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  • प्लास्टिक के 10-20 रुपये के नोट कब आएंगे? आरबीआई गवर्नर ने फील्ड ट्रायल और लॉन्च प्लान पर दी अहम जानकारी

    प्लास्टिक के 10-20 रुपये के नोट कब आएंगे? आरबीआई गवर्नर ने फील्ड ट्रायल और लॉन्च प्लान पर दी अहम जानकारी

    नई दिल्ली । भारतीय रिजर्व बैंक देश में पॉलिमर यानी प्लास्टिक बैंक नोटों को प्रचलन में लाने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल 10 रुपये और 20 रुपये के पॉलिमर नोटों का फील्ड ट्रायल जारी है। इन परीक्षणों के नतीजों का विस्तृत मूल्यांकन करने के बाद ही इन्हें बड़े स्तर पर बाजार में उतारने का अंतिम फैसला लिया जाएगा। यदि सभी परीक्षण सफल रहते हैं तो वित्त वर्ष 2027-28 तक इन नोटों को चरणबद्ध तरीके से जारी किए जाने की संभावना है।

    आरबीआई के अनुसार, पॉलिमर नोटों का परीक्षण देश के विभिन्न क्षेत्रों और अलग-अलग जलवायु परिस्थितियों में किया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ये नोट भारतीय मौसम, लगातार उपयोग और दैनिक लेनदेन की परिस्थितियों में कितने टिकाऊ और प्रभावी साबित होते हैं। परीक्षण के दौरान नोटों की मजबूती, घिसाव, सुरक्षा और परिचालन संबंधी कई पहलुओं का बारीकी से अध्ययन किया जा रहा है।

    केंद्रीय बैंक का मानना है कि पॉलिमर नोट पारंपरिक कागजी नोटों की तुलना में अधिक समय तक उपयोग योग्य रहते हैं। विशेष रूप से 10 और 20 रुपये जैसे छोटे मूल्यवर्ग के नोटों का लेनदेन सबसे अधिक होता है, जिसके कारण वे जल्दी खराब हो जाते हैं। ऐसे में पॉलिमर सामग्री से बने नोट लंबे समय तक सुरक्षित रह सकते हैं और बार-बार नए नोट छापने की आवश्यकता भी कम हो सकती है। इससे नोटों की छपाई और प्रतिस्थापन पर होने वाले खर्च में भी कमी आने की उम्मीद है।

    सरकार पहले ही 10 रुपये और 20 रुपये के पॉलिमर नोटों के फील्ड ट्रायल को मंजूरी दे चुकी है। पायलट परियोजना के तहत दोनों मूल्यवर्ग के बड़ी संख्या में नोट जारी कर विभिन्न परिस्थितियों में उनकी उपयोगिता का परीक्षण किया जा रहा है। इन परीक्षणों से प्राप्त आंकड़ों और अनुभवों के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।

    पॉलिमर नोटों में आधुनिक सुरक्षा तकनीकों का भी उपयोग किया जाएगा। इनमें पारदर्शी विंडो, उन्नत सुरक्षा फीचर और नकली नोटों की पहचान आसान बनाने वाली तकनीक शामिल हो सकती है। इससे जालसाजी की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण पाने में मदद मिलने की उम्मीद है। साथ ही नोटों की गुणवत्ता और सुरक्षा दोनों में सुधार होगा।

    आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल कागजी मुद्रा को पूरी तरह बंद करने की कोई योजना नहीं है। पॉलिमर नोट जारी होने के बाद भी मौजूदा कागजी नोट कानूनी रूप से मान्य रहेंगे और दोनों प्रकार की मुद्रा समानांतर रूप से प्रचलन में रहेगी। इससे लोगों को नए नोटों को अपनाने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा और नकदी व्यवस्था पर किसी प्रकार का अचानक प्रभाव नहीं पड़ेगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि फील्ड ट्रायल सफल रहता है तो भारत भी उन देशों की श्रेणी में शामिल हो जाएगा, जहां पॉलिमर मुद्रा का व्यापक उपयोग किया जाता है। इससे नोटों की उम्र बढ़ाने, नकली मुद्रा पर अंकुश लगाने और नकदी प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिल सकती है। फिलहाल सभी की नजर फील्ड ट्रायल के परिणामों और आरबीआई के अंतिम निर्णय पर बनी हुई है।

