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  • दतिया हार पर भाजपा का बड़ा मंथन, सीएम आवास में समीक्षा बैठक, संगठन में सख्ती की तैयारी

    दतिया हार पर भाजपा का बड़ा मंथन, सीएम आवास में समीक्षा बैठक, संगठन में सख्ती की तैयारी


    दतिया । दतिया विधानसभा उपचुनाव में 6016 वोटों से मिली हार के बाद भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक स्तर पर व्यापक समीक्षा शुरू कर दी है। मंगलवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के आवास पर महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है जिसमें प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सहित चुनाव से जुड़े मंत्री, पदाधिकारी और संगठन के प्रमुख नेता शामिल होंगे। इस बैठक में हार के कारणों का विश्लेषण करने के साथ-साथ संगठन की कार्यप्रणाली, चुनावी रणनीति और भीतरघात की शिकायतों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

    पार्टी सूत्रों के अनुसार समीक्षा बैठक में उपचुनाव के प्रभारी भारत सिंह कुशवाह, प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी, उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, मंत्री राव उदय प्रताप सिंह, राकेश शुक्ला सहित करीब दो दर्जन वरिष्ठ नेता मौजूद रहेंगे। बैठक में चुनावी प्रबंधन की हर स्तर पर समीक्षा होगी और यह भी देखा जाएगा कि किन कारणों से पार्टी अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सकी।

    सूत्रों का कहना है कि दतिया शहर में भाजपा को बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी लेकिन वहां कांग्रेस ने बढ़त बना ली जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में भाजपा को अपेक्षाकृत बेहतर समर्थन मिला। संगठन की प्रारंभिक रिपोर्ट में कुछ पार्षदों पर पार्टी विरोधी गतिविधियों और भीतरघात के आरोप सामने आए हैं। इन्हीं शिकायतों के आधार पर दर्जनभर पार्षदों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई पर भी विचार किया जा सकता है। समीक्षा बैठक के बाद इस संबंध में अंतिम निर्णय लिया जा सकता है।

    हार के बाद पार्टी के भीतर भी आत्ममंथन की आवाजें तेज हो गई हैं। पूर्व मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर आत्ममंथन का समय बताते हुए दतिया उपचुनाव का उल्लेख किया। वहीं टीकमगढ़ जिला पंचायत अध्यक्ष उमिता राहुल सिंह ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि जब कार्यकर्ताओं की जगह अधिकारी खुद को शीर्ष नेतृत्व तक सीधी पहुंच वाला बताने लगते हैं तब चुनाव परिणाम प्रभावित होना स्वाभाविक है। उनके इस बयान को भी संगठन के भीतर चल रही चर्चा से जोड़कर देखा जा रहा है।

    भाजपा संगठन जिलाध्यक्ष रघुवीर कुशवाह सहित कुछ स्थानीय पदाधिकारियों के खिलाफ मिली शिकायतों की रिपोर्ट भी तैयार कर रहा है। बताया जा रहा है कि यह रिपोर्ट प्रदेश नेतृत्व के माध्यम से केंद्रीय संगठन तक भेजी जा सकती है ताकि आगे की रणनीति तय की जा सके।

    पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने टिकट नहीं मिलने के बावजूद भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के समर्थन में पूरे चुनाव अभियान में सक्रिय भूमिका निभाई थी। हालांकि पार्टी के भीतर यह आकलन किया जा रहा है कि प्रत्याशी बदलने के बाद संगठन के सभी कार्यकर्ता पूरी मजबूती से एकजुट नहीं हो पाए और इसका असर चुनाव परिणाम पर दिखाई दिया।

