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  • दिल्ली में 200 वर्ग किमी में बसेगी नई टाउनशिप, 12 लाख घरों के साथ 600 किमी से ज्यादा सड़कें बनाने की योजना

    दिल्ली में 200 वर्ग किमी में बसेगी नई टाउनशिप, 12 लाख घरों के साथ 600 किमी से ज्यादा सड़कें बनाने की योजना

    नई दिल्ली ।देश की राजधानी दिल्ली में शहरी विकास को विस्तार देने के लिए करीब 200 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में नई टाउनशिप विकसित करने की योजना पर काम किया जा रहा है। इस योजना के तहत लगभग 12 लाख नए घर बनाने पर विचार किया जा रहा है। दिल्ली विकास प्राधिकरण की लैंडपूलिंग नीति को आगे बढ़ाते हुए किसानों और जमीन मालिकों के साथ बातचीत शुरू की गई है। इसका उद्देश्य जमीन के नियोजित इस्तेमाल के जरिए आवासीय और अन्य शहरी सुविधाओं का विकास करना है। योजना में खास तौर पर मध्यम आय वर्ग के लोगों के लिए किफायती आवास उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।

    इस पहल को दिल्ली के मास्टर प्लान 2047 के प्रावधानों से जोड़कर आगे बढ़ाया जा रहा है। इसके अंतर्गत राजधानी के बाहरी और ग्रामीण इलाकों में बड़े भूभाग को सुनियोजित तरीके से विकसित करने की तैयारी है। प्रस्तावित विकास मॉडल में जमीन मालिकों की भागीदारी महत्वपूर्ण होगी। उन्हें लैंडपूलिंग नीति की प्रक्रिया, विकास की रूपरेखा और इसमें उनकी भूमिका के बारे में जानकारी दी जा रही है। इसके लिए संबंधित किसानों और भू-स्वामियों के साथ बैठकें की जा रही हैं।

    प्रस्तावित योजना के तहत करीब 200 वर्ग किलोमीटर जमीन पर आवासीय टाउनशिप विकसित की जाएगी। इसमें लगभग 12 लाख घर बनाने की योजना है। इन घरों को किफायती दरों पर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि मध्यम आय वर्ग के लोगों को राजधानी में आवास पाने के अधिक अवसर मिल सकें। इसके साथ ही नियोजित विकास के माध्यम से अनधिकृत कॉलोनियों के विस्तार को रोकने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    योजना का एक प्रमुख हिस्सा बुनियादी ढांचे का विकास है। लैंडपूलिंग नीति के तहत घरों का निर्माण शुरू होने से पहले सड़कों और दूसरी जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था पर जोर दिया गया है। इसके लिए 30 मीटर या उससे अधिक चौड़ी सड़कों का नेटवर्क चरणबद्ध तरीके से तैयार किया जाना है। प्रस्तावित योजना में 600 किलोमीटर से ज्यादा अतिरिक्त सड़क नेटवर्क विकसित करने का लक्ष्य है। इससे नए विकसित होने वाले क्षेत्रों को बेहतर संपर्क सुविधा देने और आवागमन को सुगम बनाने में मदद मिल सकती है।

    इस टाउनशिप योजना में दिल्ली के कई नियोजन क्षेत्र शामिल हैं। इनमें द्वारका और वसंत कुंज के K-1 जोन, द्वारका और नजफगढ़ के L जोन, उत्तर-पश्चिम दिल्ली के नरेला, बवाना और कंझावला क्षेत्र के N तथा P-2 जोन और दक्षिणी दिल्ली के घिटोरनी क्षेत्र का J जोन शामिल हैं। इन इलाकों में शहरी विकास के लिए जमीन और बुनियादी ढांचे की योजना बनाई जा रही है।

