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  • बीटेक की फीस के लिए जोड़ी मेहनत की कमाई साइबर ठगों ने उड़ाई, हेल्पलाइन और कार्रवाई पर छात्र ने उठाए सवाल

    बीटेक की फीस के लिए जोड़ी मेहनत की कमाई साइबर ठगों ने उड़ाई, हेल्पलाइन और कार्रवाई पर छात्र ने उठाए सवाल


    मध्य प्रदेश के इंदौर में साइबर ठगी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने एक छात्र की उच्च शिक्षा की तैयारी को गंभीर झटका पहुंचाया है। बीटेक की फीस जमा करने के लिए महीनों तक मेहनत और ओवरटाइम कर बचाए गए 48 हजार रुपये कुछ ही मिनटों में साइबर अपराधियों ने बैंक खाते से निकाल लिए। घटना के बाद पीड़ित ने पुलिस और साइबर हेल्पलाइन से मदद की गुहार लगाई, लेकिन समय पर राहत नहीं मिलने का आरोप लगाया है। फिलहाल पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

    जानकारी के अनुसार, अशोकनगर निवासी केशव सैन इंदौर में एक निजी कंपनी में हेल्पर के रूप में कार्य करते हैं। वह नौकरी के साथ-साथ बीटेक की पढ़ाई कर रहे हैं और आगामी शैक्षणिक सत्र की फीस जमा करने के लिए लगातार अतिरिक्त समय तक काम कर पैसे बचा रहे थे। उनके अनुसार, खाते में जमा पूरी राशि उनकी शिक्षा और भविष्य की योजनाओं के लिए रखी गई थी।

    पीड़ित ने बताया कि अचानक उनके मोबाइल पर बैंक खाते से लगातार ऑनलाइन लेनदेन के संदेश आने लगे। कुछ ही मिनटों के भीतर खाते से कुल 48 हजार रुपये निकल गए। उनका दावा है कि राशि अमेज़न पे के माध्यम से अलग-अलग ट्रांजैक्शन में स्थानांतरित की गई। जब तक वह स्थिति को समझ पाते, खाते की पूरी जमा पूंजी समाप्त हो चुकी थी।

    घटना के तुरंत बाद छात्र ने राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क किया। पीड़ित का आरोप है कि तत्काल लेनदेन रोकने या तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने के बजाय उन्हें नजदीकी पुलिस थाने जाने की सलाह दी गई। इसके बाद वह इंदौर क्राइम ब्रांच पहुंचे, जहां भी उन्हें तत्काल समाधान नहीं मिलने का दावा किया गया। इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।

    पीड़ित का कहना है कि यदि शुरुआती स्तर पर त्वरित कार्रवाई होती तो संभवतः राशि को रोका या रिकवर किया जा सकता था। अब फीस जमा करने की समयसीमा नजदीक होने से उनकी पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच और जल्द से जल्द राशि वापस दिलाने की मांग की है।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार, शिकायत प्राप्त होने के बाद साइबर ठगी से जुड़े तकनीकी पहलुओं की जांच की जा रही है। बैंक लेनदेन, डिजिटल रिकॉर्ड और संबंधित खातों की जानकारी जुटाई जा रही है ताकि रकम के प्रवाह का पता लगाया जा सके और जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सके।

    साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि ऑनलाइन भुगतान सेवाओं और डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराध के तरीके भी लगातार बदल रहे हैं। ऐसे मामलों में किसी भी संदिग्ध लेनदेन की जानकारी मिलते ही तुरंत बैंक, साइबर हेल्पलाइन और स्थानीय पुलिस को सूचित करना आवश्यक होता है। साथ ही अनजान लिंक, संदिग्ध कॉल और अविश्वसनीय मोबाइल एप्लिकेशन से सावधानी बरतने की भी सलाह दी जाती है।

    यह मामला एक बार फिर साइबर सुरक्षा व्यवस्था, त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र और डिजिटल लेनदेन की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। जांच एजेंसियों का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • इंटरनेट पर डॉक्टर का नंबर खोजना पड़ा महंगा, रजिस्ट्रेशन लिंक पर क्लिक करते ही खाते से पांच लाख रुपये साफ

    इंटरनेट पर डॉक्टर का नंबर खोजना पड़ा महंगा, रजिस्ट्रेशन लिंक पर क्लिक करते ही खाते से पांच लाख रुपये साफ


    मध्य प्रदेश: के जबलपुर में साइबर ठगी का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां इंटरनेट पर डॉक्टर का संपर्क नंबर खोजने के दौरान एक व्यक्ति ठगों के जाल में फंस गया। इलाज के लिए डॉक्टर से संपर्क करने की कोशिश कर रहे व्यक्ति को रजिस्ट्रेशन के नाम पर भेजे गए एक लिंक पर क्लिक करना भारी पड़ गया। लिंक खुलते ही उसके बैंक खाते से कुल पांच लाख रुपये चार अलग-अलग लेनदेन में निकल गए। घटना के बाद पीड़ित ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है।

