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  • SIR विवाद पर सुप्रीम कोर्ट आज सुनाएगा फैसला…. जानें क्या है पूरा मामला?

    SIR विवाद पर सुप्रीम कोर्ट आज सुनाएगा फैसला…. जानें क्या है पूरा मामला?


    नई दिल्ली।
    देश में मतदाता सूची (Voter List) के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Review.- SIR) को लेकर विवाद पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) बुधवार को अहम फैसला सुनाने जा रहा है। मामला इस सवाल पर केंद्रित है कि क्या चुनाव आयोग ने अपने संवैधानिक अधिकारों की सीमा लांघते हुए वोटर लिस्ट को लगभग नए सिरे से तैयार करने की कोशिश की। याचिकाकर्ताओं ने अदालत में दावा किया कि आयोग की यह प्रक्रिया लाखों वैध मतदाताओं को मताधिकार से वंचित कर सकती है और इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

    याचिकाओं में कहा गया कि संविधान के अनुच्छेद 326, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और मतदाता पंजीकरण नियम 1960 के तहत चुनाव आयोग को इतनी व्यापक कार्रवाई का अधिकार नहीं है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि SIR के जरिए मतदाता सूचियों का पूरी तरह नया पुनर्गठन किया जा रहा है, जो सामान्य संशोधन प्रक्रिया से अलग है। इस दौरान आधार कार्ड और राशन कार्ड जैसे दस्तावेजों को स्वीकार नहीं किए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं।


    चुनाव आयोग का क्या है पक्ष

    दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने अदालत में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि यह प्रक्रिया मतदाता सूची को शुद्ध और पारदर्शी बनाने के लिए जरूरी है। आयोग का कहना है कि मताधिकार केवल पात्र नागरिकों को ही मिलना चाहिए और फर्जी या अपात्र नाम हटाना उसकी संवैधानिक जिम्मेदारी है। आयोग ने यह भी दलील दी कि वोट देने का अधिकार संविधान और कानून में तय योग्यताओं के अधीन है, इसलिए अपात्र लोगों को सूची से हटाना लोकतंत्र के हित में है।

    इस पूरे विवाद का राजनीतिक असर भी दिखाई दे रहा है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया के जरिए बड़े पैमाने पर असली मतदाताओं के नाम हटाए जा सकते हैं, जबकि सत्तापक्ष इसे चुनावी पारदर्शिता के लिए जरूरी कदम बता रहा है। बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में यह मुद्दा पहले ही राजनीतिक बहस का केंद्र बन चुका है। अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं, क्योंकि यह निर्णय भविष्य में देशभर में मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रिया और चुनाव आयोग की शक्तियों की सीमा तय कर सकता है।

  • DNA टेस्ट में पिता नहीं निकले तो नहीं देना होगा गुजारा, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

    DNA टेस्ट में पिता नहीं निकले तो नहीं देना होगा गुजारा, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला


    अहमदाबाद। सुप्रीम कोर्ट ने गुजारा भत्ता (मेंटेनेंस) से जुड़े एक अहम मामले में स्पष्ट किया है कि यदि डीएनए जांच से यह साबित हो जाए कि कोई व्यक्ति बच्चे का जैविक पिता नहीं है, तो उसे बच्चे के पालन-पोषण के लिए गुजारा देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता—even अगर बच्चे का जन्म विवाह के दौरान ही क्यों न हुआ हो।

    क्या है मामला?

    यह फैसला जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने सुनाया।

    अदालत महिला की उस अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उसने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी।

    कोर्ट ने क्या कहा?

    सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि:

    डीएनए टेस्ट से यदि पितृत्व खारिज हो जाता है, तो गुजारा देने का आदेश नहीं दिया जा सकता
    वैज्ञानिक साक्ष्य (DNA) को कानूनी अनुमान से अधिक महत्व मिलेगा
    संबंधित व्यक्ति ने खुद टेस्ट के लिए सहमति दी थी और रिपोर्ट पर कोई आपत्ति नहीं उठाई
    पुराने फैसलों का भी जिक्र

    अदालत ने अपने फैसले में कई महत्वपूर्ण मामलों का हवाला दिया, जैसे:

    अपर्णा अजिंक्य फिरोदिया बनाम अजिंक्य अरुण फिरोदिया
    इवान रतिनम बनाम मिलान जोसेफ
    नंदलाल बडवाइक बनाम लता बडवाइक

    इन मामलों में कोर्ट ने पहले भी कहा था कि डीएनए टेस्ट का आदेश बहुत सावधानी से दिया जाना चाहिए।

    हालांकि, मौजूदा केस में टेस्ट पहले ही हो चुका था और उसकी रिपोर्ट को चुनौती नहीं दी गई थी, इसलिए इसे निर्णायक माना गया।

    कानून बनाम विज्ञान

    अदालत ने माना कि जब वैज्ञानिक प्रमाण और कानूनी अनुमान (जैसे विवाह के दौरान जन्मे बच्चे का पिता पति माना जाना) के बीच टकराव हो, तो विज्ञान को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

    महिला को क्या राहत मिली?

    हालांकि महिला की अपील खारिज कर दी गई, लेकिन कोर्ट ने संबंधित विभाग को निर्देश दिया कि बच्चे की स्थिति का आकलन किया जाए और जरूरत पड़ने पर सहायता उपलब्ध कराई जाए।

    पूरा मामला समझिए
    दंपति की शादी 2016 में हुई
    विवाद के बाद महिला ने बच्चे के लिए गुजारा भत्ता मांगा
    पति ने डीएनए टेस्ट की मांग की
    रिपोर्ट में वह बच्चे का जैविक पिता नहीं निकला
    ट्रायल कोर्ट और हाई कोर्ट दोनों ने गुजारा देने से इनकार किया

    सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला पारिवारिक कानून में एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है। इससे साफ संदेश गया है कि पितृत्व से जुड़े मामलों में वैज्ञानिक साक्ष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।

  • ईरान युद्ध खत्म करने की घोषणा क्यों नहीं कर पा रहे ट्रंप? व्हाइट हाउस में मतभेद, फैसले पर बढ़ा दबाव

    ईरान युद्ध खत्म करने की घोषणा क्यों नहीं कर पा रहे ट्रंप? व्हाइट हाउस में मतभेद, फैसले पर बढ़ा दबाव

    वॉशिंगटन। ईरान के साथ जारी युद्ध को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump के सामने बड़ी राजनीतिक और रणनीतिक चुनौती खड़ी हो गई है। व्हाइट हाउस के भीतर ही इस बात को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही है कि युद्ध को कब और किस तरह खत्म घोषित किया जाए।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रशासन के भीतर कुछ अधिकारी मानते हैं कि संघर्ष लंबा खिंचने से वैश्विक तेल कीमतों में उछाल आ सकता है, जिसका असर अमेरिका की घरेलू राजनीति पर भी पड़ेगा। वहीं दूसरी ओर कुछ सख्त रुख वाले नेता ईरान पर सैन्य दबाव जारी रखने के पक्ष में हैं।

    तेल की कीमतों को लेकर चिंता

    अमेरिकी ट्रेजरी विभाग और नेशनल इकोनॉमिक काउंसिल के अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि युद्ध के कारण पेट्रोल की कीमतें तेजी से बढ़ती हैं तो अमेरिका में इस अभियान के लिए जनसमर्थन कम हो सकता है।
    हालांकि कुछ रिपब्लिकन नेता और रणनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि अमेरिका को ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से हर हाल में रोकना होगा और अमेरिकी सैनिकों या जहाजों पर हमले का कड़ा जवाब देना चाहिए।

    लंबी जंग से बचना चाहते हैं कई रणनीतिकार

    ट्रंप के कुछ करीबी सलाहकार और समर्थक यह भी चाहते हैं कि अमेरिका मध्यपूर्व में लंबे समय तक चलने वाले युद्ध में न फंसे। वे चाहते हैं कि मौजूदा संघर्ष को सीमित रखा जाए और जल्द कोई रास्ता निकाला जाए।

