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  • बेटी रीति के बिग बॉस विवाद पर मनोज तिवारी का रिएक्शन, बोले- ‘बच्चों का बिग बॉस है

    बेटी रीति के बिग बॉस विवाद पर मनोज तिवारी का रिएक्शन, बोले- ‘बच्चों का बिग बॉस है


    नई दिल्ली। बिग बॉस 20 में मनोज तिवारी की बेटी रीति तिवारी अपने गेम और विवादों को लेकर लगातार चर्चा में हैं। काजी तौकीर के साथ तीखी बहस और उदिति सिंह को लेकर उनके कथित आपत्तिजनक व्यवहार पर सोशल मीडिया पर सवाल उठने के बाद अब मनोज तिवारी से भी बेटी के गेमप्ले को लेकर सवाल किए गए। हाल ही में एक कार्यक्रम से बाहर निकलते समय पत्रकारों ने उनसे रीति को लेकर सवाल किया, जिस पर उन्होंने कहा कि बिग बॉस एक गेम है और इसे उसी तरह लिया जाना चाहिए।

    मनोज तिवारी से पूछा- बेटी के लिए इस्तीफा दे दीजिए

    मनोज तिवारी हाल ही में ‘मोदी: द डिकेड दैट चेंज्ड इंडिया’ किताब के लॉन्च कार्यक्रम में पहुंचे थे। कार्यक्रम के बाद जब उनसे रीति के बिग बॉस गेम को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, “बच्चों का बिग बॉस है, चलने दो।”

    इसके बाद उन्होंने उन चर्चाओं पर भी सफाई दी, जिनमें दावा किया जा रहा था कि उन्होंने अपनी बेटी को बिग बॉस में शामिल कराने के लिए सिफारिश की थी। मनोज तिवारी ने कहा कि उन्हें खुद जानकारी नहीं थी कि रीति शो में जा रही हैं।

    इसी दौरान एक रिपोर्टर ने उनसे कहा, “तो फिर आप उनके लिए इस्तीफा दे दीजिए।” इस सवाल पर मनोज तिवारी हैरान नजर आए और बोले, “आप क्या बोल रहे हैं, मुझे समझ नहीं आ रहा है।” वायरल वीडियो क्लिप में इसके बाद बातचीत अचानक खत्म हो जाती है।

    ‘बिग बॉस एक खेल है, उसका आनंद लीजिए’

    मनोज तिवारी ने बेटी के विवादों को लेकर कहा कि बिग बॉस को लेकर किसी को परेशान होने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि शो में 24 घंटे कुछ न कुछ होता रहता है और इसे एक खेल की तरह देखना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वह खुद इस तरह का गेम खेल चुके हैं।

    मनोज तिवारी का कहना था कि “बिग बॉस एक खेल है… एक गेम है, उसका आनंद लीजिए।”

    रीति के गेम पर सलमान खान भी कर चुके हैं टिप्पणी

    रीति तिवारी हाल के एपिसोड में काजी तौकीर के साथ विवाद के बाद सुर्खियों में आई थीं। बहस के दौरान उन्होंने काजी पर तीखी टिप्पणियां की थीं और उनके पिता का जिक्र भी किया था। बाद में उन्होंने उस टिप्पणी के लिए माफी मांगी थी। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर भी रीति की आलोचना हुई।

    27 सितंबर के ‘वीकेंड का वार’ एपिसोड में सलमान खान ने भी रीति के व्यवहार और भाषा को लेकर उन्हें टोका। उन्होंने काजी को दी गई धमकी और उदिति सिंह को लेकर की गई टिप्पणियों पर रीति से सवाल किए।

    पहले भी बेटी के गेम पर बोल चुके हैं मनोज तिवारी

    इससे पहले मनोज तिवारी ने पैपराजी से बातचीत में रीति के बिग बॉस सफर को लेकर कहा था कि वह शो को ‘डर-डरकर’ देखते हैं और उम्मीद जताई थी कि सब ठीक रहे। रीति के शो में आने के बाद से उनके गेम और पिता के साथ रिश्ते को लेकर भी कई चर्चाएं सामने आई हैं।