    जानकारी के अनुसार, पीड़ित जबलपुर के गोरखपुर थाना क्षेत्र के हथिताल इलाके का निवासी है। उसने अपनी पत्नी के त्वचा संबंधी उपचार के लिए इंटरनेट पर डॉक्टर का मोबाइल नंबर तलाशा था। सर्च के दौरान मिले एक नंबर पर उसने संपर्क किया। फोन पर हुई बातचीत के दौरान सामने वाले व्यक्ति ने खुद को संबंधित चिकित्सा सेवा से जुड़ा बताते हुए इलाज से पहले ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराने की बात कही।

    आरोप है कि इसके बाद पीड़ित के मोबाइल पर एक लिंक भेजा गया और उसे रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी करने के लिए उस पर क्लिक करने के लिए कहा गया। जैसे ही उसने लिंक खोला और आगे की प्रक्रिया पूरी करने का प्रयास किया, कुछ ही समय में उसके बैंक खाते से क्रमवार चार ट्रांजैक्शन के माध्यम से कुल पांच लाख रुपये निकल गए। बैंक खाते से राशि कटने के संदेश मिलने के बाद उसे साइबर ठगी का एहसास हुआ।

    घटना की जानकारी मिलते ही पीड़ित ने स्थानीय थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर साइबर ठगी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि लेनदेन से जुड़े तकनीकी पहलुओं, बैंकिंग रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है ताकि आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सके।

    साइबर अपराध के बढ़ते मामलों के बीच पुलिस ने नागरिकों को इंटरनेट पर उपलब्ध किसी भी मोबाइल नंबर या लिंक की सत्यता जांचने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर ठग अक्सर अस्पताल, डॉक्टर, बैंक या सरकारी सेवाओं के नाम पर फर्जी वेबसाइट और मोबाइल नंबर तैयार कर लोगों को झांसे में लेते हैं। इसके बाद रजिस्ट्रेशन, अपॉइंटमेंट या सत्यापन के बहाने लिंक भेजकर बैंकिंग जानकारी या डिवाइस तक पहुंच हासिल करने का प्रयास किया जाता है।

    विशेषज्ञों ने यह भी कहा है कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी प्रामाणिकता की जांच करना जरूरी है। यदि किसी सेवा के लिए ऑनलाइन भुगतान या रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता हो तो संबंधित संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट या सत्यापित संपर्क माध्यम का ही उपयोग किया जाना चाहिए। साथ ही बैंक खाते से जुड़े ओटीपी, पासवर्ड, यूपीआई पिन या अन्य गोपनीय जानकारी किसी भी व्यक्ति के साथ साझा नहीं करनी चाहिए।

    पुलिस ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी संदिग्ध कॉल, संदेश या लिंक के माध्यम से वित्तीय जानकारी मांगी जाए तो सतर्क रहें और किसी भी प्रकार का लेनदेन करने से पहले जानकारी की पुष्टि अवश्य करें। अधिकारियों का कहना है कि समय रहते सतर्कता बरतकर इस प्रकार की साइबर ठगी से बचा जा सकता है, जबकि किसी भी संदिग्ध घटना की स्थिति में तत्काल पुलिस और साइबर हेल्पलाइन को सूचना देना सबसे प्रभावी कदम माना जाता है।

  • इंदौर में साइबर ठगों का डबल अटैक: इंडियामार्ट से एसी गैस खरीदने और बेटे की गिरफ्तारी का झांसा देकर 1.72 लाख उड़ाए

    इंदौर में साइबर ठगों का डबल अटैक: इंडियामार्ट से एसी गैस खरीदने और बेटे की गिरफ्तारी का झांसा देकर 1.72 लाख उड़ाए


    इंदौर इंदौर में साइबर अपराधियों ने एक ही दिन में दो अलग-अलग वारदातों को अंजाम देकर दो लोगों से कुल 1.72 लाख रुपए की ठगी कर ली। एक मामले में इंडियामार्ट पर एसी गैस बेचने के नाम पर ऑटो पार्ट्स कारोबारी से 82 हजार रुपए हड़प लिए गए, जबकि दूसरे मामले में खुद को पुलिस अधिकारी बताकर एक व्यक्ति को उसके बेटे की रेप केस में गिरफ्तारी का डर दिखाया गया और जमानत के नाम पर 90 हजार रुपए ट्रांसफर करा लिए गए। दोनों मामलों में पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    पहला मामला छोटी ग्वालटोली थाना क्षेत्र का है। रानी बाग निवासी ऑटो पार्ट्स व्यापारी पवनदीप सिंह खनूजा ने एसी गैस खरीदने के लिए इंडियामार्ट पर सप्लायर का नंबर तलाशा। वहां उन्हें श्रुति इंटरप्राइजेज के नाम से कुलदीप अग्रवाल का मोबाइल नंबर मिला। बातचीत के बाद आरोपी ने व्हाट्सएप पर एसी गैस के 220 टिन का इनवॉइस और फोटो भेजकर 82 हजार रुपए ऑनलाइन जमा कराने को कहा।

