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  • एशिया कप में भारत का शानदार आगाज: दीप्ति शर्मा ने रचा विश्व रिकॉर्ड, बिना रन दिए झटके 3 विकेट

    एशिया कप में भारत का शानदार आगाज: दीप्ति शर्मा ने रचा विश्व रिकॉर्ड, बिना रन दिए झटके 3 विकेट


    नई दिल्ली। विमेंस एशिया कप 2026 में भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने अपने अभियान की शुरुआत धमाकेदार जीत के साथ की है। दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में भारत ने थाईलैंड को 94 रनों से करारी शिकस्त दी। इस जीत के दौरान भारतीय टीम की गेंदबाज दीप्ति शर्मा ने ऐसा इतिहास रच दिया जो लंबे समय तक याद रखा जाएगा। दीप्ति ने अपनी घातक गेंदबाजी से महज 1.1 ओवर में बिना कोई रन दिए 3 विकेट हासिल किए और इसी के साथ वह विमेंस टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाली गेंदबाज बन गईं। दीप्ति के नाम अब टी20 इंटरनेशनल में कुल 171 विकेट हो गए हैं और उन्होंने थाईलैंड की थिपाचा पुथावोंग को पीछे छोड़ दिया है जिनके नाम 170 विकेट दर्ज हैं। रवांडा की हेनरीट इशिम्वे 164 विकेट के साथ इस सूची में तीसरे स्थान पर हैं।

    दीप्ति शर्मा के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास रही क्योंकि उन्होंने केवल सर्वाधिक विकेट लेने का रिकॉर्ड ही नहीं बनाया बल्कि भारत की ओर से टी20 इंटरनेशनल में तीन या उससे ज्यादा विकेट लेने वाली गेंदबाजों में सबसे बेहतरीन गेंदबाजी प्रदर्शन भी अपने नाम कर लिया। दीप्ति ने अपने स्पेल में एक भी रन खर्च किए बिना तीन बल्लेबाजों को पवेलियन भेजा। इससे पहले यह रिकॉर्ड रेणुका सिंह के नाम था जिन्होंने 2022 में पांच रन देकर तीन विकेट हासिल किए थे। दीप्ति ने इस प्रदर्शन के साथ भारतीय महिला क्रिकेट में अपनी खास जगह और मजबूत कर ली।

    मुकाबले की बात करें तो भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए अच्छी शुरुआत की लेकिन पारी के दौरान लगातार विकेट गिरने के कारण टीम बड़ा स्कोर खड़ा नहीं कर सकी। भारतीय टीम ने निर्धारित पारी में 9 विकेट खोकर 159 रन बनाए। सलामी बल्लेबाज शेफाली वर्मा ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 64 रनों की महत्वपूर्ण पारी खेली और टीम को मजबूत शुरुआत दिलाई। उनके अलावा प्रतिका रावल ने 22 रन बनाए जबकि स्मृति मंधाना 19 रन के स्कोर पर रनआउट हो गईं। कप्तान हरमनप्रीत कौर सिर्फ 5 रन बना सकीं जबकि भारती फुलमाली के बल्ले से 13 रन निकले। ऋचा घोष खाता खोले बिना पवेलियन लौट गईं और दीप्ति शर्मा भी बल्ले से सिर्फ 5 रन का योगदान दे सकीं।

    भारत के 159 रन के जवाब में थाईलैंड की टीम भारतीय गेंदबाजों के सामने पूरी तरह बेबस नजर आई। 160 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी थाईलैंड की पूरी टीम महज 65 रन पर ऑलआउट हो गई। भारतीय गेंदबाजों ने शुरुआत से ही विपक्षी बल्लेबाजों पर दबाव बनाए रखा और उन्हें खुलकर रन बनाने का मौका नहीं दिया। दीप्ति शर्मा ने तीन विकेट लेकर टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई। उनके अलावा नंदनी शर्मा ने 18 रन देकर तीन विकेट हासिल किए जबकि श्री चरणी को दो सफलताएं मिलीं।

