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  • एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया को 153.58 करोड़ रुपये की कस्टम ड्यूटी का नोटिस, आयातित सामान के मूल्यांकन पर उठे सवाल

    एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया को 153.58 करोड़ रुपये की कस्टम ड्यूटी का नोटिस, आयातित सामान के मूल्यांकन पर उठे सवाल

    नई दिल्ली ।एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया लिमिटेड को कस्टम अधिकारियों की ओर से 153.58 करोड़ रुपये की कस्टम ड्यूटी से जुड़ा कारण बताओ नोटिस मिला है। यह नोटिस कुछ आयातित सामानों के मूल्यांकन योग्य मूल्य में रॉयल्टी भुगतान को शामिल नहीं करने के आरोप से संबंधित है। कंपनी ने इस संबंध में जानकारी स्टॉक एक्सचेंज को दी गई फाइलिंग में साझा की है।

    मामले में डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस यानी डीआरआई की जांच के बाद कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। जांच में आरोप लगाया गया है कि कुछ आयातित सामानों का मूल्यांकन योग्य मूल्य तय करते समय संबंधित रॉयल्टी भुगतान को शामिल नहीं किया गया। इसी आधार पर कस्टम ड्यूटी की अतिरिक्त राशि की मांग की गई है।

    22 सितंबर की तारीख वाला यह नोटिस नवी मुंबई के न्हावा शेवा पोर्ट स्थित कस्टम्स कमिश्नर कार्यालय से जारी किया गया था। कंपनी को यह नोटिस 24 सितंबर को प्राप्त हुआ। नोटिस में 153.58 करोड़ रुपये की कस्टम ड्यूटी की वसूली से जुड़ा मामला उठाया गया है।

    मामले में एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स के आयात से संबंधित कस्टम मूल्यांकन को लेकर जांच की गई है। रॉयल्टी भुगतान को आयातित सामान के मूल्यांकन योग्य मूल्य में शामिल किए जाने के मुद्दे पर विभाग की ओर से आपत्ति दर्ज की गई है। इसी आधार पर कंपनी से जवाब मांगा गया है।

    इसके अलावा एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स और उसकी प्रमुख प्रतिद्वंद्वी कंपनी सैमसंग से जुड़े ओएलईडी ग्लास स्क्रीन के आयात पर भी जांच चल रही है। यह जांच 5 प्रतिशत की रियायती कस्टम ड्यूटी के कथित गलत दावे को लेकर की जा रही है। जांच का केंद्र यह है कि आयात किए गए ओएलईडी ग्लास स्क्रीन पर किस दर से कस्टम ड्यूटी लागू होनी चाहिए।

    डीआरआई अधिकारियों का मानना है कि 5 प्रतिशत की रियायती कस्टम ड्यूटी की दर सामान्य बाजार में बिकने वाले उत्पादों में इस्तेमाल होने वाले पुराने एलसीडी और एलईडी से संबंधित है। ओएलईडी पार्ट्स के मामले में विभाग की ओर से अलग कस्टम ड्यूटी दर लागू होने की बात कही गई है।

    मामले में एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स ने ओएलईडी आयात से जुड़े अधिकारियों के लिखित सवालों के जवाब दिए हैं। कंपनी ने अधिकारियों द्वारा आकलन किए गए कस्टम ड्यूटी अंतर की रकम भी स्वेच्छा से जमा कर दी है। हालांकि, कारण बताओ नोटिस अलग से 153.58 करोड़ रुपये की कस्टम ड्यूटी से जुड़े मामले में जारी किया गया है।

    कस्टम ड्यूटी से जुड़े इस मामले के बीच एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया के वित्तीय प्रदर्शन में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में कंपनी का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 27.2 प्रतिशत बढ़कर 653 करोड़ रुपये हो गया। वित्त वर्ष 2025-26 की समान तिमाही में कंपनी का शुद्ध मुनाफा 513 करोड़ रुपये था।

    अप्रैल से जून की तिमाही के दौरान कंपनी की आय भी बढ़ी। इस अवधि में कंपनी का राजस्व 15.5 प्रतिशत बढ़कर 7,233 करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह 6,262 करोड़ रुपये था। कंपनी के अनुसार, गर्मियों के दौरान मजबूत मांग और प्रीमियम उत्पादों की बिक्री में बढ़ोतरी से वित्तीय प्रदर्शन को सहारा मिला।