  • महाराष्ट्र के BJP मंत्री की भतीजी नीला विखे पाटिल बनीं स्वीडन की सांसद, स्टॉकहोम सिटी से जीता चुनाव

    महाराष्ट्र के BJP मंत्री की भतीजी नीला विखे पाटिल बनीं स्वीडन की सांसद, स्टॉकहोम सिटी से जीता चुनाव


    स्टॉकहोम सिटी। महाराष्ट्र के BJP मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल की भतीजी नीला विखे पाटिल ने स्वीडन की राजनीति में अहम मुकाम हासिल किया है। ग्रीन पार्टी की नेता नीला ने स्टॉकहोम सिटी से चुनाव जीतकर 349 सदस्यीय स्वीडिश संसद में जगह बनाई है। चुनाव परिणाम के बाद उन्होंने अपने परिवार, खासकर अपने दादा और पूर्व केंद्रीय मंत्री बालासाहेब विखे पाटिल से जुड़ी यादें साझा कीं।

    अहमदनगर में बीता बचपन, महाराष्ट्र से आज भी गहरा जुड़ाव

    नीला का जन्म स्वीडन में हुआ, लेकिन उनके बचपन के शुरुआती साल महाराष्ट्र के अहमदनगर में बीते। बाद में वह स्वीडन लौट गईं और वहीं से उन्होंने राजनीति में अपना सफर आगे बढ़ाया। महाराष्ट्र से उनका पारिवारिक रिश्ता कई पीढ़ियों पुराना है। उनके दादा बालासाहेब विखे पाटिल पूर्व केंद्रीय मंत्री रहे हैं, जबकि पिता अशोक विखे पाटिल शिक्षाविद हैं। उनके चाचा राधाकृष्ण विखे पाटिल महाराष्ट्र सरकार में मंत्री हैं।

    चुनाव जीतने के बाद नीला ने अपने दादा को याद करते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि बालासाहेब विखे पाटिल को उन पर गर्व होता। उन्होंने बताया कि जब वह 15 साल की थीं, तब उनके दादा उन्हें महाराष्ट्र का बजट पढ़ने के लिए दिया करते थे। नीला ने अपने दादा के साथ बिताए आखिरी वर्षों की याद भी साझा की। उन्होंने बताया कि उस दौरान उनके दादा लगभग हर सप्ताह उन्हें फोन करते थे और अब उन्हें उनकी बहुत याद आती है।

    प्रधानमंत्री कार्यालय में भी कर चुकी हैं काम

    नीला विखे पाटिल कई वर्षों से स्वीडन की राजनीति में सक्रिय रही हैं। पूर्व प्रधानमंत्री स्टीफन लोफवेन के कार्यकाल में उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय में सलाहकार के तौर पर काम किया। इस दौरान वित्त, टैक्स और आवास से जुड़े विषयों पर उनकी जिम्मेदारी रही।

    इसके बाद वह स्टॉकहोम सिटी काउंसिल के लिए चुनी गईं। उन्होंने ग्रीन पार्टी की चुनाव समिति में भी काम किया। इसके अलावा वह स्वीडिश यंग ग्रीन्स और ग्रीन पार्टी की अन्य इकाइयों से जुड़ी रहीं।

    शिक्षा के क्षेत्र में भी नीला की पृष्ठभूमि विविध रही है। उन्होंने गोथेनबर्ग स्कूल ऑफ बिजनेस से अर्थशास्त्र और कानून की पढ़ाई की है। इसके साथ ही उन्होंने MBA की डिग्री हासिल की और मैड्रिड की कॉम्प्लूटेंस यूनिवर्सिटी में भी अध्ययन किया है।

    बच्चों के कल्याण और पर्यावरण पर रहेगा फोकस

    सांसद बनने के बाद नीला ने बच्चों के कल्याण और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल करने की बात कही है। उनका कहना है कि वह उन लोगों की आवाज बनना चाहती हैं, जो खुद वोट नहीं दे सकते। साथ ही वह स्टॉकहोम और पूरे स्वीडन के लिए योगदान देना चाहती हैं।

