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  • भारत में डेटा सेंटर का बढ़ता जाल, 2030 तक लाखों नौकरियों और रियल एस्टेट में आएगा बड़ा बदलाव

    भारत में डेटा सेंटर का बढ़ता जाल, 2030 तक लाखों नौकरियों और रियल एस्टेट में आएगा बड़ा बदलाव

    नई दिल्ली । भारत में डिजिटल सेवाओं के तेजी से विस्तार के बीच डेटा सेंटर परियोजनाएं आने वाले वर्षों में रोजगार, बुनियादी ढांचे और रियल एस्टेट क्षेत्र के विकास का बड़ा आधार बन सकती हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार देश में प्रस्तावित लगभग 9,030 मेगावाट क्षमता वाली डेटा सेंटर परियोजनाएं वर्ष 2030 तक करीब 4.33 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार अवसर पैदा कर सकती हैं। इसके अलावा इन परियोजनाओं के आसपास आवासीय क्षेत्र में भी बड़ी मांग उत्पन्न होने का अनुमान लगाया गया है।

    डेटा सेंटर आधुनिक डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं, क्योंकि इनमें इंटरनेट सेवाओं, क्लाउड कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बड़े पैमाने पर डिजिटल डेटा को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी तकनीकी ढांचा तैयार किया जाता है। भारत में डिजिटल गतिविधियों के बढ़ने के साथ डेटा स्टोरेज और प्रोसेसिंग की जरूरत लगातार बढ़ रही है, जिससे इस क्षेत्र में निवेश को गति मिल रही है।

    रिपोर्ट के मुताबिक भारत वर्तमान में दुनिया के कुल डिजिटल डेटा का लगभग 20 प्रतिशत तैयार करता है, लेकिन वैश्विक डेटा सेंटर क्षमता में देश की हिस्सेदारी करीब 4 प्रतिशत ही है। यह अंतर बताता है कि भारत में डेटा सेंटर अवसंरचना के विस्तार की काफी संभावनाएं मौजूद हैं। आने वाले वर्षों में डिजिटल सेवाओं की मांग बढ़ने के साथ इस क्षेत्र में बड़े निवेश की उम्मीद जताई जा रही है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि डेटा सेंटर केवल तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं रहते, बल्कि इनके निर्माण और संचालन से आसपास के क्षेत्रों में कई अन्य गतिविधियां भी विकसित होती हैं। बिजली आपूर्ति व्यवस्था, फाइबर नेटवर्क, लॉजिस्टिक्स, सुरक्षा सेवाएं और अन्य व्यावसायिक सुविधाओं का विस्तार होता है, जिससे नए आर्थिक केंद्रों का विकास शुरू हो जाता है।

    रिपोर्ट में कहा गया है कि डेटा सेंटर परियोजनाओं का असर लंबे समय तक रहने वाला है। इन परियोजनाओं के आसपास रोजगार बढ़ने के साथ आवासीय मांग भी तेजी से बढ़ सकती है। अनुमान के अनुसार डेटा सेंटर परिसरों के आसपास 5 से 15 किलोमीटर का क्षेत्र सबसे अधिक लाभान्वित हो सकता है। इन क्षेत्रों में सड़क, बिजली और संचार सुविधाओं के विकास के साथ आवासीय टाउनशिप, खुदरा बाजार और अन्य नागरिक सुविधाओं का विस्तार होने की संभावना है।

    डेटा सेंटर आधारित विकास को रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए भी एक नए अवसर के रूप में देखा जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2030 तक इन परियोजनाओं के कारण देश में लगभग 19.5 करोड़ वर्गफुट अतिरिक्त आवासीय मांग पैदा हो सकती है। इससे नए विकास क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

    राज्यों के स्तर पर महाराष्ट्र को इसका सबसे अधिक फायदा मिलने का अनुमान लगाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार महाराष्ट्र में डेटा सेंटर निवेश के कारण करीब 5.4 करोड़ वर्गफुट से अधिक आवासीय मांग पैदा हो सकती है। इसके बाद कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु जैसे राज्यों में भी बड़े अवसर बनने की संभावना जताई गई है।

    विशेषज्ञों के अनुसार भारत में पहले राजमार्ग, औद्योगिक गलियारे, हवाई अड्डे और आईटी पार्क आर्थिक विकास के प्रमुख केंद्र रहे हैं। अब डेटा सेंटर इस विकास यात्रा का नया आधार बन सकते हैं। इनके लिए जरूरी बिजली, इंटरनेट कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क में निवेश बढ़ने से उद्योगों और निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा।

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड सेवाओं और डिजिटल कारोबार के विस्तार के साथ डेटा सेंटर क्षेत्र आने वाले समय में भारत की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। रोजगार सृजन के साथ-साथ यह क्षेत्र नए शहरी विकास क्षेत्रों को भी आकार देने वाला प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर केंद्र बन सकता है।

  • रिलायंस की हिस्सेदारी वाली HFCL को विदेश से ₹496 करोड़ का बड़ा ऑर्डर, डेटा सेंटर कनेक्टिविटी कारोबार में मिली नई रफ्तार, निवेशकों का भरोसा और मजबूत