    ईरान की सरकार गिरने की संभावना कम

    अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का मानना है कि फिलहाल ईरान की मौजूदा सरकार के जल्द गिरने की संभावना कम है। इसी कारण ट्रंप प्रशासन ने हाल के दिनों में तेहरान की सरकार को हटाने की बात भी कम कर दी है।

    युद्ध से बाहर निकलने का रास्ता तलाश रहे ट्रंप

    सूत्रों के अनुसार ट्रंप प्रशासन अब इस संघर्ष से निकलने का रास्ता खोज रहा है। युद्ध शुरू होने के समय इसके कई लक्ष्य बताए गए थे—जैसे ईरान के हमलों को रोकना, उसके परमाणु कार्यक्रम को कमजोर करना और उसकी सैन्य क्षमता को सीमित करना।

    युद्ध रोकना भी आसान नहीं

    विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध शुरू करने के बाद उसे खत्म करना भी उतना ही मुश्किल होता है। अगर अमेरिका अचानक जीत का ऐलान कर सैन्य कार्रवाई रोक देता है और सैनिकों की वापसी शुरू कर देता है, तो अल्पकाल में वैश्विक बाजार शांत हो सकते हैं।
    लेकिन यदि ईरान की धार्मिक सरकार सत्ता में बनी रहती है और उसके पास परमाणु सामग्री, मिसाइल और ड्रोन मौजूद रहते हैं, तो इससे क्षेत्रीय सुरक्षा पर नए खतरे पैदा हो सकते हैं।

    ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा असर

    ईरान के पास अभी भी कई कम दूरी की मिसाइलें, ड्रोन और समुद्री बारूदी सुरंगें हैं। इनके जरिए वह तेल और गैस की आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है, खासकर Strait of Hormuz के रास्ते। यह जलमार्ग दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है।

    होर्मुज को खोलना भी चुनौती

    सैन्य विश्लेषकों का कहना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह सुरक्षित करना हो तो ईरान के तटीय इलाकों में जमीनी सैन्य कार्रवाई करनी पड़ सकती है। ऐसा कदम युद्ध को और व्यापक बना सकता है और अमेरिकी सैनिकों के लिए बड़ा जोखिम पैदा कर सकता है।

    इसी वजह से विशेषज्ञ मानते हैं कि ट्रंप के लिए युद्ध शुरू करना जितना आसान था, उसे खत्म करना उतना ही कठिन साबित हो रहा है।

  • टैरिफ पर US सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सोने-चांदी के दामों में जबरदस्त उछाल….

    टैरिफ पर US सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सोने-चांदी के दामों में जबरदस्त उछाल….


    नई दिल्ली।
    सोने और चांदी के भाव (Gold-Silver Rate) में आज सोमवार को जबरदस्त उछाल (Tremendous Surge) देखने को मिला। सोने की कीमतों में 1.61% और चांदी की कीमतों में 5% तक की तेजी दर्ज की गई। यह तेजी अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट (US Supreme Court) के एक फैसले के बाद आई है, जिसमें अदालत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (President Donald Trump) द्वारा लगाए गए व्यापक ग्लोबल टैरिफ को खारिज कर दिया। निवेशक अब इसके बाद अमेरिका की ओर से संभावित नए कदमों का आकलन कर रहे हैं। एशियाई बाजारों में आज स्पॉट गोल्ड की कीमत 1.61% बढ़कर 5,160 डॉलर प्रति औंस और चांदी की कीमत 5% उछलकर 86 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।


    क्यों बढ़ रहे हैं सोना-चांदी के दाम?

    अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया भर पर “पारस्परिक” टैरिफ लगाने के लिए आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल करके अपने अधिकार का उल्लंघन किया था। इस फैसले के साथ ही ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में लगाए गए कई महत्वपूर्ण टैरिफ अब समाप्त हो गए हैं।

    इस फैसले के जवाब में ट्रंप ने कहा है कि रद्द किए गए टैरिफ को बदलने के लिए वैकल्पिक तंत्र लागू किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि वह मौजूदा शुल्कों के अलावा, कानून की धारा 122 के तहत 10% का वैश्विक टैरिफ लागू करेंगे। साथ ही, राष्ट्रीय सुरक्षा और अन्य मामलों से जुड़े मौजूदा टैरिफ पूरी तरह से लागू रहेंगे।

    वहीं, जियो-पॉलिटिकल मोर्चे पर भी तनाव बना हुआ है। अमेरिकी सेना ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य तैनाती बढ़ा दी है। ट्रंप ने ईरान को उसके परमाणु कार्यक्रम को लेकर चेतावनी दी है, जिससे क्षेत्र में टकराव की आशंका और बढ़ गई है। ईरान पर संभावित अमेरिकी हमले से वहां पहले से मौजूद आंतरिक अस्थिरता और गहरी हो सकती है और यह अमेरिका के लिए एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष का रूप ले सकता है।


    क्या सोना-चांडी के भाव में और तेजी आ सकती है?

    जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के कमोडिटी रिसर्च हेड हरीश वी के अनुसार, हालांकि मजबूत डॉलर और बदलती ब्याज दर की उम्मीदें कीमतों में तेज उछाल को फिलहाल रोक सकती हैं, लेकिन लगातार बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव निवेशकों को सुरक्षित निवेश की ओर ले जा रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में सोने-चांदी की कीमतों में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

    हरीश ने कहा, “निवेशक आमतौर पर भू-राजनीतिक संकटों के दौरान सोने और चांदी की ओर रुख करते हैं, क्योंकि ये धातुएं मूल्य संरक्षण करती हैं, बाजार में उतार-चढ़ाव के जोखिम को कम करती हैं और मुद्राओं व वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता के समय एक भरोसेमंद विकल्प के रूप में काम करती हैं।”


    नई ऊंचाई छूने की संभावना

    एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने सोने की कीमतों के तकनीकी परिदृश्य पर कहा कि कीमतों में हालिया गिरावट मुनाफावसूली का हिस्सा है और व्यापक रुझान तेजी वाला ही बना हुआ है। उन्होंने कहा कि 4,500-4,700 डॉलर के बीच मजबूत खरीदारी देखी जा रही है और अगर कीमतें 5,100-5,200 डॉलर के स्तर को पार कर जाती हैं, तो नई ऊंचाई छूने की संभावना बन सकती है।

    वहीं, चांदी के भाव पर पोनमुडी ने कहा कि हालिया गिरावट के बावजूद, बड़े समय के फ्रेम में तेजी वाली संरचना बरकरार है। 65-70 डॉलर के बीच मजबूत खरीदारी का समर्थन स्तर है। अगर यह आधार बना रहता है और कीमतें 85-92 डॉलर के स्तर को पार करके वापसी करती हैं, तो तेजी का रुख फिर से मजबूत हो सकता है। मिड टू लॉन्ग टर्म नजरिए से चांदी के लिए संभावनाएं सकारात्मक बनी हुई हैं।

  • टी20 वर्ल्ड कप: 10 टीमें टूर्नामेंट से बाहर, पाकिस्तान की किस्मत का फैसला आज, नामीबिया से होगी टक्‍कर

    टी20 वर्ल्ड कप: 10 टीमें टूर्नामेंट से बाहर, पाकिस्तान की किस्मत का फैसला आज, नामीबिया से होगी टक्‍कर


    नई दिल्ली । टी20 वर्ल्ड कप सुपर-8 की तस्वीर आज पूरी तरह साफ हो जाएगी। इस बार टूर्नामेंट में कुल 20 टीमों ने हिस्सा लिया था, जिनमें से 10 टीमें पहले ही बाहर हो चुकी हैं। इनमें सबसे बड़ा नाम ऑस्ट्रेलिया का है। आज दो और टीमों का टूर्नामेंट से पत्ता कट सकता है और इस लिस्ट में पाकिस्तान भी शामिल है। पाकिस्तान का लीग स्टेज का आखिरी मैच नामीबिया के खिलाफ है। अगर पाकिस्तान को हार का सामना करना पड़ा तो टीम टी20 वर्ल्ड कप से बाहर हो सकती है और सुपर-8 का टिकट यूएसए के पास चला जाएगा, क्योंकि उसका नेट रन रेट बेहतर है।

    सुपर-8 के लिए 7 टीमें पहले ही क्वालीफाई

    टी20 वर्ल्ड कप सुपर-8 के लिए भारत, श्रीलंका, जिम्बाब्वे, वेस्टइंडीज, इंग्लैंड, साउथ अफ्रीका और न्यूजीलैंड की टीमें पहले ही क्वालीफाई कर चुकी हैं। आखिरी पायदान के लिए रेस में पाकिस्तान, यूएसए और नीदरलैंड्स की टीमें हैं।

    अब तक कौन सी 10 टीमें बाहर हो चुकी हैं
    ऑस्ट्रेलिया, नामीबिया, आयरलैंड, ओमान, स्कॉटलैंड, इटली, नेपाल, अफगानिस्तान, यूएई और कनाडा की टीमें टी20 वर्ल्ड कप 2026 से बाहर हो चुकी हैं। आज ही बची दो टीमों का नाम तय होगा।

    आज के मुकाबले

    18 फरवरी को भारत का मुकाबला नीदरलैंड्स से है, पाकिस्तान नामीबिया से भिड़ेगा और दिन का तीसरा मैच साउथ अफ्रीका और यूएई के बीच खेला जाएगा। सभी की नजरें पाकिस्तान और नामीबिया मैच पर रहेंगी, क्योंकि यही मैच सुपर-8 की 8वीं और आखिरी टीम तय करेगा।

    पाकिस्तान के सुपर-8 में क्वालीफाई करने का रास्ता

    पाकिस्तान, यूएसए और नीदरलैंड्स तीनों टीमों के बराबर 4-4 अंक हैं। पाकिस्तान को सुपर-8 में जगह बनाने के लिए हर हाल में नामीबिया को हराना होगा। जीत के साथ पाकिस्तान 6 अंकों तक पहुंच जाएगा और सुपर-8 का टिकट सुनिश्चित करेगा। हार की स्थिति में मामला नेट रन रेट पर जाएगा, जहां पाकिस्तान का नेट रन रेट यूएसए से काफी कमजोर है।

  • तमिलनाडु चुनाव : तमिलनाडु कांग्रेस ने आलाकमान पर छोड़ दिया फाइनल फैसला

    तमिलनाडु चुनाव : तमिलनाडु कांग्रेस ने आलाकमान पर छोड़ दिया फाइनल फैसला

    नई दिल्‍ली। कांग्रेस ने शनिवार देर रात चली मैराथन बैठक के बाद घोषणा करते हुए कहा कि तमिलनाडु में पार्टी की चुनावी रणनीति और संभावित सत्ता-साझाकरण गठबंधनों पर अंतिम निर्णय शीर्ष नेतृत्व द्वारा लिया जाएगा। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की लगभग साढ़े तीन घंटे तक चली इस बैठक की अध्यक्षता कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने की। इसमें तमिलनाडु और पुडुचेरी के 40 से अधिक वरिष्ठ नेताओं ने भाग लिया।

    चर्चा के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए पार्टी के महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल ने इन वार्ताओं को “रचनात्मक और पार्टी को मजबूत करने पर केंद्रित” बताया। उन्होंने कहा कि नेतृत्व ने सामूहिक और व्यक्तिगत, दोनों तरह के सत्र आयोजित किए ताकि राज्य के नेता “स्वतंत्र रूप से अपने विचार व्यक्त कर सकें।”

    हालांकि गठबंधन या सत्ता-साझाकरण की मांगों के विशिष्ट विवरण स्पष्ट नहीं किए गए, लेकिन श्री वेणुगोपाल ने पुष्टि की कि राज्य इकाई की चिंताओं को विस्तार से सुना गया है। उन्होंने कहा, “बैठक ने सर्वसम्मति से माननीय कांग्रेस अध्यक्ष और विपक्ष के नेता को चुनावी रणनीति से संबंधित मामलों पर निर्णय लेने का अधिकार दिया है।

    पार्टी हाई कमान पार्टी की विचारधारा और तमिलनाडु के लोगों के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए उचित समय पर निर्णय लेगा।”

    पार्टी के भीतर आंतरिक कलह और सार्वजनिक अटकलों को रोकने के लिए हाई कमान ने बयानों को लेकर सख्त चेतावनी जारी की है। श्री वेणुगोपाल ने जोर देकर कहा कि सभी नेताओं को अनुशासित रहना चाहिए और सोशल मीडिया सहित किसी भी मंच पर व्यक्तिगत शिकायतों या अटकलों को साझा करने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा, “नेताओं को एक सुर में बोलने की सलाह दी गई है।”

    पुडुचेरी के संबंध में नेतृत्व ने घोषणा की कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी 21 जनवरी से एक बड़ी ‘पदयात्रा’ शुरू करेगी। यह मार्च पूरे राज्य को कवर करेगा, जिसमें वरिष्ठ राष्ट्रीय नेतृत्व के भी शामिल होने की संभावना है। यह बैठक तमिलनाडु में द्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन के भीतर कांग्रेस की भूमिका को लेकर बढ़ती अटकलों के बीच हुई है, जहां स्थानीय इकाइयां कथित तौर पर शासन और सीटों के बंटवारे में बड़ी हिस्सेदारी की मांग कर रही हैं।

  • T20 वर्ल्ड कप टीम में शुभमन गिल को नहीं मिली जगह… लखनऊ में हो गया था ड्राप करने का फैसला

    T20 वर्ल्ड कप टीम में शुभमन गिल को नहीं मिली जगह… लखनऊ में हो गया था ड्राप करने का फैसला


    नई दिल्ली।
    मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर (Ajit Agarkar), टी20 टीम के कप्तान सूर्यकुमार यादव (T20 team captain Suryakumar Yadav) और बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया (BCCI Secretary Devjit Saikia) की अगुवाई में शनिवार, 20 दिसंबर को आगामी टी20 वर्ल्ड कप (T20 World Cup) के लिए टीम इंडिया का ऐलान हुआ। जब इस टीम में उप-कप्तान शुभमन गिल (Shubman Gill) का नाम नहीं दिखा तो हर कोई हैरान था। दरअसल, एशिया कप 2025 से ही शुभमन गिल को लगातार टी20 टीम में फिट किए जाने की कोशिश की जा रही थी, उन्हें संजू सैमसन की जगह लगातार मौके मिल रहे थे, मगर इस फॉर्मेट में उनका बल्ला एकदम खामौश था। गिल 2025 में T20I में एक भी बार 50 रन का आंकड़ा नहीं छू पाए।

    ऐसा नहीं है कि शुभमन गिल के टी20 क्रिकेट के भविष्य को सिर्फ एक ही दिन में तय किया गया, जब टीम का ऐलान हुआ। बल्कि इसका फैसला लखनऊ में हुए चौथे टी20 के दौरान ही ले लिया गया था, जो धुंध के कारण रद्द हुआ। एक रिपोर्ट में कहा गया है, “शनिवार को जब बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने टी20 विश्व कप के लिए टीम की घोषणा की, तब शुभमन गिल की किस्मत पर मुहर नहीं लगी थी, बल्कि तब हुआ जब बुधवार को घने धुंध के कारण चौथा टी20 इंटरनेशनल रद्द कर दिया गया था।

    BCCI के एक सोर्स के मुताबिक, उस दिन यह तय हुआ था कि गिल को T20 वर्ल्ड कप के लिए नहीं चुना जाएगा, लेकिन शनिवार सुबह तक न तो सेलेक्शन कमेटी के चेयरमैन ने उन्हें इस बारे में बताया और न ही कप्तान सूर्यकुमार यादव या हेड कोच गौतम गंभीर ने उन्हें इन्फॉर्म किया। शुभमन गिल को ड्रॉप करने के बाद टी20 वर्ल्ड कप टीम का उप-कप्तान अक्षर पटेल को बनाया गया है। वहीं ईशान किशन को बैकअप विकेट कीपर के रूप में टीम में शामिल किया गया है, जो बैकअप ओपनर की भूमिका भी अदा करेंगे।