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  • CWG 2026: भारत ने 10वें दिन रचा इतिहास, पदक विजेताओं को पीएम मोदी ने दी शुभकामनाएं

    CWG 2026: भारत ने 10वें दिन रचा इतिहास, पदक विजेताओं को पीएम मोदी ने दी शुभकामनाएं


    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का दसवां दिन भारतीय खेल इतिहास के सबसे यादगार दिनों में शामिल हो गया। ग्लासगो में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए एक ही दिन में 16 पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया। इनमें 7 स्वर्ण पदक शामिल रहे जिसने भारत की पदक तालिका को और मजबूत कर दिया। मुक्केबाजी से लेकर पैरा एथलेटिक्स तक भारतीय खिलाड़ियों ने हर मंच पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। खिलाड़ियों की इस शानदार उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी पदक विजेताओं को बधाई देते हुए उनके प्रदर्शन की खुलकर सराहना की और इसे देश के युवाओं के लिए प्रेरणादायक बताया।

    दसवें दिन भारतीय मुक्केबाजों का दबदबा सबसे ज्यादा देखने को मिला। भारत ने बॉक्सिंग में कुल 10 पदक अपने नाम किए और कई खिलाड़ियों ने स्वर्ण जीतकर तिरंगा ऊंचा लहराया। पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में सचिन सिवाच ने शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि उनकी यह सफलता आने वाली पीढ़ी के मुक्केबाजों को प्रेरित करेगी और वे भविष्य में भी देश का नाम रोशन करते रहेंगे।

    महिला मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन ने 75 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीतकर एक बार फिर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। प्रधानमंत्री ने उनके संघर्ष और निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि उनका समर्पण देशभर के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

    महिलाओं के 70 किलोग्राम वर्ग में अरुंधति चौधरी ने स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। उनकी तकनीक आत्मविश्वास और आक्रामक खेल की प्रधानमंत्री ने खुलकर तारीफ की। वहीं 60 किलोग्राम वर्ग में प्रिया घांगस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सफलता उनके कौशल और मानसिक मजबूती का प्रमाण है।

    भारत की एक और महिला मुक्केबाज साक्षी ने 51 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर देश को गौरवान्वित किया। प्रधानमंत्री ने उन्हें निर्णायक जीत के लिए बधाई देते हुए भविष्य में और बड़ी सफलताओं की शुभकामनाएं दीं। पुरुषों के 55 किलोग्राम वर्ग में जदुमणि सिंह मंडेंगबाम ने रजत पदक जीतकर भारत की झोली में एक और महत्वपूर्ण पदक जोड़ा। प्रधानमंत्री ने उनकी दृढ़ता अनुशासन और संघर्ष की सराहना की।

    पैरा एथलेटिक्स में भी भारत ने शानदार प्रदर्शन किया। पुरुषों के शॉट पुट एफ57 वर्ग में सोमन राणा ने स्वर्ण पदक जीतकर नया इतिहास रच दिया। यह इस स्पर्धा में भारत का पहला कॉमनवेल्थ स्वर्ण पदक है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पूरी प्रतियोगिता के दौरान उनका फोकस और अटूट संकल्प साफ दिखाई दिया। इसी स्पर्धा में शुभम जुयाल ने रजत पदक जीतकर भारत की सफलता में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ा। प्रधानमंत्री ने उनकी तकनीक और समर्पण की प्रशंसा करते हुए भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

    भारतीय खिलाड़ियों के इस शानदार प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया कि देश अब हर खेल में वैश्विक स्तर पर मजबूती से अपनी पहचान बना रहा है। एक ही दिन में 16 पदकों का ऐतिहासिक प्रदर्शन भारतीय खेलों के बढ़ते स्तर और खिलाड़ियों की कड़ी मेहनत का परिणाम है। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहा है और खिलाड़ियों की यह सफलता देशवासियों के लिए गर्व का विषय बन गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बधाई ने खिलाड़ियों का उत्साह और बढ़ाया है तथा पूरे देश में इस ऐतिहासिक उपलब्धि का जश्न मनाया जा रहा है।

  • कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में तेजस्विन शंकर का ऐतिहासिक कारनामा, डेकाथलॉन में भारत को मिला पहला पदक

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में तेजस्विन शंकर का ऐतिहासिक कारनामा, डेकाथलॉन में भारत को मिला पहला पदक