    इस तरह भारत ने 94 रन की बड़ी जीत के साथ एशिया कप का शानदार आगाज किया। मुकाबले का सबसे बड़ा आकर्षण हालांकि दीप्ति शर्मा का ऐतिहासिक प्रदर्शन रहा। उन्होंने टी20 इंटरनेशनल में सर्वाधिक विकेट लेने वाली गेंदबाज बनकर भारतीय क्रिकेट के इतिहास में एक और बड़ी उपलब्धि जोड़ दी। उनकी शानदार गेंदबाजी ने न केवल थाईलैंड की पारी को जल्दी समेटने में मदद की बल्कि भारत को टूर्नामेंट में आत्मविश्वास से भरपूर शुरुआत भी दिलाई।

  • दीप्ति शर्मा की कहानी: भक्ति से ताकत और क्रिकेट में कमाल, विश्व कप फाइनल में ऑलराउंड प्रदर्शन से रचा इतिहास

    दीप्ति शर्मा की कहानी: भक्ति से ताकत और क्रिकेट में कमाल, विश्व कप फाइनल में ऑलराउंड प्रदर्शन से रचा इतिहास


    नई दिल्ली। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की सफलता की कहानी जब भी लिखी जाएगी तो उसमें दीप्ति शर्मा का नाम बेहद खास अंदाज में दर्ज होगा। गेंद और बल्ले दोनों से टीम के लिए मैच का रुख बदलने वाली दीप्ति ने 2025 वनडे विश्व कप में ऐसा प्रदर्शन किया जिसने उन्हें भारतीय क्रिकेट की सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में शामिल कर दिया। खुद को बजरंगबली का भक्त बताने वाली दीप्ति मैदान पर भी अपनी टीम के लिए संकटमोचक की भूमिका निभाती नजर आती हैं। 24 अगस्त 1997 को उत्तर प्रदेश के आगरा में जन्मी दीप्ति ने बेहद कम उम्र में क्रिकेट की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई और भारतीय टीम के तीनों फॉर्मेट में अपनी उपयोगिता साबित की।

    दीप्ति बाएं हाथ से बल्लेबाजी करती हैं जबकि दाएं हाथ से ऑफ स्पिन गेंदबाजी करती हैं। भारतीय टीम के लिए उन्होंने 2014 में वनडे क्रिकेट से अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत की। इसके बाद 2016 में टी20 और 2021 में टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू किया। धीरे धीरे वह टीम इंडिया की ऐसी ऑलराउंडर बन गईं जिनसे किसी भी मुकाबले में बल्ले और गेंद दोनों से महत्वपूर्ण योगदान की उम्मीद रहती है। उनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि दबाव की परिस्थितियों में भी वह अपने प्रदर्शन का स्तर बनाए रखने में कामयाब रहती हैं।

    2025 में भारत में खेले गए वनडे विश्व कप में दीप्ति ने अपनी इसी क्षमता का शानदार उदाहरण पेश किया। टूर्नामेंट में उन्होंने नौ मुकाबलों में 215 रन बनाए और तीन अर्धशतक लगाए। गेंदबाजी में उन्होंने 22 विकेट हासिल किए और पूरे टूर्नामेंट की सबसे सफल गेंदबाज बनीं। उनके इस शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट चुना गया। हालांकि उनका सबसे यादगार प्रदर्शन विश्व कप के फाइनल में आया जहां उन्होंने भारत को चैंपियन बनाने में निर्णायक भूमिका निभाई।

    फाइनल मुकाबले में दीप्ति ने पहले बल्ले से शानदार पारी खेली और 58 गेंदों पर 58 रन बनाए। उनकी पारी में तीन चौके और एक छक्का शामिल रहा। इसके बाद जब गेंदबाजी की बारी आई तो उन्होंने विपक्षी बल्लेबाजों पर ऐसा शिकंजा कसा कि मैच का रुख भारत की ओर पूरी तरह मुड़ गया। दीप्ति ने 9.3 ओवर में 39 रन देकर पांच विकेट हासिल किए। उनके इस ऑलराउंड प्रदर्शन ने भारत को 52 रन से जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई और टीम पहली बार महिला वनडे विश्व कप का खिताब अपने नाम करने में सफल रही।