    भारत के साथ अपने रिश्ते पर भी नीला ने बात की। उन्होंने कहा कि वह भारत से बहुत प्यार करती हैं और देश से उनका गहरा जुड़ाव है। उनके कई करीबी दोस्त भी भारतीय हैं।

    सहकारिता आंदोलन से भी जुड़ा है विखे पाटिल परिवार

    नीला के परिवार का महाराष्ट्र की राजनीति और शिक्षा के साथ-साथ सहकारिता आंदोलन से भी पुराना संबंध रहा है। उनके परदादा विठ्ठलराव विखे पाटिल ने एशिया की पहली सहकारी चीनी मिल की स्थापना की थी। इसी वजह से परिवार की सामाजिक और सहकारी क्षेत्र में भी अलग पहचान रही है।

    स्वीडन में विपक्ष को तीन सीटों का बहुमत

    स्वीडन के चुनाव में वामपंथी विचारों वाली चार विपक्षी पार्टियों ने कुल 176 सीटें हासिल की हैं, जबकि मौजूदा रूढ़िवादी सरकार का समर्थन करने वाली पार्टियों को 173 सीटें मिली हैं। इस तरह विपक्षी दलों को तीन सीटों का अंतर मिला है।

    नतीजे सामने आने के बाद प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टरसन ने अपने इस्तीफे का ऐलान कर दिया। पूर्व प्रधानमंत्री मैग्डालेना एंडरसन की सोशल डेमोक्रेट्स पार्टी 99 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी है। हालांकि, विपक्षी दलों के बीच कई मुद्दों पर मतभेद हैं। ऐसे में नई सरकार बनाने के लिए एंडरसन को अलग-अलग दलों के साथ बातचीत करनी होगी।

  • शेख हसीना की बेटी साइमा वाजेद ने WHO के क्षेत्रीय प्रमुख पद से दिया इस्तीफा, वित्तीय धोखाधड़ी के आरोपों के बीच बड़ा फैसला

    शेख हसीना की बेटी साइमा वाजेद ने WHO के क्षेत्रीय प्रमुख पद से दिया इस्तीफा, वित्तीय धोखाधड़ी के आरोपों के बीच बड़ा फैसला


    नई दिल्ली।
    बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की बेटी साइमा वाजेद ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र की क्षेत्रीय निदेशक के पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने बुधवार को अपना इस्तीफा सौंपा, जो तत्काल प्रभाव से लागू हो गया। वाजेद के खिलाफ वित्तीय धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े से जुड़े आरोपों की जांच चल रही थी। उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया है।

    साइमा वाजेद ने वर्ष 2024 की शुरुआत में WHO के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र की क्षेत्रीय निदेशक का पद संभाला था। उनका कार्यकाल पांच साल का निर्धारित था। हालांकि, आरोपों और जांच के बीच WHO ने उन्हें पिछले साल बिना वेतन प्रशासनिक छुट्टी पर भेज दिया था।

    बांग्लादेश की भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी ने भी लगाए थे आरोप

    साइमा वाजेद के खिलाफ बांग्लादेश की भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी ने भी कार्रवाई की थी। एजेंसी ने मार्च 2025 में उन पर फ्रॉड और फर्जीवाड़े के आरोप लगाए थे। इसके बाद जुलाई 2025 में WHO ने उन्हें प्रशासनिक छुट्टी पर भेज दिया।

    WHO की ओर से लगाए गए आरोपों में चीन की यात्रा से जुड़े खर्च में कथित वित्तीय अनियमितता भी शामिल थी। इसके अलावा संगठन ने उनकी शैक्षणिक योग्यता पर भी सवाल उठाए थे। हालांकि, वाजेद ने इन आरोपों को खारिज किया है।

    वकीलों ने WHO को भेजा जवाब

    साइमा वाजेद के वकीलों ने जुलाई 2026 में WHO को पत्र भेजकर उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों का जवाब दिया था। पत्र में कहा गया था कि उनकी मुवक्किल ने किसी तरह की वित्तीय धोखाधड़ी नहीं की है। वकीलों ने उनकी शैक्षणिक योग्यता को लेकर लगाए गए आरोपों को भी गलत बताया था।