    प्रस्तावित क्षेत्रों में अकबरपुर माजरा, बुराड़ी, बापरौला, धूलसिरस, बवाना, इब्राहिमपुर, झड़ौदा माजरा, घेवरा, नजफगढ़ और नंगली पूना जैसे गांव भी शामिल हैं। इन क्षेत्रों को नियोजित विकास से जोड़ने के लिए जमीन के इस्तेमाल और बुनियादी सुविधाओं की जरूरतों पर ध्यान दिया जा रहा है।

    योजना में एक डेंसिटी कॉरिडोर विकसित करने का प्रस्ताव भी है। इसके तहत आवासीय सुविधाओं के साथ व्यावसायिक जमीन, लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग जैसी गतिविधियों के लिए जगह उपलब्ध कराने की योजना है। इससे आवास और आर्थिक गतिविधियों को एक साथ विकसित करने का अवसर मिल सकता है। व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, भंडारण सुविधाओं और अन्य गतिविधियों के विस्तार से रोजगार के अवसर बढ़ाने का लक्ष्य भी जुड़ा है।

    लैंडपूलिंग नीति के जरिए दिल्ली के बाहरी क्षेत्रों में बड़े स्तर पर शहरी विकास की रूपरेखा तैयार की जा रही है। हालांकि, प्रस्तावित 12 लाख घरों, सड़क नेटवर्क और अन्य सुविधाओं को जमीन पर उतारने के लिए विकास प्रक्रिया, जमीन मालिकों की भागीदारी और बुनियादी ढांचे का चरणबद्ध निर्माण महत्वपूर्ण रहेगा। योजना का उद्देश्य आवासीय जरूरतों को पूरा करने के साथ राजधानी के विस्तार को व्यवस्थित स्वरूप देना है।

  • श्रीश्री रविशंकर के आर्ट ऑफ लिविंग को 5 करोड़ रुपये लौटाएगा DDA…. SC ने रद्द किया NGT का आदेश

    श्रीश्री रविशंकर के आर्ट ऑफ लिविंग को 5 करोड़ रुपये लौटाएगा DDA…. SC ने रद्द किया NGT का आदेश


    नई दिल्ली।
    सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने NGT (राष्ट्रीय हरित अधिकरण) के 2017 के उस आदेश को शनिवार को रद्द कर दिया, जिसमें साल 2016 में आयोजित विश्व संस्कृति महोत्सव (World Culture Festival) के कारण यमुना (Yamuna) के बाढ़ क्षेत्र को हुए नुकसान के लिए श्रीश्री रविशंकर (Sri Sri Ravi Shankar) के ‘आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन’ (‘Art of Living Foundation’) को जिम्मेदार ठहराया गया था। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) को फाउंडेशन द्वारा जमा किए गए पांच करोड़ रुपए के पर्यावरणीय मुआवजे को भी वापस करने का निर्देश दिया और इसके लिए उसे चार सप्ताह का समय भी दिया।

    यमुना के बाढ़ क्षेत्र डीएनडी फ्लाईवे में गंदगी फैलाने के आरोपों से आर्ट ऑफ लिविंग को क्लीन चिट देते हुए जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस एन.के. सिंह की पीठ ने कहा कि रिकॉर्ड पर पर्याप्त सामग्री मौजूद है, जिससे पता चलता है कि आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन को सौंपे जाने से पहले ही कार्यक्रम स्थल खराब स्थिति में था। पीठ ने कहा, ‘रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री वास्तव में यह साबित करती है कि यदि कोई नुकसान हुआ भी है, तो उसके लिए अपीलकर्ता को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता…।’


    सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया 9 साल पुराना फैसला

    पीठ ने कहा, ‘सात दिसंबर 2017 के फैसले को रद्द किया जाता है और इसके परिणामस्वरूप अपीलकर्ता के खिलाफ की गई सभी कार्रवाइयों और अंतरिम आदेशों को भी निरस्त किया जाता है। अपीलकर्ता नौ मार्च 2016 के अधिकरण के आदेश के अनुपालन में डीडीए के पास जमा की गई पांच करोड़ रुपए की राशि वापस पाने का हकदार है। डीडीए आज से चार सप्ताह के भीतर यह राशि वापस करेगा।’


