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  • Gen-Z के सवालों का जवाब देंगे कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय, संस्कार जीवन और करियर पर होगी खुली चर्चा

    Gen-Z के सवालों का जवाब देंगे कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय, संस्कार जीवन और करियर पर होगी खुली चर्चा


    इंदौर । मध्य प्रदेश के इंदौर में युवाओं के लिए Gen-Z चर्चा का आयोजन किया जा रहा है। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के तक्षशिला परिसर स्थित ऑडिटोरियम में प्रसिद्ध कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय युवाओं से सीधे संवाद करेंगे। इस कार्यक्रम की खास बात यह है कि युवा केवल उनके विचार सुनने तक सीमित नहीं रहेंगे बल्कि अपने मन में उठ रहे सवाल भी सीधे उनके सामने रख सकेंगे। करियर रिश्ते संस्कार जीवन के उद्देश्य और व्यक्तिगत विकास जैसे विषयों पर चर्चा के जरिए युवाओं को अपने सवालों पर विचार करने का अवसर मिलेगा। आयोजकों ने कार्यक्रम में युवाओं के लिए प्रवेश निशुल्क रखा है।

    करियर से रिश्तों तक हर सवाल पर होगी बात

    आज की युवा पीढ़ी के सामने करियर चुनने से लेकर भविष्य की योजना बनाने तक कई तरह की चुनौतियां हैं। पढ़ाई पूरी करने के बाद किस क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहिए रिश्तों में विश्वास और समझदारी कैसे बनाए रखनी चाहिए और जीवन में अपनी प्राथमिकताएं कैसे तय करनी चाहिए जैसे सवाल युवाओं के मन में रहते हैं। इसके साथ ही परिवार की अपेक्षाओं और अपनी पसंद के बीच संतुलन बनाना भी कई युवाओं के लिए चुनौती बन जाता है। Gen-Z चर्चा में इन विषयों पर खुलकर बातचीत होने की उम्मीद है। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को अपने सवाल सामने रखने और अलग-अलग नजरियों से जीवन को समझने का अवसर देना है।

    सिर्फ प्रवचन नहीं सवाल-जवाब होगा खास आकर्षण

    इस आयोजन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा प्रश्नोत्तर सत्र रहेगा। आमतौर पर धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यक्रमों में श्रोता वक्ता के विचार सुनते हैं लेकिन यहां युवाओं को अपनी जिज्ञासाएं सीधे रखने का मौका मिलेगा। वे जीवन में आने वाली उलझनों रिश्तों में पैदा होने वाली परेशानियों और भविष्य को लेकर अपनी चिंताओं पर सवाल पूछ सकेंगे। कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय अपने विचारों और आध्यात्मिक दृष्टिकोण के जरिए इन सवालों पर बात करेंगे। इस तरह कार्यक्रम युवाओं और आध्यात्मिक विचारों के बीच संवाद का मंच बनेगा।

    डिजिटल दौर में संस्कार और जीवन मूल्यों पर चर्चा

    Gen-Z यानी नई युवा पीढ़ी की सोच जीवनशैली और प्राथमिकताएं इन दिनों व्यापक चर्चा का विषय हैं। सोशल मीडिया और इंटरनेट ने युवाओं को जानकारी के नए अवसर दिए हैं लेकिन इसके साथ तुलना तनाव भविष्य की चिंता और रिश्तों में बदलते व्यवहार जैसी चुनौतियां भी सामने आई हैं। ऐसे समय में जीवन मूल्यों संस्कारों और व्यक्तिगत जिम्मेदारियों पर बातचीत महत्वपूर्ण हो जाती है। इस कार्यक्रम में युवाओं को अपने अनुभव साझा करने और जीवन के विभिन्न पहलुओं को आध्यात्मिक नजरिए से समझने का अवसर मिलेगा। इसका मकसद नई पीढ़ी के सवालों को समझना और उनके साथ सार्थक संवाद करना है।