    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के स्टार एथलीट तेजस्विन शंकर ने ऐसा इतिहास रचा है, जिसने भारतीय एथलेटिक्स को नई पहचान दिला दी है। पुरुषों की डेकाथलॉन स्पर्धा में 7976 अंक हासिल कर उन्होंने कांस्य पदक अपने नाम किया और राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में इस कठिन स्पर्धा में पदक जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए। यह उपलब्धि इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि डेकाथलॉन को ट्रैक एंड फील्ड की सबसे चुनौतीपूर्ण प्रतियोगिताओं में गिना जाता है, जिसमें खिलाड़ी की ताकत, गति, तकनीक, सहनशक्ति और मानसिक मजबूती सभी की एक साथ परीक्षा होती है।

    इस स्पर्धा का स्वर्ण पदक ग्रेनाडा के लिंडन विक्टर ने 8096 अंकों के साथ जीता, जबकि कनाडा के अनुभवी एथलीट डेमियन वार्नर 8036 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहे। तेजस्विन शंकर ने दोनों दिग्गज खिलाड़ियों के बीच शानदार प्रदर्शन करते हुए तीसरा स्थान हासिल किया और भारत के लिए ऐतिहासिक कांस्य पदक सुनिश्चित किया।

    तेजस्विन की शुरुआत 100 मीटर दौड़ में सातवें स्थान से हुई थी, लेकिन इसके बाद उन्होंने शानदार वापसी की। लंबी कूद में दूसरे स्थान पर रहते हुए उन्होंने अंकतालिका में सुधार किया। हाई जंप में 2.15 मीटर की शानदार छलांग लगाकर पहला स्थान हासिल किया और कुल रैंकिंग में दूसरे स्थान पर पहुंच गए। पहले दिन के अंत तक उन्होंने खुद को पदक की दौड़ में मजबूती से बनाए रखा।

    दूसरे दिन भी तेजस्विन ने दमदार प्रदर्शन जारी रखा। 110 मीटर बाधा दौड़ और डिस्कस थ्रो में उन्होंने दूसरा स्थान हासिल किया। हालांकि पोल वॉल्ट और भाला फेंक में उन्हें उम्मीद के मुताबिक अंक नहीं मिले, जिससे वह तीसरे स्थान पर खिसक गए। इसके बावजूद अंतिम इवेंट 1500 मीटर दौड़ में उन्होंने संयम बनाए रखा और कुल 7976 अंक के साथ कांस्य पदक जीतकर भारतीय खेल इतिहास में अपना नाम दर्ज करा दिया।

    डेकाथलॉन को एथलेटिक्स की सबसे कठिन स्पर्धाओं में से एक माना जाता है। यह प्रतियोगिता दो दिनों तक चलती है और इसमें कुल 10 अलग-अलग इवेंट शामिल होते हैं। पहले दिन खिलाड़ियों को 100 मीटर दौड़, लंबी कूद, शॉटपुट, हाई जंप और 400 मीटर दौड़ में हिस्सा लेना होता है। दूसरे दिन 110 मीटर बाधा दौड़, डिस्कस थ्रो, पोल वॉल्ट, भाला फेंक और 1500 मीटर दौड़ आयोजित की जाती है। हर स्पर्धा में प्रदर्शन के आधार पर अंक दिए जाते हैं और अंत में सभी 10 इवेंट्स के अंकों को जोड़कर अंतिम परिणाम तय किया जाता है।

    समय आधारित प्रतियोगिताओं जैसे 100 मीटर, 400 मीटर और 1500 मीटर में कम समय लेने वाले खिलाड़ी को अधिक अंक मिलते हैं। वहीं लंबी कूद, हाई जंप, पोल वॉल्ट, शॉटपुट, डिस्कस और भाला फेंक जैसी फील्ड स्पर्धाओं में जितनी अधिक दूरी या ऊंचाई हासिल होती है, उतने अधिक अंक दिए जाते हैं। इसके लिए विश्व एथलेटिक्स द्वारा निर्धारित आधिकारिक स्कोरिंग प्रणाली लागू होती है।

    तेजस्विन शंकर का यह कांस्य पदक केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं बल्कि भारतीय एथलेटिक्स के लिए मील का पत्थर है। लगातार दो दिनों तक दस अलग-अलग स्पर्धाओं में उच्च स्तर का प्रदर्शन करना किसी भी खिलाड़ी के लिए आसान नहीं होता। ऐसे में इस कठिन प्रतियोगिता में भारत का पहला पदक जीतकर तेजस्विन ने साबित कर दिया कि भारतीय खिलाड़ी अब बहु-इवेंट एथलेटिक्स में भी दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को चुनौती देने की क्षमता रखते हैं। उनकी यह ऐतिहासिक सफलता आने वाली पीढ़ी के एथलीटों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी और भारतीय एथलेटिक्स के भविष्य को नई दिशा देगी।

