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  • 11 या 12 अगस्त, कब लगेगा साल का दूसरा सूर्य ग्रहण ? जानें भारत में दिखेगा या नहीं

    11 या 12 अगस्त, कब लगेगा साल का दूसरा सूर्य ग्रहण ? जानें भारत में दिखेगा या नहीं


    नई दिल्ली। वर्ष 2026 का दूसरा और पूर्ण सूर्य ग्रहण 12 अगस्त को लगेगा। यह खगोलीय घटना विज्ञान और ज्योतिष, दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस दौरान चंद्रमा पूरी तरह सूर्य को ढक लेगा, जिससे पृथ्वी के कुछ हिस्सों में दिन के समय अंधकार छा जाएगा। हालांकि, यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां सूतक काल प्रभावी नहीं माना जाएगा।

    कब लगेगा सूर्य ग्रहण?
    समय क्षेत्र (टाइम जोन) के अंतर के कारण कुछ देशों में यह ग्रहण 11 अगस्त की तारीख में दिखाई दे सकता है, लेकिन भारतीय समय (IST) के अनुसार यह 12 अगस्त 2026 को लगेगा। इसलिए भारत में इसकी मान्य तिथि 12 अगस्त ही होगी।

    सूर्य ग्रहण का समय (भारतीय समय)
    ग्रहण प्रारंभ: रात 9:04 बजे
    चरम (पीक): रात 11:17 बजे
    ग्रहण समाप्त: देर रात 1:27 बजे (13 अगस्त)

    कहां दिखाई देगा पूर्ण सूर्य ग्रहण?
    यह पूर्ण सूर्य ग्रहण मुख्य रूप से इन क्षेत्रों में दिखाई देगा—
    ग्रीनलैंड
    आइसलैंड
    स्पेन
    रूस
    अटलांटिक महासागर के कुछ हिस्से
    इसके अलावा यूरोप के अधिकांश देशों, उत्तरी अमेरिका के कुछ क्षेत्रों और उत्तर-पश्चिमी अफ्रीका में यह आंशिक सूर्य ग्रहण के रूप में देखा जा सकेगा।

    क्या भारत में दिखाई देगा?
    नहीं। यह सूर्य ग्रहण भारत में दृश्यमान नहीं होगा, क्योंकि भारतीय समय के अनुसार यह रात में घटित होगा। इसलिए देश में इसे देखा नहीं जा सकेगा।

    क्या भारत में सूतक काल लगेगा?
    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य ग्रहण से 12 घंटे पहले सूतक काल शुरू होता है। लेकिन चूंकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां सूतक काल मान्य नहीं होगा। मंदिरों के कपाट सामान्य रूप से खुले रहेंगे और पूजा-पाठ व अन्य मांगलिक कार्यों पर कोई प्रतिबंध नहीं रहेगा।

    ज्योतिषीय महत्व
    ज्योतिष के अनुसार यह ग्रहण सिंह राशि और मघा नक्षत्र में लगेगा। सिंह राशि के स्वामी स्वयं सूर्य हैं, इसलिए इस राशि के जातकों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार ग्रहण का प्रभाव वैश्विक स्तर पर मौसम, प्राकृतिक घटनाओं और राजनीतिक परिस्थितियों पर भी पड़ सकता है।

    ग्रहण के बाद क्या करें?
    – भगवान शिव या अपने इष्ट देव का स्मरण और मंत्र जाप करना शुभ माना जाता है।
    – ग्रहण समाप्त होने के बाद गेहूं, गुड़, तांबे के बर्तन या लाल वस्त्र का दान करना धार्मिक दृष्टि से लाभकारी माना जाता है।

  • सदी का सबसे लंबा सूर्य ग्रहण: छह मिनट 23 सेकंड तक दिन में छाएगा अंधेरा

    सदी का सबसे लंबा सूर्य ग्रहण: छह मिनट 23 सेकंड तक दिन में छाएगा अंधेरा

    नई दिल्ली। 2 अगस्त 2027 को दुनिया एक बेहद दुर्लभ खगोलीय घटना की गवाह बनेगी। इस दिन 21वीं सदी का सबसे लंबा पूर्ण सूर्य ग्रहण दिखाई देगा। ग्रहण के दौरान चंद्रमा पूरी तरह सूर्य को ढक लेगा और पृथ्वी के कुछ हिस्सों में दिन के समय करीब 6 मिनट 23 सेकंड तक पूर्ण अंधेरा रहेगा।
    खगोलविद इसे इस सदी की सबसे महत्वपूर्ण और दुर्लभ खगोलीय घटनाओं में से एक मान रहे हैं।

