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  • विंबलडन पहुंचीं दीप्ति शर्मा, धोनी और जोकोविच की मानसिक मजबूती को बताया एक जैसा

    विंबलडन पहुंचीं दीप्ति शर्मा, धोनी और जोकोविच की मानसिक मजबूती को बताया एक जैसा


    नई दिल्ली। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की अनुभवी ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा इन दिनों विंबलडन का रोमांच करीब से देख रही हैं। इस दौरान उन्होंने टेनिस के महान खिलाड़ी नोवाक जोकोविच और भारत के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की तुलना करते हुए कहा कि दोनों खिलाड़ियों की सबसे बड़ी ताकत कठिन परिस्थितियों में भी शांत रहकर मुकाबले का रुख बदलने की क्षमता है।

    जियो हॉटस्टार से बातचीत में दीप्ति ने कहा कि जब भी नोवाक जोकोविच का नाम आता है तो सबसे पहले उनकी मानसिक मजबूती की चर्चा होती है। उन्होंने कहा कि जोकोविच कभी हार नहीं मानते और चाहे हालात कितने भी चुनौतीपूर्ण हों, उनका आत्मविश्वास और संयम हमेशा कायम रहता है। यही गुण उन्हें दुनिया के महानतम खिलाड़ियों में शामिल करता है।

    दीप्ति ने कहा कि क्रिकेट में अगर किसी खिलाड़ी की तुलना जोकोविच से की जा सकती है तो वह महेंद्र सिंह धोनी हैं। उनके अनुसार धोनी मैदान पर हमेशा बेहद शांत दिखाई देते हैं और दबाव की स्थिति में भी उनके चेहरे पर घबराहट नहीं दिखती। यही कारण है कि उन्होंने अपने करियर में कई मुश्किल मुकाबलों में टीम इंडिया को जीत दिलाई। उन्होंने कहा कि दोनों दिग्गज खिलाड़ियों से यह सीख मिलती है कि कठिन परिस्थितियों में धैर्य और मानसिक संतुलन बनाए रखना ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है।

    भारतीय ऑलराउंडर ने यह भी स्वीकार किया कि मौजूदा समय में नोवाक जोकोविच उनके पसंदीदा टेनिस खिलाड़ी हैं। उन्होंने कहा कि वह बचपन से रोजर फेडरर और राफेल नडाल जैसे दिग्गजों को खेलते हुए देखती आई हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में जोकोविच की जुझारू मानसिकता और कभी हार न मानने वाले रवैये ने उन्हें सबसे अधिक प्रभावित किया है। अब वह उनके लगभग हर मुकाबले को फॉलो करती हैं।

    दीप्ति ने विंबलडन का अनुभव साझा करते हुए कहा कि यह उनका लंबे समय से देखा गया सपना था। उन्होंने कहा कि वर्षों तक टीवी पर इस प्रतिष्ठित ग्रैंड स्लैम को देखने के बाद पहली बार यहां लाइव मुकाबले देखने का अनुभव बेहद खास है। स्टेडियम का माहौल, दर्शकों का उत्साह और प्रतियोगिता का वातावरण उन्हें बेहद रोमांचित कर रहा है।

    जब उनसे पूछा गया कि यदि उन्हें विंबलडन में किसी तीन भारतीय खेल हस्तियों के साथ मैच देखने का मौका मिले तो वह किन्हें चुनेंगी, तो उन्होंने सचिन तेंदुलकर, रवि शास्त्री और सुनील गावस्कर का नाम लिया। दीप्ति का मानना है कि इन तीनों दिग्गजों के साथ बैठकर मैच देखने और खेल पर उनकी राय सुनना अपने आप में यादगार अनुभव होगा।

    दीप्ति शर्मा का यह बयान खेल जगत के दो महान खिलाड़ियों की मानसिक मजबूती और नेतृत्व क्षमता को लेकर उनकी गहरी समझ को भी दर्शाता है। उन्होंने यह संदेश दिया कि किसी भी खेल में प्रतिभा के साथ मानसिक दृढ़ता और दबाव में सही फैसले लेने की क्षमता ही महान खिलाड़ियों की पहचान होती है।

  • इतिहास के शिखर पर दीप्ति शर्मा झूलन गोस्वामी का रिकॉर्ड तोड़ बनीं महिला क्रिकेट की नंबर-1 विकेट टेकर

    इतिहास के शिखर पर दीप्ति शर्मा झूलन गोस्वामी का रिकॉर्ड तोड़ बनीं महिला क्रिकेट की नंबर-1 विकेट टेकर


