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  • CWG 2026: भारत की पदक तालिका में लंबी छलांग….एक दिन में 8 गोल्ड सहित रिकॉर्ड 16 मेडल जीते

    CWG 2026: भारत की पदक तालिका में लंबी छलांग….एक दिन में 8 गोल्ड सहित रिकॉर्ड 16 मेडल जीते


    नई दिल्ली।
    ग्लासगो में जारी कॉमनवेल्थ गेम्स (Glasgow Commonwealth Games) के 10वें दिन भारत (India) की झोली में रिकॉर्ड 16 मेडल (Record 16 medals) आए। इन मेडल के दम पर भारत ने ओवरऑल मेडल टैली में लंबी छलांग लगाई है। भारत अब कुल 39 मेडल के साथ चौथे पायदान पर पहुंच गया है।

    भारत ने 10वें दिन 8 गोल्ड, 5 सिल्वर और 3 बॉन्ज मेडल जीते, जिसमें 7 गोल्ड तो बॉक्सिंग में आए। बॉक्सर प्रीति पवार, जैस्मीन लैम्बोरिया, साक्षी चौधरी, प्रिया घनघस, अरुंधति चौधरी, सचिन सिवाच और अंकुश पंघाल ने टॉप मेडल जीते, जबकि जदुमणि सिंह, लवलीना बोरगोहेन और नरेंद्र बेरवाल ने अपने-अपने वेट कैटेगरी में सिल्वर मेडल जीते। लॉन्ग-डिस्टेंस रनर गुलवीर सिंह ने पुरुषों की 5000m फाइनल में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर CWG 2026 का अपना दूसरा मेडल जीता। दूसरी ओर, पुरुषों के F57 शॉट पुट इवेंट में भारत 1-2 पर रहा, जिसमें सोमन राणा ने गोल्ड और शुभम जुयाल ने सिल्वर मेडल जीता। पुरुषों के ट्रिपल जंप इवेंट में, प्रवीण चित्रवेल ने सिल्वर मेडल जीता, जबकि सेल्वा प्रभु थिरुमारन ने ब्रॉन्ज़ मेडल जीता। जूडोका उन्नति शर्मा ने भी ब्रॉन्ज़ मेडल जीता। भारत के कुल 39 मेडल (13 गोल्ड, 17 ​​सिल्वर और नौ ब्रॉन्ज) हो गए हैं, जिससे देश मेडल टेबल में चौथे नंबर पर आ गया है।


    कॉमनवेल्थ गेम्स के 10वें दिन मेडल जीतने वाले भारतीय एथलीट्स

    गोल्ड प्रीति पवार – महिलाओं की 54kg (बॉक्सिंग)
    गोल्ड जैस्मिन लैम्बोरिया – महिलाओं की 57kg (बॉक्सिंग)
    गोल्ड सोमन राणा – पुरुषों की शॉट पुट F57 (पैरा एथलेटिक्स)
    गोल्ड साक्षी चौधरी – महिलाओं की 51kg (बॉक्सिंग)
    गोल्ड प्रिया घनघस – महिलाओं की 60kg (बॉक्सिंग)
    गोल्ड अरुंधति चौधरी – महिलाओं की 70kg (बॉक्सिंग)
    गोल्ड सचिन सिवाच – पुरुषों की 60kg (बॉक्सिंग)
    गोल्ड अंकुश पंघाल – पुरुषों का 80kg (बॉक्सिंग)
    सिल्वर प्रवीण चित्रावेल – पुरुषों का ट्रिपल जंप (एथलेटिक्स)
    सिल्वर जदुमणि सिंह मंडेंगबाम – पुरुषों का 55kg (बॉक्सिंग)
    सिल्वर शुभम जुयाल – पुरुषों का शॉट पुट F57 (पैरा एथलेटिक्स)
    सिल्वर लवलीना बोरगोहेन – महिलाओं का 75kg (बॉक्सिंग)
    सिल्वर नरेंद्र बेरवाल – पुरुषों का +90kg (बॉक्सिंग)
    ब्रॉन्ज सेल्वा प्रभु थिरुमारन – पुरुषों की ट्रिपल जंप (एथलेटिक्स)
    ब्रॉन्ज उन्नति शर्मा – महिलाओं की -57kg (जूडो)
    ब्रॉन्ज गुलवीर सिंह – पुरुषों की 5000m (एथलेटिक्स)


