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  • ट्रैफिक और पुलिस पर वीडियो बनाना पड़ा महंगा, मोरक्को में विदेशी कंटेंट क्रिएटर को अदालत ने सुनाई एक साल की सजा

    ट्रैफिक और पुलिस पर वीडियो बनाना पड़ा महंगा, मोरक्को में विदेशी कंटेंट क्रिएटर को अदालत ने सुनाई एक साल की सजा

    नई दिल्ली । सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो को लेकर मोरक्को में एक विदेशी कंटेंट क्रिएटर को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ा है। फ्रेंच-अल्जीरियाई इन्फ्लुएंसर यास नौबेले को स्थानीय अदालत ने एक वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। मामला उस वीडियो से जुड़ा है जिसमें उन्होंने मोरक्को की ट्रैफिक व्यवस्था, स्थानीय नागरिकों की ड्राइविंग शैली और पुलिस व्यवस्था पर सार्वजनिक टिप्पणियां की थीं। अदालत ने इन टिप्पणियों को सरकारी संस्थाओं की कथित मानहानि और सार्वजनिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला माना।

    जानकारी के अनुसार, 30 वर्षीय यास नौबेले निजी यात्रा पर मोरक्को के ऐतिहासिक शहर माराकेश पहुंची थीं। इसी दौरान उन्होंने टैक्सी में यात्रा करते हुए एक वीडियो रिकॉर्ड किया और उसे अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा कर दिया। वीडियो में उन्होंने शहर की ट्रैफिक व्यवस्था, सड़क सुरक्षा, वाहन चालकों के व्यवहार और यातायात नियमों के पालन को लेकर कई आलोचनात्मक टिप्पणियां की थीं, जो बाद में व्यापक चर्चा का विषय बन गईं।

    वीडियो में उन्होंने स्थानीय ट्रैफिक पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि बिना उचित कारण लोगों को रोका जाता है। इसके अलावा उन्होंने भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप भी लगाए और मोरक्को की व्यवस्थाओं की तुलना दूसरे देशों से करते हुए उन्हें कमजोर बताया। सोशल मीडिया पर वीडियो के तेजी से वायरल होने के बाद मामला प्रशासन के संज्ञान में आया, जिसके बाद संबंधित एजेंसियों ने इसकी जांच शुरू कर दी।

    प्रशासन के अनुसार, जांच में वीडियो की सामग्री का परीक्षण किया गया और इसे सरकारी संस्थाओं की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला माना गया। इसके बाद इन्फ्लुएंसर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई। बताया गया कि यात्रा पूरी होने के बाद जब वह फ्रांस लौटने के लिए एयरपोर्ट पहुंचीं, तब सीमा अधिकारियों ने उन्हें हिरासत में ले लिया। विवाद बढ़ने के बाद उन्होंने संबंधित वीडियो अपने सोशल मीडिया अकाउंट से हटा दिया था, लेकिन तब तक जांच प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी थी।

    मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने वीडियो, उपलब्ध साक्ष्यों और अन्य दस्तावेजों की समीक्षा की। न्यायालय ने उन्हें मोरक्को के नागरिकों और पुलिस बल के प्रति कथित अपमानजनक टिप्पणी करने का दोषी मानते हुए एक वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने इसके साथ आर्थिक दंड भी लगाया। हालांकि फैसले के बाद उन्हें निर्धारित समय सीमा के भीतर उच्च अदालत में अपील करने का कानूनी अधिकार भी प्रदान किया गया है।

    यह मामला एक बार फिर इस तथ्य को सामने लाता है कि अलग-अलग देशों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, मानहानि और सरकारी संस्थाओं पर सार्वजनिक टिप्पणी से जुड़े कानून अलग-अलग हो सकते हैं। किसी भी विदेशी नागरिक या सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर के लिए यह आवश्यक है कि वह जिस देश की यात्रा कर रहा हो, वहां के स्थानीय कानूनों और कानूनी प्रावधानों की जानकारी रखे तथा उनका पालन करे। इंटरनेट पर साझा की गई सामग्री कई बार सीमाओं से परे भी कानूनी परिणाम उत्पन्न कर सकती है।

    डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते प्रभाव के बीच यह घटना सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और कंटेंट क्रिएटर्स के लिए भी महत्वपूर्ण संदेश मानी जा रही है। अधिक लोकप्रियता या व्यापक पहुंच हासिल करने की प्रतिस्पर्धा में प्रकाशित सामग्री यदि स्थानीय कानूनों का उल्लंघन करती है या किसी देश की संस्थाओं को लेकर कानूनी विवाद खड़ा करती है, तो उसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। इसलिए ऑनलाइन सामग्री साझा करते समय तथ्यात्मकता, जिम्मेदारी और स्थानीय नियमों का पालन करना पहले से कहीं अधिक आवश्यक माना जा रहा है।

  • अपमान किसी भी कीमत पर मंजूर नहीं', सोशल मीडिया पर छवि धूमिल करने के खिलाफ थाने पहुंचे पूर्व कप्तान सौरव गांगुली

    अपमान किसी भी कीमत पर मंजूर नहीं', सोशल मीडिया पर छवि धूमिल करने के खिलाफ थाने पहुंचे पूर्व कप्तान सौरव गांगुली

    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के पूर्व अध्यक्ष सौरव गांगुली ने अपनी सामाजिक व पेशेवर प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाए जाने के खिलाफ सख्त कानूनी रुख अख्तियार कर लिया है। सोशल मीडिया पर लगातार उनके खिलाफ की जा रही अपमानजनक और भ्रामक टिप्पणियों से आहत होकर पूर्व दिग्गज क्रिकेटर ने पुलिस का दरवाजा खटखटाया है। सौरव गांगुली ने कोलकाता के ठाकुरपुकुर थाने में इस संबंध में एक औपचारिक लिखित शिकायत दर्ज कराई है। अपनी शिकायत में उन्होंने स्पष्ट तौर पर आरोप लगाया है कि कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा इंटरनेट मीडिया पर उनके खिलाफ बेहद आपत्तिजनक, भ्रामक और मानहानिकारक कंटेंट फैलाकर आम जनता के बीच उनकी साफ-सुथरी साख को धूमिल करने की गहरी साजिश रची जा रही है।

    पूर्व कप्तान द्वारा पुलिस को सौंपी गई शिकायत में मुख्य रूप से ‘सौरव गांगुली फैंस’ (Sourav Ganguly Fans) नाम के एक बेहद लोकप्रिय फेसबुक पेज का विशेष उल्लेख किया गया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस फेसबुक पेज पर वर्तमान में ३६ लाख से भी अधिक फॉलोअर्स जुड़े हुए हैं और इस मंच के संचालक इसे सौरव गांगुली का आधिकारिक फैन पेज होने का दावा करते हैं। शिकायत पत्र के मुताबिक, इसी बड़े मंच का दुरुपयोग करते हुए पिछले कुछ समय से लगातार ऐसे पोस्ट पब्लिश किए जा रहे हैं, जो आम लोगों के बीच गांगुली की छवि को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर रहे हैं। गांगुली ने अपनी शिकायत के साथ इस फेसबुक पेज के लिंक्स, कुछ स्क्रीनशॉट्स और इससे जुड़ी एक खेल वेबसाइट की अहम जानकारियां भी साक्ष्य के तौर पर पुलिस प्रशासन से साझा की हैं।