    व्यापारी ने भरोसा कर मुंबई स्थित बैंक खाते में भुगतान कर दिया। इसके बाद आरोपी ने गति इंटरप्राइजेज के नाम से एक बिल्टी भी भेजी, लेकिन काफी समय तक सामान नहीं पहुंचा। जांच करने पर पता चला कि भेजी गई बिल्टी एआई तकनीक से तैयार की गई फर्जी दस्तावेज थी। जब आरोपी ने फोन उठाना बंद कर दिया, तब व्यापारी को ठगी का एहसास हुआ। उन्होंने बैंक में भुगतान रोकने का प्रयास किया और साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया।

    दूसरी घटना कनाड़िया थाना क्षेत्र की है। राज वर्मा के पास व्हाट्सएप कॉल कर खुद को पुलिस अधिकारी बताने वाले व्यक्ति ने दावा किया कि उनके बेटे को रेप के आरोप में तीन अन्य युवकों के साथ गिरफ्तार किया गया है। ठग ने बेटे को जेल से बचाने के लिए तत्काल तीन लाख रुपए की मांग की और डर का माहौल बनाकर पैसे भेजने का दबाव बनाया।

    घबराए राज वर्मा ने अपने पास केवल 90 हजार रुपए होने की बात कही। इसके बाद ठगों ने बताए गए बैंक खाते में रकम ट्रांसफर करा ली। कुछ देर बाद जब उन्होंने अपने बेटे से संपर्क किया तो पता चला कि वह पूरी तरह सुरक्षित है और उसके खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है। तब उन्हें एहसास हुआ कि वे साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं।

    दोनों मामलों में साइबर हेल्पलाइन पर मिली शिकायतों के आधार पर संबंधित थानों में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल ट्रांजैक्शन की जांच कर आरोपियों की पहचान में जुटी है।

    पुलिस ने लोगों से अपील की है कि ऑनलाइन खरीदारी के दौरान केवल सत्यापित विक्रेताओं से ही लेनदेन करें। किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर अग्रिम भुगतान न करें और यदि कोई पुलिस, सीबीआई या अन्य अधिकारी बनकर फोन पर गिरफ्तारी या जमानत के नाम पर पैसे मांगे तो पहले संबंधित व्यक्ति या स्थानीय पुलिस से पुष्टि जरूर करें। ऐसी किसी भी संदिग्ध कॉल या ऑनलाइन धोखाधड़ी की सूचना तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी पुलिस थाने में दें।

  • भोपाल में निवेश के नाम पर 33 लाख की ठगी शेयर ट्रेडिंग और रियल एस्टेट का झांसा देकर दो लोगों को बनाया शिकार

    भोपाल में निवेश के नाम पर 33 लाख की ठगी शेयर ट्रेडिंग और रियल एस्टेट का झांसा देकर दो लोगों को बनाया शिकार


    भोपाल । राजधानी भोपाल में ऑनलाइन निवेश और रियल एस्टेट कारोबार के नाम पर धोखाधड़ी के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। एक बार फिर साइबर ठगों और निवेश के नाम पर भरोसा जीतने वाले आरोपियों ने दो अलग-अलग लोगों को अपना निशाना बनाकर कुल 33 लाख रुपए की ठगी कर ली। एक मामले में शेयर ट्रेडिंग में भारी मुनाफे का लालच देकर रिटायर्ड बैंक कर्मचारी से 23 लाख रुपए ऐंठ लिए गए जबकि दूसरे मामले में रियल एस्टेट कारोबार में निवेश का भरोसा दिलाकर फिजियोथेरेपिस्ट से 10 लाख रुपए हड़प लिए गए। दोनों मामलों में पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    पहला मामला मिसरोद थाना क्षेत्र का है जहां सलैया निवासी 48 वर्षीय रोहित वर्मा साइबर ठगी का शिकार बने। निजी बैंक से सेवानिवृत्त रोहित वर्मा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर शेयर ट्रेडिंग से जुड़ा एक विज्ञापन देखा। विज्ञापन के माध्यम से उन्होंने एक ट्रेडिंग ऐप डाउनलोड किया जिसके बाद उनसे संपर्क कर निवेश पर मोटे मुनाफे का दावा किया गया। शुरुआती बातचीत और भरोसा दिलाने के बाद आरोपियों ने उन्हें अलग-अलग चरणों में करीब 23 लाख रुपए निवेश करने के लिए तैयार कर लिया।

    जब निवेश की रकम बढ़ती गई तो रोहित वर्मा को भरोसा हो गया कि उन्हें अच्छा लाभ मिलेगा। लेकिन जब उन्होंने अपने निवेश की राशि और मुनाफा वापस मांगना शुरू किया तो आरोपियों ने संपर्क पूरी तरह बंद कर दिया। इसके बाद उन्हें ठगी का एहसास हुआ और उन्होंने पुलिस से शिकायत की। पुलिस अब इस मामले में उपयोग किए गए बैंक खातों मोबाइल नंबरों और डिजिटल लेनदेन की जांच कर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