    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में गोल्ड मेडल जीतने वाले भारतीय एथलीट्स (13)

    मीराबाई चानू – महिलाओं की 48kg (वेटलिफ्टिंग)
    शर्मिला धनखड़ – महिलाओं की शॉट पुट F57 (पैरा एथलेटिक्स)
    दिलीप महादू गावित – पुरुषों की 100m T47 (पैरा एथलेटिक्स)
    अस्मिता डे – महिलाओं की -48kg (जूडो)
    हर्ष सिंह – पुरुषों की -60kg (जूडो)
    प्रीति पवार – महिलाओं की 54kg (बॉक्सिंग)
    जैस्मिन लैम्बोरिया – महिलाओं की 57kg (बॉक्सिंग)
    सोमन राणा – पुरुषों की शॉट पुट F57 (पैरा एथलेटिक्स)
    साक्षी चौधरी – महिलाओं की 51kg (बॉक्सिंग)
    प्रिया घनघस – महिलाओं की 60kg (बॉक्सिंग)
    अरुंधति चौधरी – महिलाओं की 70kg (बॉक्सिंग)
    सचिन सिवाच – पुरुषों की 60kg (बॉक्सिंग)
    अंकुश पंघाल – पुरुषों का 80kg (बॉक्सिंग)


    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में सिल्वर मेडल जीतने वाले भारतीय एथलीट्स (17)

    ऋषिकांत सिंह – पुरुषों का 60kg (वेटलिफ्टिंग)
    मुथुपंडी राजा – पुरुषों का 65kg (वेटलिफ्टिंग)
    ज्ञानेश्वरी यादव – महिलाओं का 53kg (वेटलिफ्टिंग)
    वल्लूरी अजय बाबू – पुरुषों का 79kg (वेटलिफ्टिंग)
    हरजिंदर कौर – महिलाओं का 69kg (वेटलिफ्टिंग)
    सर्वेश कुशारे – पुरुषों का हाई जंप (एथलेटिक्स)
    गुलवीर सिंह – पुरुषों का 10,000m (एथलेटिक्स)
    एम. श्रीशंकर – पुरुषों का लॉन्ग जंप (एथलेटिक्स)
    मोहम्मद बेसिल – पुरुषों का 100m T47 (पैरा एथलेटिक्स)
    लवप्रीत सिंह – पुरुषों का +110kg (वेटलिफ्टिंग)
    यामिनी मौर्या – महिलाओं का -57kg (जूडो)
    नीरज चोपड़ा – पुरुषों का जेवलिन थ्रो (एथलेटिक्स)
    प्रवीण चित्रावेल – पुरुषों का ट्रिपल जंप (एथलेटिक्स)
    जदुमणि सिंह मंडेंगबाम – पुरुषों का 55kg (बॉक्सिंग)
    शुभम जुयाल – पुरुषों का शॉट पुट F57 (पैरा एथलेटिक्स)
    लवलीना बोरगोहेन – महिलाओं का 75kg (बॉक्सिंग)
    नरेंद्र बेरवाल – पुरुषों का +90kg (बॉक्सिंग)


    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाले भारतीय एथलीट्स (9)

    झंडू कुमार – पुरुषों का हैवीवेट (पैरा पावरलिफ्टिंग)
    बिंद्यारानी देवी – महिलाओं का 58kg (वेटलिफ्टिंग)
    शिल्पा के. शायला – महिलाओं का शॉट पुट F57 (पैरा एथलेटिक्स)
    सीमा कालीरमना – महिलाओं का डिस्कस थ्रो (एथलेटिक्स)
    तेजस्विन शंकर – डेकाथलॉन (एथलेटिक्स)
    यश वीर सिंह – पुरुषों की जैवलिन थ्रो (एथलेटिक्स)
    सेल्वा प्रभु थिरुमारन – पुरुषों की ट्रिपल जंप (एथलेटिक्स)
    उन्नति शर्मा – महिलाओं की -57kg (जूडो)
    गुलवीर सिंह – पुरुषों की 5000m (एथलेटिक्स)

