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  • दूध-दही से स्नैक्स तक ऑनलाइन बिक्री पर FSSAI की सख्ती, प्रोडक्ट दावों और धतूरे की बिक्री पर उठे सवाल

    दूध-दही से स्नैक्स तक ऑनलाइन बिक्री पर FSSAI की सख्ती, प्रोडक्ट दावों और धतूरे की बिक्री पर उठे सवाल

    नई दिल्ली ।घर बैठे किराने का सामान और खाने-पीने की चीजें मंगाने वाले ग्राहकों के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जुड़ी एक महत्वपूर्ण कार्रवाई सामने आई है। खाद्य सुरक्षा और मानक से जुड़े मामलों की निगरानी करने वाली संस्था FSSAI ने Amazon, Flipkart, Zepto, Swiggy Instamart और BigBasket के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई शुरू की है। इन प्लेटफॉर्म पर कुछ खाद्य उत्पादों से जुड़े दावों को नियमों के अनुरूप नहीं पाए जाने और एक मामले में धतूरे के फल तथा बीज की ऑनलाइन बिक्री से संबंधित मामला सामने आया है।

    FSSAI की कार्रवाई Happilo Premium Date Bites Zesty Orange से जुड़े मामले में पांचों प्लेटफॉर्म तक पहुंची है। जानकारी के अनुसार इस उत्पाद पर किए गए कुछ दावों को निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं माना गया और उन्हें भ्रामक बताया गया। यह उत्पाद Amazon, Flipkart, Zepto, Swiggy Instamart और BigBasket पर उपलब्ध था। इसी वजह से इस मामले में सभी पांच प्लेटफॉर्म के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है।

    इसके अलावा Milky Mist के कुछ डेयरी उत्पादों को लेकर भी आपत्ति सामने आई है। इनमें Fresh Low Fat Cream, Farm Fresh Curd और Greek Yoghurt शामिल हैं। इन उत्पादों से जुड़े मामलों में Swiggy Instamart और BigBasket के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है।

    पूरे मामले में धतूरे के फल और बीज की ऑनलाइन बिक्री से जुड़ा प्रकरण भी सामने आया है। धतूरा खाने की वस्तु नहीं है और इसके फल तथा बीज जहरीले माने जाते हैं। FSSAI ने इसे प्रतिबंधित खाद्य पदार्थों की श्रेणी में रखा है।

    FSSAI के अनुसार Amazon, Swiggy Instamart और BigBasket पर धतूरे के फल और बीज को ऑनलाइन प्रदर्शित करने तथा बेचने से जुड़े मामले सामने आए हैं। इसी आधार पर इन तीनों प्लेटफॉर्म के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है।

    प्लेटफॉर्म के हिसाब से देखें तो BigBasket और Swiggy Instamart पर तीन तरह के मामले सामने आए हैं। इनमें Happilo उत्पाद से जुड़ा मामला, Milky Mist के उत्पादों से संबंधित आपत्ति और धतूरे की ऑनलाइन बिक्री का मामला शामिल है। Amazon पर Happilo उत्पाद और धतूरे से जुड़े मामलों में कार्रवाई शुरू की गई है। वहीं Flipkart और Zepto के खिलाफ फिलहाल Happilo उत्पाद से जुड़े मामले में कार्रवाई शुरू होने की जानकारी है।

    इस कार्रवाई का असर सीधे तौर पर ऑनलाइन खरीदारी करने वाले ग्राहकों के लिए भी महत्वपूर्ण है। अब ग्राहक किराने के सामान के साथ दूध, दही, पनीर, स्नैक्स और दूसरी खाद्य वस्तुएं भी ऑनलाइन मंगाते हैं। ऐसे में खरीदारी के दौरान वे अक्सर ऑनलाइन लिस्टिंग में दी गई जानकारी और उत्पाद की पैकिंग पर लिखे दावों पर निर्भर करते हैं।

    FSSAI की कार्रवाई से यह स्पष्ट है कि ऑनलाइन माध्यम से खाद्य उत्पादों की बिक्री करने वाले प्लेटफॉर्म भी खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों के दायरे में आते हैं। ऑनलाइन उपलब्ध किसी उत्पाद की लिस्टिंग में दी गई जानकारी और उसके दावों को लेकर भी नियामकीय कार्रवाई हो सकती है।

    हालांकि इस मामले में अभी अंतिम जुर्माने या दंड की जानकारी सामने नहीं आई है। FSSAI ने फिलहाल दंडात्मक कार्रवाई शुरू करने की बात कही है, इसलिए प्रक्रिया अभी जारी है और अंतिम निर्णय आना बाकी है।