    नई दिल्ली । भारत की स्टार ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा ने महिला क्रिकेट के इतिहास में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज करा दिया है। आईसीसी महिला टी20 विश्व कप 2026 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेले गए अहम मुकाबले के दौरान दीप्ति ने वह उपलब्धि हासिल की जिसका इंतजार भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों को लंबे समय से था। उन्होंने दिग्गज तेज गेंदबाज झूलन गोस्वामी का वर्षों पुराना रिकॉर्ड तोड़ते हुए महिला इंटरनेशनल क्रिकेट में सबसे अधिक विकेट लेने वाली गेंदबाज बनने का गौरव अपने नाम कर लिया।

    लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड पर खेले गए इस मुकाबले से पहले दीप्ति शर्मा को रिकॉर्ड अपने नाम करने के लिए सिर्फ एक विकेट की जरूरत थी। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया की अनुभवी बल्लेबाज बेथ मूनी को आउट करते ही इतिहास रच दिया। बेथ मूनी ने ऑफ स्पिनर दीप्ति की गेंद पर बड़ा शॉट खेलने की कोशिश की लेकिन गेंद सही तरह बल्ले पर नहीं आई और लॉन्ग ऑन पर राधा यादव ने आसान कैच लपक लिया। इस विकेट के साथ ही दीप्ति के इंटरनेशनल करियर में विकेटों की संख्या 356 पहुंच गई और उन्होंने झूलन गोस्वामी के 355 विकेटों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।

    दीप्ति शर्मा का यह रिकॉर्ड इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने यह उपलब्धि महज 278 इंटरनेशनल मुकाबलों में हासिल की है। आगरा में जन्मी इस ऑलराउंडर ने तीनों प्रारूपों में लगातार शानदार प्रदर्शन करते हुए भारतीय टीम की जीत में अहम योगदान दिया है। उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में 6 मैचों में 22 विकेट वनडे में 124 मुकाबलों में 166 विकेट और टी20 इंटरनेशनल में 148 मैचों में 168 विकेट हासिल किए हैं। उनकी निरंतरता और ऑलराउंड प्रदर्शन ने उन्हें महिला क्रिकेट की सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में शामिल कर दिया है।

    दीप्ति का शानदार फॉर्म पूरे टूर्नामेंट में देखने को मिला। इससे पहले पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबले में उन्होंने पांच विकेट लेकर विरोधी टीम की बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी थी। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भी उन्होंने चार ओवर में 31 रन देकर एक अहम विकेट हासिल किया और इसी के साथ भारतीय क्रिकेट के लिए एक नया इतिहास लिख दिया।

    दीप्ति शर्मा ने जिस रिकॉर्ड को अपने नाम किया वह लंबे समय तक झूलन गोस्वामी के नाम दर्ज था। झूलन ने अपने शानदार करियर में 284 इंटरनेशनल मैच खेलते हुए 355 विकेट हासिल किए थे। उन्होंने टेस्ट में 44 वनडे में 255 और टी20 इंटरनेशनल में 56 विकेट लेकर भारतीय महिला क्रिकेट को नई पहचान दिलाई थी। अब दीप्ति ने उनकी विरासत को आगे बढ़ाते हुए नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया है।

    महिला इंटरनेशनल क्रिकेट में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाली गेंदबाजों की सूची में अब दीप्ति शर्मा शीर्ष पर पहुंच गई हैं। उनके बाद झूलन गोस्वामी दूसरे स्थान पर हैं जबकि ऑस्ट्रेलिया की एलिस पेरी 336 विकेटों के साथ तीसरे स्थान पर मौजूद हैं। इंग्लैंड की कैथरीन साइवर ब्रंट 335 विकेट सोफी एक्लेस्टोन 333 विकेट और दक्षिण अफ्रीका की शबनीम इस्माइल 323 विकेट के साथ इस सूची में शामिल हैं।

    हालांकि भारतीय टीम इस मुकाबले में जीत दर्ज नहीं कर सकी। पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत ने चार विकेट पर 170 रन बनाए लेकिन ऑस्ट्रेलिया ने 19 ओवर में चार विकेट रहते लक्ष्य हासिल कर लिया। टीम की हार के बावजूद दीप्ति शर्मा की ऐतिहासिक उपलब्धि भारतीय क्रिकेट के लिए गर्व का क्षण बन गई और उनका यह रिकॉर्ड आने वाले वर्षों तक प्रेरणा का स्रोत रहेगा।