    दीप्ति का रिकॉर्ड सिर्फ विश्व कप तक सीमित नहीं है। टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने सात मैचों की 12 पारियों में 402 रन बनाए हैं और उनके नाम 25 विकेट भी हैं। वनडे क्रिकेट में उन्होंने 124 मैचों की 106 पारियों में 2771 रन बनाए हैं जिसमें एक शतक और 18 अर्धशतक शामिल हैं। उनका सर्वाधिक वनडे स्कोर 188 रन है जो भारतीय महिला क्रिकेट में एक बड़ा व्यक्तिगत रिकॉर्ड है। टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भी उनका प्रदर्शन प्रभावशाली रहा है। 149 मैचों में उनके नाम 1270 रन और 168 विकेट दर्ज हैं।

    दीप्ति की प्रतिभा का सम्मान सिर्फ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक सीमित नहीं है। वह विमेंस प्रीमियर लीग के साथ ऑस्ट्रेलिया की बिग बैश लीग और द हंड्रेड जैसी बड़ी विदेशी लीग में भी अपना जलवा दिखा चुकी हैं। उनकी ऑलराउंड क्षमता उन्हें भारतीय महिला क्रिकेट की बेहद महत्वपूर्ण खिलाड़ियों में शामिल करती है। आने वाले वर्षों में भी उनसे कई बड़े प्रदर्शन और रिकॉर्ड की उम्मीद की जा सकती है।

  • एशिया कप से पहले खुद को और धार दे रहीं दीप्ति शर्मा, बोलीं- द हंड्रेड से तीनों विभाग में सुधार का मौका

    एशिया कप से पहले खुद को और धार दे रहीं दीप्ति शर्मा, बोलीं- द हंड्रेड से तीनों विभाग में सुधार का मौका


    नई दिल्ली। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की अनुभवी ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा इन दिनों इंग्लैंड में खेले जा रहे द हंड्रेड के जरिए एशिया कप की तैयारी को मजबूत करने में जुटी हैं। दीप्ति का कहना है कि वह सनराइजर्स लीड्स के साथ खेलते हुए अपने खेल के तीनों विभागों बल्लेबाजी गेंदबाजी और फील्डिंग पर काम कर रही हैं ताकि 28 अगस्त से दुबई में शुरू होने वाले महिला एशिया कप में पूरी तरह तैयार होकर उतर सकें। मौजूदा द हंड्रेड सीजन में दीप्ति सनराइजर्स लीड्स के लिए प्रभावी प्रदर्शन कर रही हैं और टीम के लिए उनकी गेंदबाजी खास तौर पर अहम रही है।

    दीप्ति ने कहा कि वह द हंड्रेड के हर मैच और हर अनुभव का अधिकतम फायदा उठाने की कोशिश कर रही हैं। उनके मुताबिक इस प्रतियोगिता में खेलने से उन्हें अपनी स्किल्स को बेहतर करने का शानदार मौका मिल रहा है। उनका फोकस सिर्फ व्यक्तिगत प्रदर्शन पर नहीं बल्कि टीम के लिए ज्यादा से ज्यादा योगदान देने पर भी है। दीप्ति के लिए यह टूर्नामेंट इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके तुरंत बाद भारतीय टीम को एशिया कप जैसे बड़े मुकाबले में उतरना है।

