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  • ग्वालियर के डबरा में 8 करोड़ की जमीन के विवाद में गोलीबारी, संदीप परिहार की मौत, मौके से करीब 50 कारतूस बरामद

    ग्वालियर के डबरा में 8 करोड़ की जमीन के विवाद में गोलीबारी, संदीप परिहार की मौत, मौके से करीब 50 कारतूस बरामद

    मध्य प्रदेश: के ग्वालियर जिले के डबरा क्षेत्र में टेकनपुर के पास शुक्रवार शाम जमीन विवाद को लेकर दो पक्षों के बीच गोलीबारी हुई। करीब आधे घंटे तक चली इस घटना में संदीप परिहार की मौत हो गई। बताया गया है कि संदीप भाजपा नेता और जिला पंचायत सदस्य आलोक शर्मा के भाई नवीन शर्मा का कर्मचारी था। गोलीबारी के दौरान उसके पेट में चार गोलियां लगीं। पुलिस उसे घायल अवस्था में एक स्कूल के अंदर से बरामद कर अस्पताल लेकर पहुंची, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। दूसरे पक्ष के एक युवक के भी गोली लगने से घायल होने की जानकारी सामने आई है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। विवाद हाईवे से लगी चार बीघा जमीन को लेकर था, जिसकी कीमत करीब आठ करोड़ रुपये बताई जा रही है।

    यह जमीन टेकनपुर बस स्टैंड के पास पुरानी रोड पर स्थित है। इसे लेकर नवीन शर्मा और श्याम गुर्जर के बीच विवाद चल रहा था। जानकारी के मुताबिक, नवीन शर्मा का पिछले तीन वर्षों से इस जमीन पर कब्जा था। शुक्रवार को वहां बाउंड्री वॉल बनाने का काम चल रहा था। इसी दौरान श्याम गुर्जर पक्ष के लोग मौके पर पहुंच गए। इसके बाद दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और विवाद बढ़ने पर गोलीबारी शुरू हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों और वहां से गुजर रहे लोगों के अनुसार, घटनास्थल पर लगातार गोलियां चलाई गईं। बताया गया कि करीब आधे घंटे तक चली फायरिंग में बड़ी संख्या में राउंड दागे गए। घटना के दौरान वहां मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई।

    जमीन के स्वामित्व को लेकर भी पहले से विवाद की स्थिति बनी हुई थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, करीब पांच महीने पहले जमीन की रजिस्ट्री श्याम गुर्जर और विनय गुर्जर के नाम कराई गई थी। रजिस्ट्री के बाद जमीन का नामांतरण भी हो गया था। इससे पहले करीब आठ महीने पूर्व जमीन का इकरारनामा किए जाने के समय भी दोनों पक्षों के बीच विवाद हुआ था। बताया गया है कि यह जमीन पहले डबरा निवासी हरीबाबू सेठ की थी, जिसे गुर्जर पक्ष ने खरीद लिया था। इसके बावजूद जमीन पर कब्जे और निर्माण को लेकर दोनों पक्षों के बीच तनाव बना हुआ था। शुक्रवार को बाउंड्री वॉल के निर्माण के दौरान यही विवाद गोलीबारी तक पहुंच गया।

    घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। तलाशी के दौरान संदीप परिहार स्कूल के अंदर घायल अवस्था में मिला। उसके पेट में चार गोलियां लगी थीं। पुलिस उसे ग्वालियर लेकर गई, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटनास्थल पर खड़ी थार गाड़ी पर भी गोलियों के निशान मिले हैं। पुलिस ने इस गाड़ी से करीब 50 कारतूस बरामद किए। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह यादव, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक देहात जयराज कुबेर और आसपास के थानों का पुलिस बल मौके पर पहुंचा। अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और मामले से जुड़े साक्ष्य जुटाए। दूसरे पक्ष के एक युवक के घायल होने की जानकारी की भी चर्चा रही, लेकिन पुलिस की ओर से इसकी पुष्टि नहीं की गई थी।

    मृतक संदीप परिहार के भाई ने विनय गुर्जर, सोनेराम गुर्जर, लालो गुर्जर, बाबा और अन्य लोगों पर गोली मारने का आरोप लगाया है। पुलिस इन आरोपों के आधार पर मामले की जांच कर रही है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक देहात जयराज कुबेर ने बताया कि जमीन विवाद के दौरान गोली लगने से एक युवक की मौत हुई है। उन्होंने कहा कि आरोपियों को गिरफ्तार करने के प्रयास किए जा रहे हैं। घटना के समय तक मामले में प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई थी। पुलिस की जांच में गोलीबारी की परिस्थितियों, बरामद कारतूसों और दोनों पक्षों के बीच जमीन को लेकर चले आ रहे विवाद से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जा रही है।

  • ग्वालियर फ़र्ज़ी पासपोर्ट मामला:डबरा में 20 बांग्लादेशियों के पासपोर्ट का खुलासा, STF ने असम बंगाल तक जांच का दायरा बढ़ाया