  • जमशेदपुर के 300 साल पुराने हाथी खेदा मंदिर के अनोखे नियम, महिलाओं को नहीं मिलता प्रसाद


    रांची।
    झारखंड के जमशेदपुर के पास दलमा की पहाड़ियों और घने जंगलों के बीच स्थित हाथी खेदा ठाकुर मंदिर अपनी अनूठी परंपराओं और मान्यताओं के लिए जाना जाता है। करीब 300 साल पुराने इस मंदिर में किसी देवी-देवता की पारंपरिक प्रतिमा नहीं है। यहां मिट्टी से बने हाथियों की पूजा की जाती है। स्थानीय लोगों के बीच यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है।

    हाथियों के आतंक से जुड़ी है मंदिर की कहानी

    स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, सैकड़ों साल पहले दलमा के जंगलों में जंगली हाथियों का आतंक था। हाथियों के झुंड रात के समय गांवों में घुसकर फसलों को नुकसान पहुंचाते थे। ग्रामीण ढोल बजाकर और मशालें जलाकर हाथियों को दूर रखने की कोशिश करते थे, लेकिन समस्या बनी रही।

    बताया जाता है कि इसके बाद गांव के बुजुर्गों की सलाह पर लोगों ने मिट्टी के हाथी बनाकर उनकी पूजा शुरू की। स्थानीय मान्यता के अनुसार, इसके बाद हाथियों के गांवों में आने की घटनाएं कम होने लगीं। स्थानीय भाषा में ‘खेदा’ का अर्थ भगाना या दूर रखना बताया जाता है। इसी वजह से मंदिर का नाम हाथी खेदा पड़ा।

    मंदिर में सिर्फ मिट्टी के हाथियों की पूजा

    हाथी खेदा मंदिर की सबसे खास बात यहां मौजूद मिट्टी के हाथी हैं। मंदिर परिसर में संगमरमर या धातु से बनी किसी पारंपरिक देवी-देवता की प्रतिमा के बजाय अलग-अलग आकार के मिट्टी के हाथी दिखाई देते हैं।

    मान्यता के अनुसार, श्रद्धालु अपनी मन्नत पूरी होने की कामना से यहां मिट्टी का हाथी चढ़ाते हैं। इसके अलावा नारियल, धूप, दीप और चुनरी चढ़ाने की परंपरा भी है।

    मन्नत पूरी होने पर बलि की परंपरा

    मंदिर से कई स्थानीय और आदिवासी रीति-रिवाज भी जुड़े हुए हैं। श्रद्धालुओं की ओर से मन्नत पूरी होने पर बकरे या भेड़ की बलि देने की परंपरा का भी उल्लेख मिलता है। स्थानीय लोगों के लिए यह सदियों पुरानी आस्था और परंपरा का हिस्सा है।

    प्रसाद को लेकर सख्त मान्यता

    हाथी खेदा मंदिर में प्रसाद को लेकर भी एक अनोखी परंपरा बताई जाती है। स्थानीय मान्यता के मुताबिक, मंदिर में चढ़ाया गया प्रसाद महिलाओं को नहीं दिया जाता। इसके अलावा श्रद्धालुओं को प्रसाद मंदिर परिसर में ही ग्रहण करना होता है और उसे घर ले जाने की अनुमति नहीं है। मंदिर आने वाले श्रद्धालु इन परंपराओं का पालन करते हैं और इन्हें स्थानीय धार्मिक आस्था का हिस्सा मानते हैं।

    त्योहारों पर लगता है मेला

    मकर संक्रांति, चैत्र महीने और स्थानीय आदिवासी त्योहारों के दौरान हाथी खेदा मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंगलवार और रविवार को भी यहां विशेष भीड़ रहती है।

    आज भी दलमा के जंगलों में जंगली हाथियों की मौजूदगी रहती है। ऐसे में हाथी खेदा मंदिर स्थानीय लोगों की धार्मिक आस्था के साथ-साथ जंगल और वहां रहने वाले वन्यजीवों के साथ उनके ऐतिहासिक संबंध की एक अलग तस्वीर पेश करता है।

  • KitKat चॉकलेट के पैकेट में छिपाकर ला रहे थे ड्रग्स, IGI एयरपोर्ट पर 2.759 किलो गांजे के साथ यात्री गिरफ्तार