    दूसरा मामला निशातपुरा थाना क्षेत्र का है जहां पेशे से फिजियोथेरेपिस्ट नीरज तिवारी को रियल एस्टेट कारोबार में निवेश का झांसा देकर 10 लाख रुपए की धोखाधड़ी की गई। शिकायत के अनुसार उन्होंने अपने रिश्तेदार संजय तिवारी के कहने पर रियल एस्टेट कारोबार में निवेश के लिए 10 लाख रुपए दिए थे। शुरुआत में आरोपी ने कारोबार में अच्छा लाभ मिलने का भरोसा दिलाया लेकिन समय बीतने के बाद भी रकम वापस नहीं की।

    बताया गया कि पिछले वर्ष आरोपी ने केवल 2 लाख रुपए लौटाए और शेष राशि जल्द देने का आश्वासन देता रहा। लंबे समय तक टालमटोल के बाद जब पूरी रकम वापस नहीं मिली तो पीड़ित ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। जांच के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है और आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ऑनलाइन निवेश और अधिक मुनाफे का लालच देने वाले विज्ञापनों से लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। किसी भी अनजान ऐप या व्यक्ति के कहने पर बड़ी रकम निवेश करने से पहले उसकी पूरी जानकारी और वैधता की जांच करना जरूरी है। वहीं रिश्तेदारी या जान-पहचान के आधार पर भी बिना लिखित दस्तावेज और कानूनी सुरक्षा के बड़ी रकम निवेश करना आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध निवेश प्रस्ताव या साइबर धोखाधड़ी की जानकारी तुरंत पुलिस और साइबर हेल्पलाइन को दें ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।

  • भारत समेत 97 देशों की संयुक्त कार्रवाई से साइबर अपराधियों पर शिकंजा, इंटरपोल के ऑपरेशन फर्स्ट लाइट-2026 में हजारों गिरफ्तार और लाखों पीड़ितों को राहत

    भारत समेत 97 देशों की संयुक्त कार्रवाई से साइबर अपराधियों पर शिकंजा, इंटरपोल के ऑपरेशन फर्स्ट लाइट-2026 में हजारों गिरफ्तार और लाखों पीड़ितों को राहत


    नई दिल्ली । ऑनलाइन ठगी और साइबर अपराध के बढ़ते अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के खिलाफ इंटरपोल ने भारत सहित 97 देशों के सहयोग से अब तक का सबसे बड़ा संयुक्त अभियान चलाकर वैश्विक स्तर पर संगठित साइबर अपराधियों को बड़ा झटका दिया है। ऑपरेशन फर्स्ट लाइट-2026 नाम से चलाए गए इस अभियान के दौरान 5,811 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, 15,606 संदिग्धों की पहचान की गई और 31,014 बैंक खातों को ब्लॉक किया गया। इसके साथ ही लगभग 293 मिलियन अमेरिकी डॉलर, यानी करीब 2,500 करोड़ रुपये की अवैध राशि अपराधियों तक पहुंचने से पहले ही जब्त या फ्रीज कर दी गई।

    यह अभियान 15 जनवरी से 30 अप्रैल 2026 तक संचालित किया गया। कार्रवाई से पहले विभिन्न देशों की पुलिस और जांच एजेंसियों ने साइबर अपराधियों के बैंक खातों, क्रिप्टो वॉलेट, फर्जी कंपनियों, फोन नंबरों और डिजिटल नेटवर्क से जुड़ी महत्वपूर्ण सूचनाओं का आदान-प्रदान किया। समन्वित रणनीति के तहत कई देशों में एक साथ छापेमारी कर साइबर ठगी के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को निशाना बनाया गया।

    जांच एजेंसियों के अनुसार अभियान का मुख्य उद्देश्य सोशल इंजीनियरिंग स्कैम पर रोक लगाना था। इस तरह की ठगी में अपराधी खुद को बैंक अधिकारी, पुलिसकर्मी, सरकारी एजेंसी के प्रतिनिधि, निवेश सलाहकार या अन्य विश्वसनीय व्यक्ति बताकर लोगों का भरोसा जीतते हैं। कई मामलों में वीडियो कॉल पर नकली वर्दी और सरकारी कार्यालय जैसा माहौल दिखाकर लोगों को डराया या लालच दिया जाता है, जिसके बाद उनसे बैंकिंग जानकारी या धनराशि हासिल कर ली जाती है।

    ऑपरेशन के दौरान 1.42 लाख से अधिक संभावित पीड़ितों की पहचान की गई और 1,52,808 मामलों का विश्लेषण किया गया। इनमें से 23,715 मामलों का समाधान किया गया। जांच से स्पष्ट हुआ कि साइबर अपराध अब सीमाओं से परे फैला संगठित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क बन चुका है, जिसके लिए देशों के बीच निरंतर समन्वय और सूचना साझा करना आवश्यक है।

