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  • सरकार गिरने के दावे पर छिड़ी सियासी जंग, बयान के बाद आमने-सामने आए सत्ता और विपक्ष के बड़े चेहरे

    सरकार गिरने के दावे पर छिड़ी सियासी जंग, बयान के बाद आमने-सामने आए सत्ता और विपक्ष के बड़े चेहरे


    नई दिल्ली। देश की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी ने सियासी माहौल को गर्म कर दिया है। एक राजनीतिक टिप्पणी के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। हालिया बयान ने केवल राजनीतिक हलकों में चर्चा नहीं बढ़ाई, बल्कि इसे लेकर कई तरह की व्याख्याएं और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में इस बयान का असर राष्ट्रीय राजनीति की दिशा और बहस दोनों पर दिखाई दे सकता है।

    राजनीति में भविष्य को लेकर किए गए दावे और आकलन अक्सर चर्चा का विषय बनते रहे हैं। लेकिन जब ऐसे बयान देश की सत्ता, राजनीतिक स्थिरता और सरकार के भविष्य से जुड़े हों, तो उनका प्रभाव और अधिक बढ़ जाता है। यही वजह है कि हालिया टिप्पणी के बाद राजनीतिक दलों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। सत्ता पक्ष इसे विपक्ष की रणनीति से जोड़कर देख रहा है, जबकि दूसरी ओर राजनीतिक विश्लेषक इसे आने वाले राजनीतिक समीकरणों की शुरुआत मान रहे हैं।

    राजनीतिक जानकारों के अनुसार लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका सरकार के फैसलों पर सवाल उठाने और वैकल्पिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करने की होती है। लेकिन जब राजनीतिक बयान सीधे सत्ता परिवर्तन की संभावनाओं पर केंद्रित होने लगते हैं, तब उनकी राजनीतिक व्याख्या भी बदल जाती है। यही कारण है कि इस मुद्दे ने केवल राजनीतिक बहस तक सीमित रहने के बजाय व्यापक चर्चा का रूप ले लिया है।

    सत्ता पक्ष की ओर से इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। कई नेताओं ने इसे राजनीतिक निराशा से जुड़ा बयान बताया है तो कुछ ने इसे देश के राजनीतिक माहौल को प्रभावित करने की कोशिश के रूप में देखा है। राजनीतिक बयानबाजी के इस दौर में शब्दों की तीक्ष्णता भी पहले से अधिक दिखाई दे रही है। यही कारण है कि विभिन्न नेताओं के बयान लगातार चर्चा का हिस्सा बन रहे हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय राजनीति में चुनावी रणनीति केवल चुनाव के समय ही सक्रिय नहीं होती, बल्कि चुनाव खत्म होने के बाद भी राजनीतिक गतिविधियां लगातार जारी रहती हैं। आने वाले समय के लिए माहौल तैयार करना, जनता के बीच मुद्दों को स्थापित करना और अपनी राजनीतिक उपस्थिति बनाए रखना हर दल की प्राथमिकता होती है। इसलिए इस प्रकार के बयान केवल तत्काल प्रतिक्रिया तक सीमित नहीं रहते बल्कि दीर्घकालिक राजनीतिक संकेत भी माने जाते हैं।

    देश की राजनीति में पिछले कुछ वर्षों में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा पहले की तुलना में अधिक तीखी हुई है। राजनीतिक दल अब केवल चुनावी मंचों तक सीमित नहीं हैं बल्कि विभिन्न मुद्दों पर लगातार अपनी स्थिति स्पष्ट करते रहते हैं। ऐसे माहौल में बयानों का प्रभाव भी तेजी से बढ़ता है और उनके राजनीतिक अर्थ निकाले जाने लगते हैं।

    फिलहाल इतना स्पष्ट है कि इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और अधिक सक्रिय हो गया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं। सत्ता और विपक्ष के बीच चल रही यह सियासी जंग फिलहाल थमती दिखाई नहीं दे रही और आने वाले समय में इसका असर राष्ट्रीय राजनीति की चर्चा में लगातार बना रह सकता है।

  • मप्र विधानसभाः अनुपूरक बजट पर तीखी बहस, कांग्रेस ने जनविरोधी और भाजपा ने बताया विकासोन्मुखी

    मप्र विधानसभाः अनुपूरक बजट पर तीखी बहस, कांग्रेस ने जनविरोधी और भाजपा ने बताया विकासोन्मुखी


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन गुरुवार को उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा द्वारा प्रस्तुत दूसरे अनुपूरक बजट की मांगें प्रस्तुत किए जाने के बाद सदन में सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। विधानसभा अध्यक्ष ने चर्चा शुरू कराई, जिसमें भाजपा और कांग्रेस दोनों पक्षों के विधायकों ने अपनी-अपनी बात मजबूती से रखी। कांग्रेस ने जहां अनुपूरक बजट को जनविरोधी करार दिया, तो वहीं भाजपा ने इसे विकासोन्मुखी बताया। शाम साढ़े सात बजे कार्यवाही स्थगित कर इसे शुक्रवार सुबह 11 बजे तक के लिए टाल दिया गया।

    गुरुवार को सदन में दूसरे अनुपूरक बजट की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक बाला बच्चन ने कहा कि अनुपूरक बजट में पूंजीगत व्यय कम है जिससे रोजगार में कमी आएगी और टैक्स कलेक्शन कम होगा, इससे पता चलता है कि यह प्रदेश के हित में नहीं है। दूसरा अनुपूरक बजट 13155 करोड़ का है। सदन में पिछली बैठक में कहा गया था कि कांग्रेस विधायकों के क्षेत्र में 5 करोड़ रुपए विकास कार्य के लिए दिए जाएंगे लेकिन आज तक नहीं दिया गया। सरकार भेदभाव कर रही है। इसके पहले कभी ऐसा नहीं हुआ। विधायकों के ई-ऑफिस के लिए 5-5 लाख रुपये देने की बात कही गई थी। कांग्रेस के कई विधायकों को यह सुविधा नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि किसानों का ध्यान नहीं रखा जा रहा है इसलिए किसान आंदोलन करने को मजबूर हैं। खल घाट में हुए आंदोलन में 700 किसानों पर अज्ञात के नाम पर केस दर्ज कर दिया गया।

    अनुपूरक बजट पर बोलते हुए कांग्रेस विधायक भंवर सिंह शेखावत ने कहा कि सरकार पहले यह तो बताए कि जब से यह सरकार बनी है, तब से अब तक कितना कर्जा लिया। इसका क्या उपयोग हो रहा है। मध्य प्रदेश पर 4.50 लाख करोड़ से अधिक कर्ज है। हर साल जो कर्ज लिया गया है, उस पर ब्याज कितना दे रहे हैं। यह जनता को बताएं। मतदाता की जेब में पैसे डालो, वोट लेकर 5 साल राज करो… इस फार्मूले पर सरकार काम कर रही है।

    शेखावत ने कहा कि मैं बहनों के पैसे मिलने खिलाफ नहीं हूं। उनके विकास के खिलाफ भी नहीं हूं, लेकिन सबसे अहम सवाल है कि यह जो कर्ज लिया जा रहा है… चुकेगा कैसे? जनता पर जो बोझ बढ़ा रहा, वह कैसे खत्म होगा? इंदौर में 800 करोड़ रुपए बिना किसी काम के निकल गया और दिखावे के तौर पर एक इंजीनियर पर कार्रवाई हो गई। शेखावत ने इंदौर की खान नदी की शुद्धीकरण पर भी सवाल उठाए, जिसमें लगातार पैसा खर्च हो रहा, लेकिन नदी साफ नहीं हो रही। उन्होंने कहा कि किसान को खाद नहीं मिल रही है। वह लाइन में लग रहा, डंडे खा रहा है।

    कांग्रेस विधायक राजेंद्र कुमार सिंह ने प्रदेश में खाद संकट का मामला उठाते हुए कहा कि किसानों को खाद नहीं मिलता। 24 घंटे लाइन लगने के बाद टोकन मिलता है, उसके बाद फिर खाद मिलने की तारीख दी जाती है। सरकार किसानों को खाद नहीं दे पा रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में विकास कार्यों के नाम पर भेदभाव हो रहा है। बीजेपी के विधायकों से 15 करोड़ रुपये के विकास कार्य के प्रस्ताव लिए जा रहे हैं, जबकि कांग्रेस के विधायकों को अनदेखा किया जा रहा है।

