तक गिर गए।

    इस बीच, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से उछाल आया, जिससे वैश्विक अनिश्चितता और बढ़ गई। ब्रेंट क्रूड वायदा 5.24 प्रतिशत बढ़कर 106.47 डॉलर प्रति बैरल हो गया, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई वायदा 4.5 प्रतिशत बढ़कर 104.64 डॉलर हो गया।

    महावीर जयंती और नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत की छुट्टियों के कारण इस सप्ताह की शुरुआत में मुद्रा बाजार बंद रहे थे और यह गुड फ्राइडे के कारण शुक्रवार को भी बंद रहेंगे।

  • मध्य पूर्व तनाव के बीच डॉलर के मुकाबले रुपया टूटा, ऑल-टाइम लो पर पहुंचा

    मध्य पूर्व तनाव के बीच डॉलर के मुकाबले रुपया टूटा, ऑल-टाइम लो पर पहुंचा


    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच बुधवार को डॉलर के मुकाबले रुपया पहली बार 92.50 का स्तर तोड़ते हुए 92.634 पर पहुंच गया। यह अब तक का नया ऑल टाइम लो है। इससे पहले रुपए का सुप्रीम गिरावट स्तर 92.4750 था।

    सत्र की शुरुआत डॉलर के मुकाबले रुपए के 92.402 पर खुलने के साथ हुई थी, लेकिन दिन के दौरान रुपया लगातार कमजोर हुआ और अंत में नए निचले स्तर पर बंद हुआ। दिन में रुपया न्यूनतम 92.334 और सुप्रीम 92.643 को दिलाने में सफल रहा।

    रुपया कमजोर होने के प्रमुख कारण

    विश्लेषकों के अनुसार, डॉलर के मुकाबले रुपए में कमजोरी का मुख्य कारण मध्य पूर्व में संघर्ष और वैश्विक तेल कीमतों में वृद्धि है। ईरान युद्ध के चलते कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति टमाटर के पार जा चुकी हैं। भारत अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, जिससे बढ़ती कीमतों का सीधा असर रुपये पर पड़ रहा है।

    कच्चे तेल की कीमतों में पिछले एक महीने में 50 प्रतिशत से ज़्यादा की तेज़ी देखी गई है। अभी में ब्रेंट क्रूड 103 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड 94 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहे हैं।

    एलकेपी सिक्योरिटीज के जतिन त्रिवेदी ने कहा कि इम्पोर्ट बिल में लगातार बढ़ोतरी के दबाव के चलते रुपया 92.60 के नीचे फिसल गया। उन्होंने आगे बताया कि होर्मुज जलदमरूमध्य में माल ढुलाई पर रुकावटें और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत के लिए इम्पोर्ट लागत में लगातार बढ़ोतरी का कारण बन रही हैं।

    अमेरिकी नीतिगत फैसले पर नजर

    विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नीतिगत फैसले डॉलर की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इसके परिणामस्वरूप रुपए के उतार-चढ़ाव में बढ़ोतरी हो सकती है।

    निकट भविष्य में डॉलर के मुकाबले रुपया 92.25-92.95 के कमजोर दायरे में रहने की उम्मीद तय जा रही है। बाजार में निवेशक और व्यापारी इस पर बढ़ोतरी से नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि मध्य पूर्व में तनाव और तेल की ऊंची कीमतें रुपया दबाव में रख सकती हैं।

    बुधवार को डॉलर के मुकाबले रुपया ऑल टाइम लो 92.634 पर पहुंच गया। मध्य पूर्व में संघर्ष और बढ़ती कच्चे तेल की कीमतें इसके मुख्य कारण हैं। विश्लेषकों का रुझान है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले और वैश्विक आर्थिक परिदृश्य से रुपया निकट भविष्य में 92.25-92.95 के कमजोर दायरे में बने रहने की संभावना है। भारत की तेल आयात निर्भरता और होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट रुपये के दबाव को और बढ़ा रहा है।