  • कॉमनवेल्थ गेम्स में मध्यप्रदेश का दमदार प्रदर्शन, यामिनी और अजय बाबू ने जीते रजत पदक

    कॉमनवेल्थ गेम्स में मध्यप्रदेश का दमदार प्रदर्शन, यामिनी और अजय बाबू ने जीते रजत पदक

    भोपाल । कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन के बीच मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों ने भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। जूडो में सागर की यामिनी मौर्य और वेटलिफ्टिंग में अजय बाबू ने शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक (सिल्वर मेडल) अपने नाम किया। दोनों खिलाड़ियों की इस उपलब्धि पर मध्यप्रदेश के खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।

    मंत्री सारंग ने कहा कि भारतीय खिलाड़ी अंतर्राष्ट्रीय मंच पर लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन कर देश का गौरव बढ़ा रहे हैं। ऐसे में मध्यप्रदेश के दो खिलाड़ियों का कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक जीतना पूरे प्रदेश के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है। उन्होंने कहा कि यामिनी मौर्य ने 57 किग्रा जूडो में शानदार संघर्ष और तकनीकी कौशल का परिचय देते हुए रजत पदक हासिल किया, वहीं अजय बाबू ने वेट लिफ्टिंग में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सिल्वर मेडल जीतकर प्रदेश और देश का मान बढ़ाया है।

    मंत्री सारंग ने कहा कि यह सफलता प्रदेश के उभरते खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी और उन्हें बड़े मंचों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने का आत्मविश्वास देगी। मंत्री सारंग ने विश्वास व्यक्त किया कि आगामी प्रतियोगिताओं में भी मध्यप्रदेश और भारत के खिलाड़ी इसी प्रकार बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए अधिक से अधिक पदक जीतेंगे।

    वीडियो कॉल पर जूडो खिलाड़ी यामिनी को दी बधाई

    कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो स्पर्धा में रजत पदक जीतकर मध्यप्रदेश का गौरव बढ़ाने वाली खिलाड़ी यामिनी मौर्य से मंत्री सारंग ने वीडियो कॉल पर उन्हें शानदार उपलब्धि पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। मंत्री सारंग ने कहा कि यामिनी मौर्य की यह सफलता मध्यप्रदेश और देश के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए आगामी अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदक जीतने का विश्वास व्यक्त किया।

    खेल नीति के तहत मिलेगा सम्मान और प्रोत्साहन

    मंत्री विश्वास सारंग ने घोषणा की कि मध्यप्रदेश सरकार की खेल नीति के अनुसार कॉमनवेल्थ गेम्स में रजत पदक जीतने वाले यामिनी मौर्य और अजय बाबू को 25-25 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही खेल नीति के प्रावधानों के अनुरूप दोनों खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी दी जाएगी।

    खिलाड़ियों के लिए हरसंभव सहयोग दे रही सरकार
    मंत्री सारंग ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय खेल अधोसंरचना, आधुनिक प्रशिक्षण, बेहतर सुविधाएं और प्रोत्साहन उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। सरकार का उद्देश्य ऐसा खेल वातावरण तैयार करना है, जिससे मध्यप्रदेश के खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रदेश और देश का नाम रौशन करते रहें।

  • कॉमनवेल्थ गेम्स: 10 मिनट में भारत को दो गोल्ड, प्रीति-जैस्मिन ने जीती बॉक्सिंग फाइनल, अब तक मिले 7 गोल्ड

    कॉमनवेल्थ गेम्स: 10 मिनट में भारत को दो गोल्ड, प्रीति-जैस्मिन ने जीती बॉक्सिंग फाइनल, अब तक मिले 7 गोल्ड

    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय मुक्केबाजों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए महज 10 मिनट के अंतराल में दो स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिए। पहले प्रीति पवार ने महिला 54 किग्रा वर्ग का फाइनल जीतकर गोल्ड दिलाया, इसके तुरंत बाद जैस्मिन लांबोरिया ने महिला 57 किग्रा वर्ग के खिताबी मुकाबले में जीत दर्ज कर भारत की झोली में सातवां स्वर्ण पदक डाल दिया।