    NGT ने दिया था 5 करोड़ रुपए DDA को देने का आदेश

    शीर्ष अदालत ने यह आदेश ‘आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन’ से जुड़े ‘व्यक्ति विकास केंद्र इंडिया’ की ओर से दायर एक अपील पर दिया। एक समिति की रिपोर्ट के आधार पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन को पांच करोड़ रुपए जमा करने का निर्देश दिया था और कहा था कि कार्यक्रम से बाढ़ क्षेत्र को नुकसान पहुंचा है।


    कोर्ट बोला- रिपोर्ट से पूरी तरह प्रभावित हो गया था NGT

    शीर्ष अदालत ने कहा कि NGT, विशेषज्ञ समिति की उस रिपोर्ट से प्रभावित हो गया, जिसमें कहा गया था कि स्थल पर बड़े पैमाने पर तैयारियां चल रही थीं और इस आधार पर उसने निष्कर्ष निकाला कि ऐसे काम करके अपीलकर्ता (आर्ट ऑफ लिविंग) ने बाढ़ क्षेत्र को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाया।


    बाढ़ क्षेत्र में कार्यक्रम की अनुमति देने पर भड़का कोर्ट

    अदालत ने सक्रिय बाढ़ क्षेत्र में कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति देने के लिए डीडीए की भी आलोचना की और उसे एनजीटी के निर्देश के अनुसार यमुना के बाढ़ क्षेत्र के बहाली का काम जारी रखने का निर्देश दिया। विश्व सांस्कृतिक महोत्सव 11 से 13 मार्च, 2016 तक आयोजित किया गया था। यह कार्यक्रम दिल्ली में यमुना नदी के सक्रिय बाढ़ क्षेत्र में डीएनडी फ्लाईवे के आगे की ओर 25 हेक्टेयर क्षेत्र में आयोजित किया गया था।

  • दिल्ली में घर खरीदना हुआ सस्ता! DDA ने फ्लैट्स में पार्किंग चार्ज हटाया, 5-12 लाख रुपये तक की सीधी बचत

    दिल्ली में घर खरीदना हुआ सस्ता! DDA ने फ्लैट्स में पार्किंग चार्ज हटाया, 5-12 लाख रुपये तक की सीधी बचत


    नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में घर खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है। दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने अपनी हाउसिंग स्कीम्स के तहत फ्लैट की कुल कीमत में अलग से पार्किंग चार्ज न जोड़ने का अहम फैसला लिया है। अब फ्लैट खरीदारों को कवर्ड या अनकवर्ड पार्किंग स्पेस के लिए अतिरिक्त भुगतान नहीं करना होगा। पहले पार्किंग की लागत फ्लैट की बेस कीमत में शामिल नहीं होती थी, लेकिन अब इसे प्रोजेक्ट कॉस्ट का हिस्सा बनाकर प्लिंथ एरिया रेट (PAR) में समाहित कर दिया गया है। इसका मतलब है कि कुल फ्लैट कीमत में ही पार्किंग का खर्च शामिल रहेगा और अलग से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।

    इस फैसले से फ्लैट की कैटेगरी और पार्किंग स्पेस के आकार के अनुसार कीमतों में 5 लाख रुपये से लेकर 12 लाख रुपये तक की कमी आने की उम्मीद है। खासकर MIG और HIG कैटेगरी के खरीदारों को इसका सबसे ज्यादा फायदा होगा, क्योंकि इन फ्लैट्स में पार्किंग स्पेस बड़ा होता है और पहले इसकी लागत अधिक जुड़ती थी।

