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  • बैठक में गैरहाजिरी पर नोटिस, डॉक्टर ने लगाया मानसिक प्रताड़ना का आरोप

    बैठक में गैरहाजिरी पर नोटिस, डॉक्टर ने लगाया मानसिक प्रताड़ना का आरोप


    मध्य प्रदेश । दतिया के जिला स्वास्थ्य विभाग में एक कारण बताओ नोटिस ने नया प्रशासनिक विवाद खड़ा कर दिया है। एनक्वास (NQAS) बैठक में अनुपस्थित रहने पर सीएमएचओ डॉ. बीके वर्मा द्वारा जारी नोटिस के जवाब में डॉ. एसएस बाथम ने गंभीर आरोप लगाते हुए पूरे मामले को मानसिक प्रताड़ना और व्यक्तिगत द्वेष से प्रेरित बताया है।

    जानकारी के अनुसार, सीएमएचओ कार्यालय की ओर से 18 तारीख को आयोजित बैठक में अनुपस्थित रहने पर डॉ. बाथम को नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया था। इसके जवाब में डॉ. बाथम ने कई सवाल उठाते हुए पूछा कि उन्हें बैठक की सूचना कब और किस माध्यम से दी गई थी।

    डॉ. बाथम ने अपने जवाब में कहा कि यदि बैठक के संबंध में कोई आदेश जारी किया गया था, तो उसकी प्रति नोटिस के साथ संलग्न की जानी चाहिए थी। उन्होंने आरोप लगाया कि जानबूझकर उनकी छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है और उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।

    अपने पत्र में डॉ. बाथम ने यह भी लिखा कि वे कई बार कार्यालय संबंधी समस्याओं और स्टाफ की उपलब्धता पर चर्चा करने सीएमएचओ कार्यालय पहुंचे, लेकिन हर बार उन्हें यह कहकर लौटा दिया गया कि “साहब मीटिंग में हैं।” उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ऐसी कौन सी लगातार चलने वाली बैठकें थीं, जिनके कारण उनसे चर्चा तक नहीं हो सकी।

    डॉक्टर ने आरोप लगाया कि पूर्व में भी उनके खिलाफ अनर्गल पत्राचार कर छवि धूमिल करने का प्रयास किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में कुछ पत्र सोशल मीडिया ग्रुपों में साझा किए गए, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश हुई।

    डॉ. बाथम ने अपने जवाब में सीएमएचओ पर लंबे समय से व्यक्तिगत द्वेष रखने और पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर कार्रवाई करने का आरोप लगाया है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि इस प्रकार का द्वेषपूर्ण पत्राचार जारी रहा, तो वे इसे मानसिक प्रताड़ना मानते हुए वैधानिक कार्रवाई करेंगे।

    मामले को गंभीर बनाते हुए डॉ. बाथम ने अपने जवाब की प्रतिलिपि राज्य मानवाधिकार आयोग, कलेक्टर और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को भी भेजी है। वहीं दोनों अधिकारियों के बीच हुआ यह पत्राचार अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

  • पतारा जंगल में छापा: जुए के दतिया के पतारा जंगल में जुए के फड़ पर पुलिस का छापा: 8 गिरफ्तार, 6 फरार, 2.85 लाख नकद बरामदड़ से लाखों की नकदी और गाड़ियां जब्त

    पतारा जंगल में छापा: जुए के दतिया के पतारा जंगल में जुए के फड़ पर पुलिस का छापा: 8 गिरफ्तार, 6 फरार, 2.85 लाख नकद बरामदड़ से लाखों की नकदी और गाड़ियां जब्त


    मध्य प्रदेश । दतिया जिले में अवैध गतिविधियों के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत सिविल लाइन थाना पुलिस ने रविवार रात बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। जिला अस्पताल के पीछे स्थित पतारा के जंगल में लंबे समय से चल रहे जुए के फड़ पर पुलिस ने अचानक दबिश दी और 8 जुआरियों को गिरफ्तार कर लिया।

    पुलिस के अनुसार, मुखबिर से मिली सटीक सूचना के आधार पर टीआई वैभव गुप्ता के नेतृत्व में टीम ने इलाके की घेराबंदी की। जैसे ही पुलिस मौके पर पहुंची, जुआरियों में भगदड़ मच गई, लेकिन पुलिस ने तेजी दिखाते हुए 8 लोगों को पकड़ लिया, जबकि 6 आरोपी अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए।

    कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मौके से करीब 2 लाख 85 हजार रुपए नकद, एक स्विफ्ट कार, एक बाइक और एक सोने की चेन सहित जुए से जुड़ा अन्य सामान भी जब्त किया है। बरामदगी के बाद इलाके में हड़कंप मच गया।

