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  • बेटे वरुण संग आखिरी फिल्म के बाद रिटायरमेंट की तैयारी ने फैंस को किया भावुक

    बेटे वरुण संग आखिरी फिल्म के बाद रिटायरमेंट की तैयारी ने फैंस को किया भावुक

    नई दिल्ली ।   बॉलीवुड को सालों तक अपनी कॉमेडी फिल्मों से हंसाने वाले मशहूर डायरेक्टर डेविड धवन ने एक बहुत बड़ा फैसला लिया है. वे अब फिल्में बनाना छोड़ रहे हैं, यानी वे रिटायर होने जा रहे हैं. उनकी आखिरी फिल्म बेटे वरुण धवन के साथ ‘है जवानी तो इश्क होना है’ होगी. अपनी रिटायरमेंट का ऐलान उन्होंने हाल ही में पीवीआर के एक खास इवेंट में किया. इस खबर को सुनकर इंडस्ट्री के कई लोग और उनके फैंस को झटका लगा है, क्योंकि अब डेविड धवन फिल्मों का डायरेक्शन करते हुए नजर नहीं आएंगे. उन्होंने अपने अब तक के करियर में करीब 45 फिल्मों का निर्देशन किया है. डायरेक्टर ने अपने करियर की शुरुआत साल 1989 में आई फिल्म ‘ताकतवर’ से की थी. डेविड धवन ने बॉलीवुड के सुपरस्टार सलमान खान का भी कमबैक कराया था.
    डेविड धवन क्यों हुए इमोशनल
    फेमस डायरेक्टर डेविड धवन इन दिनों अपने बेटे की फिल्म ‘है जवानी तो इश्क होना है’ को लेकर चर्चा में बने हुए हैं. इस फिल्म के ट्रेलर लॉन्च में डेविड धवन भी नजर आए थे. इस दौरान मीडिया से बात करते हुए वे इमोशनल हो गए. उन्होंने ट्रेलर इवेंट में बेटे वरुण धवन की जमकर तारीफ की. डायरेक्टर ने कहा, ‘जब मैं साल 2022 में बीमार पड़ा था, तो वह मेरे साथ अस्पताल में सोया करता था.’ पिता को इमोशनल देख एक्टर वरुण धवन ने उन्हें शांत किया. वरुण धवन की फिल्म ‘है जवानी तो इश्क होना है’ सिनेमाघरों में 5 जून को रिलीज होगी, जो डेविड धवन की आखिरी फिल्म होगी.

    डेविड धवन ने फिल्म मेकिंग से लिया संन्यास?

    बॉलीवुड के मशहूर डायरेक्टर डेविड धवन ने 23 मई 2026 को डायरेक्शन की दुनिया को अलविदा कह दिया है. उन्होंने इसका ऐलान एक इवेंट के दौरान किया. इस पार्टी में बॉलीवुड के सुपरस्टार सलमान खान, करण जौहर, पूजा हेगड़े, वरुण धवन और चंकी पांडे जैसे सितारे शामिल हुए थे. दरअसल, डायरेक्टर की रिटायरमेंट की खबर की पुष्टि करण जौहर ने की है. उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर एक स्टोरी शेयर की, जिसमें उन्होंने लिखा, ‘कल जब मैं डेविड जी के सेलिब्रेशन में गया, तो उन्होंने मुझे बताया कि यह ‘है जवानी तो इश्क होना है’ उनकी आखिरी फिल्म होने वाली है.’
    डेविड धवन ने बॉलीवुड को दी कई हिट कॉमेडी
    फेमस डायरेक्टर डेविड धवन को बॉलीवुड के सबसे बड़े कॉमेडी डायरेक्टर्स में गिना जाता है. उन्होंने 90 और 2000 के दशक में एक से बढ़कर एक सुपरहिट फिल्में दी हैं, जिन्होंने दर्शकों को खूब हंसाया है. उन्होंने इंडस्ट्री को राजा बाबू, जुड़वा, पार्टनर, मिस्टर एंड मिसेज खिलाड़ी, हीरो नंबर 1, हसीना मान जाएगी, मुझसे शादी करोगी, कुली नंबर 1 और मैंने प्यार किया जैसी कई फिल्में दी हैं।
    कई बड़े कलाकारों संग किया काम
    डेविड धवन को बॉलीवुड इंडस्ट्री में कॉमेडी फिल्मों के सबसे सफल निर्देशकों में माना जाता है. उन्होंने अपने लंबे फिल्मी सफर में कई बड़े सितारों संग काम किया है. इसमें अमिताभ बच्चन, गोविंदा, सलमान खान, अक्षय कुमार, तापसी पन्नू, माधुरी दीक्षित और करिश्मा कपूर जैसे कई सितारे शामिल हैं. डेविड धवन ने करीब 6 साल के ब्रेक के बाद ‘है जवानी तो इश्क होना है’ के साथ डायरेक्शन में वापसी की है. इसमें उनके बेटे वरुण धवन के अलावा मृणाल ठाकुर, पूजा हेगड़े, मौनी रॉय, राकेश बेदी, राजेश कुमार और मनीष पॉल जैसे सितारे नजर आएंगे. सिनेमाघरों में यह फिल्म 5 जून को रिलीज होगी.
  • रीमेक की चर्चा में बड़ा खुलासा: ‘शोला और शबनम’ आज बनी तो कौन होगा नया स्टार कपल, डेविड धवन का चौंकाने वाला जवाब

