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  • सोशल मीडिया स्टार बने दुकानदार की मुश्किलें बढ़ीं, पीएम मोदी से जुड़ी मुलाकात के बाद धमकी का आरोप

    सोशल मीडिया स्टार बने दुकानदार की मुश्किलें बढ़ीं, पीएम मोदी से जुड़ी मुलाकात के बाद धमकी का आरोप

    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल के झाड़ग्राम से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनावी दौरे के दौरान झालमुड़ी खिलाने वाले स्थानीय दुकानदार को जान से मारने की धमकियां मिलने का आरोप है। इस घटना के बाद दुकानदार और उसका परिवार गहरे डर और तनाव में है।

    यह मामला उस घटना से जुड़ा है जब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी झाड़ग्राम पहुंचे थे। जनसभा समाप्त होने के बाद जब उनका काफिला लौट रहा था, तभी उन्होंने अचानक सड़क किनारे एक छोटी सी झालमुड़ी की दुकान पर रुककर स्थानीय विक्रेता बिक्रम साऊ से मुलाकात की थी। इस दौरान पीएम मोदी ने उनके हाथ की बनी झालमुड़ी का स्वाद लिया और उनसे बातचीत भी की। यह पल कैमरे में कैद हो गया और कुछ ही समय में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद बिक्रम साऊ रातों-रात सुर्खियों में आ गए।

    इस वायरल घटना के बाद उनकी दुकान पर लोगों की भीड़ बढ़ने लगी और वे एक तरह से स्थानीय स्तर पर चर्चित चेहरा बन गए। लेकिन अब यही लोकप्रियता उनके लिए परेशानी का कारण बन गई है। दुकानदार का आरोप है कि पिछले कुछ दिनों से उन्हें लगातार अंतरराष्ट्रीय नंबरों से फोन कॉल्स और वीडियो कॉल्स आ रही हैं, जिनमें पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों के नंबर शामिल बताए जा रहे हैं।

    बिक्रम साऊ का कहना है कि इन कॉल्स के दौरान उन्हें और उनके परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने और जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं। अचानक मिल रही इन धमकियों से पूरा परिवार दहशत में है और सामान्य जीवन प्रभावित हो गया है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि परिवार ने स्थानीय पुलिस प्रशासन से सुरक्षा की मांग की है और शिकायत दर्ज कराई है।

    दुकानदार के अनुसार, जो घटना पहले उनके जीवन का सबसे खुशी का पल थी, वही अब उनके लिए डर का कारण बन गई है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद उन्हें पहचान तो मिली, लेकिन इसके साथ ही अनचाही परेशानियां भी बढ़ गईं।

    इस मामले ने स्थानीय स्तर पर भी चिंता बढ़ा दी है। लोग इस बात को लेकर हैरान हैं कि एक सामान्य दुकानदार, जिसकी पहचान एक साधारण स्ट्रीट फूड विक्रेता के रूप में थी, अचानक इस तरह की धमकियों का सामना कर रहा है।

    पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी है और कॉल्स की ट्रेसिंग की कोशिश की जा रही है। हालांकि अभी तक किसी भी तरह की आधिकारिक पुष्टि या गिरफ्तारी की जानकारी सामने नहीं आई है।

    इस पूरी घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद आम लोगों की जिंदगी कितनी तेजी से बदल सकती है, और कभी-कभी यह लोकप्रियता उनके लिए चुनौती भी बन जाती है। फिलहाल बिक्रम साऊ और उनका परिवार सुरक्षा और सामान्य जीवन की वापसी की उम्मीद कर रहा है, जबकि प्रशासन मामले की जांच में जुटा हुआ है।

  • बंगाल: बाबरी मस्जिद की नींव रखने वाले हुमायूं कबीर को मिली जान से मारने की धमकियां, बढ़ाई गई निजी सुरक्षा

    बंगाल: बाबरी मस्जिद की नींव रखने वाले हुमायूं कबीर को मिली जान से मारने की धमकियां, बढ़ाई गई निजी सुरक्षा


    नई दिल्‍ली । पश्चिम बंगाल(West Bengal) के मुर्शिदाबाद (Murshidabad)जिले में 6 दिसंबर को अयोध्या की बाबरी मस्जिद के मॉडल पर आधारित एक नई मस्जिद की नींव रखने वाले तृणमूल कांग्रेस(Trinamool Congress) (टीएमसी) के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर (Humayun Kabir)को लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। राज्य के बाहर से आने वाले इन फोन कॉल्स ने उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। धमकियों के मद्देनजर हुमायूं ने तत्काल प्रभाव से अपनी निजी सुरक्षा बढ़ाने का फैसला किया है और हैदराबाद से एक विशेष सुरक्षा टीम बुलाई है। इसके अलावा, वे कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख करने की तैयारी में हैं, जहां से केंद्रीय सुरक्षा बलों की मांग करेंगे।