    पुलिस जांच में सामने आया है कि जुआरी इस सुनसान जंगल क्षेत्र का इस्तेमाल इसलिए कर रहे थे ताकि देर रात तक बिना किसी रोक-टोक के अवैध गतिविधियां चलती रहें और किसी को इसकी जानकारी न हो सके।

    गिरफ्तार आरोपियों में नीरज कुशवाह (सीतापुर), ब्रजमोहन कुशवाह (कमथरा), दिनेश अहिरवार (सिद्धार्थ कॉलोनी), नरेश कुशवाह (ठंडी सड़क), राजेंद्र गोस्वामी (उनाव रोड), प्रवेंद्र जाटव (डबरा), जीतेन्द्र कुशवाह और श्रीराम कुशवाह (कुरथरा) शामिल हैं।

    वहीं फरार आरोपियों में आनंद कुशवाह, विपिन यादव, राजेश उर्फ कल्लू कमरिया, दीपक कमरिया, रामलाल कुशवाह और बचन यादव के नाम सामने आए हैं। पुलिस उनकी तलाश में लगातार दबिश दे रही है।

    पुलिस का कहना है कि यह पता लगाया जा रहा है कि इस जुए के फड़ का मुख्य संचालक कौन था और यह गतिविधि कितने समय से चल रही थी। मामले में जुआ एक्ट के तहत आगे की कार्रवाई की जा रही है।

  • दतिया में रेलवे मार्ग बंद होने पर बवाल, 1000 लोगों के सामने संकट

    दतिया में रेलवे मार्ग बंद होने पर बवाल, 1000 लोगों के सामने संकट


    मध्य प्रदेश । दतिया रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर-1 के पास स्थित रामनगर डेरा, पीताम्बरा कॉलोनी, विला कॉलोनी और मिश्रा कॉलोनी के रहवासियों ने सोमवार सुबह कलेक्ट्रेट पहुंचकर विरोध दर्ज कराया। लोगों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए रेलवे प्रशासन द्वारा पुराने आवागमन मार्ग को बंद किए जाने की कार्रवाई पर आपत्ति जताई।

    रहवासियों का आरोप है कि रेलवे विभाग उस रास्ते को बंद करने की तैयारी कर रहा है, जिसका उपयोग वर्षों से स्थानीय लोग आवागमन के लिए करते आ रहे हैं। उनका कहना है कि इस मार्ग के बंद होने से करीब एक हजार से अधिक लोगों के सामने गंभीर आवागमन संकट खड़ा हो जाएगा।

    लोगों ने बताया कि यह मार्ग आजादी से पहले से उपयोग में है और पुराने रेलवे स्टेशन के टिकट घर के पास से रामनगर डेरा और बाजनी क्षेत्र की ओर जाने के लिए बनाया गया था। यह भूमि खसरा क्रमांक 613/701 में मध्यप्रदेश शासन के नाम दर्ज है, और लंबे समय से लोग इसी रास्ते का उपयोग कर रहे हैं।

    रहवासियों ने यह भी बताया कि नए रेलवे स्टेशन के निर्माण के दौरान पुराने रास्ते के स्थान पर एक वैकल्पिक मार्ग बनाया गया था, जिससे वर्तमान में कॉलोनियों और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की आवाजाही हो रही है। लेकिन अब उसी वैकल्पिक मार्ग को भी बंद करने की तैयारी की जा रही है, जिससे स्थिति और गंभीर हो सकती है।

    स्थानीय लोगों का आरोप है कि मौके पर गिट्टी, रेत और ईंट जैसे निर्माण सामग्री एकत्र की जा रही है, जिससे संकेत मिलता है कि रास्ता बंद करने का काम जल्द शुरू हो सकता है।

    प्रभावित कॉलोनियों में बड़ी संख्या में शासकीय कर्मचारी, व्यापारी और किसान परिवार रहते हैं। वहीं स्कूल जाने वाले बच्चों और ग्रामीणों की दैनिक आवाजाही भी इसी मार्ग पर निर्भर है। लोगों का कहना है कि प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत बनी सड़क भी इसी रास्ते से जुड़ी हुई है, ऐसे में रास्ता बंद होने पर पूरी कनेक्टिविटी प्रभावित हो जाएगी।

    रहवासियों ने कलेक्टर से मांग की है कि रेलवे द्वारा किए जा रहे किसी भी निर्माण कार्य को तत्काल रोका जाए और आमजन के लिए यह मार्ग सुरक्षित रखा जाए। ज्ञापन सौंपते समय बड़ी संख्या में कॉलोनीवासी और ग्रामीण मौजूद रहे।