    जैस्मिन ने फाइनल में नॉर्दर्न आयरलैंड की मिकाएला वॉल्स को हराया, जबकि प्रीति पवार ने कनाडा की सवाना डोलमागो को शिकस्त देकर स्वर्ण पदक हासिल किया। इन दोनों जीतों के साथ भारत के कुल पदकों की संख्या 27 पहुंच गई, जिसमें 7 गोल्ड शामिल हैं। भारत फिलहाल पदक तालिका में छठे स्थान पर है।

    अब 8 और भारतीय मुक्केबाज गोल्ड की दौड़ में
    भारतीय बॉक्सिंग टीम का अभियान अभी जारी है। दिनभर में आठ भारतीय मुक्केबाज अपने-अपने फाइनल मुकाबलों में स्वर्ण पदक के लिए चुनौती पेश करेंगे। इनमें जदुमणि सिंह (55 किग्रा), साक्षी चौधरी (51 किग्रा), प्रिया घंघास (60 किग्रा), अरुंधति चौधरी (70 किग्रा), लवलीना बोरगोहेन (75 किग्रा), सचिन सिवाच (60 किग्रा), अंकुश पंघाल (80 किग्रा) और नरेंद्र बरवाल (90+ किग्रा) शामिल हैं।

    ट्रिपल जंप में भारत को दो और पदक
    एथलेटिक्स में भी भारत का प्रदर्शन दमदार रहा। प्रवीण चित्रावेल ने 16.58 मीटर की छलांग लगाकर रजत पदक जीता, जबकि सेल्वा प्रभु ने 16.52 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ कांस्य पदक अपने नाम किया। इस स्पर्धा का स्वर्ण जाम्बिया के जॉर्डन स्कॉट ने 16.72 मीटर की छलांग के साथ जीता।

    प्रीति और जैस्मिन का शानदार रिकॉर्ड
    हरियाणा की प्रीति पवार इससे पहले 2022 एशियन चैंपियनशिप और 2023 एशियन गेम्स में कांस्य पदक जीत चुकी हैं। वह पेरिस ओलिंपिक 2024 में भी भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। इसके अलावा उन्होंने 2026 एशियन चैंपियनशिप और 2025 वर्ल्ड बॉक्सिंग कप फाइनल में स्वर्ण पदक जीते हैं।

    वहीं जैस्मिन लांबोरिया, जो वर्तमान में 57 किग्रा वर्ग की विश्व नंबर-1 मुक्केबाज हैं, 2025 वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप और वर्ल्ड बॉक्सिंग कप फाइनल की भी स्वर्ण विजेता हैं। उन्होंने 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में कांस्य पदक जीता था और पेरिस ओलिंपिक 2024 में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया था।

    जूडो में उन्नति क्वार्टर फाइनल में
    जूडो की महिला 63 किग्रा स्पर्धा में उन्नति शर्मा ने राउंड ऑफ-16 में लामुलेला मागागुला को हराकर क्वार्टर फाइनल में प्रवेश कर लिया।

    आज 44 गोल्ड मेडल इवेंट्स
    शनिवार को कॉमनवेल्थ गेम्स में कुल 44 स्वर्ण पदक मुकाबले खेले जा रहे हैं। भारत के खिलाड़ी बॉक्सिंग, एथलेटिक्स, पैरा एथलेटिक्स, जूडो, ट्रैक साइक्लिंग और लॉन बॉल्स में भी पदक जीतने की चुनौती पेश कर रहे हैं।

    अन्य प्रमुख अपडेट
    – पैरा एथलेटिक्स की पुरुष 1500 मीटर T54 स्पर्धा में रमेश शनमुगम सातवें स्थान पर रहे।
    – महिला 10,000 मीटर रेस वॉक में भारत की रवीना गायकवाड़ को तीन रेड कार्ड मिलने के कारण अयोग्य (डिस्क्वालिफाई) घोषित कर दिया गया।
    – लॉन बॉल्स में भारतीय जोड़ी नवनीत सिंह और दिनेश कुमार का मुकाबला इंग्लैंड से होगा, जबकि नयनमोनी सैकिया महिला सिंगल्स में दक्षिण अफ्रीका की खिलाड़ी के खिलाफ उतरेंगी।

