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  • चमोली टनल हादसा: पानी और मलबा गले तक भरा…., नीले ड्रमों के सहारे रेस्क्यू में जुटे जवान

    चमोली टनल हादसा: पानी और मलबा गले तक भरा…., नीले ड्रमों के सहारे रेस्क्यू में जुटे जवान


    चमोली।
    अलकनंदा नदी (Alaknanda River) पर निर्माणाधीन विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना (Vishnugad-Pipalkoti Hydroelectric Project) की टीआरटी (टेल रेस टनल) में जिस स्थान पर मजदूर काम कर रहे थे, वहां से करीब 150 मीटर दूर हुए भूस्खलन (Landslide) के बाद पानी के साथ पत्थर और मलबा टनल के अंदर घुस गया, जिसकी चपेट में कई मजदूर आ गए।

    बताया जा रहा है कि टनल में गले तक पानी और मलबा भर गया है। रात करीब दस बजे एनडीआरएफ की टीमें तीन वाहनों से टनल में घुसी। नीले रंग के ड्रम भी टनल में ले जाए गए हैं। पानी में इन ड्रमों के सहारे आगे बढ़कर जवान रेस्क्यू अभियान में जुटे हैं। देर रात तक घायलों का रेस्क्यू अभियान जारी था।

    वहीं, टनल में अधिक पानी भरने के कारण रेस्क्यू में दिक्कतें आ रही हैं। एसपी चमोली सुरजीत सिंह पंवार ने बताया कि श्रीनगर गढ़वाल से राफ्ट मंगाई गई है, उससे लापता छह लोगों का रेस्क्यू किया जाएगा।

    उधर, प्रोजेक्ट निदेशक शरद कुमार ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि यह एक अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण हादसा है। उन्होंने बताया कि हमारी पहली प्राथमिकता सभी फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है। इसके लिए सभी संसाधनों को पूरी तरह से लगाया गया है। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी और घटना की विस्तृत जांच कराई जाएगी।

    बताया कि प्रोजेक्ट की मैनेजमेंट टीम भी राहत एवं बचाव कार्य में पूरी तरह जुटी हुई है। प्रशासन के साथ मिलकर स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। राहत कार्य तब तक जारी रहेगा, जब तक सभी लोगों को सुरक्षित बाहर नहीं निकाल लिया जाता।

    बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया गया था। मौके पर रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है और अन्य फंसे हुए लोगों को निकालने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।

  • हिमाचल के चम्बा में मूसलाधार बारिश ने मचाई तबाही… घर में घुसा मलबा…कई वाहन दबे

    हिमाचल के चम्बा में मूसलाधार बारिश ने मचाई तबाही… घर में घुसा मलबा…कई वाहन दबे


    चंबा।
    हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के चंबा जिले (Chamba district) में सोमवार रात मूसलाधार बारिश (Torrential Rain) ने भारी तबाही मचाई। बारिश की तीव्रता इतनी अधिक थी कि इसने व्यापक स्तर पर नुकसान पहुंचाया। इस प्राकृतिक आपदा के बावजूद, राहत की बात यह रही कि किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। हालांकि, जिले के कई इलाकों में आवासीय घरों, व्यावसायिक दुकानों और निजी वाहनों को भारी क्षति पहुंची है।

    जिले के उदयपुर, घोलटी, नवोदय मार्ग और भरियाड जैसे क्षेत्रों में स्थिति विशेष रूप से गंभीर रही। इन इलाकों में भारी भूस्खलन हुआ, जिससे बड़ी मात्रा में मलबा सड़कों और आवासीय क्षेत्रों में आ गया। मलबे की चपेट में आकर करीब 12 वाहन दब गए।

    इन दबे हुए वाहनों में निजी कारें, मालवाहक ट्रक, दोपहिया बाइक और स्कूटियां शामिल थीं। भरमौर-पठानकोट राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित तडोली नाला भी बारिश के कारण उफान पर आ गया। नाले का बहाव इतना तेज था कि वह अपने साथ बड़े-बड़े पत्थर और मिट्टी का मलबा बहाकर लाया।


    संपत्ति और बुनियादी ढांचे को नुकसान

    तडोली नाले के तेज बहाव में आया मलबा और पत्थर एक स्टोर में घुस गए। इससे वह स्टोर पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। इसके अतिरिक्त, आसपास के कई घरों में भी मलबा घुस गया, जिससे निवासियों को काफी परेशानी हुई। सुल्तानपुर नाले ने भी रौद्र रूप धारण कर लिया, जिससे स्थानीय लोगों की मुश्किलें और बढ़ गईं।

    इस नाले के तेज बहाव में भी कई बाइक और स्कूटियां बहकर क्षतिग्रस्त हो गईं। भरियाड गांव में पानी का रुख अचानक बदल गया, जिससे स्थिति और भी भयावह हो गई। मलबा सीधे कई घरों तक पहुंच गया, जिससे पूरे गांव में दहशत का माहौल बन गया।


    जनजीवन पर गहरा असर

    बारिश और नाले के उफान से उत्पन्न खतरे को देखते हुए कई परिवारों ने अपने मकान खाली कर दिए। इन प्रभावित परिवारों ने अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रातों-रात पड़ोसियों के घरों में शरण ली। यह विस्थापन अचानक आई आपदा के कारण हुआ।


    चमोली

    घरों में मलबा घुसने से लोगों की दैनिक दिनचर्या बाधित हुई। संपत्ति के नुकसान से आर्थिक चुनौतियां भी पैदा हुई हैं। स्थानीय निवासियों को अब अपने घरों की मरम्मत और सफाई का सामना करना पड़ेगा।