  • आर्यिका माताजी हादसे पर दतिया में आक्रोश: जैन समाज का मौन जुलूस, SIT जांच और संत सुरक्षा नीति की मांग

    आर्यिका माताजी हादसे पर दतिया में आक्रोश: जैन समाज का मौन जुलूस, SIT जांच और संत सुरक्षा नीति की मांग


    मध्य प्रदेश । रीवा में सड़क हादसे में जैन आर्यिका माताजी की मृत्यु को लेकर प्रदेशभर में जैन समाज में गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है। इसी कड़ी में सोमवार को दतिया में भी जैन समाज ने शांतिपूर्ण मौन जुलूस निकालकर जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा और घटना की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच की मांग की।

    श्री 1008 आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर प्रबंध समिति और समस्त जैन समाज के नेतृत्व में बड़ी संख्या में समाजजन एसपी कार्यालय पहुंचे। यहां एएसपी सुनील कुमार शिवहरे को ज्ञापन सौंपा गया। इस दौरान समाज ने स्पष्ट कहा कि यह घटना केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं मानी जा सकती और इसकी गहराई से जांच आवश्यक है।

    जैन समाज के प्रतिनिधियों ने मांग की कि मामले की SIT अथवा न्यायिक जांच कराई जाए, साथ ही घटना स्थल के आसपास के सभी CCTV फुटेज और डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए। समाज ने दोषियों पर कठोर कार्रवाई की भी मांग की।

    मौन जुलूस के दौरान समाजजनों ने कहा कि जैन साधु-संत पूर्णतः अहिंसक, निहत्थे और पैदल विहार करने वाले होते हैं, जो समाज को शांति और संयम का संदेश देते हैं। ऐसे में उनके साथ होने वाली घटनाएं गंभीर चिंता का विषय हैं।

    समाज ने विहार मार्गों पर विशेष सुरक्षा व्यवस्था की मांग उठाई, जिसमें ट्रैफिक नियंत्रण, हाईवे पर चेतावनी संकेतक, संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस गश्त और प्रशासनिक समन्वय शामिल है। इसके अलावा एक “संत सिक्योरिटी कोऑर्डिनेशन सेल” बनाने की भी मांग की गई।

    सबसे प्रमुख मांग के रूप में जैन समाज ने केंद्र सरकार से “राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति” लागू करने की अपील की है, ताकि पैदल विहार करने वाले संतों की सुरक्षा के लिए एक स्पष्ट SOP तैयार किया जा सके। समाज का कहना है कि संतों के खिलाफ होने वाले अपराधों को विशेष संवेदनशील श्रेणी में रखा जाना चाहिए।

    प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा और समाजजनों ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का तनाव पैदा करना नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना और संतों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

  • यूपी से दतिया तक का अनोखा सफर: कलेक्टर से मिलने की जिद में बिगड़ी तबीयत

    यूपी से दतिया तक का अनोखा सफर: कलेक्टर से मिलने की जिद में बिगड़ी तबीयत


    मध्य प्रदेश । मध्यप्रदेश के दतिया में सोमवार को एक अनोखा मामला सामने आया, जहां उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले से आया एक युवक अपनी गर्लफ्रेंड की जिद पूरी करने के चक्कर में कलेक्ट्रेट परिसर में बेहोश हो गया। युवक का कहना है कि उसे सोशल मीडिया पर चर्चित दतिया कलेक्टर से मिलकर दिखाने की चुनौती दी गई थी।

    26 वर्षीय राजकुमार गुप्ता, जो पेशे से टैक्सी ड्राइवर है, अपनी गर्लफ्रेंड की शर्त पूरी करने के लिए यूपी से दतिया पहुंचा था। उसने बताया कि गर्लफ्रेंड ने कहा था कि अगर वह उसे सच में चाहता है तो दतिया जाकर कलेक्टर स्वप्निल बानखेड़े से मिलकर दिखाए। इसी चुनौती को पूरा करने के लिए वह ट्रेन और बस से यात्रा करते हुए दतिया पहुंचा।

    राजकुमार शुक्रवार को झांसी होते हुए दतिया पहुंचा और एक होटल में रुका। शनिवार को वह पहली बार कलेक्ट्रेट पहुंचा, लेकिन उस दिन अवकाश होने के कारण मुलाकात नहीं हो सकी। रविवार को भी वह होटल में ही रुका रहा। सोमवार को जब वह दोबारा कलेक्ट्रेट पहुंचा, तो भीषण गर्मी और लगातार थकान के कारण उसकी हालत बिगड़ गई।