    ग्वालियर फ़र्ज़ी पासपोर्ट मामला:डबरा में 20 बांग्लादेशियों के पासपोर्ट का खुलासा, STF ने असम बंगाल तक जांच का दायरा बढ़ाया

    ग्वालियर :जिले के डबरा में 20 बांग्लादेशी नागरिकों के कथित तौर पर फर्जी भारतीय पासपोर्ट तैयार किए जाने का मामला सामने आने के बाद जांच एजेंसियों की सक्रियता बढ़ गई है। स्पेशल टास्क फोर्स यानी STF ने इस मामले में ऐसे नेटवर्क का पता लगाया है, जिसने कथित रूप से एक ही स्थानीय पते का इस्तेमाल कर कई पासपोर्ट तैयार करवाए। मामला सामने आने के बाद दस्तावेजों की जांच के साथ उन लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है, जिन्होंने आवेदन प्रक्रिया में सहयोग किया।

    जांच के अनुसार, इन 20 बांग्लादेशी नागरिकों को डबरा के एक बौद्ध विहार में रहने वाला और बौद्ध धर्म का अनुयायी बताया गया था। सभी पासपोर्ट में एक ही व्यक्ति को गवाह के रूप में दर्ज किए जाने से जांच का दायरा बढ़ गया है। STF ने इसी गवाह रियाल चौधरी को गिरफ्तार किया है। उससे पूछताछ के आधार पर गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटाने का प्रयास किया जा रहा है।

    मामले की जांच में स्थानीय स्तर पर तैयार किए गए कथित फर्जी दस्तावेजों की भूमिका भी सामने आई है। बांग्लादेशी नागरिकों के लिए आधार कार्ड, वोटर आईडी, निवास प्रमाण पत्र और दसवीं की अंकसूची समेत कई दस्तावेज तैयार किए जाने की जानकारी सामने आई है। इन्हीं दस्तावेजों का इस्तेमाल भारतीय पहचान साबित करने और पासपोर्ट के लिए आवेदन करने में किया गया।

    एक ही पते से 20 पासपोर्ट जारी होना जांच का अहम बिंदु बन गया है। पासपोर्ट आवेदन के दौरान आवेदक के पते, पहचान और अन्य विवरणों का सत्यापन किया जाता है। ऐसे में एक ही स्थान से इतने लोगों के दस्तावेज तैयार होने और उनका सत्यापन पूरा होने की प्रक्रिया की भी पड़ताल की जा रही है।

    STF यह पता लगाने में जुटी है कि सत्यापन प्रक्रिया में किसी स्तर पर लापरवाही हुई थी या इसके पीछे किसी व्यक्ति अथवा कर्मचारियों की मिलीभगत थी। जांच में यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की संभावना है। फिलहाल इस पहलू पर जांच जारी है और किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संबंधित दस्तावेजों तथा रिकॉर्ड का मिलान किया जा रहा है।

    जांच में यह भी सामने आया है कि संबंधित पासपोर्ट करीब पांच साल पहले तैयार किए गए थे। इनमें से कुछ पासपोर्ट का इस्तेमाल विदेश यात्राओं के लिए किए जाने की जानकारी मिली है। कुछ संदिग्धों के थाईलैंड, चीन और भूटान सहित अन्य देशों की यात्रा करने की बात सामने आई है। STF अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन यात्राओं का उद्देश्य क्या था और यात्राओं के दौरान इन दस्तावेजों का किस तरह इस्तेमाल किया गया।

    रियाल चौधरी की गिरफ्तारी के बाद 44 अन्य पासपोर्ट भी जांच के दायरे में आ गए हैं। इनमें से कई दस्तावेजों में समान पते और गवाह से जुड़े विवरण मिलने की बात सामने आई है। STF इन सभी रिकॉर्ड की जांच कर यह निर्धारित करने में जुटी है कि उनका संबंध भी इसी नेटवर्क से है या नहीं। एक अन्य संदिग्ध से पूछताछ भी की जा रही है।

    मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए STF ने करीब 10 टीमों को जांच में लगाया है। मध्य प्रदेश में चार टीमें स्थानीय स्तर पर नेटवर्क और संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी जुटा रही हैं, जबकि छह टीमें असम, पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में संभावित संपर्कों की पड़ताल कर रही हैं। जांच का फोकस कथित बिचौलियों, फर्जी दस्तावेज तैयार करने वालों और पासपोर्ट प्रक्रिया में मदद करने वाले लोगों पर है।

    इस मामले ने पहचान और दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया से जुड़े कई सवाल खड़े किए हैं। STF की जांच आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि फर्जी दस्तावेजों का नेटवर्क कितना व्यापक था, इसमें कितने लोग शामिल थे और 20 संदिग्ध पासपोर्ट के अलावा सामने आए 44 अन्य पासपोर्ट का वास्तविक स्वरूप क्या है। जांच पूरी होने के बाद मामले से जुड़े पूरे नेटवर्क और उसकी कार्यप्रणाली की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।