    KitKat चॉकलेट के पैकेट में छिपाकर ला रहे थे ड्रग्स, IGI एयरपोर्ट पर 2.759 किलो गांजे के साथ यात्री गिरफ्तार

    नई दिल्ली । दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर कस्टम विभाग ने मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए एक यात्री को गिरफ्तार किया है। आरोपी यात्री फुकेट से दिल्ली पहुंचा था और उसके पास मौजूद KitKat चॉकलेट के पैकेटों में छिपाकर हाइड्रोपोनिक गांजा लाया जा रहा था। जांच के दौरान कस्टम अधिकारियों ने 2.759 किलोग्राम प्रतिबंधित पदार्थ बरामद किया, जिसके बाद यात्री के खिलाफ एनडीपीएस अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई।

    कस्टम अधिकारियों के अनुसार, यह मामला 2 अगस्त का है। एयर इंडिया की फ्लाइट से फुकेट से दिल्ली पहुंचे एक यात्री को एयर इंटेलिजेंस यूनिट की प्रोफाइलिंग के आधार पर संदिग्ध श्रेणी में रखा गया था। यात्री जब ग्रीन चैनल से बाहर निकलने की कोशिश कर रहा था, तभी अधिकारियों ने उसे रोककर उसके सामान की जांच शुरू की।

    जांच के दौरान बैग की हाई रिजॉल्यूशन एक्स-रे स्कैनिंग की गई। तलाशी लेने पर KitKat चॉकलेट के पैकेटों के अंदर चार वैक्यूम सील पैकेट मिले। इन पैकेटों में हाइड्रोपोनिक गांजा छिपाकर रखा गया था। अधिकारियों ने सभी पैकेटों को जब्त कर लिया और यात्री को गिरफ्तार कर आगे की जांच शुरू कर दी।

    जांच एजेंसियों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स तस्कर लगातार नए-नए तरीके अपनाकर सुरक्षा जांच को चकमा देने की कोशिश कर रहे हैं। इससे पहले भी दिल्ली एयरपोर्ट पर मादक पदार्थों को गीजर, मिक्सर, ट्रॉली बैग के अंदर छिपाकर लाने के मामले सामने आ चुके हैं। अब चॉकलेट के पैकेटों का इस्तेमाल तस्करी के लिए किया जाना जांच एजेंसियों के लिए एक नई चुनौती के रूप में सामने आया है।

    कस्टम विभाग अब संदिग्ध यात्रियों की पहचान के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है। एयरपोर्ट पर यात्री प्रोफाइलिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित जोखिम विश्लेषण, एक्स-रे स्कैनिंग और खुफिया जानकारी के आधार पर जांच प्रक्रिया को मजबूत किया गया है। इसी वजह से कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें तस्करों ने छिपाने के बेहद अलग तरीके अपनाए थे।

    आंकड़ों के अनुसार, पिछले कुछ समय में दिल्ली एयरपोर्ट पर हाइड्रोपोनिक गांजे की कई बड़ी खेप पकड़ी गई हैं। जून महीने में बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ बरामद किए गए, जबकि जुलाई से अगस्त के शुरुआती दिनों तक भी लगातार कार्रवाई जारी रही। इन अभियानों में कई यात्रियों को गिरफ्तार किया गया है और बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित पदार्थ जब्त किए गए हैं।

    कस्टम अधिकारियों की नजर खासतौर पर बैंकॉक, फुकेट और कुआलालंपुर जैसे अंतरराष्ट्रीय रूटों से आने वाली उड़ानों पर है। इन मार्गों को हाई रिस्क श्रेणी में रखा गया है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स नेटवर्क भारत में मादक पदार्थ पहुंचाने के लिए इनका इस्तेमाल करने की कोशिश करते हैं।

    इससे पहले भी एयरपोर्ट पर बड़ी कार्रवाई में गीजर के अंदर छिपाकर लाई गई हाइड्रोपोनिक गांजे की खेप पकड़ी गई थी। वहीं बैंकॉक से आने वाले यात्रियों के पास से भी बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित पदार्थ बरामद किया गया था। लगातार हो रही इन कार्रवाइयों से साफ है कि तस्कर तरीके बदल रहे हैं, लेकिन जांच एजेंसियां भी आधुनिक तकनीक और सतर्कता के जरिए उनकी योजनाओं को नाकाम करने में जुटी हैं।