    जमीन हासिल करने के आरोप पर भी दी सफाई

    साइमा वाजेद पर बांग्लादेश में एक जमीन का प्लॉट कथित तौर पर गलत तरीके से हासिल करने का आरोप भी लगाया गया था। इस्तीफे में उन्होंने इस आरोप का भी जवाब दिया।

    वाजेद के मुताबिक, उन्होंने संबंधित जमीन WHO में शामिल होने से पहले हासिल की थी। उनका कहना है कि यह जमीन बांग्लादेश के उस कानून के तहत मिली थी, जो देश के स्वतंत्रता आंदोलन के नेता शेख मुजीबुर रहमान के परिवारों से जुड़ा था। शेख मुजीबुर रहमान, शेख हसीना के पिता हैं।

    शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद बढ़ा परिवार पर दबाव

    साइमा वाजेद का इस्तीफा ऐसे समय हुआ है जब बांग्लादेश में शेख हसीना और उनके परिवार से जुड़े लोगों पर राजनीतिक दबाव बढ़ा हुआ है। वर्ष 2024 में बांग्लादेश में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे, जिसके बाद शेख हसीना को प्रधानमंत्री पद छोड़ना पड़ा था।

    हसीना के कई करीबी नेताओं और सहयोगियों पर बांग्लादेश में अलग-अलग मामलों में आरोप लगाए गए हैं। इनमें भ्रष्टाचार से जुड़े मामले भी शामिल हैं। शेख हसीना देश छोड़ने के बाद भारत में रह रही हैं।

    हालांकि, साइमा वाजेद के खिलाफ लगे आरोपों को उनके द्वारा लगातार खारिज किया गया है। उनके इस्तीफे को शेख हसीना के परिवार पर बढ़ते राजनीतिक और कानूनी दबाव के व्यापक घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है।

    WHO शुरू करेगा नए क्षेत्रीय प्रमुख के चुनाव की प्रक्रिया

    साइमा वाजेद के इस्तीफे के बाद WHO अब दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के लिए नए क्षेत्रीय प्रमुख के चुनाव की प्रक्रिया शुरू करेगा। एक सूत्र के मुताबिक, यह प्रक्रिया अगले महीने शुरू होने की उम्मीद है।

    WHO का दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय कार्यालय सदस्य देशों में स्वास्थ्य संबंधी कार्यक्रमों और नीतियों के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में नए क्षेत्रीय निदेशक का चुनाव संगठन के लिए अहम माना जा रहा है।

  • बेटी के जन्म पर रिश्तों में आई दरार की कहानी बनी चर्चा, बुजुर्ग दंपति ने समाज को दिया समानता का संदेश

    बेटी के जन्म पर रिश्तों में आई दरार की कहानी बनी चर्चा, बुजुर्ग दंपति ने समाज को दिया समानता का संदेश

    नई दिल्ली । बेटी और बेटे के बीच भेदभाव को लेकर समाज में समय-समय पर बहस होती रही है। इसी विषय से जुड़ा एक अनुभव इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। एक बुजुर्ग दंपति ने अपने वीडियो के माध्यम से एक महिला की आपबीती साझा करते हुए समाज से बेटियों के प्रति समान और सम्मानजनक व्यवहार अपनाने की अपील की। वीडियो में साझा किए गए अनुभव ने परिवार, पालन-पोषण और सामाजिक सोच को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।

    वीडियो में बताया गया कि एक महिला ने बुजुर्ग दंपति से अपनी एक परिचित की कहानी साझा की। महिला के अनुसार, उसकी सहेली ने बेटी को जन्म दिया तो ससुराल पक्ष का व्यवहार अचानक बदल गया। कथित तौर पर परिवार के सदस्य नवजात बच्ची और उसकी मां से मिलने अस्पताल तक नहीं पहुंचे। इतना ही नहीं, अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद भी उसे अपने ससुराल ले जाने के बजाय मायके भेज दिया गया।

    महिला ने यह भी दावा किया कि बेटी के जन्म के बाद कई वर्षों तक ससुराल पक्ष ने उससे कोई संपर्क नहीं रखा और न ही उसकी या बच्ची की कोई जानकारी ली। बाद में जब बच्ची के पालन-पोषण और खर्च से जुड़े अधिकारों के लिए कानूनी नोटिस भेजा गया, तब कथित रूप से ससुराल पक्ष ने दोबारा संपर्क करने की इच्छा जताई। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस अनुभव ने सामाजिक सोच और पारिवारिक जिम्मेदारियों पर व्यापक चर्चा को जन्म दिया है।

    इस पूरे प्रसंग पर प्रतिक्रिया देते हुए बुजुर्ग दंपति ने कहा कि किसी भी बच्चे के जन्म को परिवार के लिए खुशी का अवसर माना जाना चाहिए, चाहे वह बेटा हो या बेटी। उन्होंने कहा कि बेटियां किसी भी दृष्टि से परिवार पर बोझ नहीं होतीं, बल्कि वे भी परिवार की जिम्मेदारियों को निभाने और माता-पिता का सहारा बनने में समान रूप से सक्षम होती हैं। उनके अनुसार, बच्चे के लिंग के आधार पर व्यवहार बदलना न केवल सामाजिक असमानता को बढ़ावा देता है, बल्कि परिवारों में भावनात्मक दूरी भी पैदा करता है।

    दंपति ने यह भी कहा कि आधुनिक समाज में शिक्षा, रोजगार, खेल, विज्ञान, प्रशासन और अन्य अनेक क्षेत्रों में बेटियां लगातार अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रही हैं। ऐसे में केवल लिंग के आधार पर उनके साथ भेदभाव करना न तो सामाजिक रूप से उचित है और न ही मानवीय दृष्टि से स्वीकार्य। उनका मानना है कि बच्चों के प्रति समान अवसर और समान सम्मान ही स्वस्थ समाज की पहचान है।

    विशेषज्ञ भी समय-समय पर इस बात पर जोर देते रहे हैं कि परिवार का सहयोग और सकारात्मक वातावरण बच्चे के मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। यदि जन्म के समय ही भेदभावपूर्ण व्यवहार किया जाए, तो इसका प्रभाव केवल मां पर ही नहीं, बल्कि बच्चे के भविष्य और पूरे परिवार के संबंधों पर भी पड़ सकता है।

    सोशल मीडिया पर सामने आई यह कहानी एक व्यक्तिगत अनुभव के रूप में साझा की गई है, लेकिन इसने बेटियों के सम्मान, लैंगिक समानता और जिम्मेदार अभिभावक बनने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर फिर से चर्चा शुरू कर दी है। समाज में समान अवसर और समान सम्मान की भावना को मजबूत करना ही ऐसे संदेशों का मुख्य उद्देश्य माना जा रहा है।

  • जौरा में दिनदहाड़े कट्टे की नोक पर लूट, पिता-पुत्री से लाखों के सोने के जेवर और नकदी लूटी

    जौरा में दिनदहाड़े कट्टे की नोक पर लूट, पिता-पुत्री से लाखों के सोने के जेवर और नकदी लूटी



    मुरैना। जिले के जौरा थाना क्षेत्र में शनिवार दोपहर दिनदहाड़े कट्टे की नोक पर लूट की सनसनीखेज वारदात सामने आई। पिता के साथ बाइक से घर लौट रही विवाहिता पुत्री को तीन अज्ञात बदमाशों ने रास्ते में रोककर सोने के जेवर, मोबाइल फोन और नकदी लूट ली। घटना के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल है। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण कर अज्ञात आरोपियों की तलाश शुरू कर दी।

