Tag: CyberSecurity

  • CBSE रिजल्ट पोर्टल पर बड़ा साइबर हमला, 38 लाख से अधिक संदिग्ध रिक्वेस्ट ब्लॉक; सिस्टम रहा सुरक्षित

    CBSE रिजल्ट पोर्टल पर बड़ा साइबर हमला, 38 लाख से अधिक संदिग्ध रिक्वेस्ट ब्लॉक; सिस्टम रहा सुरक्षित


    नई दिल्ली । केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड) के पोस्ट-रिजल्ट पोर्टल पर 3 जून 2026 को एक बड़ा साइबर हमला दर्ज किया गया। इस हमले में करीब 38 लाख से अधिक संदिग्ध रिक्वेस्ट भेजी गईं, जिसका उद्देश्य सिस्टम को बाधित करना था। हालांकि, बोर्ड की मजबूत साइबर सुरक्षा व्यवस्था और तकनीकी टीम की सतर्कता के चलते पोर्टल पर कोई असर नहीं पड़ा और सेवा पूरी तरह सुचारू रूप से चलती रही।

     DDoS अटैक के जरिए किया गया हमला
    विशेषज्ञों के अनुसार यह हमला डिनायल-ऑफ-सेवा (DDoS) श्रेणी का था, जिसमें एक साथ भारी मात्रा में ट्रैफिक भेजकर किसी वेबसाइट को ठप करने की कोशिश की जाती है। CBSE के अनुसार, पोर्टल शुरू होने के कुछ ही मिनटों में लाखों रिक्वेस्ट आईं, जिनमें बड़ी संख्या अनधिकृत लॉगिन प्रयासों की थी। सिस्टम ने इन सभी को पहचानकर तुरंत ब्लॉक कर दिया।

     मजबूत साइबर सुरक्षा व्यवस्था ने रोका नुकसान
    बोर्ड ने बताया कि पोर्टल लॉन्च से पहले व्यापक सुरक्षा परीक्षण किए गए थे, जिनमें पेनिट्रेशन टेस्टिंग, वल्नरेबिलिटी असेसमेंट और लोड टेस्टिंग शामिल थीं। पोर्टल को आधुनिक सुरक्षा तकनीकों जैसे वेब एप्लिकेशन फायरवॉल (WAF), DDoS सुरक्षा प्रणाली, ऑडिट लॉगिंग और 24×7 मॉनिटरिंग से सुरक्षित किया गया था। इसी वजह से यह हमला सफल नहीं हो सका।

     रिजल्ट के बाद बढ़ा ट्रैफिक, हजारों आवेदन दर्ज
    रिजल्ट के बाद छात्रों की ओर से पुनर्मूल्यांकन और सत्यापन के लिए बड़ी संख्या में आवेदन भी आए हैं। बोर्ड को अब तक हजारों आवेदन प्राप्त हो चुके हैं, जिनमें उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन और अंकों के सत्यापन की मांग शामिल है।

     शुरुआती मिनटों में ही भारी दबाव
    रिपोर्ट के अनुसार, पोर्टल लाइव होने के मात्र दो मिनट के भीतर लगभग 15 लाख एक्सेस रिक्वेस्ट दर्ज की गईं। सिस्टम ने तुरंत सक्रिय होकर 1 लाख से अधिक संदिग्ध प्रयासों को ब्लॉक कर दिया।

    यह घटना दिखाती है कि डिजिटल सिस्टम पर साइबर हमलों का खतरा लगातार बढ़ रहा है, लेकिन मजबूत सुरक्षा ढांचे के चलते बड़े संस्थान भी ऐसे हमलों से सुरक्षित रह सकते हैं।

  • साइबर खतरों को लेकर गंभीर आरोप: डॉ. भार्गव मल्लप्पा ने मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाया

    साइबर खतरों को लेकर गंभीर आरोप: डॉ. भार्गव मल्लप्पा ने मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाया


    नई दिल्ली । डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराधों और निजता के उल्लंघन को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जब पीपल फोरम ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. भार्गव मल्लप्पा ने अपने परिवार को कथित रूप से निशाना बनाए जाने और मोबाइल टैपिंग जैसी गतिविधियों के आरोप लगाते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। यह मामला न केवल व्यक्तिगत सुरक्षा से जुड़ा बताया जा रहा है, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बढ़ते असुरक्षित वातावरण की ओर भी इशारा करता है, जहां आम नागरिकों की निजता खतरे में पड़ती दिख रही है।

