

लाल परेड ग्राउंड पर यह आयोजन दोपहर बाद करीब 3 बजे शुरू होगा। शाखा संगम में भोपाल विभाग के अंतर्गत आने वाले भोपाल प्रताप भोजपुर तात्या टोपे और विद्युत नगर संगठनात्मक जिलों के स्वयंसेवक एक साथ जुटेंगे। संघ की विभिन्न शाखाओं से जुड़े हजारों स्वयंसेवक इस कार्यक्रम में पूर्ण गणवेश में पहुंचेंगे। इतनी बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों के एकत्रीकरण के चलते आयोजन की तैयारियां भी बड़े स्तर पर की जा रही हैं।
शाखा संगम के दौरान स्वयंसेवकों के अनुशासन और शारीरिक क्षमता का प्रदर्शन भी देखने को मिलेगा। हजारों स्वयंसेवक एक साथ समता यानी परेड करेंगे। इसके अलावा शारीरिक व्यायाम दंड प्रयोग और योग का सामूहिक प्रदर्शन भी कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहेगा। संघ की दृष्टि से भोपाल विभाग के अंतर्गत आने वाले प्रमुख नगरों और बस्तियों की शाखाओं का यह एक बड़ा एकत्रीकरण होगा। आयोजन के माध्यम से संगठन की गतिविधियों और समाज जीवन में उसकी भूमिका को भी सामने रखा जाएगा।
यह कार्यक्रम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के आयोजन से भी जुड़ा हुआ है। संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर देशभर में अलग अलग गतिविधियों और कार्यक्रमों की योजना बनाई गई है। इसी क्रम में संघ ने विभिन्न क्षेत्रों में मुहल्ला शाखाओं के गठन और विस्तार पर भी जोर दिया है। भोपाल में आयोजित होने वाले शाखा संगम में इन मुहल्ला शाखाओं से जुड़े स्वयंसेवकों की भी बड़ी भागीदारी रहने की संभावना है। इसे मुहल्ला स्तर पर संगठन विस्तार के बाद एक बड़े सामूहिक जुटान के रूप में देखा जा रहा है।
कार्यक्रम में दत्तात्रेय होसबाले की मौजूदगी को भी विशेष माना जा रहा है। वे स्वयंसेवकों को संगठन समाज और राष्ट्र निर्माण से जुड़े विषयों पर मार्गदर्शन देंगे। युवाओं से संवाद भी कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है। हाल के समय में युवाओं और विशेष रूप से Gen-Z से जुड़े मुद्दों पर देशभर में चर्चा बढ़ी है। ऐसे में संघ भी युवाओं से संवाद और परिचर्चा के माध्यम से उनकी सोच और सामाजिक भागीदारी से जुड़े विषयों पर सक्रिय दिखाई दे रहा है।
भोपाल के लाल परेड ग्राउंड पर इससे पहले भी संघ का बड़ा आयोजन हो चुका है। कोरोना काल के प्रतिबंध हटने के बाद 11 दिसंबर 2022 को यहां भव्य शारीरिक प्रकटोत्सव आयोजित किया गया था। उस कार्यक्रम में भी बड़ी संख्या में स्वयंसेवक पूर्ण गणवेश में शामिल हुए थे और दत्तात्रेय होसबाले मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद रहे थे। उस दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी और समाज के गणमान्य नागरिक भी कार्यक्रम में शामिल हुए थे।
अब एक बार फिर 20 सितंबर को लाल परेड ग्राउंड पर होने वाला शाखा संगम भोपाल में संघ का बड़ा संगठनात्मक आयोजन बनने जा रहा है। 30 हजार स्वयंसेवकों की भागीदारी पर केंद्रित इस कार्यक्रम में अनुशासन शारीरिक प्रदर्शन संगठनात्मक एकजुटता और राष्ट्र निर्माण से जुड़े संदेश प्रमुख रूप से दिखाई देंगे। राजधानी में होने वाले इस विशाल जुटान पर राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों की भी नजर रहेगी।