    DDA की मौजूदा चार हाउसिंग स्कीम्स पर यह राहत लागू होगी, जिनमें DDA कर्मयोगी आवास योजना 2025 (FCFS), DDA टावरिंग हाइट्स कड़कड़डूमा हाउसिंग स्कीम 2025, DDA नागरिक आवास योजना 2026 (FCFS) और DDA टावरिंग हाइट्स कड़कड़डूमा हाउसिंग स्कीम 2026 (FCFS) शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, कर्मयोगी आवास योजना के तहत 11 वर्गमीटर पार्किंग स्पेस वाले HIG फ्लैट्स की कीमत में लगभग 10 लाख रुपये की कटौती हो सकती है, जबकि MIG फ्लैट्स की कीमत 4 से 5 लाख रुपये तक घट सकती है। टावरिंग हाइट्स कड़कड़डूमा स्कीम में पार्किंग स्पेस बड़े होने के कारण राहत और अधिक होगी।

    DDA ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन खरीदारों ने पहले ही पार्किंग चार्ज का भुगतान कर दिया है, उन्हें राशि वापस की जाएगी या अगली किस्त में समायोजित किया जाएगा। इस कदम से दिल्ली में घर खरीदना अब अपेक्षाकृत सस्ता होगा और खरीदारों पर वित्तीय बोझ कम पड़ेगा। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह फैसला रियल एस्टेट बाजार में मांग बढ़ाने के साथ-साथ मिडिल क्लास खरीदारों के लिए बड़ी राहत साबित होगा।

  • अब DDA फ्लैट निवासियों को राहत, हर बुधवार साइट-लेवल शिकायत निवारण शुरू

    अब DDA फ्लैट निवासियों को राहत, हर बुधवार साइट-लेवल शिकायत निवारण शुरू



    नई दिल्ली। दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने फ्लैट निवासियों को बड़ी राहत दी है। अब DDA के फ्लैट्स में रहने वाले लोगों को रोज़मर्रा की समस्याओं के लिए DDA ऑफिस के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। प्राधिकरण ने हर बुधवार साइट-लेवल जनसुनवाई शुरू करने का फैसला लिया है, जिसमें साइट इंजीनियर सीधे शिकायत सुनकर समाधान करेंगे।

    हर बुधवार 2:30 से 4 बजे तक जनसुनवाई
    DDA के हाउसिंग डिप्टी डायरेक्टर चिन्मय चक्रवर्ती ने 19 जनवरी को एक आधिकारिक सर्कुलर जारी किया है। सर्कुलर के अनुसार यह जनसुनवाई हर बुधवार दोपहर 2:30 बजे से शाम 4:00 बजे तक होगी।

    पानी, बिजली, सीवर, मरम्मत सहित सभी शिकायतों का समाधान
    जनसुनवाई में फ्लैट्स से जुड़ी सभी बुनियादी और तकनीकी समस्याओं पर सुनवाई होगी, जिनमें शामिल हैं

    पीने के पानी की आपूर्ति में बाधा

    सीवर, ड्रेनेज और गंदे पानी की निकासी

    फ्लैट्स की मरम्मत और नियमित मेंटेनेंस

    इलेक्ट्रिकल और स्ट्रक्चरल समस्याएं

    हाउसिंग स्कीम से जुड़े लंबित मामले

    फ्लैट की पोज़िशन, अलॉटमेंट और हैंडओवर से संबंधित शिकायतें

    जमीनी स्तर पर समाधान, पारदर्शिता और जवाबदेही
    DDA अधिकारियों का कहना है कि इस नई पहल का मुख्य उद्देश्य समस्याओं का समाधान जमीनी स्तर पर और कम समय में करना है। साइट इंजीनियरों को निर्देश दिए गए हैं कि वे शिकायतों को केवल दर्ज न करें, बल्कि समाधान की स्पष्ट समय-सीमा तय करते हुए कार्रवाई शुरू करें। अब तक फ्लैट निवासियों को अलग-अलग विभागों के बीच भटकना पड़ता था, लेकिन नई व्यवस्था के तहत वे सीधे अपने साइट के जिम्मेदार इंजीनियर से संपर्क कर सकेंगे, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों बढ़ेंगी।