    डॉ. मल्लप्पा ने अपने आरोपों में कहा है कि उनके परिवार के सदस्यों को संदिग्ध डिजिटल गतिविधियों के जरिए निशाना बनाया गया, जिसमें अज्ञात व्यक्ति द्वारा टेलीग्राम जैसे माध्यम से संदिग्ध लिंक भेजे जाने की घटना शामिल है। यह लिंक केवल उन्हें ही नहीं, बल्कि उनकी पत्नी और भाई को भी भेजा गया, जिससे यह आशंका और गहरी हो गई कि यह कोई सामान्य घटना नहीं बल्कि सुनियोजित डिजिटल हमला हो सकता है। इन घटनाओं को लेकर उन्होंने संबंधित शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग व्यवस्था में दर्ज कराई थी, जिसके बाद मामला जांच की प्रक्रिया में बताया जा रहा है।

    इस शिकायत में 13 अप्रैल को दर्ज की गई ऑनलाइन अपराध संबंधी प्रविष्टि का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें डिजिटल साक्ष्य और संबंधित रिकॉर्ड जांच एजेंसियों को सौंपे जाने की बात कही गई है। डॉ. मल्लप्पा का कहना है कि इस तरह की घटनाएं केवल व्यक्तिगत उत्पीड़न तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह नागरिकों की मौलिक स्वतंत्रता, निजता और सुरक्षा पर सीधा हमला हैं।

    उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मोबाइल टैपिंग, साइबर धोखाधड़ी और डिजिटल माध्यमों से डराने-धमकाने जैसी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जिन्हें अब अलग-अलग घटनाओं के रूप में नहीं देखा जा सकता। उनके अनुसार, यह एक व्यापक पैटर्न की ओर संकेत करता है, जिसे रोकने के लिए संस्थागत स्तर पर सख्त और त्वरित कार्रवाई आवश्यक है।

    डॉ. मल्लप्पा ने मानवाधिकार आयोग से अपील की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए, जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बढ़ती संदिग्ध गतिविधियों को देखते हुए देश के साइबर सुरक्षा ढांचे को और मजबूत करने की आवश्यकता है, ताकि आम नागरिक सुरक्षित वातावरण में डिजिटल सेवाओं का उपयोग कर सकें।

    उन्होंने जोर देकर कहा कि जागरूकता की कमी और तकनीकी सुरक्षा में खामियां ऐसे मामलों को और बढ़ावा देती हैं, इसलिए सरकार और संबंधित संस्थानों को मिलकर एक मजबूत रणनीति तैयार करनी चाहिए। इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या मौजूदा डिजिटल सुरक्षा व्यवस्था नागरिकों की निजता की रक्षा करने में पर्याप्त है या नहीं, और क्या भविष्य में ऐसे मामलों पर और सख्त कदम उठाने की आवश्यकता होगी।

  • अमेरिका में पेट्रोल पंपों के फ्यूल सिस्टम पर साइबर हमला, जांच एजेंसियों को ईरान समर्थित हैकर्स पर शक; ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता

    अमेरिका में पेट्रोल पंपों के फ्यूल सिस्टम पर साइबर हमला, जांच एजेंसियों को ईरान समर्थित हैकर्स पर शक; ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता



    नई दिल्ली। अमेरिका के कई राज्यों में पेट्रोल पंपों के ऑटोमैटिक टैंक गेज (ATG) सिस्टम को निशाना बनाकर साइबर हमले किए जाने का मामला सामने आया है। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इसके पीछे ईरान समर्थित हैकर समूह हो सकते हैं, हालांकि अब तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, हैकर्स ने उन डिजिटल सिस्टम्स में सेंध लगाई जो पेट्रोल पंपों में फ्यूल की मात्रा मापने और मॉनिटर करने के लिए इस्तेमाल होते हैं। शुरुआती जांच में पता चला है कि कई सिस्टम इंटरनेट से जुड़े थे और उनमें पर्याप्त पासवर्ड सुरक्षा मौजूद नहीं थी, जिससे हैकर्स को घुसपैठ का मौका मिला।