    रीमेक की चर्चा में बड़ा खुलासा: ‘शोला और शबनम’ आज बनी तो कौन होगा नया स्टार कपल, डेविड धवन का चौंकाने वाला जवाब


    नई दिल्ली।भारतीय सिनेमा के 90 के दशक की यादगार फिल्मों में शामिल ‘शोला और शबनम’ आज भी दर्शकों के बीच एक खास पहचान रखती है। इस फिल्म ने उस दौर में कॉमेडी, रोमांस और एक्शन का ऐसा मिश्रण पेश किया था, जिसने इसे सुपरहिट बना दिया। गोविंदा और दिव्या भारती की जोड़ी ने इस फिल्म को अलग ही ऊंचाई दी थी, जबकि निर्देशन की कमान संभालने वाले डेविड धवन ने इसे अपने करियर की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल किया था। अब इसी फिल्म को लेकर डेविड धवन का एक ताजा बयान चर्चा में है, जिसमें उन्होंने बताया कि अगर यह फिल्म आज के समय में दोबारा बनाई जाती, तो इसके किरदारों के लिए उनकी सोच क्या होती।

    डेविड धवन के अनुसार, आज के समय में फिल्मों की कहानी और प्रस्तुति तो वही रह सकती है, लेकिन किरदारों को निभाने के लिए ऐसे कलाकारों की जरूरत होती है जो गंभीरता और कॉमेडी दोनों को संतुलित तरीके से निभा सकें। उन्होंने कहा कि ‘शोला और शबनम’ जैसी फिल्म केवल हंसी-मजाक की कहानी नहीं थी, बल्कि इसके भीतर एक मजबूत भावनात्मक परत भी थी, जिसे समझना और पर्दे पर उतारना बेहद जरूरी है।

    सबसे खास बात यह रही कि जब उनसे पूछा गया कि क्या वह इस रीमेक में अपने बेटे वरुण धवन को लेंगे, तो उन्होंने इस पर सहमति नहीं जताई। इसके बजाय उन्होंने नई पीढ़ी के दो उभरते चेहरों की ओर इशारा किया। उनके अनुसार, अहान पांडे और अनीता पड्डा इस तरह की कहानी के लिए उपयुक्त विकल्प हो सकते हैं। उनका मानना है कि हाल के समय में इन दोनों कलाकारों ने अपनी स्क्रीन उपस्थिति और अभिनय क्षमता से यह साबित किया है कि वे बड़े किरदारों को संभालने में सक्षम हैं।

    मूल फिल्म की बात करें तो ‘शोला और शबनम’ वर्ष 1992 में रिलीज हुई थी और यह अपने समय की एक बड़ी व्यावसायिक सफलता साबित हुई थी। फिल्म की कहानी एनसीसी कैडेट करण के जीवन संघर्षों और उसके निजी व भावनात्मक उतार-चढ़ाव के इर्द-गिर्द घूमती है। इसमें रोमांस, ड्रामा और एक्शन का बेहतरीन संतुलन देखने को मिला था, जिसने दर्शकों को पूरे समय बांधे रखा।

