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  • साइबर ठगी के पैसों से खरीदा सोना, उज्जैन में पकड़ा गया गिरोह: MBA पास युवकों का नेटवर्क बेनकाब, BJP नेता का बेटा निकला मास्टरमाइंड

    साइबर ठगी के पैसों से खरीदा सोना, उज्जैन में पकड़ा गया गिरोह: MBA पास युवकों का नेटवर्क बेनकाब, BJP नेता का बेटा निकला मास्टरमाइंड


    मध्यप्रदेश । साइबर अपराधियों द्वारा ठगी के पैसों को वैध बनाने के लिए अपनाए जा रहे नए तरीकों का एक चौंकाने वाला मामला उज्जैन में सामने आया है। उज्जैन पुलिस ने ऐसे गिरोह का खुलासा किया है, जो साइबर ठगी से हासिल रकम को सोने में निवेश कर उसे नकदी में बदलने की साजिश रच रहा था। मामले में नर्मदापुरम के तीन युवकों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें मुख्य आरोपी एक स्थानीय भाजपा नेता का बेटा बताया जा रहा है।

    पुलिस जांच के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी अनिमेष वर्मा, कशिश बढ़ानी और राहुल गुप्ता आपस में मित्र हैं और तीनों उच्च शिक्षित हैं। आरोपियों ने फर्जी आधार कार्ड और अन्य पहचान पत्रों का इस्तेमाल कर उज्जैन के विभिन्न ज्वेलरी शोरूम से करीब 4.65 लाख रुपए का सोना खरीदा। इन खरीदारी का भुगतान साइबर ठगी से प्राप्त रकम के जरिए क्यूआर कोड स्कैन कर किया गया था।

    मामले का खुलासा तब हुआ जब फ्रीगंज स्थित एक ज्वेलर्स के बैंक खाते को संदिग्ध ट्रांजेक्शन के चलते होल्ड कर दिया गया। शोरूम संचालक ने इसकी सूचना माधवनगर थाने में दी। पुलिस ने तत्काल जांच शुरू की और सीसीटीवी फुटेज खंगाले। फुटेज में खरीदारी करने आए युवक के मोबाइल पर आए एक कॉल का नंबर स्क्रीन पर दिखाई दे गया। यही नंबर जांच का सबसे अहम सुराग साबित हुआ।

    माधवनगर थाना पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण और लोकेशन ट्रैकिंग की मदद से महाकाल क्षेत्र के एक होटल में दबिश देकर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में सामने आया कि मुख्य आरोपी अनिमेष वर्मा कुछ महीने पहले क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज प्लेटफॉर्म के माध्यम से टेलीग्राम पर सक्रिय साइबर ठगों के संपर्क में आया था। ठगों ने उसे मोटे कमीशन और त्वरित मुनाफे का लालच दिया था।

    आरोपियों ने पिछले दस दिनों में उज्जैन के कई ज्वेलरी शोरूम से सोना खरीदा। दुकानदारों के क्यूआर कोड दिल्ली में बैठे साइबर ठगों को भेजे जाते थे। इसके बाद राजस्थान, पंजाब और उत्तर प्रदेश में साइबर ठगी के शिकार लोगों के बैंक खातों से सीधे भुगतान किया जाता था। सोना खरीदने के बाद उसे बेचकर रकम को नकदी में बदलने की योजना थी।

    उज्जैन एसपी प्रदीप शर्मा के अनुसार, प्रारंभिक जांच में राजस्थान, पंजाब और उत्तर प्रदेश के पीड़ितों के खातों से लाखों रुपए के भुगतान की पुष्टि हुई है। पुलिस का मानना है कि यह एक बड़े अंतरराज्यीय और संभवतः अंतरराष्ट्रीय साइबर सिंडिकेट का हिस्सा है, जो ठगी के पैसों को पेट्रोल पंपों और सोने जैसी सुरक्षित संपत्तियों में निवेश कर वैध बनाने का प्रयास करता है।