  • मेडल से चूकीं मार्टिना देवी, कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की उम्मीदों को लगा झटका

    मेडल से चूकीं मार्टिना देवी, कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की उम्मीदों को लगा झटका


    नई दिल्ली । कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय महिला वेटलिफ्टर मार्टिना देवी मैबाम ने शानदार संघर्ष तो किया, लेकिन पदक जीतने का सपना पूरा नहीं हो सका। महिला 86+ किलोग्राम भार वर्ग में उन्होंने कुल 245 किलोग्राम वजन उठाकर पांचवां स्थान हासिल किया। कांस्य पदक उनसे महज 5 किलोग्राम दूर रह गया। उनकी इस करीबी हार ने भारतीय खेल प्रेमियों को निराश जरूर किया, लेकिन उनके जुझारू प्रदर्शन ने सभी का दिल जीत लिया।

    ग्लासगो के एसईसी आर्माडिलो एरीना में आयोजित इस मुकाबले में मार्टिना की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। स्नैच स्पर्धा में उन्होंने पहले दो प्रयासों में 103 किलोग्राम वजन उठाने की कोशिश की, लेकिन दोनों बार असफल रहीं। लगातार दो असफल प्रयासों के बाद दबाव काफी बढ़ गया था। ऐसे में उन्होंने तीसरे प्रयास में वजन बढ़ाकर 105 किलोग्राम उठाया और सफलता हासिल की। यह लिफ्ट पूरी होते ही उनकी आंखों में खुशी और राहत के आंसू साफ दिखाई दिए।

    स्नैच के बाद क्लीन एंड जर्क में मार्टिना ने दमदार शुरुआत करते हुए पहले प्रयास में 140 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाया। इसके बाद उन्होंने 144 और 146 किलोग्राम का प्रयास किया, लेकिन दोनों कोशिशें सफल नहीं हो सकीं। इस तरह उनका कुल स्कोर 245 किलोग्राम रहा, जो उन्हें पांचवें स्थान तक ही पहुंचा सका।

    इस स्पर्धा में मेजबान इंग्लैंड की एमिली कैंपबेल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 278 किलोग्राम वजन उठाकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उन्होंने स्नैच में 115 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 163 किलोग्राम का सफल प्रयास कर कॉमनवेल्थ गेम्स का नया रिकॉर्ड भी बनाया। मलेशिया की सिती अकीलाह फरहाना ड्रामन ने 253 किलोग्राम के साथ रजत पदक जीता, जबकि कनाडा की एटा मे लव ने कुल 250 किलोग्राम वजन उठाकर कांस्य पदक अपने नाम किया।

    मार्टिना यदि अपने दूसरे या तीसरे क्लीन एंड जर्क प्रयास में 144 किलोग्राम वजन उठाने में सफल हो जातीं तो उनका कुल स्कोर 249 किलोग्राम हो जाता और वह पदक की दौड़ में मजबूती से बनी रहतीं। वहीं 146 किलोग्राम की सफल लिफ्ट उन्हें सीधे कांस्य पदक तक पहुंचा सकती थी। हालांकि खेल में छोटे अंतर ही बड़ा फैसला करते हैं और इस बार किस्मत उनका साथ नहीं दे सकी।

    इसके बावजूद मार्टिना का प्रदर्शन भारतीय वेटलिफ्टिंग के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। उन्होंने दबाव की स्थिति में वापसी करते हुए अपनी मानसिक मजबूती का परिचय दिया और अंत तक पदक की दौड़ में बनी रहीं। आने वाले अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में उनसे और बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है।

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का अभियान लगातार मजबूत बना हुआ है। अब तक भारतीय दल 15 पदक जीत चुका है, जिनमें 3 स्वर्ण, 9 रजत और 3 कांस्य पदक शामिल हैं। मार्टिना भले ही इस बार पदक से चूक गईं, लेकिन उनका संघर्ष और जज्बा भविष्य के लिए भारतीय वेटलिफ्टिंग को नई उम्मीद जरूर देता है।

  • CWG 2026: शर्मिला धनखड़ ने पैरा शॉट पुट में स्वर्ण पदक जीतकर रचा इतिहास…

    CWG 2026: शर्मिला धनखड़ ने पैरा शॉट पुट में स्वर्ण पदक जीतकर रचा इतिहास…


    नई दिल्ली।
    भारत (India) की शर्मिला धनखड़ (Sharmila Dhankhar) ने सोमवार को इतिहास रचते हुए कॉमनवेल्थ गेम्स (Commonwealth Games) में देश के लिए पहला पैरा एथलेटिक्स गोल्ड मेडल (Para-athletics gold medal) जीत लिया. उन्होंने ग्लासगो में महिलाओं की शॉट पुट F57 स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया. शर्मिला ने 9.81 मीटर का सीजन का सर्वश्रेष्ठ थ्रो किया।

    शर्मिला के गोल्ड मेडल के साथ ही भारत का पैरा एथलेटिक्स में कॉमनवेल्थ गेम्स के पदक का 20 साल का इंतजार भी खत्म हो गया. शर्मिला के गोल्ड मेडल ने भारत को इन खेलों में दूसरा गोल्ड दिलाया है।

    इसी स्पर्धा में भारत की एक अन्य खिलाड़ी शिल्पा शायला ने ब्रॉन्ज मेडल जीता. हालांकि, शिल्पा का पदक बेहद नाटकीय घटनाक्रम के बाद पक्का हुआ. शिल्पा ने 7.26 मीटर का अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था और शुरुआत में वह चौथे स्थान पर रही थीं. वहीं नाइजीरिया की यूचेरिया इयियाजी को शुरुआत में ब्रॉन्ज मेडल दिया गया था।

    हालांकि, भारत की ओर से की गई आपत्ति के बाद आधिकारिक समीक्षा हुई और नाइजीरियाई खिलाड़ी के एकमात्र वैध थ्रो को फाउल करार दिया गया. इसके बाद शिल्पा को चौथे स्थान से तीसरे स्थान पर अपग्रेड करते हुए ब्रॉन्ज मेडल दिया गया.

    मेडल मिलने के बाद शिल्पा भावुक हो गईं और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े. उन्होंने शर्मिला के साथ मिलकर इस ऐतिहासिक उपलब्धि का जश्न मनाया. हालांकि, नाइजीरिया की ओर से इस फैसले के खिलाफ काउंटर प्रोटेस्ट किए जाने की संभावना भी जताई जा रही है.

    बता दें कि F57 वर्गीकरण उन पैरा एथलीटों के लिए है, जिनके निचले अंगों में दिव्यांगता, अंगों की कमी या मांसपेशियों की ताकत में कमी होती है. शर्मिला को दो साल की उम्र में बाएं पैर में पोलियो हो गया था. उन्होंने इसी साल फाजा इंटरनेशनल पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी गोल्ड मेडल जीता था. वह 2022 के बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में भी हिस्सा ले चुकी हैं, जहां वह चौथे स्थान पर रही थीं.


    वल्लूरी अजय बाबू ने वेटलिफ्टिंग में जीता सिल्वर

    भारत के पदक अभियान में वल्लूरी अजय बाबू ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए पुरुषों की 79 KG वेटलिफ्टिंग स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीता. उन्होंने कुल 330 किलो ग्राम वजन उठाया और गोल्ड मेडल से महज एक किलोग्राम से चूक गए. मलेशिया के एरी हिदायत मुहम्मद ने 331 किलो ग्राम के कुल वजन के साथ स्वर्ण पदक जीता.

    वल्लूरी अजय बाबू की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने अपने पिता श्रीनिवास राव की उपलब्धि को एक कदम आगे बढ़ाया है. उनके पिता ने 2010 दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों में पुरुषों की 56 KG वेटलिफ्टिंग स्पर्धा में ब्रॉन्ज मेडल जीता था. अब 16 साल बाद उनके बेटे ने सिल्वर मेडल जीतकर परिवार की पदक परंपरा को आगे बढ़ाया है.