    रिलायंस की हिस्सेदारी वाली HFCL को विदेश से ₹496 करोड़ का बड़ा ऑर्डर, डेटा सेंटर कनेक्टिविटी कारोबार में मिली नई रफ्तार, निवेशकों का भरोसा और मजबूत

    नई दिल्ली । रिलायंस इंडस्ट्रीज की हिस्सेदारी वाली टेक्नोलॉजी कंपनी एचएफसीएल को अंतरराष्ट्रीय बाजार से करीब 496 करोड़ रुपये का बड़ा एक्सपोर्ट ऑर्डर मिलने के बाद कंपनी एक बार फिर निवेशकों और उद्योग जगत के केंद्र में आ गई है। इस नए अनुबंध के साथ कंपनी के डेटा सेंटर कनेक्टिविटी कारोबार को महत्वपूर्ण मजबूती मिलने की उम्मीद है। बाजार में इस घोषणा का सकारात्मक असर देखने को मिला और कारोबार के दौरान कंपनी के शेयरों में उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई। निवेशकों ने इस ऑर्डर को कंपनी की वैश्विक क्षमता और भविष्य की विकास संभावनाओं का मजबूत संकेत माना।

    कंपनी की विदेशी सहायक इकाई को मिले इस अनुबंध के तहत डेटा सेंटर के लिए ऑप्टिकल फाइबर केबल आधारित कनेक्टिविटी सॉल्यूशन की आपूर्ति की जाएगी। आधुनिक डेटा सेंटरों में तेज, सुरक्षित और भरोसेमंद डेटा ट्रांसमिशन की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का अहम हिस्सा बन चुका है। इस ऑर्डर से एचएफसीएल की तकनीकी विशेषज्ञता और उच्च गुणवत्ता वाले नेटवर्क समाधान की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती स्वीकार्यता भी सामने आई है।

    कंपनी का कहना है कि यह अनुबंध उसके वैश्विक ग्राहकों के विश्वास को दर्शाता है। एचएफसीएल ने वर्षों के दौरान अपनी विनिर्माण क्षमता, अनुसंधान और तकनीकी नवाचार के आधार पर दूरसंचार और नेटवर्किंग क्षेत्र में मजबूत पहचान बनाई है। कंपनी का लक्ष्य निर्धारित समय सीमा के भीतर इस परियोजना को पूरा करना है और इसके दिसंबर 2026 तक पूरा होने की उम्मीद जताई गई है। समय पर डिलीवरी और गुणवत्ता बनाए रखना कंपनी की प्राथमिकता रहेगी।

    एचएफसीएल दूरसंचार, ऑप्टिकल फाइबर, नेटवर्किंग और रक्षा क्षेत्र में सक्रिय प्रमुख भारतीय कंपनियों में शामिल है। कंपनी ऑप्टिकल फाइबर केबल, टेलीकॉम उपकरण, वायरलेस संचार समाधान और रक्षा संबंधी तकनीकी उत्पादों का डिजाइन, विकास और निर्माण करती है। भारत में डिजिटल कनेक्टिविटी के विस्तार, 5जी नेटवर्क और डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती मांग ने कंपनी के कारोबार को नई गति प्रदान की है। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी इसके उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है।

    रिलायंस इंडस्ट्रीज अपनी निवेश इकाइयों के माध्यम से एचएफसीएल में हिस्सेदारी रखती है। दोनों कंपनियों के बीच लंबे समय से कारोबारी संबंध रहे हैं और दूरसंचार नेटवर्क तथा ऑप्टिकल फाइबर परियोजनाओं में एचएफसीएल महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही है। डिजिटल सेवाओं और हाई-स्पीड नेटवर्क की बढ़ती जरूरतों के बीच इस तरह के अनुबंध भविष्य में भी कंपनी के लिए नए अवसर पैदा कर सकते हैं।

    शेयर बाजार में भी इस घोषणा का सकारात्मक असर देखने को मिला। कारोबार के दौरान कंपनी के शेयरों में अच्छी तेजी दर्ज की गई और निवेशकों का रुझान मजबूत बना रहा। हाल के महीनों में एचएफसीएल के शेयरों ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। पिछले एक महीने से लेकर एक वर्ष और तीन वर्षों की अवधि तक कंपनी ने निवेशकों को आकर्षक रिटर्न दिया है। बेहतर ऑर्डर बुक, मजबूत तकनीकी क्षमता और वैश्विक विस्तार की रणनीति को बाजार सकारात्मक संकेत के रूप में देख रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया भर में डेटा सेंटर, क्लाउड कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और हाई-स्पीड डिजिटल नेटवर्क की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे माहौल में ऑप्टिकल फाइबर आधारित कनेक्टिविटी समाधान उपलब्ध कराने वाली कंपनियों के लिए नए अवसर तैयार हो रहे हैं। एचएफसीएल को मिला यह बड़ा अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर न केवल कंपनी के कारोबार को नई मजबूती देगा, बल्कि भारत की तकनीकी विनिर्माण क्षमता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में उसकी बढ़ती हिस्सेदारी का भी महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।