    समीक्षा बैठक में सोशल मीडिया की भूमिका भी जांच के दायरे में रहेगी। चुनाव के दौरान वायरल हुए कथित फर्जी पत्रों और भ्रामक पोस्ट की जांच कराई जाएगी। संगठन ऐसे लोगों की सूची भी तैयार कर रहा है जिन्होंने इन पोस्ट को प्रसारित किया था ताकि उनकी भूमिका स्पष्ट की जा सके।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि लोकतंत्र में जनता का निर्णय सर्वोपरि होता है और भाजपा जनादेश को पूरी विनम्रता के साथ स्वीकार करती है। वहीं प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि पार्टी हार की तथ्यपरक समीक्षा करेगी और भविष्य की चुनावी रणनीति को और अधिक मजबूत बनाया जाएगा ताकि आगामी चुनावों में बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित किया जा सके।

  • दतिया उपचुनाव में दोपहर 3 बजे तक 61.99% मतदान, कांग्रेस-बीजेपी कर रही अपनी-अपनी जीत का दावा

    दतिया उपचुनाव में दोपहर 3 बजे तक 61.99% मतदान, कांग्रेस-बीजेपी कर रही अपनी-अपनी जीत का दावा

    दतिया। दतिया विधानसभा उपचुनाव में गुरुवार को मतदान उत्साहपूर्ण माहौल में जारी है। 3 बजे तक 61.99 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। जिले के 291 मतदान केंद्रों पर कुल 2 लाख 20 हजार 400 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के कई मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं।

    इस बीच कांग्रेस ने सिरोल क्षेत्र के एक मतदान केंद्र पर मतदान प्रक्रिया में गड़बड़ी की आशंका जताई। पार्टी प्रत्याशी घनश्याम सिंह स्वयं मौके पर पहुंचे और निर्वाचन अधिकारियों से बातचीत कर निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने की मांग की।

    वहीं, कांग्रेस के आरोपों पर पूर्व गृहमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस चुनाव हारने की आशंका के चलते बेबुनियाद आरोप लगा रही है। उन्होंने कहा कि यह पार्टी की हताशा और निराशा को दर्शाता है।

    ठाकुरपुरा के बूथ संख्या-275 पर कुल 841 मतदाता हैं। यहां दोपहर 3:30 बजे तक करीब 82 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। पिछले विधानसभा चुनाव में इसी बूथ पर लगभग 98 प्रतिशत मतदान हुआ था।

    कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने डबरा में दावा किया कि दतिया में प्रशासनिक दबाव और धनबल का इस्तेमाल किया गया, लेकिन इसके बावजूद जनता कांग्रेस के पक्ष में मतदान कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह बड़ी बढ़त के साथ चुनाव जीतेंगे और पार्टी को करीब 25 हजार वोटों से विजय मिलेगी।

    उधर, कांग्रेस ने यह भी दावा किया कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए पार्टी कार्यकर्ता शिवपुरी सीमा पर सक्रिय हैं और दतिया की जनता प्रदेश की “सरकारी अराजकता” का लोकतांत्रिक जवाब देने के लिए मतदान कर रही है।

    मतदान के दौरान मौसम ने भी करवट बदली। दतिया शहर के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश हुई, जिसके बाद तेज धूप निकलने से उमस बढ़ गई। मौसम की चुनौती के बावजूद मतदान केंद्रों पर मतदान प्रक्रिया लगातार जारी रही।

  • दतिया उपचुनाव में भावुक हुए नरोत्तम मिश्रा सीएम मोहन यादव ने संभाला कहा घर घर जाकर आशुतोष तिवारी को जिताऊंगा

    दतिया उपचुनाव में भावुक हुए नरोत्तम मिश्रा सीएम मोहन यादव ने संभाला कहा घर घर जाकर आशुतोष तिवारी को जिताऊंगा


    मध्य प्रदेश। दतिया विधानसभा उपचुनाव की सियासी सरगर्मियों के बीच भाजपा की नामांकन रैली उस समय भावनात्मक मोड़ पर पहुंच गई जब पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा मंच से संबोधन करते हुए भावुक हो गए। भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के समर्थन में आयोजित जनसभा में अपने भाषण के अंतिम चरण में उनकी आंखें नम हो गईं और वे हाथ जोड़कर कार्यकर्ताओं के सामने खड़े रहे। मंच पर मौजूद मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने उनके कंधे पर हाथ रखकर उनका हौसला बढ़ाया जबकि प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भी उन्हें संभाला। इस घटनाक्रम ने रैली में मौजूद कार्यकर्ताओं को भी भावुक कर दिया।

    अपने संबोधन में नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि वह 16 जुलाई से दतिया में ही डेरा डालेंगे और कार्यकर्ताओं के साथ गांव गांव तथा घर घर जाकर भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के पक्ष में जनसंपर्क करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रत्येक मतदाता के दरवाजे पर जाकर आशीर्वाद मांगेंगे और पूरी ताकत के साथ चुनाव अभियान को आगे बढ़ाएंगे। उनके इस संकल्प पर सभा में मौजूद कार्यकर्ताओं ने जोरदार समर्थन जताया।

    रैली के दौरान नरोत्तम मिश्रा ने कांग्रेस और उसके नेताओं पर भी तीखे राजनीतिक हमले किए। उन्होंने कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के उस बयान का जवाब दिया जिसमें भाजपा की हार को अहंकार से जोड़ा गया था। मिश्रा ने कहा कि यदि कुछ हजार वोटों से हारने वाले अहंकारी कहलाते हैं तो बड़े अंतर से हारने वालों के लिए क्या कहा जाएगा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जनता ही लोकतंत्र में अंतिम फैसला करती है और वही सही मूल्यांकन करती है।

    उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी को भी खुली चुनौती देते हुए कहा कि यदि उनमें दम है तो दतिया उपचुनाव मैदान में उतरकर भाजपा प्रत्याशी का सामना करें। उनका कहना था कि चुनावी मैदान ही तय करेगा कि जनता किसे स्वीकार करती है और किसे नकारती है। इस बयान के बाद रैली में मौजूद कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए भाजपा के पक्ष में माहौल बनाया।

    नरोत्तम मिश्रा ने अपने भाषण में भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी की पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए उन्हें समर्पित कार्यकर्ता बताया। उन्होंने कहा कि आशुतोष तिवारी ने संगठन के लिए लंबे समय तक जमीन पर काम किया है और पार्टी के सिद्धांतों को अपने जीवन में उतारा है। उन्होंने कहा कि भाजपा का कार्यकर्ता पद और प्रतिष्ठा से नहीं बल्कि सेवा और समर्पण से पहचान बनाता है। यही कारण है कि संगठन ने एक कर्मठ कार्यकर्ता को उम्मीदवार बनाया है।

    सभा के दौरान उन्होंने दतिया उपचुनाव को केवल राजनीतिक मुकाबला नहीं बल्कि विचारधारा और कार्यकर्ता संस्कृति की लड़ाई बताया। उन्होंने कहा कि एक ओर राजनीतिक विरासत का दावा करने वाले लोग हैं तो दूसरी ओर संगठन और समाज सेवा के बल पर आगे बढ़ने वाले कार्यकर्ता हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे पूरी ऊर्जा और एकजुटता के साथ चुनाव मैदान में उतरें और भाजपा प्रत्याशी को रिकॉर्ड मतों से विजयी बनाएं।

    दतिया उपचुनाव को लेकर भाजपा ने पूरी ताकत झोंक दी है और शीर्ष नेतृत्व लगातार चुनाव प्रचार में सक्रिय दिखाई दे रहा है। नामांकन रैली में उमड़ी भीड़ और मंच पर दिखाई दिया भावनात्मक दृश्य इस चुनाव को और अधिक चर्चा का विषय बना गया है।

  • दतिया की चुनावी बिसात पर जातियों का गणित किसके पक्ष में जाएगा ब्राह्मण जाटव और ओबीसी वोटरों पर टिकी सभी दलों की नजर

    दतिया की चुनावी बिसात पर जातियों का गणित किसके पक्ष में जाएगा ब्राह्मण जाटव और ओबीसी वोटरों पर टिकी सभी दलों की नजर