उन्होंने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय लोकतंत्र एक विशाल और जटिल व्यवस्था है, जहां लगातार चुनावी प्रक्रिया चलती रहती है। इस स्थिति में कई बार सरकारों का ध्यान विकास कार्यों से हटकर चुनावी तैयारियों पर केंद्रित हो जाता है। यदि चुनाव एक साथ कराए जाएं तो नीतिगत निर्णय अधिक स्थिर और दीर्घकालिक हो सकेंगे, जिससे देश के विकास को नई दिशा मिल सकती है।
होसबोले ने यह भी कहा कि लोकतंत्र केवल चुनाव तक सीमित नहीं है बल्कि यह नागरिक जिम्मेदारी और जागरूकता पर भी निर्भर करता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक नागरिकों में राजनीतिक चेतना और कर्तव्य की भावना मजबूत नहीं होगी, तब तक किसी भी सुधार का पूर्ण लाभ नहीं मिल पाएगा। उनके अनुसार एक मजबूत लोकतंत्र के लिए समाज की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि निर्णय लेने की प्रक्रिया में महिलाओं की भूमिका बढ़ाना एक सकारात्मक कदम है। उनके अनुसार यह व्यवस्था न केवल लोकतंत्र को अधिक समावेशी बनाएगी बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों की आवाज को भी मजबूत करेगी। इससे नीति निर्माण की प्रक्रिया अधिक संतुलित और प्रभावी हो सकती है।
समान नागरिक संहिता के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि सभी नागरिकों के लिए समान कानून व्यवस्था एक मजबूत राष्ट्र की आधारशिला है। उनका मानना है कि देश में कानून के सामने सभी को समान रूप से देखा जाना चाहिए और किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए। इससे सामाजिक एकता और राष्ट्रीय समरसता को मजबूती मिलती है।
उन्होंने तुष्टीकरण की राजनीति पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह प्रवृत्ति लंबे समय में समाज की एकता के लिए हानिकारक साबित हो सकती है। उनके अनुसार शासन का आधार समानता और निष्पक्षता होना चाहिए, जिससे सभी नागरिकों में विश्वास और सहभागिता बढ़े।
होसबोले ने यह भी कहा कि नागरिक अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी को मजबूत करना समय की जरूरत है। उनका मानना है कि एक विकसित राष्ट्र केवल संस्थाओं से नहीं बनता बल्कि नागरिकों के व्यवहार और उनकी सोच से भी आकार लेता है।
अंत में उन्होंने संगठन के सामाजिक कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि सामाजिक सद्भाव, पर्यावरण संरक्षण, आत्मनिर्भरता और नागरिक कर्तव्य जैसे क्षेत्रों में लगातार काम किया जा रहा है। उनके अनुसार यह प्रयास समाज में सकारात्मक बदलाव लाने और सहयोग की भावना को मजबूत करने के उद्देश्य से किए जा रहे हैं।

होसबाले ने कहा कि संघ हमेशा दुनिया में शांति और स्थिरता का पक्षधर रहा है। उनका मानना है कि अंतरराष्ट्रीय विवादों का समाधान संवाद और संतुलित कूटनीति से होना चाहिए।
पड़ोसी देशों के साथ बेहतर संबंध जरूरी
होसबाले ने कहा कि संघ हमेशा पड़ोसी देशों के साथ अच्छे संबंधों पर जोर देता है। उन्होंने बांग्लादेश और नेपाल में हाल के राजनीतिक बदलावों का जिक्र करते हुए कहा कि इन देशों में शांति और स्थिरता बनी रहना पूरे एशिया के विकास और सुरक्षा के लिए जरूरी है।
हालांकि उन्होंने बांग्लादेश में हिंदू समुदाय की सुरक्षा को लेकर चिंता भी जताई और कहा कि वहां सामाजिक संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
भारतीयता और हिंदुत्व पर क्या बोले
होसबाले ने कहा कि भारतीयता और हिंदुत्व को लेकर स्पष्ट समझ होना जरूरी है। उनके अनुसार हिंदुत्व केवल एक विचार या मानसिकता नहीं बल्कि एक जीवनशैली है, जो समाज में समरसता और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करती है।
संघ में मुस्लिम और महिलाओं की भूमिका
संघ में सदस्यता को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि किसी भी धर्म का व्यक्ति संघ से जुड़ सकता है और भगवा ध्वज को प्रणाम कर सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि संघ में पहले से ही कई मुस्लिम कार्यकर्ता सक्रिय हैं।
महिलाओं की भागीदारी पर उन्होंने कहा कि शाखा की कार्यप्रणाली में महिलाएं शामिल नहीं होतीं, लेकिन संघ की कई अन्य गतिविधियों और संगठनों में बड़ी संख्या में महिलाएं कार्य कर रही हैं।
बेसहारा गोवंश पर भी बोले
बेसहारा गोवंश के मुद्दे पर होसबाले ने कहा कि सरकार और नगर निगम इस दिशा में काम कर रहे हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि गायों को केवल दूध के लिए उपयोगी न समझें, क्योंकि गोबर और गौमूत्र भी कई तरह से उपयोगी होते हैं, इसलिए उन्हें सड़कों पर छोड़ना उचित नहीं है।
बीजेपी से संबंध पर दिया जवाब
राजनीति में संघ की भूमिका पर सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि देश में कई विचारधाराएं हैं, लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने संघ की विचारधारा को अपनाया। इसी वजह से संघ से जुड़े कई लोग राजनीति में सक्रिय होकर देशहित के विचारों को आगे बढ़ा रहे हैं।
हरियाणा में बड़ा RSS केंद्र बनाने की तैयारी
सभा के दौरान उत्तर भारत में संघ की गतिविधियों को मजबूत करने के लिए पानीपत (हरियाणा) में बड़ा केंद्र विकसित करने का प्रस्ताव भी सामने आया। यहां पट्टीकल्याणा स्थित माधव दृष्टि साधना केंद्र को नागपुर स्थित मुख्यालय की तर्ज पर विकसित करने की योजना है।
करीब 25 एकड़ क्षेत्र में फैले इस केंद्र को रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यहां से उत्तर भारत के कई राज्यों में संघ के कार्यों को समन्वित किया जा सकेगा।
तीन दिवसीय सभा की प्रमुख बातें
RSS की तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में संगठन के भविष्य की योजनाओं और गतिविधियों पर चर्चा हुई। रिपोर्ट के अनुसार देशभर में संघ की 88,949 शाखाएं संचालित हो रही हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में 5,820 अधिक हैं।
सभा में दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर राज्यों में संगठन विस्तार की रणनीति पर भी चर्चा हुई। साथ ही अगले वर्षों में केरल, तमिलनाडु, पंजाब और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में संघ की गतिविधियों को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया।