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  • मेटा को केंद्र की दो टूक, भारत में ग्लोबल पॉलिसी नहीं बल्कि स्थानीय कानूनों के मुताबिक करना होगा मॉडरेशन

    मेटा को केंद्र की दो टूक, भारत में ग्लोबल पॉलिसी नहीं बल्कि स्थानीय कानूनों के मुताबिक करना होगा मॉडरेशन


    नई दिल्ली । 
    भारत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के संचालन और कंटेंट मॉडरेशन को लेकर केंद्र सरकार ने मेटा के सामने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। सरकार का कहना है कि भारत में फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप जैसे प्लेटफॉर्म केवल अपनी वैश्विक नीतियों के आधार पर काम नहीं कर सकते। उन्हें भारतीय कानूनों और देश की भाषाई तथा सांस्कृतिक परिस्थितियों के अनुरूप अपने कंटेंट मॉडरेशन तंत्र को लागू करना होगा।

    मेटा और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के बीच इस मुद्दे पर कई दौर की बातचीत हो चुकी है। इन चर्चाओं के बाद सरकारी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल कंपनी के पूरे एल्गोरिदम को बदलने का कोई निर्देश नहीं दिया गया है। सरकार का जोर इस बात पर है कि प्लेटफॉर्म की नीतियां और मॉडरेशन व्यवस्था भारत में लागू कानूनी प्रावधानों के अनुरूप हो तथा स्थानीय परिस्थितियों को पर्याप्त महत्व दिया जाए।

    सरकार विशेष रूप से भारतीय भाषाओं और सांस्कृतिक संदर्भों को लेकर चिंतित है। अधिकारियों के अनुसार, विदेशों में बैठे मॉडरेशन दल कई बार भारत की अलग-अलग भाषाओं, सामाजिक संदर्भों और स्थानीय संवेदनशीलताओं को पूरी तरह नहीं समझ पाते। ऐसे में कंटेंट की सही पहचान और उचित कार्रवाई के लिए स्थानीय स्तर पर विशेषज्ञता और इनपुट बढ़ाने की आवश्यकता बताई गई है।

    बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट यानी सीएसएएम को लेकर सरकार ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। इस तरह के कंटेंट के मामले में किसी तरह की ढिलाई स्वीकार नहीं करने की बात कही गई है। सरकार चाहती है कि मेटा अपने प्लेटफॉर्म पर ऐसे कंटेंट की पहचान, रोकथाम और कार्रवाई के लिए अधिक प्रभावी व्यवस्था विकसित करे और संदिग्ध सामग्री के दोबारा सामने आने की संभावना को भी कम करे।

    डीपफेक के मुद्दे पर भी सरकार और मेटा के बीच चर्चा हुई है। खासतौर पर मशहूर हस्तियों से जुड़े सिंथेटिक कंटेंट को लेकर सरकार ने मानवीय समीक्षा की जरूरत पर जोर दिया है। अधिकारियों का मानना है कि केवल स्वचालित तकनीक के आधार पर किसी सामग्री को हटाने से गलत निर्णय की संभावना बनी रह सकती है। इसलिए संवेदनशील मामलों में ह्यूमन इन द लूप व्यवस्था के जरिए अंतिम समीक्षा की जरूरत बताई गई है।

    सरकार ने यह भी जानना चाहा है कि एक बार किसी हानिकारक या सिंथेटिक कंटेंट की पहचान होने के बाद उसे दोबारा यूजर्स तक पहुंचने और रिकमेंड होने से रोकने के लिए मेटा की व्यवस्था कितनी प्रभावी है। रिकमेंडेशन सिस्टम और वायरल कंटेंट को लेकर भी कंपनी से सवाल किए गए हैं।

    बैठकों में यह मुद्दा भी सामने आया कि कई बार यूजर्स को उनकी सामान्य पसंद से अलग सामग्री क्यों दिखाई जाती है और क्या रिकमेंडेशन सिस्टम सिंथेटिक या हानिकारक कंटेंट को अनावश्यक रूप से आगे बढ़ा रहा है। सरकार का जोर इस बात पर है कि पहचाने जा चुके नुकसानदायक कंटेंट की पहुंच को एल्गोरिदम के जरिए दोबारा बढ़ावा नहीं मिलना चाहिए।

    इसके साथ ही मेटा के इंटरमीडियरी स्टेटस और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 के तहत मिलने वाली सेफ हार्बर सुरक्षा से जुड़े अनुपालन की भी समीक्षा की जा रही है। सरकार यह देख रही है कि प्लेटफॉर्म की कंटेंट रिकमेंडेशन में भूमिका उसके कानूनी दायित्वों को किस तरह प्रभावित करती है।

    फिलहाल सरकार और मेटा के बीच तकनीकी स्तर पर बातचीत जारी है और अगले दौर की बैठक होने की उम्मीद है। केंद्र का स्पष्ट संदेश यह है कि उद्देश्य मेटा के एल्गोरिदम को पूरी तरह बदलना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि उसके प्लेटफॉर्म, कंटेंट नीति और मॉडरेशन व्यवस्था भारतीय कानूनों के साथ देश की भाषाई और सांस्कृतिक जरूरतों के अनुरूप काम करें।

  • डीपफेक पर मेटा से सरकार की दो टूक, कार्रवाई नहीं हुई तो भारतीय कानून के तहत तय हो सकती है कंपनी की जवाबदेही

    डीपफेक पर मेटा से सरकार की दो टूक, कार्रवाई नहीं हुई तो भारतीय कानून के तहत तय हो सकती है कंपनी की जवाबदेही

    नई दिल्ली । डीपफेक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से तैयार होने वाली भ्रामक सामग्री को लेकर केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया मंच मेटा के प्रति सख्त रुख अपनाया है। सरकार ने कंपनी से डीपफेक सामग्री के खिलाफ ठोस और प्रभावी कदम उठाने को कहा है। साथ ही मेटा के साथ हुई बैठकों के परिणामों की समीक्षा के बाद आगे की कार्रवाई को लेकर कानूनी राय लेने की प्रक्रिया शुरू करने की बात सामने आई है। सरकार यह भी जांच कर रही है कि भारतीय कानून के तहत मेटा और अन्य ऑनलाइन मंचों को मिलने वाले मध्यस्थ के दर्जे की शर्तों का सही तरीके से पालन किया जा रहा है या नहीं।

    सरकारी सूत्रों के अनुसार, मौजूदा समीक्षा का मुख्य सवाल यह है कि ऑनलाइन मंच भारतीय कानून में मध्यस्थों के लिए निर्धारित जिम्मेदारियों का पालन कर रहे हैं या नहीं। सरकार यह भी देख रही है कि यदि किसी मंच की तकनीकी प्रणाली यह तय करती है कि किसी यूजर को कौन-सी सामग्री दिखाई जाएगी, तो उस स्थिति में उसकी भूमिका केवल एक निष्क्रिय मध्यस्थ तक सीमित मानी जा सकती है या नहीं। इसी आधार पर संबंधित कंपनियों की जिम्मेदारी तय करने को लेकर कानूनी पहलुओं की जांच की जा रही है।

    सरकार की नजर केवल मेटा तक सीमित नहीं रहने वाली है। आने वाले समय में अन्य प्रमुख ऑनलाइन मंचों को भी बातचीत के लिए बुलाया जा सकता है। इनके माध्यम से यह समझने की कोशिश होगी कि उनकी अनुशंसा प्रणाली किस तरह काम करती है और यूजर्स तक सामग्री पहुंचाने में उनकी तकनीकी भूमिका कितनी सक्रिय है। सरकार यह भी देख रही है कि भुगतान वाली सामग्री को बढ़ावा देने और यूजर के लिए सामग्री चुनने वाली प्रणालियों की भूमिका भारतीय कानून के मौजूदा प्रावधानों के तहत किस तरह निर्धारित होती है।

    डीपफेक को लेकर सरकार की चिंता इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि एआई तकनीक के इस्तेमाल से वास्तविक व्यक्ति के चेहरे, आवाज और वीडियो को बदलकर ऐसी सामग्री तैयार की जा सकती है, जो देखने में वास्तविक लगती है। ऐसी सामग्री का इस्तेमाल गलत सूचना फैलाने, किसी व्यक्ति की छवि खराब करने और लोगों को भ्रमित करने के लिए किया जा सकता है। बिना स्पष्ट लेबल वाली एआई-जनित सामग्री भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर यूजर्स के लिए भ्रम की स्थिति पैदा कर सकती है।