    वल्लूरी गोल्ड मेडल के बेहद करीब पहुंचे, लेकिन एरी हिदायत मुहम्मद से सिर्फ एक किलोग्राम पीछे रह गए. मुकाबला आखिरी लिफ्ट तक बेहद रोमांचक रहा और भारतीय खिलाड़ी को रजत पदक से संतोष करना पड़ा. इसी के साथ भारत की कुल पदक संख्या अब 10 हो गई है, जिसमें 2 गोल्ड शामिल हैं।

  • कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत को दूसरी बड़ी सफलता, ऋषिकांत सिंह ने रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन के साथ जीता सिल्वर मेडल

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत को दूसरी बड़ी सफलता, ऋषिकांत सिंह ने रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन के साथ जीता सिल्वर मेडल


    नई दिल्ली । कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। रविवार को वेटलिफ्टिंग में भारत को एक और बड़ी सफलता मिली जब युवा वेटलिफ्टर ऋषिकांत सिंह चनंबम ने पुरुषों की 60 किलोग्राम स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीतकर देश का गौरव बढ़ाया। ऋषिकांत ने कुल 264 किलोग्राम वजन उठाते हुए पोडियम पर दूसरा स्थान हासिल किया। उनके शानदार प्रदर्शन से भारत की पदक तालिका में दूसरा पदक जुड़ गया और खेल प्रेमियों को एक और जश्न मनाने का मौका मिला।

    प्रतियोगिता के स्नैच राउंड में ऋषिकांत का प्रदर्शन बेहद शानदार रहा। उन्होंने अपने पहले प्रयास में 116 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाया। इसके बाद दूसरे प्रयास में 119 किलोग्राम और तीसरे प्रयास में 121 किलोग्राम वजन उठाकर सभी प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़ दिया। 121 किलोग्राम का सफल प्रयास उनके लिए ऐतिहासिक साबित हुआ क्योंकि इसके साथ उन्होंने स्नैच वर्ग में नया कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। इस प्रदर्शन ने उन्हें गोल्ड मेडल की मजबूत दावेदारी में ला खड़ा किया।

    क्लीन एंड जर्क राउंड में भी ऋषिकांत ने आत्मविश्वास के साथ शुरुआत की और पहले ही प्रयास में 143 किलोग्राम वजन उठाकर अपनी स्थिति मजबूत कर ली। इसके बाद उन्होंने 148 किलोग्राम वजन उठाने का प्रयास किया लेकिन सफलता नहीं मिली। इसी दौरान मलेशिया के मोहम्मद अनिक ने 149 किलोग्राम वजन उठाकर बढ़त हासिल कर ली।

    गोल्ड मेडल जीतने की उम्मीद बनाए रखने के लिए ऋषिकांत ने अंतिम प्रयास में 151 किलोग्राम वजन उठाने की चुनौती स्वीकार की। उन्होंने वजन को कंधों तक सफलतापूर्वक पहुंचा भी दिया लेकिन अंतिम जर्क पूरा नहीं कर सके। इसी के साथ उनका कुल स्कोर 264 किलोग्राम पर रुक गया और उन्हें सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा।

    मलेशिया के मोहम्मद अनिक ने कुल 273 किलोग्राम वजन उठाकर नया कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड बनाया और स्वर्ण पदक अपने नाम किया। वहीं केन्या के जोशुआ अमूंगा मबोया ने 260 किलोग्राम वजन उठाकर कांस्य पदक हासिल किया।

    ऋषिकांत सिंह का यह प्रदर्शन भारत के लिए बेहद अहम रहा। उन्होंने न केवल सिल्वर मेडल जीतकर देश का मान बढ़ाया बल्कि स्नैच में गेम्स रिकॉर्ड बनाकर अपनी प्रतिभा का भी शानदार परिचय दिया। शुरुआती दिनों में ही भारतीय खिलाड़ियों के दमदार प्रदर्शन से कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के पदकों की उम्मीदें और मजबूत हो गई हैं।

    फिलहाल भारत के खाते में एक सिल्वर और एक ब्रॉन्ज मेडल दर्ज हैं और देश पदक तालिका में 10वें स्थान पर है। ऑस्ट्रेलिया शीर्ष स्थान पर बना हुआ है जबकि इंग्लैंड और नाइजीरिया क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। आने वाले मुकाबलों में भारतीय खिलाड़ियों से और पदकों की उम्मीद की जा रही है।

  • कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का दमदार पंच, जादुमनी ने एकतरफा मुकाबले में दर्ज की शानदार जीत

    कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का दमदार पंच, जादुमनी ने एकतरफा मुकाबले में दर्ज की शानदार जीत


    नई दिल्ली। ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय बॉक्सिंग दल ने शानदार आगाज किया है। पुरुषों के 55 किलोग्राम वर्ग में भारत के युवा मुक्केबाज जादुमनी सिंह मंडेन्गबाम ने अपने पहले ही मुकाबले में दमदार प्रदर्शन करते हुए मेजबान स्कॉटलैंड के एरन कलन को 5-0 से करारी शिकस्त दी। इस प्रभावशाली जीत के साथ जादुमनी ने राउंड ऑफ 16 में जगह पक्की कर ली और पदक की ओर एक मजबूत कदम बढ़ा दिया।

    एसईसी हॉल में खेले गए इस मुकाबले में शुरुआत से ही जादुमनी पूरी तरह लय में नजर आए। उन्होंने तेज रफ्तार, सटीक पंच और मजबूत डिफेंस का शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने प्रतिद्वंद्वी को कोई मौका नहीं दिया। पहले राउंड से लेकर आखिरी राउंड तक भारतीय मुक्केबाज का दबदबा साफ दिखाई दिया। घरेलू दर्शकों के जोरदार समर्थन के बावजूद स्कॉटलैंड के एरन कलन भारतीय खिलाड़ी की आक्रामक रणनीति के सामने बेबस नजर आए।

    मुकाबले के दौरान जादुमनी ने बेहतरीन फुटवर्क और सटीक काउंटर अटैक का प्रदर्शन किया। उनके लगातार सटीक पंचों ने विपक्षी खिलाड़ी को पूरे मुकाबले में दबाव में रखा। यही वजह रही कि पांचों जजों ने एकमत से जादुमनी को विजेता घोषित किया। सभी जजों ने प्रत्येक राउंड में भारतीय बॉक्सर के पक्ष में 30-27 का समान स्कोर दिया, जिससे उनकी एकतरफा जीत की तस्वीर साफ हो गई।

    इस शानदार जीत के बाद अब जादुमनी का अगला मुकाबला 26 जुलाई को पाकिस्तान के मुक्केबाज रहमान से होगा। दोनों देशों के खिलाड़ियों के बीच होने वाला यह मुकाबला काफी रोमांचक माना जा रहा है। यदि जादुमनी इस चुनौती को भी पार कर लेते हैं तो वह क्वार्टर फाइनल में पहुंच जाएंगे और पदक की उम्मीदें और मजबूत हो जाएंगी। भारतीय दल को उनसे इस प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन की पूरी उम्मीद है।

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय बॉक्सिंग टीम इस बार अधिक से अधिक पदक जीतने के लक्ष्य के साथ उतरी है। हालांकि इस संस्करण में बैडमिंटन, हॉकी, क्रिकेट, शूटिंग और कुश्ती जैसे कई प्रमुख खेल शामिल नहीं किए गए हैं, जिनमें भारत पारंपरिक रूप से मजबूत रहा है। ऐसे में बॉक्सिंग से भारतीय दल को बड़ी उम्मीदें हैं।

    इससे पहले भारत की स्टार मुक्केबाज और ओलंपिक कांस्य पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन बिना मुकाबला खेले ही सेमीफाइनल में पहुंच चुकी हैं। पहले दौर में बाय मिलने के कारण उनका कांस्य पदक पहले ही सुनिश्चित हो गया है। अब वह 31 जुलाई को अपना पहला मुकाबला खेलेंगी। यदि लवलीना जीत दर्ज करती हैं तो उनका कम से कम रजत पदक पक्का हो जाएगा।

    जादुमनी की दमदार शुरुआत ने भारतीय बॉक्सिंग टीम का आत्मविश्वास बढ़ा दिया है। अब सभी की निगाहें उनके अगले मुकाबले पर टिकी हैं, जहां पाकिस्तान के खिलाफ जीत दर्ज कर वह पदक की दौड़ में खुद को और मजबूती से स्थापित करना चाहेंगे।