    अभियान के दौरान इंटरपोल ने अपने विशेष भुगतान हस्तक्षेप तंत्र I-GRIP का भी उपयोग किया, जिसके माध्यम से विभिन्न देशों के बीच भेजी जा रही संदिग्ध धनराशि को समय रहते रोकने में सफलता मिली। इस प्रणाली ने कई मामलों में बैंक खातों और क्रिप्टो वॉलेट तक रकम पहुंचने से पहले ही लेनदेन रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    कार्रवाई के दौरान कई देशों में चौंकाने वाले खुलासे भी हुए। एक स्थान पर ठगी के लिए नकली पुलिस स्टेशन तैयार कर लोगों को वीडियो कॉल के जरिए डराया जाता था, जबकि दूसरे मामले में रोमांस स्कैम के जरिए करोड़ों डॉलर का लेनदेन क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से छिपाने का प्रयास किया गया। कई स्थानों से बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य अहम साक्ष्य भी बरामद किए गए, जिनके आधार पर आगे की जांच जारी है।

    इस अभियान में कई अंतरराष्ट्रीय पुलिस संगठनों ने भी सहयोग दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल अरेस्ट, निवेश ठगी, रोमांस स्कैम, फर्जी कॉल सेंटर और क्रिप्टो आधारित मनी लॉन्ड्रिंग जैसे अपराध लगातार नए रूप ले रहे हैं। ऐसे में विभिन्न देशों की संयुक्त कार्रवाई ही इन संगठित नेटवर्क पर प्रभावी नियंत्रण का सबसे मजबूत माध्यम बन सकती है। इंटरपोल ने भी स्पष्ट किया है कि भविष्य में सदस्य देशों के साथ तकनीकी सहयोग, खुफिया जानकारी साझा करने और संयुक्त अभियानों के माध्यम से वैश्विक साइबर अपराध के खिलाफ कार्रवाई को और मजबूत किया जाएगा।

  • शादी का झांसा देकर महिला से 28 लाख ऐंठे विदेश भागने की फिराक में आरोपी क्राइम ब्रांच के हत्थे चढ़ा

    शादी का झांसा देकर महिला से 28 लाख ऐंठे विदेश भागने की फिराक में आरोपी क्राइम ब्रांच के हत्थे चढ़ा


    मध्य प्रदेश। आरोपी को दिल्ली से गिरफ्तार किया है। आरोपी ने खुद को भारतीय सेना का अधिकारी बताकर इंदौर की एक महिला का भरोसा जीता और बीमारी का बहाना बनाकर उससे करीब 28 लाख रुपये ठग लिए। पुलिस के मुताबिक आरोपी लंबे समय से फरार था और गिरफ्तारी से पहले यूरोप भागने की तैयारी कर रहा था।

    क्राइम ब्रांच अधिकारियों के अनुसार गिरफ्तार आरोपी की पहचान जीतू उर्फ जितेंद्र पुत्र राकेश छोनकर के रूप में हुई है। वह नोएडा क्षेत्र का रहने वाला है और रूस के मॉस्को में कंस्ट्रक्शन सुपरवाइजर के रूप में काम करता है। पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुका है और उसने अपनी शैक्षणिक एवं पेशेवर जानकारी का इस्तेमाल लोगों को प्रभावित करने के लिए किया।

    जांच के दौरान पता चला कि आरोपी ने मैट्रिमोनियल वेबसाइट जीवनसाथी डॉट कॉम पर फर्जी प्रोफाइल बनाई थी। उसने खुद को भारतीय सेना का अधिकारी बताकर इंदौर की एक महिला से संपर्क किया। दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और शादी की चर्चा शुरू हो गई। विश्वास कायम होने के बाद आरोपी ने महिला को अपनी गंभीर बीमारी की झूठी कहानी सुनाई और इलाज के लिए आर्थिक मदद मांगी।
    पुलिस के मुताबिक वर्ष 2024 के दौरान आरोपी ने अलग अलग किस्तों में महिला से करीब 28 लाख रुपये अपने बैंक खाते में ट्रांसफर करवा लिए। जब पूरी रकम मिल गई तो उसने शादी करने से साफ इनकार कर दिया और महिला से संपर्क भी कम कर दिया। खुद को ठगा हुआ महसूस करने पर पीड़िता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई जिसके बाद मामले की जांच शुरू हुई।

    क्राइम ब्रांच की जांच में सामने आया कि आरोपी अधिकतर समय विदेश में रह रहा था जिससे उसकी गिरफ्तारी आसान नहीं थी। हाल ही में वह अपने परिवार से मिलने दिल्ली आया था। पुलिस को जैसे ही उसकी मौजूदगी की जानकारी मिली टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए घेराबंदी की और उसे गिरफ्तार कर लिया। अधिकारियों के अनुसार आरोपी दिल्ली से यूरोप जाने वाली फ्लाइट पकड़ने की तैयारी में था लेकिन उससे पहले ही उसे हिरासत में ले लिया गया।