    सुबह से शुरू होगा कार्यक्रम

    आयोजकों की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार सुबह 9:30 बजे प्रतिभागियों का चेक इन होगा। सुबह 10:15 बजे बैठने और स्वागत की व्यवस्था की जाएगी। सुबह 10:30 बजे इंद्रेश उपाध्याय के आगमन और दीप प्रज्वलन का कार्यक्रम रखा गया है। इसके बाद सुबह 11 बजे Gen-Z चर्चा की शुरुआत होगी। दोपहर 12 बजे प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया जाएगा और 12:15 बजे समापन संबोधन होगा। दोपहर 12:30 बजे कार्यक्रम समाप्त होगा।

    इंदौर में आयोजित यह चर्चा युवाओं को अपने सवाल खुलकर रखने का अवसर देगी। करियर रिश्तों संस्कारों और जीवन के उद्देश्य जैसे विषयों पर होने वाला संवाद नई पीढ़ी की सोच और उसकी प्राथमिकताओं को समझने का माध्यम बन सकता है। युवाओं के लिए यह कार्यक्रम अपनी जिज्ञासाओं को सामने रखने और जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार करने का अवसर होगा।
  • झाबुआ में बनेगा DAVV का मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज में अस्थायी संचालन की तैयारी

    झाबुआ में बनेगा DAVV का मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज में अस्थायी संचालन की तैयारी


    नई दिल्ली। इंदौर स्थित देवी अहिल्या विश्वविद्यालय अब आदिवासी बहुल झाबुआ जिले में अपना मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। विश्वविद्यालय को इसके लिए राज्य सरकार द्वारा भूमि आवंटित कर दी गई है, जिससे परियोजना को औपचारिक रूप से मंजूरी मिल चुकी है।

    इंजीनियरिंग कॉलेज में अस्थायी संचालन की योजना

    कुलगुरु प्रोफेसर राकेश सिंघई के अनुसार, जब तक मेडिकल कॉलेज का नया भवन तैयार नहीं होता, तब तक अस्थायी रूप से इंजीनियरिंग कॉलेज परिसर में ही मेडिकल शिक्षा शुरू करने का प्रस्ताव है। इसके लिए विश्वविद्यालय ने अनुमति के लिए आवेदन किया है और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) से मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है।

     झाबुआ जिला अस्पताल बनेगा टीचिंग हॉस्पिटल

    योजना के तहत झाबुआ जिला अस्पताल को मेडिकल कॉलेज के टीचिंग हॉस्पिटल के रूप में विकसित किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार अस्पताल में लगभग 250 बेड पहले से उपलब्ध हैं, और इसे 300 बेड क्षमता तक बढ़ाया जाएगा, जो 100 मेडिकल सीटों के लिए आवश्यक मानक है।

    परियोजना की लागत और विकास योजना

    मेडिकल कॉलेज की आधारभूत संरचना तैयार करने में शुरुआती तौर पर करीब 350 से 400 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। हालांकि अस्पताल पहले से उपलब्ध होने के कारण लागत अपेक्षाकृत नियंत्रित रहेगी।

    शासन की मंजूरी पर टिकी आगे की प्रक्रिया

    विश्वविद्यालय ने उम्मीद जताई है कि इस महीने के भीतर अनुमति से जुड़ा निर्णय आ सकता है। यदि मंजूरी मिलती है तो झाबुआ में मेडिकल शिक्षा की शुरुआत अस्थायी ढांचे से ही कर दी जाएगी।

     आदिवासी क्षेत्र के लिए बड़ा बदलाव

    झाबुआ जैसे आदिवासी क्षेत्र में मेडिकल कॉलेज की स्थापना से न सिर्फ चिकित्सा शिक्षा का विस्तार होगा, बल्कि स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं में भी बड़ा सुधार आने की उम्मीद है।

    शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों में नई शुरुआत

    देवी अहिल्या विश्वविद्यालय की यह पहल मध्यप्रदेश के आदिवासी क्षेत्रों में उच्च चिकित्सा शिक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।