    सनराइजर्स लीड्स के साथ अपने अनुभव को लेकर भी दीप्ति काफी उत्साहित नजर आईं। उन्होंने बताया कि टीम में चुने जाने के बाद वह बेहद खुश थीं क्योंकि ऑरेंज उनका पसंदीदा रंग है। लीड्स में घरेलू मैदान पर खेलने का अनुभव भी उनके लिए खास है। स्टेडियम में बड़ी संख्या में सनराइजर्स के प्रशंसकों की मौजूदगी उन्हें अतिरिक्त ऊर्जा देती है। दीप्ति ने कहा कि टीम के खिलाड़ी एक दूसरे के योगदान की सराहना करते हैं और इसी माहौल में वे हर मुकाबले से कुछ नया सीखने की कोशिश कर रहे हैं।

    अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत का प्रतिनिधित्व करने को दीप्ति सबसे बड़े गर्व के पलों में से एक मानती हैं। उनके लिए भारतीय टीम की नीली जर्सी सिर्फ खेल की पोशाक नहीं बल्कि वर्षों की मेहनत त्याग और संघर्ष का परिणाम है। वह मानती हैं कि देश के लिए खेलने के साथ बड़ी जिम्मेदारी भी आती है। जब उम्मीदें ज्यादा होती हैं और खिलाड़ी उन उम्मीदों पर खरा उतरने में सफल होता है तो वह पल बेहद खास बन जाता है। यही भावना उन्हें मैदान पर अपना सर्वश्रेष्ठ देने के लिए प्रेरित करती है।

    दीप्ति दबाव वाले मुकाबलों को भी चुनौती के रूप में देखती हैं। उनका मानना है कि हर मैच महत्वपूर्ण होता है और किसी एक बड़े टूर्नामेंट तक सीमित होकर तैयारी करना सही तरीका नहीं है। वह हर मुकाबले में अपना पूरा योगदान देने की कोशिश करती हैं। मुश्किल परिस्थितियों में प्रदर्शन करना उन्हें पसंद है क्योंकि ऐसे मौके खिलाड़ी को अपनी कमियों पर काम करने और खुद को बेहतर बनाने का अवसर देते हैं।

    महिला एशिया कप 28 अगस्त से दुबई में शुरू होगा और भारतीय टीम के लिए यह अहम टूर्नामेंट माना जा रहा है। इसके बाद फरवरी 2027 में महिला चैंपियंस ट्रॉफी भी खेली जानी है। हालांकि दीप्ति फिलहाल भविष्य की बजाय मौजूदा चुनौती पर ध्यान देना चाहती हैं। उनका स्पष्ट कहना है कि अभी उनका पूरा फोकस द हंड्रेड पर है और इस प्रतियोगिता से हासिल अनुभव को वह एशिया कप में भारत के लिए उपयोग करना चाहती हैं।

  • मंधाना-हरमनप्रीत का दम, लॉर्ड्स टेस्ट के पहले दिन भारत का दबदबा; इंग्लैंड को शुरुआती झटका

    मंधाना-हरमनप्रीत का दम, लॉर्ड्स टेस्ट के पहले दिन भारत का दबदबा; इंग्लैंड को शुरुआती झटका


    नई दिल्ली। भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने लॉर्ड्स में खेले जा रहे एकमात्र टेस्ट मैच के पहले दिन शानदार प्रदर्शन करते हुए मुकाबले पर अपनी मजबूत पकड़ बना ली। बल्लेबाजों के दमदार प्रदर्शन की बदौलत भारत ने पहली पारी में 285 रन बनाए और दिन का खेल समाप्त होने से पहले इंग्लैंड को शुरुआती झटका देकर दबाव भी बना दिया। पहले दिन का खेल खत्म होने तक इंग्लैंड ने एक विकेट के नुकसान पर 21 रन बनाए हैं और वह अभी भारत के स्कोर से 264 रन पीछे है।

    टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत निराशाजनक रही। सलामी बल्लेबाज शेफाली वर्मा बिना खाता खोले पवेलियन लौट गईं। इसके बाद यास्तिका भाटिया भी बड़ी पारी नहीं खेल सकीं और 12 रन बनाकर आउट हो गईं। शुरुआती दो विकेट जल्दी गिरने के बाद जेमिमा रोड्रिग्स और स्मृति मंधाना ने पारी को संभाला। दोनों ने तीसरे विकेट के लिए 64 रन जोड़कर टीम को मुश्किल स्थिति से बाहर निकाला। जेमिमा ने 38 गेंदों में 35 रन की तेजतर्रार पारी खेली, जिसमें पांच चौके शामिल रहे।

    इसके बाद कप्तान हरमनप्रीत कौर ने स्मृति मंधाना का बेहतरीन साथ निभाया। दोनों ने चौथे विकेट के लिए 89 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी कर भारतीय पारी को मजबूती दी। स्मृति मंधाना शानदार लय में नजर आईं और 108 गेंदों में 11 चौकों तथा एक छक्के की मदद से 83 रन बनाए। वहीं कप्तान हरमनप्रीत कौर ने जिम्मेदारी भरी बल्लेबाजी करते हुए 58 रन का अहम योगदान दिया।

    मध्यक्रम में दीप्ति शर्मा ने भी बेहतरीन प्रदर्शन किया। उन्होंने 87 गेंदों पर 57 रन की संयमित पारी खेली, जिसमें सात चौके शामिल रहे। हालांकि मंधाना के आउट होने के बाद भारतीय बल्लेबाजी थोड़ी लड़खड़ा गई और टीम ने अपने अंतिम छह विकेट केवल 95 रन जोड़कर गंवा दिए। ऋचा घोष और स्नेह राणा दोनों 13-13 रन बनाकर आउट हुईं।

    इंग्लैंड की ओर से अनुभवी स्पिनर सोफी एक्लेस्टोन सबसे सफल गेंदबाज रहीं। उन्होंने 68 रन देकर तीन विकेट हासिल किए। इस्सी वोंग और मैडी विलियर्स ने दो-दो विकेट लिए, जबकि लॉरेन बेल को एक सफलता मिली।

    दिन का खेल समाप्त होने से पहले भारतीय गेंदबाजों ने भी शानदार शुरुआत की। तेज गेंदबाज क्रांति गौड़ ने इंग्लैंड की सलामी बल्लेबाज टैमी ब्यूमोंट को सिर्फ दो रन पर आउट कर भारत को पहली सफलता दिलाई। स्टंप्स तक हीथर नाइट एक रन और मैया बाउचियर 17 रन बनाकर नाबाद रहीं। इंग्लैंड को अभी भारत की पहली पारी के स्कोर तक पहुंचने के लिए लंबा सफर तय करना है।

    पहले दिन के खेल के बाद भारतीय टीम मजबूत स्थिति में नजर आ रही है। अब दूसरे दिन गेंदबाजों की कोशिश इंग्लैंड को कम स्कोर पर समेटकर पहली पारी में बड़ी बढ़त हासिल करने की होगी।

  • विंबलडन पहुंचीं दीप्ति शर्मा, धोनी और जोकोविच की मानसिक मजबूती को बताया एक जैसा

    विंबलडन पहुंचीं दीप्ति शर्मा, धोनी और जोकोविच की मानसिक मजबूती को बताया एक जैसा


    नई दिल्ली। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की अनुभवी ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा इन दिनों विंबलडन का रोमांच करीब से देख रही हैं। इस दौरान उन्होंने टेनिस के महान खिलाड़ी नोवाक जोकोविच और भारत के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की तुलना करते हुए कहा कि दोनों खिलाड़ियों की सबसे बड़ी ताकत कठिन परिस्थितियों में भी शांत रहकर मुकाबले का रुख बदलने की क्षमता है।

    जियो हॉटस्टार से बातचीत में दीप्ति ने कहा कि जब भी नोवाक जोकोविच का नाम आता है तो सबसे पहले उनकी मानसिक मजबूती की चर्चा होती है। उन्होंने कहा कि जोकोविच कभी हार नहीं मानते और चाहे हालात कितने भी चुनौतीपूर्ण हों, उनका आत्मविश्वास और संयम हमेशा कायम रहता है। यही गुण उन्हें दुनिया के महानतम खिलाड़ियों में शामिल करता है।