    पुलिस अब आरोपी के बैंक खातों मोबाइल फोन और डिजिटल रिकॉर्ड की गहन जांच कर रही है। शुरुआती जांच में आशंका जताई जा रही है कि उसने इसी तरीके से अन्य लोगों को भी अपना शिकार बनाया हो सकता है। जांच एजेंसियां उसके ऑनलाइन नेटवर्क और वित्तीय लेनदेन की भी पड़ताल कर रही हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस तरह की ठगी के और कितने मामले उससे जुड़े हुए हैं।

    क्राइम ब्रांच ने लोगों से अपील की है कि ऑनलाइन मैट्रिमोनियल वेबसाइट या सोशल मीडिया के जरिए बनने वाले रिश्तों में आर्थिक लेनदेन करने से पहले पूरी तरह जांच पड़ताल करें। किसी भी व्यक्ति की पहचान और दावों की पुष्टि किए बिना बड़ी रकम भेजना गंभीर नुकसान का कारण बन सकता है। पुलिस ने मामले में आगे की जांच जारी होने की जानकारी दी है।
  • सुरक्षा बल के अधिकारी भी नहीं सुरक्षित, साइबर अपराधियों ने BSF इंस्पेक्टर को बनाया शिकार

    सुरक्षा बल के अधिकारी भी नहीं सुरक्षित, साइबर अपराधियों ने BSF इंस्पेक्टर को बनाया शिकार


    ग्वालियर । ग्वालियर में साइबर अपराध का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां सीमा सुरक्षा बल के एक अधिकारी को ही साइबर ठगों ने अपना शिकार बना लिया। टेकनपुर स्थित बीएसएफ प्रशिक्षण केंद्र में पदस्थ एक इंस्पेक्टर का मोबाइल फोन हैक कर शातिर बदमाशों ने उनके बैंक खातों और क्रेडिट कार्ड से 3 लाख 10 हजार रुपये की धोखाधड़ी कर ली। घटना के बाद पुलिस और साइबर सेल की टीम जांच में जुट गई है।

    जानकारी के अनुसार बिहार के समस्तीपुर निवासी 34 वर्षीय अविनाश कुमार वर्तमान में एसटीसी बीएसएफ टेकनपुर में इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत हैं। उनके पास आईसीआईसीआई बैंक, एसबीआई और यस बैंक के क्रेडिट कार्ड तथा बैंकिंग सुविधाएं थीं। 17 जून की रात अज्ञात साइबर अपराधियों ने किसी तकनीकी माध्यम से उनके मोबाइल फोन का ऑनलाइन एक्सेस हासिल कर लिया।

    मोबाइल पर नियंत्रण मिलते ही ठगों ने बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं तक पहुंच बनाई। इसके बाद उन्होंने एक के बाद एक कई ऑनलाइन ट्रांजैक्शन कर डाले। अलग-अलग किस्तों में किए गए इन लेनदेन के जरिए कुल 3 लाख 10 हजार रुपये खाते और क्रेडिट कार्ड से निकाल लिए गए। पूरी वारदात बेहद सुनियोजित तरीके से अंजाम दी गई, जिससे शुरुआती दौर में पीड़ित को इसकी भनक तक नहीं लगी।

    घटना का खुलासा तब हुआ जब इंस्पेक्टर अविनाश कुमार के मोबाइल पर लगातार ट्रांजैक्शन संबंधी संदेश आने लगे। बैंक खातों से रकम निकलने की जानकारी मिलते ही उनके होश उड़ गए। उन्होंने तत्काल संबंधित बैंक अधिकारियों से संपर्क किया और बाद में बिलौआ थाना पहुंचकर मामले की शिकायत दर्ज कराई।

    शिकायत के आधार पर पुलिस ने अज्ञात साइबर ठगों के खिलाफ धोखाधड़ी और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार साइबर सेल की टीम ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड, बैंकिंग डेटा और तकनीकी साक्ष्यों की जांच कर रही है। साथ ही लेनदेन में उपयोग किए गए आईपी एड्रेस और डिजिटल ट्रेल को भी खंगाला जा रहा है ताकि आरोपियों तक पहुंचा जा सके।

    विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर अपराधी अब रिमोट एक्सेस ऐप, फर्जी लिंक, स्क्रीन शेयरिंग और मालवेयर जैसे तरीकों का इस्तेमाल कर लोगों के मोबाइल और बैंक खातों तक पहुंच बना रहे हैं। ऐसे में किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने, संदिग्ध ऐप डाउनलोड करने या ओटीपी और बैंकिंग जानकारी साझा करने से बचना बेहद जरूरी है।

    इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि साइबर अपराधी किसी को भी निशाना बना सकते हैं। आम नागरिकों के साथ-साथ सुरक्षा बलों के अधिकारी भी इनके जाल में फंस रहे हैं। ऐसे में डिजिटल सतर्कता ही साइबर ठगी से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।

