Tag: Dalit politics India

  • सीहोर में दामोदर यादव का तीखा वार सदियों की गुलामी का हिसाब होगा अब बदलने वाली है सियासत

    सीहोर में दामोदर यादव का तीखा वार सदियों की गुलामी का हिसाब होगा अब बदलने वाली है सियासत

    सीहोर । मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के इछावर क्षेत्र में आयोजित एक जनसभा उस वक्त चर्चा का केंद्र बन गई जब आजाद समाज पार्टी के नेता दामोदर यादव ने अपने तीखे और आक्रामक भाषण से सियासी माहौल को गर्म कर दिया बाबा साहेब डॉ भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर ग्राम बरखेड़ा कुर्मी में आयोजित इस कार्यक्रम में देर रात तक लोगों की भारी भीड़ जुटी रही और यादव के भाषण ने पूरे इलाके में राजनीतिक हलचल तेज कर दी

    रात करीब 11 बजे शुरू हुआ यह संबोधन देर रात 1 बजे तक चला जिसमें दामोदर यादव ने अपने खास अंदाज में विरोधियों पर जमकर निशाना साधा उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत स्थानीय बुंदेली और मालवी लहजे से करते हुए लोगों से सीधा संवाद स्थापित किया और फिर सामाजिक न्याय तथा सत्ता में भागीदारी के मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया

    यादव ने कहा कि जो लोग आज उनकी विचारधारा और यात्रा को रोकने की कोशिश कर रहे हैं वे दरअसल समाज में आ रही जागरूकता से डरे हुए हैं उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ राष्ट्रपति और सुप्रीम कोर्ट तक चिट्ठियां भेजी जा रही हैं ताकि उनके आंदोलन को रोका जा सके लेकिन अब यह रुकने वाला नहीं है

    अपने भाषण में उन्होंने सबसे बड़ा संदेश दलित और पिछड़ा वर्ग की एकता को लेकर दिया उन्होंने कहा कि जिस दिन यह दोनों वर्ग एकजुट हो जाएंगे उस दिन देश की राजनीति की दिशा और दशा दोनों बदल जाएंगी उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे अपने अधिकारों के लिए जागरूक हों और अपनी ताकत को पहचानें

    घोड़ी पर चढ़ने को लेकर समाज में होने वाले विवादों पर भी यादव ने तीखा कटाक्ष किया उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने सदियों तक कुछ वर्गों को दबाकर रखा अब वही लोग डर रहे हैं उन्होंने कहा कि समय बदल रहा है और अब जो भेदभाव करेंगे उन्हें जवाब मिलेगा उनका यह बयान सभा में मौजूद लोगों के बीच काफी चर्चा का विषय बना रहा

    दामोदर यादव ने बाबा साहेब डॉ भीमराव अंबेडकर के संघर्ष और उनके योगदान को याद करते हुए लोगों से अपने वोट की ताकत को समझने की अपील की उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सबसे बड़ी शक्ति वोट है और अगर सही तरीके से इसका इस्तेमाल किया जाए तो सत्ता की तस्वीर बदली जा सकती है

    इस कार्यक्रम में भीम युवा संगठन और आजाद समाज पार्टी के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में शामिल हुए आसपास के गांवों से भी लोग देर रात तक कार्यक्रम में डटे रहे और पूरा माहौल जय भीम के नारों से गूंजता रहा

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सीहोर जिले में आजाद समाज पार्टी लगातार अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है और इस तरह की आक्रामक सभाएं आने वाले चुनावों की रणनीति का हिस्सा हो सकती हैं दामोदर यादव के इस भाषण को भी उसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है

  • BSP सुप्रीमो का सरकार पर हमला: 'अच्छे दिन' केवल कागजों पर, बहुजनों को SIR के लिए एकजुट होने को कहा

    BSP सुप्रीमो का सरकार पर हमला: 'अच्छे दिन' केवल कागजों पर, बहुजनों को SIR के लिए एकजुट होने को कहा


    नई दिल्ली/लखनऊ। बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की पुण्यतिथि महापरिनिर्वाण दिवस के अवसर पर बसपा सुप्रीमो मायावती ने बहुजन समाज की स्थिति, सामाजिक न्याय और राजनीतिक अधिकारों को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाया। उन्होंने कहा कि आज भी देश के करोड़ों बहुजन नागरिकों को वह सम्मान, समानता और अधिकार नहीं प्राप्त हुए हैं जिनकी कल्पना बाबा साहेब ने भारत का संविधान तैयार करते समय की थी।मायावती ने तीखे शब्दों में पूछा-जब बाकी क्षेत्रों में बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं तो बहुजनों के आत्मसम्मान और जीवन-सुधार से जुड़े ‘अच्छे दिन’ अब तक क्यों नहीं आए?