    जानकारी के अनुसार, धनेला निवासी राकेश सिंह गुर्जर शनिवार दोपहर करीब 1रू30 बजे अपनी विवाहिता पुत्री प्रवेश गुर्जर को चाचूल गांव से बाइक पर बैठाकर धनेला लौट रहे थे। जब वे पगारा रोड पर पुलिस चौकी से कुछ आगे पहुंचे, तभी एक बाइक पर सवार तीन अज्ञात युवक उनके बराबर आ गए। प्रत्यक्ष जानकारी के अनुसार, बदमाशों ने चलते-चलते राकेश गुर्जर की बाइक की चाबी निकाल ली, जिससे उनकी बाइक बंद हो गई। इसके बाद दो बदमाश, जिन्होंने कपड़े से अपने चेहरे ढके हुए थे, बाइक से उतरे और पिता-पुत्री पर देशी कट्टा तान दिया। हथियार के बल पर दोनों को धमकाते हुए बदमाशों ने उनके पास मौजूद कीमती सामान लूट लिया।

    सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस
    घटना के तुरंत बाद पीडि़त राकेश गुर्जर ने पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम घटनास्थल पर पहुंची और मौके का निरीक्षण किया। आसपास के क्षेत्र में बदमाशों की तलाश भी की गई, लेकिन देर शाम तक उनका कोई सुराग नहीं लग सका।

    अज्ञात लुटेरों के खिलाफ मामला दर्ज
    पुलिस ने फरियादी की शिकायत के आधार पर तीन अज्ञात आरोपियों के विरुद्ध लूट का मामला दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने के साथ-साथ संभावित मार्गों पर जांच कर रही है। बदमाशों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें सक्रिय कर दी गई हैं।

    दिनदहाड़े वारदात से क्षेत्र में दहशत
    दिनदहाड़े हथियार के बल पर हुई इस लूट की घटना से पगारा रोड और आसपास के ग्रामीण क्षेत्र में भय का माहौल है। स्थानीय लोगों ने पुलिस से क्षेत्र में गश्त बढ़ाने और जल्द से जल्द आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की है।

    ये सामान लूटकर फरार हुए बदमाश
    लुटेरे विवाहिता से सोने के आभूषण उतरवाकर ले गए, जिनमें सोने की 4 चूडि़यां,2 सोने की अंगूठियां,1 बड़ा मंगलसूत्र, 5 पुताई वाला एक मंगलसूत्र, कान का एक झाला व इसके अलावा बदमाश राकेश गुर्जर का मोबाइल फोन तथा 5,000 रूपए नकद भी लूटकर मौके से फरार हो गए।
  • हैदराबाद में बेटी और प्रेमी ने मां की हत्या कर बेडरूम में दबाया शव, कंक्रीट से ढक दिया..

    हैदराबाद में बेटी और प्रेमी ने मां की हत्या कर बेडरूम में दबाया शव, कंक्रीट से ढक दिया..


    हैदराबाद के जवाहरनगर से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसमें एक साल से लापता 40 वर्षीय महिला अंजू दासारी की हत्या का खुलासा हुआ है। महिला का शव उसी घर के बेडरूम की फर्श के नीचे दबा पाया गया, जहां उसकी छोटी बेटी रोशनी और उसके प्रेमी 22 वर्षीय ऑटो ड्राइवर मोंटी कुमार सिंह रह रहे थे।

    जांच अधिकारियों के मुताबिक अंजू दासारी घरों में साफ-सफाई का काम करती थीं और उनकी हत्या का कारण यह था कि वह अपनी बेटी और मोंटी के रिश्ते के खिलाफ थीं। 17 अक्टूबर 2025 को बेटी ने पुलिस में मां की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। लेकिन लगभग एक साल तक बेटी उसी कमरे में सोती रही, जहां उसकी मां का शव दबा हुआ था।

    मलकाजगिरि जोन के DCP सीएच श्रीधर ने बताया कि 17 वर्षीय बेटी के बयानों में विरोधाभास और कॉल डेटा रिकॉर्ड (CDR) ने पुलिस को शक दिलाया। जांच में पता चला कि मोंटी का नाम इसमें सामने आया और दोनों ने हत्या की योजना बनाई।

    पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने शादी में रुकावट बनने के कारण अंजू की हत्या की। भय के कारण दोनों ने शव को घर के अंदर गहरा गड्ढा खोदकर दबा दिया और ऊपर से कंक्रीट की फर्श डाल दी ताकि बदबू बाहर न आए। बुधवार को फोरेंसिक एक्सपर्ट्स की मौजूदगी में फर्श खोदा गया, जहां से महिला का सड़ा-गला कंकाल बरामद हुआ।

    पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम और डीएनए टेस्ट के लिए भेजा है। दोनों आरोपी गिरफ्तार होकर जेल भेज दिए गए हैं। अब पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इस खौफनाक साजिश में कोई अन्य बाहरी व्यक्ति शामिल था।

    यह मामला न केवल परिवार में आपसी विवाद और प्रेम संबंधों की सीमा को उजागर करता है, बल्कि यह बताता है कि कैसे अपराधियों ने पूरे साल तक एक भयानक रहस्य छिपाए रखा।

  • ग्वालियर में बेटे ने पिता और बेटी को बेरहमी से पीटा, गृहस्थी का सामान महिला मित्र के घर ले गया

    ग्वालियर में बेटे ने पिता और बेटी को बेरहमी से पीटा, गृहस्थी का सामान महिला मित्र के घर ले गया



    ग्वालियर । ग्वालियर की पुरानी छावनी बाथम मोहल्ला में एक बेहद चिंताजनक और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। 72 वर्षीय रामदास तोमर और उनकी बेटी मोहिनी तोमर अपने ही बेटे राजेश तोमर की हिंसक हरकतों का शिकार बन गए। आरोप है कि राजेश ने अपनी महिला मित्र रेखा बाथम के लिए पूरे परिवार और गृहस्थी को जोखिम में डालते हुए घर से सभी कीमती सामान अपने साथ ले लिया और पिता-पुत्री को जमकर पीटा।

    रामदास तोमर ने पुलिस को बताया कि कुछ दिन पहले उनका बेटा राजेश शराब पीने का आदी बन चुका है और अक्सर घर में मारपीट करता है। उनकी बहू और बच्चों के साथ भी वह अक्सर मारपीट करता था। इस बार राजेश ने परिवार की गैरमौजूदगी में घर से पूरे गृहस्थी का सामान निकाल लिया। जब रामदास और उनकी बेटी मोहिनी सामान लेने उनके घर गए, तो राजेश ने उन्हें पीटा। इस दौरान उसकी महिला मित्र रेखा बाथम ने भी बेटी पर हमला किया। घटना के बाद पिता-पुत्री को मानसिक और शारीरिक चोटें आईं, और उन्हें स्थानीय पुलिस के पास शिकायत दर्ज करानी पड़ी।

    पुलिस ने बताया कि रेखा बाथम बाथम मोहल्ला में रहती है और राजेश उसका टेंपो चलाता है। घटना के समय रेखा के बच्चे और परिवार अपने गांव गए हुए थे, जिससे राजेश को मौका मिला और उसने रात के समय घर से दो बार सामान भरकर ले गया। केवल एक ड्रम और टब जैसी कुछ वस्तुएं छोड़ दी गईं।

    रामदास ने बताया कि राजेश की महिला मित्र के लिए अति लगाव ने उसे परिवार और जिम्मेदारियों से दूर कर दिया। अपने पिता और बेटी के साथ हिंसा करने के बाद राजेश ने गृहस्थी का सामान अपने प्रेम संबंध के घर पहुंचा दिया। पुलिस ने कहा कि इस मामले में पिता की शिकायत के आधार पर तुरंत कार्रवाई की जा रही है और आरोपी के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है।

    पुरानी छावनी थाना पुलिस ने बताया कि इस मामले में आरोपी की गिरफ्तारी और उसकी महिला मित्र की भूमिका की भी जांच की जा रही है। साथ ही, परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि ऐसे मामलों में समय पर कार्रवाई बेहद जरूरी है ताकि परिवार और समाज दोनों सुरक्षित रह सकें।

    विशेषज्ञों के अनुसार, यह घटना परिवारिक संबंधों में आए तनाव, अविवेकपूर्ण संबंध और व्यक्तिगत लालच का एक गंभीर उदाहरण है। इसके साथ ही यह समाज और समुदाय के लिए चेतावनी भी है कि अविवेकपूर्ण निर्णय और गलत संगति किस हद तक हिंसा और पारिवारिक विवाद में बदल सकते हैं।