    इस पर विधायक सीता शरण शर्मा ने कहा कि ऐसी कोई बात नहीं है। प्रस्ताव दिए जाते हैं, उसके परीक्षण होते हैं, उसके आधार पर राशि जारी होती है। इस पर राजेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि कांग्रेस के विधायकों के साथ भी ऐसा क्यों नहीं होता है कि उनसे भी प्रस्ताव लेकर विकास कार्य करने का मौका दिया जाए। विधायक राजेंद्र कुमार सिंह ने विधायकों के वेतन बढ़ाने का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार ने 1 लाख 60 हजार रुपये वेतन बढ़ाने की तैयारी की थी, लेकिन इससे भी रोक दिया गया है। अभी 1 लाख 10 हजार रुपये मिल रहा है। वेतन नहीं भी बढ़ेगा तो भी कांग्रेस विधायक काम करते रहेंगे।

    राजेंद्र कुमार सिंह ने अमरपाटन की 6 पंचायतों को रीवा जिले में शामिल करने का विरोध किया और कहा कि मैहर में बन रहे कलेक्ट्रेट भवन को मैहर से दूर कटनी रोड पर बनाया जा रहा है, जबकि इसे मैहर और अमरपाटन के बीच बनाया जाना चाहिए। विधायक राजेंद्र कुमार सिंह ने मार्कंडेय घाट पर एक ब्रिज बनाने की मांग की।

    कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने अनुपूरक बजट पर कहा कि वैसे तो अल्पसंख्यकों के लिए अल्पसंख्यक विभाग में बजट का प्रावधान नहीं है, लेकिन अब हमें भी इसकी आदत हो गई है। जो भी व्यवस्था रहेगी, उसके हिसाब से चलते रहेंगे, लेकिन सरकर को इस ओर ध्यान देना चाहिए, ताकि विकास कार्य कराए जा सकें। उन्होंने कहा कि भोपाल शहर में विकास के काम में तेजी लाना चाहिए।

    कांग्रेस विधायक फुंदेलाल मार्को ने छात्रावास में बच्चों को महुआ खिलाए जाने का विरोध करते हुए कहा– यह बच्चे अपने घर पर भी महुआ खा रहे थे और जब यहां छात्रावास में पहुंचे हैं तो वहां भी चने के साथ महुआ खिलाया जा रहा है। धीरे-धीरे महुआ पीने की आदत डाल दी जाएगी। वे सरकार से मांग करते हैं कि बच्चों के मन में यह भावना खत्म करें कि आदिवासी हैं और उन्हें महुआ पीना पड़ेगा, महुआ ही खाना पड़ेगा। उन्होंने संभागों के लिए नियुक्त किए गए अपर मुख्य सचिवों के साथ विधायकों के संवाद पर भी जोर दिया।

    मार्को ने देश भर में 3000 से अधिक रजिस्टर्ड बूचड़खाने बंद करने की मांग करते हुए कहा कि अगर आप इसे बंद नहीं कर सकते हैं तो दिखावा मत कीजिए। मार्को ने कहा कि जहां गोमाता का वध किया जाता है। ऐसे बूचड़खाने को बंद करने का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजना चाहिए। यह तय है कि इसका सारे देश में विरोध होगा। सरकार अगर गंभीर है तो दिखावा न करें।

    नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि बजट में किसानों, युवाओं और एमएसएमई सेक्टर के लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं है। धान और मक्का के लिए एसएसपी और समर्थन मूल्य का उल्लेख नहीं होना गंभीर लापरवाही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता की जेब की चोरी कर रही है और किसानों की समस्याओं से मुंह मोड़ रही है।

    अनुपूरक बजट का बचाव करते हुए भाजपा विधायक ओमप्रकाश सखलेचा ने कहा कि सरकार का फोकस लाड़ली बहना, आवास, किसान, सिंचाई और उद्योगों पर है। उन्होंने बताया कि रोजगार के लिए 2 लाख 27 करोड़ से अधिक का प्रावधान किया गया है तथा भावांतर के लिए 500 करोड़ रखे गए हैं।

    होशंगाबाद से भाजपा विधायक डॉ. सीताशरण शर्मा ने कहा कि भाजपा सरकार ने जो वादे किए, वे पूरे किए हैं। कर्जा कोई नया मुद्दा नहीं है, लेकिन हमारी सरकार ने कर्ज लेकर विकास भी किया है। सदन में दोनों पक्षों की तीखी बहस के बीच अनुपूरक बजट पर चर्चा शुक्रवार को भी जारी रहेगी। सरकार ने वर्ष 2025-26 के लिए द्वितीय अनुपूरक बजट 13,476 करोड़ रुपये का पेश किया है।