    मध्य प्रदेश मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव ने प्रदेश की राजनीति को फिर गर्मा दिया है। 30 जुलाई को होने वाले मतदान और 3 अगस्त को मतगणना से पहले सभी राजनीतिक दल अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुट गए हैं। इस बार चुनाव का सबसे बड़ा आधार जातीय समीकरण माना जा रहा है क्योंकि यहां किसी एक वर्ग के भरोसे जीत हासिल करना आसान नहीं माना जा रहा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ओबीसी ब्राह्मण अनुसूचित जाति और मुस्लिम मतदाताओं का रुख ही चुनावी परिणाम तय करेगा।

    दतिया विधानसभा क्षेत्र में सबसे बड़ा वोट बैंक अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी का है। अनुमानित तौर पर करीब 95 हजार ओबीसी मतदाता हैं जो कुल वोटरों का लगभग 53 प्रतिशत हिस्सा माने जाते हैं। इस वर्ग में यादव कुशवाहा काछी लोधी बघेल पाल समेत कई प्रभावशाली समुदाय शामिल हैं। यही वजह है कि सभी दल इस वर्ग को साधने की रणनीति पर सबसे अधिक जोर दे रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि ओबीसी मतदाता किसी एक दल के पक्ष में एकजुट हो जाते हैं तो मुकाबले की दिशा पूरी तरह बदल सकती है।

    जातीय समीकरणों में ब्राह्मण और अहिरवार समाज भी सबसे प्रभावशाली माने जा रहे हैं। दोनों समुदायों की अनुमानित संख्या करीब 33 33 हजार बताई जाती है। परंपरागत रूप से ब्राह्मण मतदाताओं का झुकाव भाजपा की ओर माना जाता है जबकि अनुसूचित जाति विशेषकर अहिरवार समाज में कांग्रेस का प्रभाव मजबूत रहा है। ऐसे में इन दोनों वर्गों का रुझान इस उपचुनाव का सबसे अहम फैक्टर बन सकता है।

    सामान्य वर्ग के मतदाताओं की संख्या भी लगभग 60 हजार बताई जा रही है। इसमें ब्राह्मणों के अलावा बनिया राजपूत कायस्थ और सिंधी समाज की अच्छी भागीदारी है। यदि सामान्य वर्ग किसी एक दल के समर्थन में एकजुट होता है तो चुनाव का परिणाम एकतरफा भी हो सकता है। दूसरी ओर अनुसूचित जाति के करीब 58 हजार मतदाता भी निर्णायक भूमिका निभाएंगे। खटीक वाल्मीकि कोरी और जाटव समाज कई बूथों पर जीत हार का अंतर तय करने की क्षमता रखते हैं। मुस्लिम मतदाताओं की संख्या भले लगभग आठ हजार है लेकिन करीबी मुकाबले में उनका समर्थन भी बेहद अहम साबित हो सकता है।

    कांग्रेस में उम्मीदवार चयन को लेकर सबसे ज्यादा हलचल दिखाई दे रही है। पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद उपचुनाव की स्थिति बनी है और अब वह अपने बेटे अनुज भारती को टिकट दिलाने के लिए सक्रिय हैं। वहीं वर्ष 2023 में भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आए अवधेश नायक भी टिकट के मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। उनका तर्क है कि पिछली बार उन्होंने पार्टी के लिए त्याग किया था इसलिए इस बार उन्हें मौका मिलना चाहिए। पूर्व विधायक घनश्याम सिंह का नाम भी संभावित उम्मीदवारों की सूची में शामिल है जिससे कांग्रेस में मुकाबला और रोचक हो गया है।

    दूसरी ओर भाजपा की ओर से पूर्व गृह मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा का चुनाव लड़ना लगभग तय माना जा रहा है जबकि आजाद समाज पार्टी की ओर से दामोदर यादव प्रमुख चेहरा बनकर सामने आए हैं। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा को 7742 मतों से हराया था इसलिए इस बार का उपचुनाव भी बेहद कांटे का माना जा रहा है। सभी दल जातीय संतुलन संगठनात्मक मजबूती और स्थानीय मुद्दों के सहारे चुनावी जीत का समीकरण तैयार करने में जुटे हैं।