    गर्मी में पानी पीते समय उसे अचानक सीने में दर्द हुआ और वह कलेक्ट्रेट परिसर में बेहोश होकर गिर पड़ा। मौके पर मौजूद कर्मचारियों ने तुरंत उसे जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका इलाज जारी है।

    युवक ने बताया कि इस पूरी यात्रा में उसके पैसे भी खत्म हो गए और होटल का किराया देने तक की स्थिति नहीं बची। उसने अपने परिचितों से मदद मांगी है।

    इस बीच दतिया कलेक्टर स्वप्निल बानखेड़े ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि उन्हें युवक की जानकारी मिली है और वे जल्द ही उससे मुलाकात करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यदि युवक की तबीयत ठीक नहीं होती है तो वे स्वयं अस्पताल जाकर उससे मिलेंगे।

  • दतिया नगरपालिका में सिस्टम की बलि चढ़ा एक बाबू: प्रताड़ना से तंग आकर लिपिक ने दी जान, मौत से पहले वीडियो में सीएमओ की काली करतूतों का किया पर्दाफाश

    दतिया नगरपालिका में सिस्टम की बलि चढ़ा एक बाबू: प्रताड़ना से तंग आकर लिपिक ने दी जान, मौत से पहले वीडियो में सीएमओ की काली करतूतों का किया पर्दाफाश


    दतिया। मध्य प्रदेश के दतिया नगरपालिका से एक हृदयविदारक और प्रशासनिक तंत्र को शर्मसार करने वाली खबर सामने आई है। यहाँ कार्यरत एक लिपिक बाबू दिलीप सिंह गौड़ ने मानसिक प्रताड़ना की इंतहा के बाद मौत को गले लगा लिया। दिलीप सिंह का शव रविवार को उत्तर प्रदेश के झांसी स्थित उनके निवास पर बरामद हुआ। लेकिन यह केवल एक आत्महत्या नहीं, बल्कि एक ईमानदार कर्मचारी के स्वाभिमान की हत्या का मामला प्रतीत होता है, जिसकी गवाही खुद मृतक ने अपनी जीवनलीला समाप्त करने से ठीक पहले एक वीडियो रिकॉर्ड कर दी है।

    दिलीप सिंह ने मरने से पहले अपनी मौत का जिम्मेदार दतिया नगरपालिका के मुख्य नगरपालिका अधिकारी सीएमओ नागेंद्र सिंह गुर्जर और दो अन्य कर्मचारियों को ठहराया है। दिलीप का आरोप है कि उन्हें लंबे समय से मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। वीडियो में उन्होंने जो खुलासे किए, वे चौंकाने वाले हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सीएमओ द्वारा उन पर फर्जी दस्तावेज तैयार करने और भ्रष्टाचार में शामिल होने के लिए दबाव बनाया गया था। जब उन्होंने इस गलत काम का हिस्सा बनने से इनकार कर दिया और प्रलोभन को ठुकरा दिया, तो उनके खिलाफ बदले की कार्रवाई शुरू हो गई।

    प्रताड़ना का स्तर इस कदर गिर गया कि एक पढ़े लिखे लिपिक को सजा देने के उद्देश्य से उनकी ड्यूटी ट्रेचिंग ग्राउंड कचरा डंपिंग साइट पर लगा दी गई। दिलीप ने वीडियो में रोते हुए अपनी पीड़ा व्यक्त की कि एक बाबू होने के बावजूद उन्हें कचरा गाड़ियों की गिनती करने जैसा काम सौंपा गया, जिसने उनके मानसिक आत्मसम्मान को गहरी चोट पहुंचाई। यह कदम उन्हें नीचा दिखाने और मानसिक रूप से तोड़ने के लिए उठाया गया था। हद तो तब हो गई जब दिलीप इस अपमानजनक स्थिति से राहत पाने के लिए और शाखा बदलने का आवेदन लेकर सीएमओ नागेंद्र सिंह के पास पहुंचे। दिलीप के अनुसार, मदद करने के बजाय सीएमओ ने उन्हें मां-बहन की भद्दी गालियां दीं और जलील किया।

    इसी अपमान और मानसिक आघात से दुखी होकर दिलीप सिंह गौड़ ने आत्मघाती कदम उठा लिया। उन्होंने वीडियो में स्पष्ट मांग की है कि उनकी मौत के बाद सीएमओ और अन्य दो कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी धाराओं में मामला दर्ज किया जाए। दूसरी ओर, जब इन गंभीर आरोपों को लेकर सीएमओ नागेंद्र सिंह गुर्जर से सवाल किए गए, तो उन्होंने किसी भी प्रकार की प्रताड़ना से इनकार कर दिया। हालांकि, मृतक का वीडियो अब पुलिस के पास है और झांसी व दतिया पुलिस इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच में जुट गई है।