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    ईरान में विरोध पर कड़ा रुख: सजा-ए-मौत की चेतावनी, मरने वालों की संख्या 72 पहुंची

    नई दिल्ली| ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन दूसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुके हैं और हालात तेजी से विस्फोटक होते जा रहे हैं। हालात की गंभीरता को देखते हुए ईरानी सरकार ने बाहरी दुनिया से संपर्क तोड़ने के लिए इंटरनेट और अंतरराष्ट्रीय फोन लाइनों को पूरी तरह बंद कर दिया है। इसके बावजूद मानवाधिकार संगठनों से आ रही सूचनाएं बेहद चिंताजनक तस्वीर पेश कर रही हैं। देशभर में आर्थिक तंगी, महंगाई और दमनकारी नीतियों के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग अब सीधे धार्मिक सत्ता और शासन व्यवस्था को चुनौती दे रहे हैं।

    प्रदर्शनकारियों पर मौत की धमकी, ‘अल्लाह का शत्रु’ करार

    शनिवार को ईरान के अटॉर्नी जनरल मोहम्मद मोवहेदी आजाद ने सरकारी टेलीविजन पर सख्त बयान देते हुए प्रदर्शनकारियों को ‘मोहारेबेह’ यानी ‘अल्लाह के खिलाफ युद्ध’ का दोषी बताया। उन्होंने कहा कि जो भी इन प्रदर्शनों में शामिल है या प्रदर्शनकारियों की मदद कर रहा है, उसे ईरानी कानून के तहत मौत की सजा दी जाएगी। अटॉर्नी जनरल ने न्यायिक अधिकारियों को निर्देश दिए कि बिना किसी देरी और नरमी के ऐसे लोगों के खिलाफ मुकदमे चलाए जाएं। सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के संकेतों के बाद माना जा रहा है कि देशभर में अब बड़ा और व्यापक क्रैकडाउन शुरू होने वाला है।

    मानवाधिकार संगठनों का दावा: 72 की मौत, 2300 से ज्यादा गिरफ्तार

    मानवाधिकार कार्यकर्ता समाचार एजेंसी (HRANA) के मुताबिक, अब तक कम से कम 72 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2,300 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है। वहीं, ईरानी मीडिया का दावा है कि गचसरन में बासिज बल के तीन सदस्य मारे गए हैं। इसके अलावा हमदान, बंदर अब्बास, गिलान और मशहद में भी सुरक्षा बलों के जवानों की मौत की खबरें सामने आई हैं। इन घटनाओं ने हालात को और तनावपूर्ण बना दिया है।

    अमेरिका का खुला समर्थन, ट्रंप प्रशासन की चेतावनी

    ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों को अमेरिका का खुला समर्थन मिल रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका ईरान के “बहादुर लोगों” के साथ खड़ा है। वहीं, अमेरिकी विदेश विभाग ने कड़ा संदेश देते हुए ईरान को चेतावनी दी है कि वह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ ‘खेल’ न करे। विभाग ने कहा कि ट्रंप जो कहते हैं, उसका मतलब होता है और उसके नतीजे भी होते हैं।

    आर्थिक बदहाली से शुरू हुआ विद्रोह

    इन प्रदर्शनों की शुरुआत 28 दिसंबर 2025 को ईरान की चरमराती अर्थव्यवस्था के खिलाफ हुई थी। ईरानी मुद्रा रियाल गिरकर अब तक के सबसे निचले स्तर 14 लाख प्रति डॉलर तक पहुंच गई है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और परमाणु कार्यक्रम को लेकर जारी तनाव ने आम जनता की जिंदगी मुश्किल कर दी है। महंगाई और बेरोजगारी से त्रस्त जनता का गुस्सा अब खुलकर सड़कों पर है, जो धीरे-धीरे धार्मिक सत्ता के खिलाफ राजनीतिक विद्रोह का रूप ले चुका है।