    सरकार और मेटा के बीच इस मुद्दे पर लगातार कई दौर की बैठकें हुई हैं। दो दिनों तक कंपनी की टीम से विस्तृत पूछताछ के बाद तीसरे दिन तकनीकी स्तर पर चर्चा की गई। इसमें डीपफेक, बाल यौन शोषण सामग्री और बिना लेबल वाली एआई-जनित सामग्री से निपटने के लिए कंपनी की कार्ययोजना पर विशेष रूप से चर्चा हुई। सरकार की ओर से प्लेटफॉर्म की तकनीकी व्यवस्था और कंटेंट मॉडरेशन प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए गए।

    यह पूरा मामला उस घटनाक्रम के बाद और महत्वपूर्ण हो गया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक सोशल मीडिया पोस्ट पर मेटा के एआई आधारित कंटेंट फिल्टर की वजह से अस्थायी रोक लग गई थी। बाद में कंपनी ने इसे तकनीकी गलती बताया और पोस्ट बहाल करते हुए माफी मांगी थी। इसके बाद सरकार और कंपनी के बीच हुई बैठकों में प्लेटफॉर्म की कंटेंट मॉडरेशन व्यवस्था और तकनीकी प्रणालियों की भूमिका पर विशेष ध्यान दिया गया।

    अब सरकार बैठकों से मिले जवाबों और मेटा की कार्ययोजना की समीक्षा कर रही है। इसके बाद कानूनी राय के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जा सकती है। यदि जांच में यह पाया जाता है कि प्लेटफॉर्म भारतीय कानून के तहत अपनी जिम्मेदारियों का पालन नहीं कर रहे हैं, तो उनकी जवाबदेही तय करने की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं। इससे भारत में डीपफेक, एआई सामग्री और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी को लेकर नियामकीय व्यवस्था और सख्त होने के संकेत मिल रहे हैं।

  • मार्क जुकरबर्ग ने भारत सरकार से मांगी माफी, सीएसएएम, डीपफेक और सिस्टम एरर को लेकर जताया खेद

    मार्क जुकरबर्ग ने भारत सरकार से मांगी माफी, सीएसएएम, डीपफेक और सिस्टम एरर को लेकर जताया खेद

    नई दिल्ली । मेटा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जुकरबर्ग ने बाल यौन शोषण सामग्री (सीएसएएम), डीपफेक कंटेंट और ऑपरेटिंग सिस्टम से जुड़ी तकनीकी त्रुटियों को लेकर भारत सरकार से माफी मांगी है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, कंपनी ने कुछ मामलों में हुई चूक पर खेद व्यक्त करते हुए भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने का भरोसा दिया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही और भारतीय कानूनों के पालन को लेकर सरकार लगातार सख्त रुख अपनाए हुए है।

    जानकारी के अनुसार, भारत सरकार ने मेटा को स्पष्ट किया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका केवल तकनीकी माध्यम तक सीमित नहीं मानी जा सकती। सरकार का कहना है कि यदि कोई मंच सामग्री के प्रसार और दृश्यता को प्रभावित करता है, तो उस पर भारतीय कानूनों के अनुरूप आवश्यक जिम्मेदारियां भी लागू होती हैं। इसी संदर्भ में कंपनी के प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत चर्चा की गई और स्थानीय नियमों के पूर्ण अनुपालन पर जोर दिया गया।

    सरकारी सूत्रों के मुताबिक, बैठक के दौरान मेटा की ओर से सीएसएएम और डीपफेक जैसे संवेदनशील विषयों पर विशेष चिंता व्यक्त की गई। कंपनी ने स्वीकार किया कि इन चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए अपने तकनीकी तंत्र और निगरानी प्रणाली को लगातार मजबूत बनाने की आवश्यकता है। साथ ही ऑपरेटिंग सिस्टम से जुड़ी कुछ तकनीकी त्रुटियों पर भी खेद जताते हुए उन्हें दूर करने की प्रक्रिया तेज करने की बात कही गई।

    यह मामला उस विवाद के बाद और अधिक चर्चा में आया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो कुछ समय के लिए फेसबुक पर उपलब्ध नहीं रहा। इस घटना को गंभीरता से लेते हुए संबंधित संसदीय समिति ने मेटा से जवाब मांगा था और निर्धारित समय के भीतर बिना शर्त माफी की मांग की थी। समिति ने यह भी संकेत दिया था कि यदि कंपनी संतोषजनक जवाब देने में विफल रहती है तो नियामकीय स्तर पर आगे की कार्रवाई पर विचार किया जा सकता है।