  • साइबर ठगी पर CJI सूर्यकांत का सख्त संदेश, जमानत से इनकार करते हुए बोले- ‘परजीवी हो, समाज के लिए जेल में रहना ही बेहतर’

    साइबर ठगी पर CJI सूर्यकांत का सख्त संदेश, जमानत से इनकार करते हुए बोले- ‘परजीवी हो, समाज के लिए जेल में रहना ही बेहतर’

    नई दिल्ली । साइबर अपराधों के बढ़ते मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। साइबर ठगी से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश Justice Surya Kant की अध्यक्षता वाली पीठ ने आरोपी को जमानत देने से इनकार करते हुए कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि साइबर अपराधी समाज और अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाले ऐसे तत्व हैं, जिनके प्रति नरमी बरतना उचित नहीं होगा। न्यायालय की इस टिप्पणी ने साइबर अपराधों को लेकर न्यायपालिका के सख्त दृष्टिकोण को एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है।

    सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि साइबर ठगी में शामिल लोग देशभर के नागरिकों को निशाना बनाते हैं और बड़ी संख्या में लोगों को आर्थिक नुकसान पहुंचाते हैं। अदालत का मानना था कि ऐसे अपराध केवल किसी एक व्यक्ति या संस्था को प्रभावित नहीं करते, बल्कि व्यापक स्तर पर वित्तीय व्यवस्था और आम लोगों के भरोसे को भी कमजोर करते हैं। इसी कारण अदालत ने आरोपी की जमानत याचिका को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।

    न्यायालय ने अपनी टिप्पणी में कहा कि साइबर अपराधी विभिन्न राज्यों में सक्रिय होकर लोगों को ठगी का शिकार बनाते हैं। वे तकनीक का दुरुपयोग कर निवेश, बैंकिंग और डिजिटल लेनदेन से जुड़े फर्जीवाड़े को अंजाम देते हैं। अदालत के अनुसार ऐसे मामलों में अपराध का दायरा किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव देशभर में फैल जाता है। यही वजह है कि इस प्रकार के अपराधों को गंभीरता से देखना आवश्यक है।

    मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि साइबर अपराध के मामलों में न्यायपालिका को बेहद सतर्क और कठोर दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है। अदालत का मानना है कि डिजिटल युग में साइबर अपराध लगातार जटिल और संगठित होते जा रहे हैं, जिससे आम नागरिकों की मेहनत की कमाई पर सीधा खतरा पैदा हो रहा है। इसलिए ऐसे आरोपियों को राहत देने से पहले अपराध की प्रकृति और उसके प्रभाव का गंभीरता से मूल्यांकन किया जाना चाहिए।

    इस टिप्पणी के बाद साइबर अपराधों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और न्यायिक सख्ती को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन निवेश के बढ़ते चलन के साथ साइबर ठगी के मामलों में भी वृद्धि हुई है। ऐसे में अदालतों की सख्त टिप्पणियां न केवल कानून प्रवर्तन एजेंसियों का मनोबल बढ़ाती हैं, बल्कि संभावित अपराधियों के लिए भी एक स्पष्ट संदेश का काम करती हैं।

    यह मामला इसलिए भी चर्चा में आया क्योंकि कुछ समय पहले मुख्य न्यायाधीश की एक अन्य टिप्पणी राष्ट्रीय स्तर पर बहस का विषय बनी थी। उस टिप्पणी को लेकर विभिन्न वर्गों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं। हालांकि इस बार साइबर अपराधियों पर की गई सख्त टिप्पणी को लेकर व्यापक स्तर पर लोगों की प्रतिक्रिया अपेक्षाकृत अलग दिखाई दे रही है। कई लोग इसे बढ़ते साइबर अपराधों के खिलाफ आवश्यक चेतावनी के रूप में देख रहे हैं।

    कानूनी जानकारों का कहना है कि साइबर अपराध अब केवल तकनीकी चुनौती नहीं रह गए हैं, बल्कि यह आर्थिक सुरक्षा और नागरिकों के डिजिटल विश्वास से भी जुड़ा विषय बन चुका है। ऐसे में अदालतों द्वारा दिए जा रहे कड़े संदेश यह संकेत देते हैं कि भविष्य में भी साइबर ठगी और डिजिटल अपराधों से जुड़े मामलों में न्यायपालिका का रुख सख्त बना रह सकता है। फिलहाल इस मामले में जमानत से इनकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि व्यापक जनहित को प्रभावित करने वाले साइबर अपराधों को हल्के में नहीं लिया जा सकता।

  • आयुर्वेदिक दवाओं के बहाने तांत्रिक बनकर लाखों की ठगी पुलिस जांच में जुटी

    आयुर्वेदिक दवाओं के बहाने तांत्रिक बनकर लाखों की ठगी पुलिस जांच में जुटी


    जबलपुर । जबलपुर जिले में ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है जहां शातिर ठगों ने खुद को तांत्रिक बताकर एक युवक से बड़ी रकम ऐंठ ली। यह पूरा मामला पारिवारिक समस्याओं के समाधान के नाम पर की गई धोखाधड़ी से जुड़ा है। पीड़ित चंद्रकांत सोनी सिवनी घंसौर क्षेत्र के निवासी हैं जिनके साथ यह वारदात हुई।

    जानकारी के अनुसार दो जालसाजों ने खुद को तांत्रिक बताकर युवक को यह विश्वास दिलाया कि उसकी पारिवारिक समस्याओं का समाधान विशेष आयुर्वेदिक दवाओं और अनुष्ठानों से संभव है। इसी झांसे में लेकर उन्होंने अलग अलग जगहों से महंगी दवाएं खरीदने के लिए मजबूर किया। ठगों ने योजना बनाकर दवा दुकानों से सीधे बड़ी मात्रा में आयुर्वेदिक उत्पाद मंगवाए और भुगतान पीड़ित से कराया।

    दमोह नाका स्थित एक आयुर्वेदिक दवा दुकान से लगभग 5 लाख 25 हजार रुपये की दवाएं खरीदी गईं। इसके बाद नागपुर स्थित एक अन्य दवा दुकान से लगभग साढ़े 12 लाख रुपये की दवाएं मंगवाई गईं। इस तरह कुल रकम साढ़े 17 लाख रुपये तक पहुंच गई।

    ठगों ने यहां तक दावा किया कि यदि इन दवाओं का उपयोग और अनुष्ठान विधिवत किया जाए तो पारिवारिक समस्याएं समाप्त हो जाएंगी और जीवन में सकारात्मक बदलाव आएगा। इसी विश्वास के आधार पर पीड़ित लगातार उनके जाल में फंसता गया।

    मामले में नया मोड़ तब आया जब प्रयागराज से भी दवाएं मंगवाने की बात कही गई। इसी दौरान पीड़ित को संदेह हुआ और उसे महसूस हुआ कि उसके साथ धोखाधड़ी की जा रही है। शक गहराने पर उसने पूरे मामले की जानकारी पुलिस को दी।

    कोतवाली थाना पुलिस ने शिकायत दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि दोनों आरोपियों की पहचान की जा रही है और उनके संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। शुरुआती जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि यह एक सुनियोजित ठगी का मामला है जिसमें तांत्रिक बनकर लोगों को मानसिक रूप से प्रभावित किया गया।

    पुलिस अब दवा दुकानों से जुड़े लेनदेन और आरोपियों के बैंकिंग रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके। इस घटना ने इलाके में सनसनी फैला दी है और लोग इस तरह के फर्जी तांत्रिकों से सतर्क रहने की अपील कर रहे हैं।

  • दतिया में साइबर ठगी का मामला: महिला को नौकरी और इलाज का बहाना देकर ठगे गए लाखों

    दतिया में साइबर ठगी का मामला: महिला को नौकरी और इलाज का बहाना देकर ठगे गए लाखों


    दतिया । दतिया के कोतवाली थाना क्षेत्र में रविवार को साइबर ठगी का गंभीर मामला सामने आया। फेसबुक पर दोस्ती कर महिला सुमन भटनागर (57) से आरोपियों ने इलाज और नौकरी का झांसा देकर करीब 18 लाख रुपये ठग लिए। पुलिस ने तीन आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    सुमन भटनागर ने बताया कि 1 मार्च 2025 को उनकी फेसबुक आईडी पर शिवम वीरेंद्र सिंह नामक व्यक्ति की फ्रेंड रिक्वेस्ट आई। बातचीत बढ़ने के बाद आरोपी ने अपनी मां के इलाज का बहाना बनाकर पहले 20 हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर करवाए। इसके बाद अलग-अलग बहानों से लगातार रकम मांगते रहे।

    आरोपी ने कभी मां के इलाज, कभी एक्सीडेंट और कभी बहन की बीमारी का बहाना बनाकर महिला से पैसे लिए। अगस्त 2025 से महिला को बिजली विभाग में नौकरी दिलाने का झांसा भी दिया गया और करीब साढ़े तीन लाख रुपये ठगे गए। आरोपियों ने ‘टीना मैम’ नाम की महिला और किसी ‘सर’ से भी बात कराई ताकि महिला को भरोसे में लिया जा सके और पैसे ट्रांसफर कराए जा सकें।

    पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी सहित कई धाराओं में मामला दर्ज किया है। महिला ने मोबाइल नंबर और लेनदेन के स्क्रीनशॉट के साथ शिकायत दी। पुलिस का कहना है कि आरोपियों की पहचान और लोकेशन ट्रेस कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

    पुलिस ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से सतर्क रहें और किसी भी तरह के लालच में आकर पैसे न भेजें। यह घटना साइबर ठगी और सोशल मीडिया पर धोखाधड़ी की गंभीरता को उजागर करती है।