    अधिकारियों के अनुसार, कुछ मामलों में डिस्प्ले स्क्रीन पर दिखने वाले डेटा से छेड़छाड़ की गई, लेकिन फ्यूल की वास्तविक मात्रा या सप्लाई सिस्टम को प्रभावित नहीं किया जा सका। फिलहाल किसी बड़े हादसे या नुकसान की सूचना नहीं है।

    साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि ऐसे सिस्टम पर पूरी तरह नियंत्रण हासिल कर लिया जाए तो गैस लीक, आग या बड़े औद्योगिक हादसों जैसी गंभीर स्थितियां पैदा हो सकती हैं। इसी वजह से इस घटना को अमेरिकी ऊर्जा ढांचे की सुरक्षा के लिहाज से बेहद गंभीर माना जा रहा है।

    जांच एजेंसियां इस मामले को अमेरिका-ईरान तनाव के मौजूदा दौर से भी जोड़कर देख रही हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान समर्थित साइबर समूह पहले भी तेल, गैस, पानी और मेडिकल सिस्टम जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाते रहे हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में ईरानी साइबर नेटवर्क की तकनीकी क्षमता काफी बढ़ी है और वे अब पारंपरिक युद्ध के बजाय साइबर हमलों को रणनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।

    अमेरिका के कई पेट्रोल पंपों के फ्यूल मॉनिटरिंग सिस्टम में साइबर घुसपैठ का मामला सामने आया है, जिसमें जांच एजेंसियों को ईरान समर्थित हैकर्स पर शक है।
    हालांकि कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन इस घटना ने अमेरिका की ऊर्जा और साइबर सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

  • ग्वालियर में एयरफोर्स ऑफिसर से 'डिजिटल डकैती': 2 क्रेडिट कार्ड से ठगों ने उड़ाए ₹1.66 लाख, एक साथ खरीदे 8 मोबाइल

    ग्वालियर में एयरफोर्स ऑफिसर से 'डिजिटल डकैती': 2 क्रेडिट कार्ड से ठगों ने उड़ाए ₹1.66 लाख, एक साथ खरीदे 8 मोबाइल


    ग्वालियर। मध्यप्रदेश के ग्वालियर स्थित महाराजपुरा एयरफोर्स स्टेशन में पदस्थ एक ज्वाइंट वारेंट ऑफिसर साइबर ठगी का शिकार हो गए हैं। शातिर ठगों ने अधिकारी के दो अलग-अलग बैंकों के क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कर महज कुछ ही मिनटों में ₹1.66 लाख की ऑनलाइन खरीदारी कर डाली। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पीड़ित अधिकारी ने न तो किसी के साथ अपना ओटीपी OTP साझा किया और न ही किसी संदिग्ध कॉल पर कोई जानकारी दी। पुलिस को अंदेशा है कि यह पूरा खेल मोबाइल में भेजी गई एक घातकAPKफाइल के जरिए रचा गया है।

    मूल रूप से जम्मू के रहने वाले अधिकारी ऋषि नरगोवाजो वर्तमान में महाराजपुरा एयरफोर्स स्टेशन में तैनात हैंउनके साथ यह घटना 6 फरवरी की रात घटित हुई। रात करीब 10:11 बजे अचानक उनके मोबाइल पर ट्रांजैक्शन के मैसेज आने शुरू हुए। ठगों ने उनके स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के क्रेडिट कार्ड से ₹95,020 और इंडसइंड बैंक के कार्ड से ₹70,753 की चपत लगाई।

    अगले दिन जब अधिकारी बैंक पहुंचेतो पता चला कि इन पैसों से कुल 8 महंगे मोबाइल फोन खरीदे गए हैं। अधिकारी ने तत्काल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराईजिसके बादई-जीरो एफआईआरके माध्यम से मामला महाराजपुरा थाने भेजा गया है।

    पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि अधिकारी के मोबाइल पर कोई संदिग्ध लिंक याAPKफाइल आई होगीजिसे अनजाने में ओपन करने से उनके फोन का पूरा एक्सेस ठगों के पास चला गया। इससे ठगों ने बिना कॉल किए ही ओटीपी और कार्ड की डिटेल्स हैक कर लीं। फिलहालसाइबर सेल उस आईडी और डिलीवरी एड्रेस को ट्रैक कर रही हैजहाँ इन 8 मोबाइल फोनों को मंगवाया गया है। यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि किसी भी अनजान लिंक या फाइल को ओपन करना वित्तीय जोखिम का कारण बन सकता है।