    हैदराबाद से सुरक्षा टीम हायर करने को लेकर हुमायूं कबीर ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा- मुझे सिक्योरिटी चाहिए क्योंकि उत्तर प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे राज्यों से मुझे धमकी भरे कॉल आए हैं। मैं डरा हुआ नहीं हूं लेकिन मेरे समर्थक सुरक्षा बढ़ाने के लिए कह रहे हैं। मैंने हैदराबाद से प्राइवेट सिक्योरिटी हायर कर ली है और जल्द ही कलकत्ता हाई कोर्ट में और सिक्योरिटी के लिए अपील भी करूंगा।

    इसके अलावा, हुमायूं कबीर ने मंगलवार को संवाददाताओं से बातचीत में कहा- मुझे राज्य के बाहर से लगातार धमकी भरे फोन आ रहे हैं। लोग कह रहे हैं कि वे मुझे जान से मार देंगे। टीएमसी सरकार ने अभी तक मेरी सरकारी सुरक्षा नहीं हटाई है, लेकिन मैं पश्चिम बंगाल पुलिस पर भरोसा नहीं कर पा रहा हूं। इसलिए, तत्काल उपाय के तौर पर मैंने हैदराबाद से 8 निजी सुरक्षाकर्मियों की एक टीम बुलाई है। ये लोग कल से मेरी सुरक्षा संभालेंगे। कबीर ने यह भी बताया कि उन्होंने राज्य सरकार, केंद्र सरकार और पुलिस को ईमेल के जरिए सुरक्षा बढ़ाने की गुहार लगाई है। अगर हाईकोर्ट नौशाद सिद्दीकी जैसे लोगों को 6-8 सुरक्षाकर्मी दे सकता है, तो मुझे क्यों नहीं? मैं अदालत जाकर केंद्रीय फोर्स की मांग करूंगा।

    बाबरी मस्जिद शिलान्यास और विवाद
    यह पूरा विवाद 6 दिसंबर को शुरू हुआ, जब 1992 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद विध्वंस की बरसी पर हुमायूं कबीर ने मुर्शिदाबाद के रेजीनगर (बेलडांगा क्षेत्र) में एक नई मस्जिद का शिलान्यास किया। यह मस्जिद अयोध्या वाली बाबरी मस्जिद के डिजाइन पर आधारित बताई जा रही है, जिसका निर्माण तीन साल में पूरा होने का दावा किया गया है। कुल बजट करीब 300 करोड़ रुपये का है, जिसमें सऊदी अरब से आए मौलवियों की मौजूदगी और 60,000 पैकेट बिरयानी का इंतजाम भी शामिल था। समर्थकों ने सिर पर ईंटें रखकर जुलूस निकाला और ‘अल्लाहु अकबर’ के नारे लगाए।

    कार्यक्रम के दौरान इलाके में भारी सुरक्षा व्यवस्था थी। प्रशासन ने रेजीनगर और बेलडांगा को हाई-सिक्योरिटी जोन घोषित कर दिया था। लगभग 3,000 पुलिसकर्मी, रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ), बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ) और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) तैनात किए गए थे। राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस ने शांति बनाए रखने की अपील की थी। कुछ लोगों ने कोलकाता हाईकोर्ट में निर्माण रोकने की याचिका दायर की, लेकिन कोर्ट ने हस्तक्षेप से इनकार कर दिया और शांति बनाए रखने की जिम्मेदारी राज्य सरकार पर डाल दी।

    राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और टीएमसी से निष्कासन
    शिलान्यास के ऐलान के बाद ही हुमायूं कबीर को टीएमसी ने 4 दिसंबर को निलंबित कर दिया था। भाजपा ने इसे ‘सांप्रदायिक ध्रुवीकरण’ का प्रयास बताते हुए ममता बनर्जी सरकार पर निशाना साधा। हुमायूं ने शुरुआत में विधानसभा से इस्तीफा देने की बात कही थी, लेकिन दो दिन बाद यू-टर्न ले लिया। उन्होंने कहा- मैं इस्तीफा नहीं दूंगा, लेकिन टीएमसी ने सदन में मेरी सीटिंग अरेंजमेंट बदल दिया है। टीएमसी ने आरोप लगाया कि कबीर मस्जिद निर्माण के लिए फंडिंग जुटाने के बहाने सांप्रदायिक तनाव फैला रहे हैं। कबीर ने इसका खंडन किया और कहा कि यह एक धार्मिक आयोजन है, जिसमें कोई राजनीति नहीं है।