    साथ ही इस कार्रवाई को संबंधित उत्पादों और ऑनलाइन लिस्टिंग से जुड़े मामलों के रूप में देखा जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर इसे संबंधित कंपनियों के खिलाफ अंतिम दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता, क्योंकि कार्रवाई की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है।

  • कर्नाटक में ऑनलाइन बिक रहा था जहरीला धतूरा, Amazon, Instamart और BigBasket के फूड लाइसेंस निलंबित

    कर्नाटक में ऑनलाइन बिक रहा था जहरीला धतूरा, Amazon, Instamart और BigBasket के फूड लाइसेंस निलंबित

    नई दिल्ली ।कर्नाटक में जहरीले धतूरा फल और बीज की ऑनलाइन बिक्री के मामले में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने सख्त कार्रवाई की है। विभाग ने Amazon, Instamart और BigBasket से जुड़े फूड लाइसेंस को अगले आदेश तक निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर धतूरा के फल और बीज को मानव इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराए जाने की शिकायतों और जांच के बाद की गई।

    धतूरा एक जहरीला पौधा माना जाता है और इसके फल तथा बीज का सेवन मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। इसी वजह से खाद्य पदार्थों की श्रेणी में इसकी बिक्री और वितरण को लेकर विभाग ने गंभीर आपत्ति जताई। जांच के दौरान अलग-अलग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर धतूरा के फल और बीज बिक्री के लिए प्रदर्शित पाए गए।

    जांच में कुछ ऐसे पैकेट भी सामने आए जिन पर फूड लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज था। विभाग के अनुसार, धतूरा जैसे जहरीले उत्पादों को खाद्य पदार्थ के रूप में स्टोर करना, बेचना या वितरित करना स्वीकार्य नहीं है। जांच के दौरान ऐसे उत्पादों के गोदामों में रखे होने की जानकारी भी सामने आई, जिससे खाद्य सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर सवाल उठे।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित कंपनियों के प्रतिनिधियों को विभाग के सामने अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया। कंपनियों से ऑनलाइन बिक्री, उत्पादों की उपलब्धता और उनके खिलाफ की गई कार्रवाई से जुड़े दस्तावेज मांगे गए।

    Amazon की ओर से इस मामले में अपना जवाब दाखिल नहीं किया गया। वहीं Instamart ने अपने स्तर पर की गई कार्रवाई से जुड़े दस्तावेज जमा करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा। BigBasket ने बताया कि उसने धतूरा के फलों की ऑनलाइन बिक्री रोक दी है। कंपनी की ओर से भविष्य में ऐसे उत्पादों की लेबलिंग को स्पष्ट करने की बात भी कही गई।

    BigBasket ने यह भी कहा कि ऐसे उत्पादों पर मानव उपभोग के लिए नहीं होने की स्पष्ट चेतावनी दी जाएगी। हालांकि, नियामक विभाग ने कंपनियों की ओर से दिए गए जवाब और स्पष्टीकरण को संतोषजनक नहीं माना। विभाग का कहना है कि जहरीले उत्पादों को खाद्य पदार्थ के तौर पर उपलब्ध कराना खाद्य सुरक्षा के लिहाज से स्वीकार्य नहीं है।

    कार्रवाई के तहत Amazon, Instamart और BigBasket के संबंधित फूड लाइसेंस को अस्थायी रूप से निलंबित किया गया है। लाइसेंस की बहाली आगे की सुनवाई और कंपनियों की ओर से जवाब दाखिल किए जाने के बाद ही हो सकेगी। इस दौरान कंपनियों को खाद्य सुरक्षा से जुड़े निर्देशों का पालन करना होगा।

    विभाग ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से धतूरा के फल और बीज की उन सभी लिस्टिंग और विज्ञापनों को तत्काल हटाने या निलंबित करने का निर्देश दिया है, जिनमें इन्हें खाद्य पदार्थ या मानव उपभोग के लिए उपलब्ध बताया गया हो। साथ ही धतूरा उत्पादों की आपूर्ति करने वाले संबंधित विक्रेताओं और सप्लायरों के लाइसेंस तथा रजिस्ट्रेशन पर भी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

    इस कार्रवाई से ऑनलाइन खाद्य बिक्री में उत्पादों की जांच, सही लेबलिंग और खाद्य सुरक्षा मानकों के पालन की जिम्मेदारी एक बार फिर सामने आई है। विभाग की सख्ती का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जहरीले या मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक पदार्थ खाद्य उत्पादों के रूप में उपभोक्ताओं तक न पहुंचें।