    इसी क्रम में मेटा के एक वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की। बैठक के दौरान डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सामग्री प्रबंधन, पारदर्शिता, जवाबदेही और भारतीय कानूनों के पालन से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि भारत में संचालित सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को देश के लागू नियमों और कानूनी प्रावधानों का पूर्ण पालन करना होगा।

    मेटा और अन्य सोशल मीडिया कंपनियों के प्रतिनिधियों ने बैठक में कहा कि उनके प्लेटफॉर्म पर पहले से ही कंटेंट मॉडरेशन, फैक्ट-चेकिंग और सुरक्षा संबंधी कई आंतरिक व्यवस्थाएं लागू हैं। उन्होंने यह भी दोहराया कि प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग रोकने और आपत्तिजनक सामग्री के खिलाफ कार्रवाई को और प्रभावी बनाने के लिए लगातार तकनीकी सुधार किए जा रहे हैं। सरकार और डिजिटल प्लेटफॉर्म के बीच हुई यह बातचीत भविष्य में ऑनलाइन सुरक्षा, पारदर्शिता और डिजिटल जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

  • गडकरी ने कहा- E20 और एथेनॉल ब्लेंडिंग से मेरा कोई संबंध नहीं, फर्जी AI वीडियो पर मेटा, एक्स और गूगल के खिलाफ करेंगे मुकदमा

    गडकरी ने कहा- E20 और एथेनॉल ब्लेंडिंग से मेरा कोई संबंध नहीं, फर्जी AI वीडियो पर मेटा, एक्स और गूगल के खिलाफ करेंगे मुकदमा

    नई दिल्ली । केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को लेकर सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे कथित एआई-जनित डीपफेक वीडियो से स्वयं को पूरी तरह अलग बताते हुए स्पष्ट किया है कि एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (ईबीपी) कार्यक्रम और ई20 पहल से उनका कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र का विषय है और इस नीति के क्रियान्वयन में उनकी कोई भूमिका नहीं है।

    इस मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने गडकरी को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करने की अनुमति दे दी है। अदालत की मंजूरी के बाद अब वह मेटा, एक्स और गूगल के विरुद्ध सिविल मुकदमा दायर कर सकते हैं। गडकरी का आरोप है कि विभिन्न डिजिटल माध्यमों पर प्रसारित कई वीडियो में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की मदद से उनकी छवि और आवाज का उपयोग कर भ्रामक सामग्री तैयार की गई, जिससे जनता के बीच गलत संदेश फैलाने का प्रयास किया गया।

    याचिका में कहा गया है कि वायरल किए गए वीडियो में यह झूठा दावा किया गया कि गडकरी और उनका परिवार एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल कार्यक्रम तथा ई20 पहल से किसी प्रकार का आर्थिक लाभ प्राप्त कर रहे हैं। मंत्री ने इन दावों को पूरी तरह निराधार, मनगढ़ंत और दुर्भावनापूर्ण बताते हुए कहा कि इस प्रकार की सामग्री उनकी व्यक्तिगत और सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से तैयार की गई है।

    मामले में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा दूरसंचार मंत्रालय को भी प्रतिवादी बनाया गया है। याचिका के माध्यम से डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध कथित फर्जी सामग्री के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई और उसे हटाने की मांग की गई है। गडकरी ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी याचिका का उद्देश्य किसी सरकारी नीति पर होने वाली सार्वजनिक बहस, आलोचना या लोकतांत्रिक चर्चा को सीमित करना नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक को सरकारी नीतियों पर अपनी राय रखने का अधिकार है, लेकिन किसी व्यक्ति के नाम और पहचान का दुरुपयोग कर झूठी जानकारी फैलाना स्वीकार्य नहीं हो सकता।

    हाल के समय में देश में ई20 पेट्रोल को लेकर कई तरह की चर्चाएं और दावे सामने आए हैं। विशेष रूप से वर्ष 2023 से पहले निर्मित कुछ पेट्रोल वाहनों के मालिकों ने माइलेज में कमी, रखरखाव लागत बढ़ने और इंजन के कुछ हिस्सों पर संभावित प्रभाव जैसी चिंताएं व्यक्त की हैं। इसी बीच सोशल मीडिया पर कई भ्रामक वीडियो और दावे भी तेजी से प्रसारित हुए, जिनमें एथेनॉल मिश्रण नीति को लेकर विभिन्न प्रकार की गलत जानकारियां साझा की गईं।

    गडकरी ने अपने पक्ष में दायर याचिका में दोहराया कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से संबंधित नीति का संचालन और निर्णय केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधीन है। उन्होंने कहा कि उनके नाम का उपयोग कर तैयार किए गए एआई-जनित वीडियो तथ्यों से परे हैं और इनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है। उनका कहना है कि डिजिटल माध्यमों पर फर्जी सामग्री के प्रसार से न केवल आम लोगों में भ्रम फैलता है, बल्कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्तियों की विश्वसनीयता भी प्रभावित होती है।

    इस घटनाक्रम ने एक बार फिर कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित डीपफेक सामग्री, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही और ऑनलाइन भ्रामक सूचनाओं की निगरानी जैसे मुद्दों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया के बाद संबंधित पक्षों का जवाब और अदालत की आगामी सुनवाई महत्वपूर्ण रहेगी।

  • 'इंडियाज गॉट लेटेंट 2' में जॉनी सिन्स की एंट्री का दावा निकला पूरी तरह फर्जी, समय रैना के साथ वायरल वीडियो के पीछे का सच आया सामने

    'इंडियाज गॉट लेटेंट 2' में जॉनी सिन्स की एंट्री का दावा निकला पूरी तरह फर्जी, समय रैना के साथ वायरल वीडियो के पीछे का सच आया सामने

    नई दिल्ली। मशहूर स्टैंडअप कॉमेडियन समय रैना के बहुचर्चित शो ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ के दूसरे सीजन की धमाकेदार शुरुआत के साथ ही सोशल मीडिया पर एक नया विवाद और उत्सुकता खड़ी हो गई है। इंटरनेट पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एडल्ट फिल्म स्टार जॉनी सिन्स और कोमाटोजी को कॉमेडियन समय रैना के साथ पोज देते हुए देखा जा सकता है। इस क्लिप के सामने आने के बाद से ही डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर यह कयास लगाए जाने लगे कि ये दोनों वैश्विक एडल्ट स्टार्स शो के आगामी एपिसोड में बतौर जज या मेहमान नजर आ सकते हैं। हालांकि, इस सनसनीखेज दावे की पड़ताल में एक बिल्कुल अलग ही हकीकत सामने आई है।

    पहली नजर में पूरी तरह वास्तविक और प्रामाणिक दिखने वाला यह वीडियो असल में आधुनिक तकनीक का एक भ्रामक उदाहरण है। तकनीकी जांच और विशेषज्ञों के अनुसार, यह पूरी क्लिप आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई टूल्स की मदद से तैयार की गई है। डिजिटल रूप से निर्मित इस फर्जी वीडियो का समय रैना के वास्तविक शो या उनकी किसी शूटिंग से कोई संबंध नहीं है। समय रैना, जॉनी सिन्स और कोमाटोजी के बीच असल जिंदगी में ऐसी कोई मुलाकात दर्ज नहीं की गई है, और न ही शो के निर्माताओं ने इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा या टीजर जारी किया है।

    वर्तमान में ‘इंडियाज गॉट लेटेंट सीजन 2’ के मंच से इन एडल्ट स्टार्स का दूर-दूर तक कोई जुड़ाव नहीं है। खुद समय रैना या उनकी प्रोडक्शन टीम की ओर से इस वायरल सामग्री पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। यह पूरी घटना इंटरनेट पर एआई के जरिए फैलाई जाने वाली अफवाहों का एक ताजा उदाहरण मात्र है। यह शो अपने अजीबोगरीब प्रतियोगियों और अप्रत्याशित मेहमानों के लिए जाना जाता है, यही वजह है कि प्रशंसकों ने इस एआई-जनरेटेड वीडियो को भी सच मान लिया और इसे लेकर गॉसिप का बाजार गर्म हो गया।

    उल्लेखनीय है कि इस शो के दूसरे सीजन का भव्य प्रीमियर हाल ही में नेटफ्लिक्स और यूट्यूब पर एक साथ किया गया है। इसके पहले ही एपिसोड में बॉलीवुड अभिनेत्री आलिया भट्ट और शरवरी वाघ बतौर गेस्ट नजर आई थीं, जहां समय रैना के तीखे और मजेदार रोस्टिंग अंदाज को दर्शकों ने काफी पसंद किया। इस एपिसोड की सफलता के बाद फैंस अगले एपिसोड का उत्सुकता से इंतजार कर रहे हैं। इसी बीच मुंबई के द हैबिटैट स्टूडियो से कुछ वास्तविक तस्वीरें और वीडियो भी सामने आए हैं, जहां इस रियलिटी शो की मूल शूटिंग की जाती है।

    शो के वास्तविक आगामी एपिसोड्स की बात करें तो हाल ही में सामने आई प्रामाणिक कड़ियों में मशहूर पंजाबी गायक करण औजला को समय रैना के साथ देखा गया है। स्टूडियो से लीक हुए वास्तविक दृश्यों में करण औजला और कॉमेडियन तन्मय भट्ट जजिंग पैनल का हिस्सा बनते दिखाई दे रहे हैं, जिसने प्रशंसकों के उत्साह को वास्तविक रूप से बढ़ा दिया है। बहरहाल, जॉनी सिन्स वाले फर्जी वीडियो की पोल खुलने के बाद तकनीकी जानकारों ने सोशल मीडिया यूजर्स को ऐसी एआई-जनरेटेड सामग्रियों के प्रति सचेत रहने और बिना आधिकारिक पुष्टि के उन पर विश्वास न करने की सलाह दी है।

  • मध्य प्रदेश में डीपफेक का कहर, उज्जैन की छात्रा और भोपाल की मां-बेटी बनीं AI साजिश का शिकार

    मध्य प्रदेश में डीपफेक का कहर, उज्जैन की छात्रा और भोपाल की मां-बेटी बनीं AI साजिश का शिकार


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीपफेक तकनीक के दुरुपयोग के दो चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं जिन्होंने साइबर अपराध के बढ़ते खतरे को एक बार फिर उजागर कर दिया है। उज्जैन और भोपाल में सामने आई इन घटनाओं में लोगों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के लिए एआई की मदद से अश्लील तस्वीरें और वीडियो तैयार कर सोशल मीडिया पर वायरल किए गए। दोनों मामलों में पुलिस जांच जारी है और आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

    पहला मामला उज्जैन के पंवासा थाना क्षेत्र का है जहां एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही एक छात्रा को सुनियोजित साजिश का शिकार बनाया गया। छात्रा की तस्वीर को अश्लील वीडियो के साथ जोड़कर डीपफेक कंटेंट तैयार किया गया और उसे सोशल मीडिया तथा गांव के व्हाट्सएप ग्रुपों में वायरल कर दिया गया। इस घटना के बाद छात्रा के पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई जिसके आधार पर जांच शुरू हुई।

    पुलिस जांच में सामने आया कि इस पूरी साजिश के पीछे छात्रा का ही एक रिश्तेदार था जिसका उद्देश्य छात्रा के पिता को समाज में बदनाम करना था। जांच में यह भी पता चला कि छात्रा की तस्वीर सरकारी रिकॉर्ड से हासिल की गई थी। आरोप है कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के दौरान जमा कराई गई फोटो एक महिला बीएलओ के माध्यम से आरोपियों तक पहुंची जिसके बाद उसी तस्वीर का इस्तेमाल कर डीपफेक वीडियो तैयार किया गया।

    इस मामले में पुलिस ने पांच आरोपियों में से चार को गिरफ्तार कर लिया है जबकि एक आरोपी अब भी फरार है। महिला बीएलओ को अदालत से जमानत मिल चुकी है। पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल साक्ष्य जब्त कर लिए हैं। शुरुआती जांच में पारिवारिक और चुनावी रंजिश को इस घटना की प्रमुख वजह माना जा रहा है।

    दूसरा मामला भोपाल के करोंद इलाके का है जहां शादी से इनकार करने पर एक युवती ने बदला लेने के उद्देश्य से युवक के परिवार को निशाना बनाया। आरोप है कि युवती ने एआई तकनीक की मदद से युवक की मां और 18 वर्षीय बहन की अश्लील तस्वीरें और वीडियो तैयार किए और फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट बनाकर उन्हें वायरल कर दिया।

    पीड़ित परिवार का कहना है कि इस घटना के बाद उनकी बेटी मानसिक तनाव से गुजर रही है और पूरा परिवार सामाजिक बदनामी का सामना कर रहा है। परिवार ने पहले स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराई लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर पुलिस कमिश्नर कलेक्टर और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग की है। परिवार ने आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

    इन दोनों घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आधुनिक एआई और डीपफेक तकनीक का दुरुपयोग किसी भी व्यक्ति की प्रतिष्ठा सामाजिक जीवन और मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। साइबर विशेषज्ञ लोगों को सलाह दे रहे हैं कि वे अपनी निजी तस्वीरें और व्यक्तिगत जानकारी सोशल मीडिया पर साझा करते समय पूरी सावधानी बरतें। यदि किसी व्यक्ति को अपने नाम या तस्वीर का दुरुपयोग होने की जानकारी मिले तो बिना देर किए पुलिस और साइबर सेल में शिकायत दर्ज करानी चाहिए ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।

  • वैश्विक विरोध के बाद एलन मस्क की एक्स ने ग्रोक का आपत्तिजनक इमेज फीचर बंद किया

    वैश्विक विरोध के बाद एलन मस्क की एक्स ने ग्रोक का आपत्तिजनक इमेज फीचर बंद किया


    नई दिल्ली: दुनिया भर में बढ़ते विरोध और कानूनी दबाव के बाद एलन मस्क के नेतृत्व वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स X ने गुरुवार को अपने एआई चैटबॉट ग्रोक का आपत्तिजनक तस्वीर बनाने वाला फीचर बंद कर दिया। अब ग्रोक किसी भी स्थिति में महिलाओं की अशोभनीय या आपत्तिजनक तस्वीरें नहीं बना सकेगा चाहे यूजर के पास प्रीमियम अकाउंट ही क्यों न हो।एक्स के सेफ्टी अकाउंट ने पोस्ट में कहा कि तकनीकी बदलाव किए गए हैं जिससे ग्रोक असली लोगों की तस्वीरों को बिकिनी या अन्य खुले कपड़ों में एडिट नहीं कर सकेगा। यह नियम सभी यूजर्स पर लागू होगा जिसमें पेड और प्रीमियम दोनों प्रकार के अकाउंट्स शामिल हैं।

    ग्रोक के ‘स्पाइसी मोड’ फीचर ने कई देशों में नाराजगी पैदा की थी। इस मोड के जरिए यूजर्स आसानी से किसी भी व्यक्ति की अश्लील डीपफेक तस्वीरें बना सकते थे जैसे कपड़े हटाना या बिकिनी में दिखाना। इस पर कई देशों ने प्लेटफॉर्म को ब्लॉक कर दिया या इसकी जांच शुरू कर दी। भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने भी एक्सएआई से इस मामले में रिपोर्ट मांगी थी। वहीं अमेरिका के कैलिफोर्निया अटॉर्नी जनरल ने डेवलपर के खिलाफ जांच शुरू की।28 सामाजिक संगठनों ने एप्पल और गूगल को पत्र लिखकर मांग की थी कि ग्रोक और एक्स ऐप को उनके ऐप स्टोर से हटाया जाए। बढ़ती अश्लील तस्वीरों की वजह से यह कदम जरूरी समझा गया।

    अब एक्स ने तस्वीर बनाने और एडिट करने की सुविधा केवल पेड सब्सक्राइबर्स तक सीमित कर दी है। पहले यह सुविधा प्रीमियम यूजर्स के लिए थी लेकिन अब इसे और भी सख्त बनाया गया है। प्लेटफॉर्म ने बताया कि यह कदम एक अतिरिक्त सुरक्षा परत के रूप में काम करेगा और नियम तोड़ने वाले यूजर्स के खिलाफ कड़ी कार्रवाई संभव होगी।एक्स ने यह भी स्पष्ट किया कि बाल यौन शोषण सामग्री CSAM और बिना अनुमति की नग्न तस्वीरों जैसे गंभीर नियम उल्लंघन वाले कंटेंट को तुरंत हटाया जाएगा। ऐसे नियम तोड़ने वाले अकाउंट्स को निलंबित या बंद किया जाएगा।

    दिसंबर में मंत्रालय ने एक्स को निर्देश दिया था कि कानून के खिलाफ पहले से मौजूद आपत्तिजनक कंटेंट को हटाया जाए या उसकी पहुंच बंद की जाए। भारत में एक्स ने ग्रोक की मदद से बनाई गई लगभग 3500 अश्लील तस्वीरें हटाईं और करीब 600 यूजर्स को प्रतिबंधित किया।इस कदम को प्लेटफॉर्म की सुरक्षा नीतियों और कानूनी जिम्मेदारी के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। एक्स ने कहा कि अब ग्रोक का इस्तेमाल केवल सुरक्षित और जिम्मेदार तरीके से ही संभव होगा जिससे किसी की निजता और सम्मान का उल्लंघन न हो।