    गोविंदा और दिव्या भारती की केमिस्ट्री इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है। दोनों ने अपने किरदारों में जो सहजता और ऊर्जा दिखाई, उसने फिल्म को यादगार बना दिया। इसके साथ ही सहायक कलाकारों ने भी कहानी को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई, जिससे फिल्म की प्रभावशीलता और बढ़ गई।

    उस दौर में यह फिल्म बड़ी हिट साबित हुई और साल की सबसे सफल फिल्मों में से एक बन गई। आज भी इसे एक क्लासिक के रूप में याद किया जाता है, जिसे बार-बार देखने का मन करता है।

    डेविड धवन का यह बयान यह भी दिखाता है कि समय के साथ फिल्म इंडस्ट्री कैसे बदल रही है। पहले जहां बड़े सितारों का दबदबा हुआ करता था, वहीं अब नई प्रतिभाओं को मौके मिल रहे हैं। यह बदलाव दर्शकों की बदलती पसंद और आधुनिक कहानी कहने के तरीके को भी दर्शाता है।

    ‘शोला और शबनम’ जैसी फिल्में यह साबित करती हैं कि अच्छी कहानी कभी पुरानी नहीं होती, बस उसे नए कलाकारों और नए अंदाज में पेश करने की जरूरत होती है।

  • डेविड धवन ने पहली बार तोड़ी चुप्पी, बताया आखिर क्यों सुपरस्टार शाहरुख खान के साथ कभी नहीं बन पाई कोई फिल्म।

    डेविड धवन ने पहली बार तोड़ी चुप्पी, बताया आखिर क्यों सुपरस्टार शाहरुख खान के साथ कभी नहीं बन पाई कोई फिल्म।


    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा के इतिहास में जब भी व्यावसायिक और मनोरंजक फिल्मों का जिक्र होता है, तो निर्देशक डेविड धवन का नाम सबसे ऊपर आता है। उन्होंने अपने करियर में गोविंदा, सलमान खान, संजय दत्त और अमिताभ बच्चन जैसे दिग्गज कलाकारों के साथ काम करके सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित किए। डेविड धवन की फिल्मों की अपनी एक अलग पहचान रही है, जिसमें हंसी, मस्ती और पारिवारिक मनोरंजन का अनूठा संगम होता है। हालांकि, फिल्म जगत के जानकारों और प्रशंसकों के मन में हमेशा यह एक बड़ा सवाल बना रहा कि आखिर क्यों डेविड धवन ने ‘रोमांस के बादशाह’ शाहरुख खान के साथ कभी कोई फिल्म निर्देशित नहीं की। यह सवाल इसलिए भी अहम है क्योंकि जिस दौर में डेविड धवन एक के बाद एक सुपरहिट फिल्में दे रहे थे, उसी दौर में शाहरुख खान भी बॉलीवुड के सबसे बड़े सुपरस्टार बनकर उभरे थे।

    हाल ही में अपनी आने वाली फिल्म के प्रचार के दौरान डेविड धवन ने इस रहस्य से पर्दा हटाया और बताया कि उनके और शाहरुख के बीच कभी किसी अनबन या मतभेद की वजह से दूरी नहीं रही। असल में एक समय ऐसा भी था जब दोनों कलाकार और निर्देशक साथ में किसी प्रोजेक्ट पर काम करने की गंभीरता से योजना बना रहे थे। डेविड धवन के अनुसार, वह शाहरुख खान की प्रतिभा के कायल रहे हैं और उनके मन में हमेशा से उनके साथ काम करने की इच्छा थी। दोनों के बीच बातचीत भी हुई और एक कहानी को लेकर शुरुआती चर्चाएं भी की गईं, लेकिन सिनेमाई दुनिया के कुछ व्यावहारिक कारणों ने इस जोड़ी को पर्दे पर आने से रोक दिया।