  • ग्लासगो में भारत का तिरंगा बुलंद गोल्ड सिल्वर की बरसात दिलीप गावित और श्रीशंकर चमके बॉक्सिंग में भी बढ़ीं पदकों की उम्मीदें

    ग्लासगो में भारत का तिरंगा बुलंद गोल्ड सिल्वर की बरसात दिलीप गावित और श्रीशंकर चमके बॉक्सिंग में भी बढ़ीं पदकों की उम्मीदें

    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। ग्लासगो में आयोजित खेलों के सातवें दिन भारत ने एथलेटिक्स और पैरा एथलेटिक्स में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए देश का गौरव बढ़ाया। पैरा एथलीट दिलीप महादु गावित ने पुरुषों की 100 मीटर टी47 स्पर्धा में शानदार दौड़ लगाते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया। उन्होंने 10.71 सेकंड का समय निकालते हुए नया गेम्स रिकॉर्ड भी बनाया। इस ऐतिहासिक जीत के साथ वह कॉमनवेल्थ गेम्स की पैरा ट्रैक स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष एथलीट बन गए। वहीं उनके साथी मोहम्मद बासिल ने 10.83 सेकंड के साथ सिल्वर जीतकर भारत को शानदार वन टू फिनिश दिलाई।

    भारत की सफलता का सिलसिला यहीं नहीं रुका। स्टार लॉन्ग जंपर मुरली श्रीशंकर ने पुरुषों की लंबी कूद स्पर्धा में 8.09 मीटर की सर्वश्रेष्ठ छलांग लगाकर सिल्वर मेडल अपने नाम किया। यह कॉमनवेल्थ गेम्स में उनका लगातार दूसरा सिल्वर मेडल है। इससे पहले उन्होंने बर्मिंघम 2022 में भी रजत पदक जीता था। फाइनल मुकाबले में जमैका के ताजे गेल ने 8.15 मीटर की छलांग लगाकर गोल्ड हासिल किया जबकि स्कॉटलैंड के स्टीफन मैकेंजी ने ब्रॉन्ज जीता। श्रीशंकर ने पूरे मुकाबले में शानदार निरंतरता दिखाई और अंतिम प्रयास तक पदक की दौड़ में मजबूती से बने रहे।

    एथलेटिक्स के अलावा भारतीय मुक्केबाजों ने भी शानदार प्रदर्शन किया। भारतीय बॉक्सिंग दल के सभी 10 खिलाड़ियों ने अपने अपने मुकाबले जीतकर सेमीफाइनल में जगह बना ली है। कॉमनवेल्थ गेम्स के नियमों के अनुसार सेमीफाइनल में पहुंचने वाला प्रत्येक खिलाड़ी कम से कम कांस्य पदक का दावेदार बन जाता है। इस तरह भारत ने मुक्केबाजी में कम से कम 10 पदक पहले ही सुनिश्चित कर लिए हैं जो बर्मिंघम 2022 के प्रदर्शन से भी बेहतर उपलब्धि मानी जा रही है।

    इन शानदार प्रदर्शनों के बाद भारत की पदक तालिका भी मजबूत हुई है। देश के खाते में अब 15 पदक हो चुके हैं जिनमें 3 स्वर्ण 9 रजत और 3 कांस्य पदक शामिल हैं। एथलेटिक्स और पैरा एथलेटिक्स में खिलाड़ियों की निरंतर सफलता ने भारतीय दल का मनोबल और बढ़ा दिया है।

    दिलीप गावित की ऐतिहासिक जीत और श्रीशंकर की शानदार छलांग ने यह साबित कर दिया कि भारतीय एथलेटिक्स लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। वहीं मुक्केबाजों का दमदार प्रदर्शन आने वाले दिनों में भारत के पदकों की संख्या और बढ़ाने की उम्मीद जगा रहा है। ग्लासगो से लगातार मिल रही इन सफलताओं ने भारतीय खेल प्रेमियों का उत्साह चरम पर पहुंचा दिया है और अब सभी की नजर आगामी फाइनल मुकाबलों पर टिकी हुई है जहां भारत के पास कई और पदक जीतने का सुनहरा अवसर होगा।