  • देश में जल्द शुरू होगा प्लास्टिक करेंसी नोटों का परीक्षण, सरकार ने स्पष्ट किया- कागजी नोट नहीं होंगे बंद

    देश में जल्द शुरू होगा प्लास्टिक करेंसी नोटों का परीक्षण, सरकार ने स्पष्ट किया- कागजी नोट नहीं होंगे बंद

    नई दिल्ली । देश में करेंसी व्यवस्था को अधिक टिकाऊ और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने ₹10 और ₹20 मूल्यवर्ग के पॉलिमर यानी प्लास्टिक नोटों के परीक्षण को मंजूरी दे दी है। इन नोटों को शुरुआत में सीमित स्तर पर फील्ड ट्रायल के रूप में जारी किया जाएगा। सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य नए प्रकार की करेंसी की उपयोगिता, टिकाऊपन और व्यवहारिक प्रभाव का आकलन करना है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि मौजूदा कागजी नोटों का चलन जारी रहेगा और उन्हें तत्काल बंद करने की कोई योजना नहीं है।

    सरकार के अनुसार भारतीय रिजर्व बैंक के प्रस्ताव पर सहमति देते हुए पहले चरण में ₹10 और ₹20 के 100-100 करोड़ पॉलिमर नोट परीक्षण के लिए जारी किए जाएंगे। इन नोटों का विभिन्न भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियों में उपयोग कर उनकी गुणवत्ता, मजबूती और संचालन क्षमता का अध्ययन किया जाएगा। ट्रायल के परिणाम संतोषजनक रहने पर आगे इन नोटों के नियमित उपयोग को लेकर निर्णय लिया जाएगा।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि देश में पहले से प्रचलित कागजी नोट पूरी तरह वैध बने रहेंगे। नागरिकों को किसी भी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि प्लास्टिक नोटों के आने से कागजी नोट अमान्य नहीं होंगे। दोनों प्रकार की करेंसी एक साथ चलन में रह सकती हैं। फिलहाल पूरे देश में कागजी नोटों को पॉलिमर नोटों से बदलने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।

    पॉलिमर नोटों को पारंपरिक कागजी नोटों की तुलना में अधिक टिकाऊ माना जाता है। इनकी उम्र सामान्य नोटों से अधिक होती है और ये नमी, धूल तथा बार-बार इस्तेमाल के बावजूद लंबे समय तक सुरक्षित रह सकते हैं। इसके अलावा इनमें आधुनिक सुरक्षा फीचर्स शामिल करना अपेक्षाकृत आसान होता है, जिससे नकली नोट तैयार करना कठिन हो जाता है। लंबे समय तक उपयोग योग्य होने के कारण इनकी बार-बार छपाई की आवश्यकता भी कम पड़ती है।

    दुनिया के कई देशों में पॉलिमर करेंसी का सफल उपयोग किया जा रहा है। सबसे पहले ऑस्ट्रेलिया ने वर्ष 1988 में इस तकनीक को अपनाया था। इसके बाद अनेक देशों ने भी अपने कुछ या सभी मूल्यवर्ग के नोट पॉलिमर सामग्री पर छापने शुरू किए। इन देशों के अनुभवों के आधार पर पॉलिमर नोटों को अधिक सुरक्षित और टिकाऊ विकल्प माना गया है।

    भारत में यह परियोजना अभी शुरुआती चरण में है। परीक्षण के दौरान यह भी देखा जाएगा कि आम लोगों, बैंकों, एटीएम नेटवर्क और अन्य वित्तीय संस्थानों के लिए इन नोटों का उपयोग कितना व्यावहारिक रहता है। इसके साथ ही परिवहन, रखरखाव और दीर्घकालिक लागत पर भी विस्तृत मूल्यांकन किया जाएगा, ताकि भविष्य में बड़े स्तर पर निर्णय लेने से पहले सभी पहलुओं का अध्ययन किया जा सके।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि परीक्षण सफल रहता है तो इससे करेंसी प्रबंधन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिल सकती है। हालांकि सरकार ने फिलहाल यह स्पष्ट कर दिया है कि यह केवल परीक्षण चरण है और इसका उद्देश्य नई तकनीक की उपयोगिता को परखना है। इसलिए आम लोगों को अपने पास मौजूद कागजी नोटों को लेकर किसी तरह की भ्रम की स्थिति में आने की आवश्यकता नहीं है। आने वाले समय में ट्रायल के नतीजों के आधार पर ही आगे की रणनीति तय की जाएगी।