    क्यों खास है यह सूर्य ग्रहण?
    यह पूर्ण सूर्य ग्रहण अटलांटिक महासागर से शुरू होकर दक्षिणी स्पेन, जिब्राल्टर, उत्तरी अफ्रीका और मध्य-पूर्व के कई हिस्सों से गुजरेगा। इसका सबसे लंबा पूर्ण चरण मिस्र के लक्सर के आसपास देखा जाएगा, जहां लगभग 6 मिनट 23 सेकंड तक सूर्य पूरी तरह चंद्रमा से ढका रहेगा।

    इतनी लंबी अवधि का पूर्ण सूर्य ग्रहण जमीन से देखने का अवसर बेहद दुर्लभ होता है। यही वजह है कि दुनिया भर के वैज्ञानिक, खगोल फोटोग्राफर और लाखों स्काई-वॉचर्स इस घटना का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

    इतना लंबा ग्रहण क्यों होगा?

    इस ग्रहण की असाधारण अवधि के पीछे पृथ्वी, चंद्रमा और सूर्य की विशेष खगोलीय स्थिति जिम्मेदार होगी।

    ग्रहण के समय चंद्रमा पृथ्वी के अपेक्षाकृत करीब होगा, इसलिए उसका दृश्य आकार बड़ा दिखाई देगा।
    उसी समय पृथ्वी सूर्य से लगभग अपनी अधिकतम दूरी (एपहेलियन) के पास होगी, जिससे सूर्य सामान्य से थोड़ा छोटा दिखाई देगा।
    इन दोनों परिस्थितियों के कारण चंद्रमा सूर्य को अधिक समय तक पूरी तरह ढक सकेगा और पूर्ण ग्रहण की अवधि सामान्य ग्रहणों की तुलना में काफी लंबी होगी।
    किन देशों में दिखाई देगा?

    पूर्ण सूर्य ग्रहण का मार्ग हजारों किलोमीटर लंबा होगा।

    यह इन क्षेत्रों से होकर गुजरेगा।

    अटलांटिक महासागर
    दक्षिणी स्पेन
    जिब्राल्टर
    मोरक्को
    अल्जीरिया
    ट्यूनीशिया
    लीबिया
    मिस्र
    सूडान
    सऊदी अरब
    यमन
    सोमालिया

    मिस्र के लक्सर और न्यू वैली क्षेत्र को ग्रहण देखने के लिए सबसे बेहतरीन स्थान माना जा रहा है।

    भारत में यह पूर्ण सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा।

    पूर्ण ग्रहण के दौरान क्या-क्या दिखाई देगा?
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    पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान कुछ मिनटों के लिए दिन का उजाला शाम जैसा महसूस होगा। इस दौरान कई दुर्लभ खगोलीय दृश्य देखने को मिल सकते हैं-

    सूर्य का बाहरी चमकीला वातावरण कोरोना स्पष्ट दिखाई देगा।
    तापमान में कुछ समय के लिए गिरावट महसूस हो सकती है।

    आकाश में चमकीले ग्रह और कुछ तारे भी नजर आ सकते हैं।
    बेलीज़ बीड्स (Baily’s Beads) प्रभाव दिखाई देगा, जब सूर्य की किरणें चंद्रमा की घाटियों से छनकर आती हैं।
    डायमंड रिंग इफेक्ट (Diamond Ring Effect) भी दिखाई देगा, जो पूर्ण सूर्य ग्रहण के सबसे आकर्षक दृश्यों में गिना जाता है।
    वैज्ञानिकों के लिए क्यों अहम है?

    पूर्ण सूर्य ग्रहण केवल एक सुंदर प्राकृतिक घटना नहीं, बल्कि वैज्ञानिक अध्ययन का भी महत्वपूर्ण अवसर होता है। इस दौरान वैज्ञानिक सूर्य के कोरोना, सौर चुंबकीय गतिविधियों और पृथ्वी के वायुमंडल पर पड़ने वाले प्रभावों का विस्तृत अध्ययन करते हैं। इसी वजह से 2 अगस्त 2027 का यह ग्रहण खगोल विज्ञान के इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना माना जा रहा है।