    दिल्ली में श्रद्धांजलि, संदेश में गंभीरता
    मायावती ने नई दिल्ली स्थित अपने आवास पर बाबा साहेब को पुष्प अर्पित किए और दो मिनट का मौन रखकर उन्हें याद किया। उन्होंने कहा कि हर साल इस दिन राष्ट्र को यह सोचना चाहिए कि क्या हम अंबेडकर के सपनों का भारत बना पाए हैं? उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस, तथा अंबेडकर जयंती जैसे अवसरों पर यह प्रश्न हमेशा उठेगा कि क्या सामाजिक न्याय पर आधारित वास्तविक समग्र और मानवीय अच्छे दिन कभी आएंगे? मायावती ने यह भी याद दिलाया कि उत्तर प्रदेश में बसपा सरकार के कार्यकाल में बहुजनों के सम्मान और सामाजिक उन्नति के लिए कई ऐसे फैसले लिए गए जो इतिहास में दर्ज हैं। उनके अनुसार जब सरकार की नीयत साफ हो और नीति स्पष्ट हो तब समाज में वास्तविक परिवर्तन संभव होता है।

    मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया SIR में सक्रिय भागीदारी का आग्रह


    महापरिनिर्वाण दिवस पर दिए गए अपने संदेश में मायावती ने बहुजन समाज से आग्रह किया कि वे SIR-मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया में सक्रियता दिखाएं। उन्होंने कहा कि बहुजन समाज की राजनीतिक शक्ति तभी प्रभावी हो सकती है जब हर योग्य व्यक्ति मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराए।उन्होंने चेताया कि कई बार नाम छूटने या गलत विवरण के कारण बहुजन समाज के लोगों को अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का पूर्ण उपयोग करने से वंचित होना पड़ता है। इसलिए SIR प्रक्रिया में भागीदारी केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि बहुजनों की राजनीतिक सशक्तिकरण का आवश्यक हिस्सा है।

    रुपये के अवमूल्यन पर चिंता

    अपने बयान में मायावती ने देश की आर्थिक स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की। खासकर रुपये के लगातार गिरते मूल्य को लेकर उन्होंने कहा कि सरकार को केवल विशेषज्ञों की सलाह पर निर्भर न रहकर स्वयं हस्तक्षेप कर स्थिति को स्थिर करने के निर्णायक कदम उठाने चाहिए। उन्होंने कहा कि आर्थिक अस्थिरता का सबसे अधिक बोझ गरीबों, मजदूरों और वंचित वर्गों पर पड़ता है-और इन्हीं वर्गों की रक्षा करने का दावा सरकारें सबसे अधिक करती हैं।

    देशभर में श्रद्धांजलि समारोह
    महापरिनिर्वाण दिवस के कार्यक्रम पूरे देश में बड़े पैमाने पर आयोजित किए गए। लखनऊ के अंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल पर सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग जुटने लगे। वहीं नोएडा के दलित प्रेरणा स्थल पर बसपा कार्यकर्ताओं अनुयायियों और आम नागरिकों का विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ा।कार्यक्रमों में बाबा साहेब के विचारों को दोहराया गया और संविधान में दिए गए सामाजिक न्याय, समान अधिकारों और अवसरों की संवैधानिक व्यवस्था को मजबूत करने के संकल्प लिए गए।नोएडा में बसपा के राष्ट्रीय समन्वयक आकाश आनंद ने भी बाबा साहेब की प्रतिमा पर फूल चढ़ाकर उन्हें याद किया और कहा कि समाज को आगे बढ़ाने के लिए संगठन की जिम्मेदारी बढ़ जाती है।

    जातिवादी राजनीति पर निशाना

    मायावती ने अपने बयान में यह भी कहा कि देश की मुख्यधारा की कई राजनीतिक पार्टियों की जातिवादी मानसिकता बहुजनों के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा है। उनके अनुसार, राजनीतिक सत्ता की मास्टर चाबी बहुजनों के हाथ में न आए इसके लिए तरह-तरह के हथकंडों का इस्तेमाल किया जाता रहा है। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब के मिशन की सच्ची पूर्ति तभी होगी जब बहुजन समाज अपनी सामूहिक शक्ति को पहचानकर लोकतांत्रिक ढंग से संगठित होगा।

    एक स्पष्ट और मजबूत संदेश

    महापरिनिर्वाण दिवस पर मायावती का यह वक्तव्य केवल श्रद्धांजलि भर नहीं बल्कि बहुजन समाज को राजनीतिक रूप से जागरूक और संगठित होने का आह्वान भी है। उनका संदेश यह स्पष्ट करता है कि आने वाले समय में सामाजिक न्याय, बहुजन अधिकार, और राजनीतिक सक्रियता पर बसपा और अधिक जोर देने वाली है।