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  • ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ को लेकर आरएसएस का समर्थन, दत्तात्रेय होसबोले ने बताया लोकतंत्र को मजबूत करने वाला सुधार

    ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ को लेकर आरएसएस का समर्थन, दत्तात्रेय होसबोले ने बताया लोकतंत्र को मजबूत करने वाला सुधार

    नई दिल्ली:राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने देश के राजनीतिक ढांचे में बड़े सुधारों की जरूरत पर जोर देते हुए ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ प्रस्ताव का समर्थन किया है। संघ के महासचिव दत्तात्रेय होसबोले ने कहा कि यदि देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जाएं तो इससे प्रशासनिक स्थिरता बढ़ेगी और विकास कार्यों की गति तेज होगी। उनके अनुसार बार बार होने वाले चुनाव न केवल संसाधनों पर दबाव डालते हैं बल्कि शासन की निरंतरता को भी प्रभावित करते हैं।

    उन्होंने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय लोकतंत्र एक विशाल और जटिल व्यवस्था है, जहां लगातार चुनावी प्रक्रिया चलती रहती है। इस स्थिति में कई बार सरकारों का ध्यान विकास कार्यों से हटकर चुनावी तैयारियों पर केंद्रित हो जाता है। यदि चुनाव एक साथ कराए जाएं तो नीतिगत निर्णय अधिक स्थिर और दीर्घकालिक हो सकेंगे, जिससे देश के विकास को नई दिशा मिल सकती है।

    होसबोले ने यह भी कहा कि लोकतंत्र केवल चुनाव तक सीमित नहीं है बल्कि यह नागरिक जिम्मेदारी और जागरूकता पर भी निर्भर करता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक नागरिकों में राजनीतिक चेतना और कर्तव्य की भावना मजबूत नहीं होगी, तब तक किसी भी सुधार का पूर्ण लाभ नहीं मिल पाएगा। उनके अनुसार एक मजबूत लोकतंत्र के लिए समाज की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।

    महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि निर्णय लेने की प्रक्रिया में महिलाओं की भूमिका बढ़ाना एक सकारात्मक कदम है। उनके अनुसार यह व्यवस्था न केवल लोकतंत्र को अधिक समावेशी बनाएगी बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों की आवाज को भी मजबूत करेगी। इससे नीति निर्माण की प्रक्रिया अधिक संतुलित और प्रभावी हो सकती है।

    समान नागरिक संहिता के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि सभी नागरिकों के लिए समान कानून व्यवस्था एक मजबूत राष्ट्र की आधारशिला है। उनका मानना है कि देश में कानून के सामने सभी को समान रूप से देखा जाना चाहिए और किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए। इससे सामाजिक एकता और राष्ट्रीय समरसता को मजबूती मिलती है।

    उन्होंने तुष्टीकरण की राजनीति पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह प्रवृत्ति लंबे समय में समाज की एकता के लिए हानिकारक साबित हो सकती है। उनके अनुसार शासन का आधार समानता और निष्पक्षता होना चाहिए, जिससे सभी नागरिकों में विश्वास और सहभागिता बढ़े।

    होसबोले ने यह भी कहा कि नागरिक अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी को मजबूत करना समय की जरूरत है। उनका मानना है कि एक विकसित राष्ट्र केवल संस्थाओं से नहीं बनता बल्कि नागरिकों के व्यवहार और उनकी सोच से भी आकार लेता है।

    अंत में उन्होंने संगठन के सामाजिक कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि सामाजिक सद्भाव, पर्यावरण संरक्षण, आत्मनिर्भरता और नागरिक कर्तव्य जैसे क्षेत्रों में लगातार काम किया जा रहा है। उनके अनुसार यह प्रयास समाज में सकारात्मक बदलाव लाने और सहयोग की भावना को मजबूत करने के उद्देश्य से किए जा रहे हैं।

  • दत्तात्रेय होसबाले बोले- ईरान युद्ध पर भारत का रुख सही, दुनिया में शांति चाहता है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

    दत्तात्रेय होसबाले बोले- ईरान युद्ध पर भारत का रुख सही, दुनिया में शांति चाहता है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ


    नई दिल्ली। हरियाणा में चल रही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा के अंतिम दिन सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कई अहम मुद्दों पर संघ का पक्ष रखा। उन्होंने मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध और ईरान को लेकर भारत के रुख पर कहा कि उन्हें विश्वास है कि भारत सरकार देशहित में सही कदम उठा रही है।

    होसबाले ने कहा कि संघ हमेशा दुनिया में शांति और स्थिरता का पक्षधर रहा है। उनका मानना है कि अंतरराष्ट्रीय विवादों का समाधान संवाद और संतुलित कूटनीति से होना चाहिए।

    पड़ोसी देशों के साथ बेहतर संबंध जरूरी
    होसबाले ने कहा कि संघ हमेशा पड़ोसी देशों के साथ अच्छे संबंधों पर जोर देता है। उन्होंने बांग्लादेश और नेपाल में हाल के राजनीतिक बदलावों का जिक्र करते हुए कहा कि इन देशों में शांति और स्थिरता बनी रहना पूरे एशिया के विकास और सुरक्षा के लिए जरूरी है।

    हालांकि उन्होंने बांग्लादेश में हिंदू समुदाय की सुरक्षा को लेकर चिंता भी जताई और कहा कि वहां सामाजिक संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण है।

    भारतीयता और हिंदुत्व पर क्या बोले
    होसबाले ने कहा कि भारतीयता और हिंदुत्व को लेकर स्पष्ट समझ होना जरूरी है। उनके अनुसार हिंदुत्व केवल एक विचार या मानसिकता नहीं बल्कि एक जीवनशैली है, जो समाज में समरसता और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करती है।

    संघ में मुस्लिम और महिलाओं की भूमिका
    संघ में सदस्यता को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि किसी भी धर्म का व्यक्ति संघ से जुड़ सकता है और भगवा ध्वज को प्रणाम कर सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि संघ में पहले से ही कई मुस्लिम कार्यकर्ता सक्रिय हैं।

    महिलाओं की भागीदारी पर उन्होंने कहा कि शाखा की कार्यप्रणाली में महिलाएं शामिल नहीं होतीं, लेकिन संघ की कई अन्य गतिविधियों और संगठनों में बड़ी संख्या में महिलाएं कार्य कर रही हैं।

    बेसहारा गोवंश पर भी बोले
    बेसहारा गोवंश के मुद्दे पर होसबाले ने कहा कि सरकार और नगर निगम इस दिशा में काम कर रहे हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि गायों को केवल दूध के लिए उपयोगी न समझें, क्योंकि गोबर और गौमूत्र भी कई तरह से उपयोगी होते हैं, इसलिए उन्हें सड़कों पर छोड़ना उचित नहीं है।

    बीजेपी से संबंध पर दिया जवाब
    राजनीति में संघ की भूमिका पर सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि देश में कई विचारधाराएं हैं, लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने संघ की विचारधारा को अपनाया। इसी वजह से संघ से जुड़े कई लोग राजनीति में सक्रिय होकर देशहित के विचारों को आगे बढ़ा रहे हैं।

    हरियाणा में बड़ा RSS केंद्र बनाने की तैयारी
    सभा के दौरान उत्तर भारत में संघ की गतिविधियों को मजबूत करने के लिए पानीपत (हरियाणा) में बड़ा केंद्र विकसित करने का प्रस्ताव भी सामने आया। यहां पट्टीकल्याणा स्थित माधव दृष्टि साधना केंद्र को नागपुर स्थित मुख्यालय की तर्ज पर विकसित करने की योजना है।

    करीब 25 एकड़ क्षेत्र में फैले इस केंद्र को रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यहां से उत्तर भारत के कई राज्यों में संघ के कार्यों को समन्वित किया जा सकेगा।

    तीन दिवसीय सभा की प्रमुख बातें
    RSS की तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में संगठन के भविष्य की योजनाओं और गतिविधियों पर चर्चा हुई। रिपोर्ट के अनुसार देशभर में संघ की 88,949 शाखाएं संचालित हो रही हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में 5,820 अधिक हैं।

    सभा में दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर राज्यों में संगठन विस्तार की रणनीति पर भी चर्चा हुई। साथ ही अगले वर्षों में केरल, तमिलनाडु, पंजाब और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में संघ की गतिविधियों को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया।