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  • हाईकोर्ट में बड़ा मोड़: राहुल गांधी के मानहानि केस की अंतिम सुनवाई पर टिकी निगाहें

    हाईकोर्ट में बड़ा मोड़: राहुल गांधी के मानहानि केस की अंतिम सुनवाई पर टिकी निगाहें


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के Jabalpur स्थित हाईकोर्ट में आज एक महत्वपूर्ण कानूनी मामले पर सुनवाई होने जा रही है, जिस पर पूरे राजनीतिक और कानूनी हलकों की नजरें टिकी हुई हैं। यह मामला लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ दायर मानहानि याचिका से जुड़ा है, जो 2018 के एक चुनावी भाषण पर आधारित है।

    यह मामला झाबुआ में दिए गए एक भाषण से जुड़ा है, जिसमें आरोप है कि राहुल गांधी ने पनामा पेपर लीक का जिक्र करते हुए मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री और उनके परिवार से जुड़े लोगों का नाम लिया था। इसी बयान को लेकर कार्तिकेय सिंह चौहान ने एमपी-एमएलए विशेष अदालत भोपाल में मानहानि का परिवाद दायर किया था।

    बाद में विशेष अदालत ने इस मामले में राहुल गांधी को समन जारी किया, जिसे चुनौती देते हुए उन्होंने Jabalpur हाईकोर्ट का रुख किया। राहुल गांधी की ओर से दायर याचिका में समन और पूरे परिवाद को निरस्त करने की मांग की गई है।

    पिछली सुनवाई में दोनों पक्षों की ओर से विस्तृत दलीलें पेश की गई थीं। राहुल गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि यह परिवाद तथ्यात्मक रूप से कमजोर है और इसमें लगाए गए आरोप ठोस सबूतों पर आधारित नहीं हैं।

    वहीं शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि 2018 में कांग्रेस अध्यक्ष रहते हुए राहुल गांधी ने झाबुआ की चुनावी सभा में अपने भाषण के दौरान पनामा पेपर्स लीक का उल्लेख करते हुए कथित रूप से गलत जानकारी दी थी, जिससे उनकी छवि को नुकसान पहुंचा।

    शिकायत में यह भी कहा गया है कि राहुल गांधी ने अपने भाषण में पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के खिलाफ कार्रवाई का उदाहरण देते हुए मध्यप्रदेश में भी ऐसी कार्रवाई न होने की बात कही थी, जिससे शिकायतकर्ता पक्ष को आपत्ति है।

    हालांकि, बाद में राहुल गांधी ने यह स्वीकार किया था कि बयान के दौरान उनसे नाम को लेकर भ्रम हो गया था और उनका आशय किसी अन्य व्यक्ति से था।

    Jabalpur हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई पहले भी हो चुकी है, जिसमें कोर्ट ने दोनों पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया था। पिछली सुनवाई में समय मांगने पर अदालत ने उसे स्वीकार कर लिया था।

    आज की सुनवाई को बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि संभावना जताई जा रही है कि यह अंतिम चरण हो सकता है। यदि ऐसा होता है तो कोर्ट इस मामले में आगे की दिशा तय कर सकता है कि ट्रायल जारी रहेगा या नहीं। फिलहाल इस पूरे मामले पर राजनीतिक और कानूनी दोनों ही स्तर पर नजर बनी हुई है।

  • अमित शाह पर टिप्पणी मामले में राहुल गांधी को राहत नहीं, सुल्तानपुर कोर्ट में अगली सुनवाई 21 मई को तय

    अमित शाह पर टिप्पणी मामले में राहुल गांधी को राहत नहीं, सुल्तानपुर कोर्ट में अगली सुनवाई 21 मई को तय

    नई दिल्ली ।
    सुल्तानपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि मामले की सुनवाई एक बार फिर हुई, जिसमें अब अगली तारीख 21 मई 2026 तय कर दी गई है। यह मामला कई साल पुराने उस बयान से जुड़ा बताया जाता है, जो कर्नाटक चुनाव प्रचार के दौरान गृहमंत्री अमित शाह को लेकर दिए गए कथित टिप्पणी से संबंधित है। इसी टिप्पणी को लेकर भाजपा नेता विजय मिश्रा ने राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था।

    कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान मामले से जुड़े कई पहलुओं पर चर्चा हुई, लेकिन फिलहाल किसी अंतिम निर्णय पर नहीं पहुंचा जा सका। इसी वजह से अदालत ने अगली सुनवाई के लिए नई तारीख निर्धारित कर दी। यह मामला लंबे समय से कानूनी प्रक्रिया में चल रहा है और समय-समय पर इसकी सुनवाई होती रही है।

    इस केस में वादी पक्ष की ओर से यह भी जानकारी दी गई कि वे कोर्ट के एक पुराने आदेश के खिलाफ उच्च अदालत में रिवीजन याचिका दाखिल करने की तैयारी कर रहे हैं। वकील की ओर से यह भी कहा गया कि आदेश का अध्ययन करने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    पिछली सुनवाई में कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मांग को खारिज कर दिया था, जिसमें राहुल गांधी की आवाज का नमूना जांच के लिए देने की बात शामिल थी। इस फैसले के बाद भी मामला आगे बढ़ता रहा और अब अदालत ने वादी पक्ष को अपनी दलीलों के लिए अंतिम मौका भी दिया है।

    यह पूरा मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। अदालत में चल रही प्रक्रिया के बीच दोनों पक्ष अपनी-अपनी दलीलों को मजबूती से पेश कर रहे हैं। अब सभी की नजरें 21 मई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हुई हैं, जहां मामले में आगे की दिशा तय हो सकती है।

  • महावीर जन्म कल्याणक विवाद: इंदौर में 50 लाख का मानहानि नोटिस, 7 दिन में माफी की मांग

    महावीर जन्म कल्याणक विवाद: इंदौर में 50 लाख का मानहानि नोटिस, 7 दिन में माफी की मांग


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के इंदौर में महावीर जन्म कल्याणक के मौके पर आयोजित नवकारसी कार्यक्रम अब कानूनी विवाद में बदल गया है। इस मामले में 50 लाख रुपए का मानहानि नोटिस भेजा गया है, जिसमें श्वेताम्बर जैन महासंघ न्यास के पदाधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

    नोटिस अक्षय जैन की ओर से उनके अधिवक्ता के माध्यम से जारी किया गया है। इसमें आरोप लगाया गया है कि महासंघ द्वारा जारी स्पष्टीकरण में आधिकारिक लेटरहेड का दुरुपयोग करते हुए निराधार और अपमानजनक टिप्पणियां प्रकाशित की गईं, जिससे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा।

    नोटिस के अनुसार, यह पत्र केवल संस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज में व्यापक रूप से प्रसारित हुआ और व्हाट्सएप सहित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी वायरल हुआ। इससे संबंधित पक्ष की सार्वजनिक छवि को ठेस पहुंची है। दावा किया गया है कि पिछले 40 वर्षों से व्यापार और सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय अक्षय जैन की साख को जानबूझकर नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई।

    विवाद की जड़ में महावीर जन्म कल्याणक के दिन हुए नवकारसी आयोजन का एक घटनाक्रम है, जिसमें ट्रैक्टर खड़ा होने को लेकर विवाद हुआ था। नोटिस में कहा गया है कि इस घटना के लिए इवेंट कंपनी के संचालक ने पहले ही लिखित रूप से अपनी गलती स्वीकार कर माफी मांग ली थी। इसके बावजूद करीब 29 दिन बाद आरोपों के साथ पत्र जारी करना दुर्भावनापूर्ण बताया गया है।

    इसके अलावा 29 अप्रैल को हुई बैठक के मिनट्स पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि संस्था के मंच का इस्तेमाल कर व्यक्तिगत आरोपों को संस्थागत रूप दिया गया, जिससे न केवल संस्था की गरिमा प्रभावित हुई, बल्कि एक व्यक्ति विशेष के खिलाफ नकारात्मक माहौल बनाने का प्रयास किया गया।

    नोटिस में भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 356 (मानहानि) और धारा 61 (आपराधिक साजिश) का हवाला देते हुए इसे दंडनीय कृत्य बताया गया है। साथ ही इसे दीवानी क्षति के रूप में भी प्रस्तुत किया गया है।

    नोटिस में 15 दिनों के भीतर 50 लाख रुपए की क्षतिपूर्ति, 25 हजार रुपए विधिक खर्च, और 7 दिनों के भीतर बिना शर्त लिखित माफी जारी करने की मांग की गई है। साथ ही सोशल मीडिया पर सार्वजनिक माफी प्रकाशित करने और भविष्य में ऐसे कृत्यों से बचने की भी शर्त रखी गई है।

    स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि तय समयसीमा में मांगें पूरी नहीं होने पर संबंधित पदाधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कराया जाएगा और अलग से दीवानी वाद भी दायर किया जाएगा।

  • शिवराज सिंह के बेटे के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे राहुल गांधी, अब कोर्ट में आमने-सामने होंगे राहुल-कार्तिकेय

    शिवराज सिंह के बेटे के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे राहुल गांधी, अब कोर्ट में आमने-सामने होंगे राहुल-कार्तिकेय


    जबलपुर । मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में मानहानि मामले को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी और शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय चौहान के बीच कानूनी टकराव तेज हो गया है। राहुल गांधी ने भोपाल स्थित एमपी-एमएलए कोर्ट द्वारा जारी समन को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। इस मामले में जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकल पीठ अगले सप्ताह सुनवाई करेगी।

    2018 के बयान से शुरू हुआ विवाद
    पूरा मामला 29 अक्टूबर 2018 का है, जब झाबुआ में एक चुनावी सभा के दौरान राहुल गांधी ने पनामा पेपर्स लीक का जिक्र करते हुए कार्तिकेय चौहान का नाम लिया था। हालांकि बाद में उन्होंने इसे भ्रम बताया, लेकिन यह बयान विवाद का कारण बन गया।

    कार्तिकेय ने दर्ज कराया मानहानि केस
    इस बयान को अपनी छवि खराब करने की साजिश बताते हुए कार्तिकेय चौहान ने भोपाल की एमपी-एमएलए कोर्ट में आपराधिक मानहानि का मामला दर्ज कराया। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने जानबूझकर उनके और उनके परिवार के खिलाफ गलत बयान दिया। इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 499 और 500 के तहत केस दर्ज किया गया।

    समन के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे राहुल
    भोपाल एमपी-एमएलए कोर्ट की विशेष मजिस्ट्रेट द्वारा जारी समन को चुनौती देते हुए राहुल गांधी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। प्रारंभिक सुनवाई के बाद कोर्ट ने मामले को एक सप्ताह के लिए स्थगित कर दिया है। अब इस केस में हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं, जहां दोनों पक्ष आमने-सामने होंगे।

  • संजय राउत को राहत, मानहानि मामले में कोर्ट ने किया बरी

    संजय राउत को राहत, मानहानि मामले में कोर्ट ने किया बरी

    मुंबई। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट के नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत को मानहानि के एक मामले में बड़ी राहत मिली है। मुंबई की सत्र अदालत ने उनकी पुनरीक्षण याचिका स्वीकार करते हुए भाजपा नेता किरिट सोमैया की पत्नी मेधा सोमैया द्वारा दायर शिकायत में उन्हें बरी कर दिया।

    इससे पहले पिछले वर्ष मजिस्ट्रेट अदालत ने राउत को भारतीय दंड संहिता की मानहानि से जुड़ी धारा के तहत दोषी ठहराते हुए 15 दिन के कारावास और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। हालांकि, सजा पर रोक लगा दी गई थी ताकि वे उच्च अदालत में आदेश को चुनौती दे सकें। इसके बाद राउत ने सत्र अदालत में अपील दायर की थी।

    मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें विस्तार से सुनी गईं। सुनवाई कर रहे न्यायाधीश महेश जाधव ने इस महीने की शुरुआत में अंतिम बहस पूरी होने के बाद राउत की याचिका मंजूर कर ली।

    राउत की ओर से अधिवक्ता मनोज पिंगले ने तर्क दिया कि उनके मुवक्किल ने किसी व्यक्ति विशेष की मानहानि करने का उद्देश्य नहीं रखा था। वहीं, मेधा सोमैया की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता लक्ष्मण कनाल ने कहा कि जिस कथित घोटाले का आरोप लगाया गया, जांच में उसका कोई आधार नहीं मिला, इसलिए सार्वजनिक आरोप मानहानिकारक थे।
    दरअसल, विवाद उस समय शुरू हुआ जब राउत ने मीडिया से बातचीत में मीरा-भायंदर नगर निगम क्षेत्र में सार्वजनिक शौचालय निर्माण परियोजना में 100 करोड़ रुपये के कथित घोटाले का आरोप लगाया था और इसमें सोमैया दंपत्ति के जुड़े होने की बात कही थी।

    शिकायतकर्ता पक्ष के अनुसार, वर्ष 2007 में निविदा प्रक्रिया के जरिए यह काम पांच गैर-सरकारी संगठनों को सौंपा गया था, जिनमें से एक संस्था सोमैया परिवार से संबंधित थी।

    परियोजना की कुल लागत लगभग 22 करोड़ रुपये बताई गई, जिससे 100 करोड़ रुपये के घोटाले का दावा तथ्यात्मक रूप से संभव नहीं बताया गया।

    मजिस्ट्रेट अदालत ने अपने पूर्व आदेश में कहा था कि मेधा सोमैया एक शिक्षित और प्रतिष्ठित व्यक्तित्व हैं तथा आरोपों से उनकी छवि को नुकसान पहुंचा और मानसिक पीड़ा हुई। साथ ही यह भी टिप्पणी की गई थी कि एक सांसद होने के नाते सार्वजनिक बयान देते समय राउत पर उच्च स्तर की जिम्मेदारी होती है।
    अब सत्र अदालत के फैसले के बाद राउत को इस मामले में राहत मिल गई है।

  • मप्रः नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार समेत तीन नेताओं को मानहानी मामले में कोर्ट का नोटिस

    मप्रः नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार समेत तीन नेताओं को मानहानी मामले में कोर्ट का नोटिस


    जबलपुर।
    विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट डीपी सूत्रकार की एमपी-एमएलए कोर्ट ने मध्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, कांग्रेस विधायक अजय सिंह राहुल और लखन घनघोरिया को नोटिस जारी किए हैं। यह कार्रवाई नेशनल हेल्थ मिशन के जिला प्रोग्राम (डीपीएम) विजय पांडे द्वारा दायर मानहानि केस के बाद हुई है। कोर्ट ने तीनों नेताओं को 16 जनवरी को पेश होने के आदेश दिए हैं।

    दरअसल, कांग्रेस नेताओं ने नेशनल हेल्थ मिशन के जिला प्रोग्राम मैनेजर विजय पांडे पर फर्जी अंकसूची के सहारे नौकरी पाने का आरोप लगाया था। अगस्त 2025 में इस मुद्दे पर न केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई, बल्कि विधानसभा में भी हंगामा कर कांग्रेस विधायकों ने वॉक आउट किया था। विधानसभा में हंगामे के बाद राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की संचालक सलोनी सिडाना ने उन्हें पद से हटा दिया था।

    हालांकि. विभागीय जांच में पांडे पर लगाए गए आरोप झूठे पाए गए। मप्र माध्यमिक शिक्षा मंडल ने भी अंकसूची को सही बताया और किसी तरह की गड़बड़ी न मिलने की पुष्टि की। इसके बाद पांडे ने कांग्रेस नेताओं के खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज कराया था। इसके बाद विभागीय जांच और एमपी शिक्षा बोर्ड की जांच रिपोर्ट में उनकी अंकसूची सही पाई गई। रिपोर्ट के अनुसार विपक्ष के आरोप तथ्यहीन थे और गलत जानकारी के आधार पर सरकार को घेरने की कोशिश की गई थी। कोर्ट के नोटिस के बाद अब सभी तीन नेताओं को 16 जनवरी को एमपी-एमएलए कोर्ट में पेश होकर अपना पक्ष रखना होगा।

    इस मामले में कांग्रेस विधायक लखन घनघोरिया ने गुरुवार को कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाना हमारा काम है। किसी विभाग में अगर अराजकता की स्थिति बन रही है तो उसे उठाना हमारा काम है, जनता से हमें शिकायत मिली तो हमने उसका विरोध किया अब कोई अगर मानहानि करता है तो कोर्ट के समक्ष जाकर देखेंगे।