    फिलहाल पुलिस ने आरोपियों को न्यायालय में पेश कर 21 जून तक रिमांड पर लिया है। मामले की गहराई से जांच की जा रही है और नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचने के लिए एक विशेष टीम दिल्ली भेजी जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ में साइबर अपराध के इस संगठित नेटवर्क से जुड़े कई और अहम खुलासे हो सकते हैं।

  • पुणे में ऑनलाइन ट्रेडिंग घोटाले में वरिष्ठ डॉक्टर ने गंवाई 12 करोड़ रुपये से अधिक की पूंजी

    पुणे में ऑनलाइन ट्रेडिंग घोटाले में वरिष्ठ डॉक्टर ने गंवाई 12 करोड़ रुपये से अधिक की पूंजी

    नई दिल्ली: पुणे में एक सनसनीखेज ऑनलाइन ट्रेडिंग घोटाले का मामला सामने आया है, जिसमें 75 वर्षीय एक वरिष्ठ डॉक्टर ने 12 करोड़ रुपये से अधिक की अपनी जमा पूंजी गंवा दी। मामला जनवरी के आखिरी सप्ताह से शुरू हुआ, जब डॉक्टर को एक अननोन नंबर से मैसेज आया, जिसमें कई शेयरों की सूची और निवेश पर भारी मुनाफे का दावा किया गया। लिंक पर क्लिक करते ही डॉक्टर को एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा गया, जहां धोखेबाजों ने खुद को एक ग्लोबल फाइनेंसियल मैनेजमेंट फर्म के सीनियर अधिकारी के रूप में प्रस्तुत किया।

    ग्रुप में आरोपी सदस्य निवेश के दौरान होने वाले मुनाफे की झूठी जानकारी साझा करते थे, जिससे डॉक्टर का भरोसा जीतना आसान हो गया। डॉक्टर को एक फर्जी ट्रेडिंग एप्लिकेशन पर भेजा गया, जिसका नाम एक अंतरराष्ट्रीय कंपनी के नाम से मिलता जुलता था। इसके माध्यम से जालसाजों ने डॉक्टर से बैंक अकाउंट और अन्य संवेदनशील जानकारी हासिल की। इसके बाद उन्हें कई बैंक खातों में निवेश के नाम पर धन ट्रांसफर करने के लिए कहा गया।

    पीड़ित डॉक्टर ने 7 मार्च से 18 मार्च के बीच लगभग 12.3 करोड़ रुपये फर्जी प्लेटफॉर्म पर निवेश किए। इस दौरान निवेश पर मनगढ़ंत मुनाफे का प्रदर्शन कर डॉक्टर को और धन निवेश करने के लिए मजबूर किया गया। जब डॉक्टर ने और पैसा लगाने से इनकार किया, तो आरोपियों ने उनके खिलाफ संपत्ति जब्त करने की धमकी दी। इस प्रक्रिया के दौरान डॉक्टर की सभी जमा पूंजी को जालसाजों ने अपने नियंत्रण में ले लिया।

    घोटाले का यह तरीका अत्यंत सुनियोजित था, जिसमें व्हाट्सएप ग्रुप और फर्जी एप्लिकेशन का प्रयोग कर पीड़ित को लगातार प्रभावित किया गया। आरोपियों ने निवेश पर झूठे लाभ दिखाकर डॉक्टर को विश्वास में लिया और अपनी संपत्ति गंवाने के लिए मजबूर किया। यह मामला ऑनलाइन निवेश में बढ़ती धोखाधड़ी और साइबर अपराध की गंभीरता को उजागर करता है।

    पुलिस और साइबर क्राइम विभाग ने अब इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में सावधानी और विश्वसनीय प्लेटफॉर्म पर ही निवेश करना आवश्यक है। डॉक्टर की उम्र और अनुभव को देखते हुए यह घटना निवेशकों के लिए चेतावनी का विषय है।