    दीप्ति ने कहा कि क्रिकेट में अगर किसी खिलाड़ी की तुलना जोकोविच से की जा सकती है तो वह महेंद्र सिंह धोनी हैं। उनके अनुसार धोनी मैदान पर हमेशा बेहद शांत दिखाई देते हैं और दबाव की स्थिति में भी उनके चेहरे पर घबराहट नहीं दिखती। यही कारण है कि उन्होंने अपने करियर में कई मुश्किल मुकाबलों में टीम इंडिया को जीत दिलाई। उन्होंने कहा कि दोनों दिग्गज खिलाड़ियों से यह सीख मिलती है कि कठिन परिस्थितियों में धैर्य और मानसिक संतुलन बनाए रखना ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है।

    भारतीय ऑलराउंडर ने यह भी स्वीकार किया कि मौजूदा समय में नोवाक जोकोविच उनके पसंदीदा टेनिस खिलाड़ी हैं। उन्होंने कहा कि वह बचपन से रोजर फेडरर और राफेल नडाल जैसे दिग्गजों को खेलते हुए देखती आई हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में जोकोविच की जुझारू मानसिकता और कभी हार न मानने वाले रवैये ने उन्हें सबसे अधिक प्रभावित किया है। अब वह उनके लगभग हर मुकाबले को फॉलो करती हैं।

    दीप्ति ने विंबलडन का अनुभव साझा करते हुए कहा कि यह उनका लंबे समय से देखा गया सपना था। उन्होंने कहा कि वर्षों तक टीवी पर इस प्रतिष्ठित ग्रैंड स्लैम को देखने के बाद पहली बार यहां लाइव मुकाबले देखने का अनुभव बेहद खास है। स्टेडियम का माहौल, दर्शकों का उत्साह और प्रतियोगिता का वातावरण उन्हें बेहद रोमांचित कर रहा है।

    जब उनसे पूछा गया कि यदि उन्हें विंबलडन में किसी तीन भारतीय खेल हस्तियों के साथ मैच देखने का मौका मिले तो वह किन्हें चुनेंगी, तो उन्होंने सचिन तेंदुलकर, रवि शास्त्री और सुनील गावस्कर का नाम लिया। दीप्ति का मानना है कि इन तीनों दिग्गजों के साथ बैठकर मैच देखने और खेल पर उनकी राय सुनना अपने आप में यादगार अनुभव होगा।

    दीप्ति शर्मा का यह बयान खेल जगत के दो महान खिलाड़ियों की मानसिक मजबूती और नेतृत्व क्षमता को लेकर उनकी गहरी समझ को भी दर्शाता है। उन्होंने यह संदेश दिया कि किसी भी खेल में प्रतिभा के साथ मानसिक दृढ़ता और दबाव में सही फैसले लेने की क्षमता ही महान खिलाड़ियों की पहचान होती है।

  • इतिहास के शिखर पर दीप्ति शर्मा झूलन गोस्वामी का रिकॉर्ड तोड़ बनीं महिला क्रिकेट की नंबर-1 विकेट टेकर

    इतिहास के शिखर पर दीप्ति शर्मा झूलन गोस्वामी का रिकॉर्ड तोड़ बनीं महिला क्रिकेट की नंबर-1 विकेट टेकर


    नई दिल्ली । भारत की स्टार ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा ने महिला क्रिकेट के इतिहास में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज करा दिया है। आईसीसी महिला टी20 विश्व कप 2026 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेले गए अहम मुकाबले के दौरान दीप्ति ने वह उपलब्धि हासिल की जिसका इंतजार भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों को लंबे समय से था। उन्होंने दिग्गज तेज गेंदबाज झूलन गोस्वामी का वर्षों पुराना रिकॉर्ड तोड़ते हुए महिला इंटरनेशनल क्रिकेट में सबसे अधिक विकेट लेने वाली गेंदबाज बनने का गौरव अपने नाम कर लिया।

    लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड पर खेले गए इस मुकाबले से पहले दीप्ति शर्मा को रिकॉर्ड अपने नाम करने के लिए सिर्फ एक विकेट की जरूरत थी। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया की अनुभवी बल्लेबाज बेथ मूनी को आउट करते ही इतिहास रच दिया। बेथ मूनी ने ऑफ स्पिनर दीप्ति की गेंद पर बड़ा शॉट खेलने की कोशिश की लेकिन गेंद सही तरह बल्ले पर नहीं आई और लॉन्ग ऑन पर राधा यादव ने आसान कैच लपक लिया। इस विकेट के साथ ही दीप्ति के इंटरनेशनल करियर में विकेटों की संख्या 356 पहुंच गई और उन्होंने झूलन गोस्वामी के 355 विकेटों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।

    दीप्ति शर्मा का यह रिकॉर्ड इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने यह उपलब्धि महज 278 इंटरनेशनल मुकाबलों में हासिल की है। आगरा में जन्मी इस ऑलराउंडर ने तीनों प्रारूपों में लगातार शानदार प्रदर्शन करते हुए भारतीय टीम की जीत में अहम योगदान दिया है। उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में 6 मैचों में 22 विकेट वनडे में 124 मुकाबलों में 166 विकेट और टी20 इंटरनेशनल में 148 मैचों में 168 विकेट हासिल किए हैं। उनकी निरंतरता और ऑलराउंड प्रदर्शन ने उन्हें महिला क्रिकेट की सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में शामिल कर दिया है।

    दीप्ति का शानदार फॉर्म पूरे टूर्नामेंट में देखने को मिला। इससे पहले पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबले में उन्होंने पांच विकेट लेकर विरोधी टीम की बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी थी। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भी उन्होंने चार ओवर में 31 रन देकर एक अहम विकेट हासिल किया और इसी के साथ भारतीय क्रिकेट के लिए एक नया इतिहास लिख दिया।

    दीप्ति शर्मा ने जिस रिकॉर्ड को अपने नाम किया वह लंबे समय तक झूलन गोस्वामी के नाम दर्ज था। झूलन ने अपने शानदार करियर में 284 इंटरनेशनल मैच खेलते हुए 355 विकेट हासिल किए थे। उन्होंने टेस्ट में 44 वनडे में 255 और टी20 इंटरनेशनल में 56 विकेट लेकर भारतीय महिला क्रिकेट को नई पहचान दिलाई थी। अब दीप्ति ने उनकी विरासत को आगे बढ़ाते हुए नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया है।

    महिला इंटरनेशनल क्रिकेट में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाली गेंदबाजों की सूची में अब दीप्ति शर्मा शीर्ष पर पहुंच गई हैं। उनके बाद झूलन गोस्वामी दूसरे स्थान पर हैं जबकि ऑस्ट्रेलिया की एलिस पेरी 336 विकेटों के साथ तीसरे स्थान पर मौजूद हैं। इंग्लैंड की कैथरीन साइवर ब्रंट 335 विकेट सोफी एक्लेस्टोन 333 विकेट और दक्षिण अफ्रीका की शबनीम इस्माइल 323 विकेट के साथ इस सूची में शामिल हैं।

    हालांकि भारतीय टीम इस मुकाबले में जीत दर्ज नहीं कर सकी। पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत ने चार विकेट पर 170 रन बनाए लेकिन ऑस्ट्रेलिया ने 19 ओवर में चार विकेट रहते लक्ष्य हासिल कर लिया। टीम की हार के बावजूद दीप्ति शर्मा की ऐतिहासिक उपलब्धि भारतीय क्रिकेट के लिए गर्व का क्षण बन गई और उनका यह रिकॉर्ड आने वाले वर्षों तक प्रेरणा का स्रोत रहेगा।