    इस दूरी का सबसे बड़ा कारण डेविड धवन का उस समय का अत्यधिक व्यस्त वर्क शेड्यूल था। निर्देशक ने साझा किया कि 90 के दशक और उसके बाद के वर्षों में उनके पास काम का इतना दबाव रहता था कि अक्सर उनकी दो से तीन फिल्में एक साथ फ्लोर पर रहती थीं। एक फिल्म की शूटिंग खत्म होने से पहले ही दूसरी फिल्म के प्री-प्रोडक्शन का काम शुरू हो जाता था। दूसरी ओर, शाहरुख खान भी अपने करियर के शिखर पर थे और उनकी डेट्स मिलना बेहद चुनौतीपूर्ण था। डेविड धवन का कहना है कि जब वे दोनों एक प्रोजेक्ट के लिए साथ बैठने की कोशिश करते थे, तो समय का तालमेल नहीं बैठ पाता था। निर्देशक का मानना है कि किसी बड़े स्टार के साथ काम करने के लिए पूरी एकाग्रता और समय की आवश्यकता होती है, जो उस समय उपलब्ध नहीं हो पा रहा था।

    डेविड धवन ने यह भी स्पष्ट किया कि फिल्म उद्योग में कलाकारों के साथ उनकी एक खास ‘ट्यूनिंग’ रही है। जैसे गोविंदा के साथ उनकी जोड़ी ने लगातार कई ब्लॉकबस्टर फिल्में दीं, वैसे ही सलमान खान और संजय दत्त के साथ भी उनका एक सहज रिश्ता बन गया था। उन्होंने अपनी शैली की फिल्मों के लिए एक विशेष कलाकार वर्ग चुन लिया था, जिसके साथ वे काम करने में बहुत सहज महसूस करते थे। हालांकि, वे शाहरुख खान के साथ भी वैसा ही जादुई अनुभव साझा करना चाहते थे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। समय बीतता गया और वे अपने स्थापित कलाकारों के साथ प्रोजेक्ट्स में व्यस्त होते गए, जिसके कारण शाहरुख के साथ काम करने का विचार धीरे-धीरे पीछे छूट गया।

    वर्तमान परिदृश्य की बात करें तो डेविड धवन आज भी फिल्म निर्माण की दुनिया में सक्रिय हैं और अब वे अपने बेटे वरुण धवन के साथ नई पीढ़ी के दर्शकों के लिए कॉमेडी फिल्में बना रहे हैं। उनकी आने वाली फिल्म ‘है जवानी तो इश्क होना है’ को लेकर दर्शकों में जबरदस्त उत्साह है। यह फिल्म न केवल डेविड के निर्देशन की वापसी को दर्शाती है, बल्कि वरुण धवन के करियर के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भले ही डेविड धवन और शाहरुख खान का साथ काम करने का सपना अधूरा रह गया हो, लेकिन डेविड के मन में आज भी शाहरुख के प्रति गहरा सम्मान है। वे मानते हैं कि शाहरुख एक बेहद मेहनती और समर्पित अभिनेता हैं और अगर भविष्य में कभी सही स्क्रिप्ट और सही समय का मेल हुआ, तो दर्शक शायद उस अधूरा सपने को पूरा होते देख सकें।

    डेविड धवन और शाहरुख खान का साथ न आना फिल्म इंडस्ट्री के उन ‘मिसिंग लिंक्स’ में से एक है जिसे लेकर प्रशंसक आज भी चर्चा करते हैं। यह कहानी हमें सिखाती है कि मनोरंजन की चकाचौंध भरी दुनिया में कभी-कभी प्रतिभा की कमी नहीं, बल्कि समय और परिस्थितियों का सही तालमेल न बैठना बड़े कोलैबोरेशंस को रोक देता है। डेविड धवन की सुपरहिट फिल्मों की सूची में भले ही शाहरुख खान का नाम शामिल न हो, लेकिन दोनों ने अपने-अपने तरीके से भारतीय सिनेमा को समृद्ध किया है। आज भी जब डेविड अपनी पुरानी यादें साझा करते हैं, तो उनके शब्दों में एक कलाकार के प्रति दूसरे कलाकार का सम्मान साफ झलकता है, जो यह साबित करता है कि सिनेमाई पर्दे से परे भी रिश्तों और व्यावसायिक व्यस्तताओं की अपनी एक अलग जटिलता होती है।