    सार्वजनिक जीवन में आलोचना और व्यक्तिगत मानहानि के बीच के अंतर को स्पष्ट करते हुए सौरव गांगुली ने अपने आवेदन में बेहद गंभीर बातें कही हैं। उन्होंने साफ शब्दों में लिखा है कि एक पब्लिक फिगर होने के नाते वह इस बात को अच्छी तरह समझते हैं कि लोगों की अलग-अलग राय होना और आलोचनाएं मिलना सार्वजनिक जीवन का ही एक स्वाभाविक हिस्सा होता है। लेकिन, किसी की प्रतिष्ठा को जानबूझकर ठेस पहुंचाने के इरादे से झूठी, अपमानजनक और दुर्भावनापूर्ण बातें फैलाना किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकता। गांगुली ने जोर देकर कहा है कि अपनी साख की रक्षा के लिए और इस तरह की भ्रामक गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए आरोपियों के खिलाफ तत्काल और कड़ी कानूनी कार्रवाई किया जाना बेहद अनिवार्य हो गया है।

    इस हाई-प्रोफाइल मामले पर कोलकाता पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पूर्व बीसीसीआई अध्यक्ष की तरफ से शिकायत मिलने की आधिकारिक पुष्टि कर दी है। पुलिस प्रशासन के मुताबिक, गांगुली की लिखित अर्जी के आधार पर संबंधित फेसबुक पेज के एडमिन और उससे जुड़े संदिग्धों के खिलाफ मामला दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और साइबर सेल की मदद से पूरे मामले की गहनता से तकनीकी जांच की जा रही है। इस कानूनी विवाद के बीच, हाल ही में राजनीतिक गलियारों में उड़े एक बड़े बवंडर पर भी सौरव गांगुली ने अपनी चुप्पी तोड़ी है, जिसमें दावा किया जा रहा था कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गांगुली के जरिए सांसद यूसुफ पठान को इस्तीफा देने का संदेश भिजवाया था।

    इस पूरे सियासी विवाद को पूरी तरह से सिरे से खारिज करते हुए सौरव गांगुली और सांसद यूसुफ पठान दोनों ने ही इसे पूरी तरह से काल्पनिक, फर्जी और मनगढ़ंत करार दिया है। पूर्व कप्तान ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री की तरफ से उन्हें ऐसा कोई भी संदेश देने के लिए कभी नहीं कहा गया और न ही उनकी इस विषय पर यूसुफ पठान से कोई बातचीत हुई है। फिलहाल, पुलिस इस पूरे घटनाक्रम और सोशल मीडिया पेज के जरिए फैलाई जा रही नकारात्मकता के पीछे छिपे वास्तविक चेहरों की पहचान करने में जुट गई है, ताकि इस प्रतिष्ठित खिलाड़ी की मानहानि करने वालों को कानून के कटघरे में खड़ा किया जा सके।

  • काला हिरण' फिल्म पर गहराया कानूनी संकट: अभिनेता गोविंद नामदेव के बयानों से भड़के निर्माता अमित जानी, मानहानि के तहत कोर्ट में घसीटने की दी चेतावनी

    काला हिरण' फिल्म पर गहराया कानूनी संकट: अभिनेता गोविंद नामदेव के बयानों से भड़के निर्माता अमित जानी, मानहानि के तहत कोर्ट में घसीटने की दी चेतावनी

    नई दिल्ली। फिल्म उद्योग में वास्तविक और चर्चित आपराधिक मामलों पर बनने वाली फिल्मों को लेकर अक्सर विवाद खड़े होते रहे हैं, लेकिन वर्तमान में फिल्म ‘काला हिरण’ को लेकर शुरू हुआ आंतरिक घमासान अब कानूनी चौखट तक पहुंच गया है। अभिनेता सलमान खान से जुड़े चर्चित ब्लैकबक कानूनी मामले से प्रेरित इस आगामी फिल्म के मुख्य कलाकार गोविंद नामदेव और फिल्म के निर्माता अमित जानी के बीच सीधा वैचारिक और कानूनी टकराव पैदा हो गया है। अभिनेता गोविंद नामदेव ने हाल ही में सार्वजनिक मंच पर यह बयान देकर सनसनी फैला दी थी कि उन्हें फिल्म की वास्तविक पटकथा और संदर्भ के बारे में पूरी तरह अंधेरे में रखा गया था। अभिनेता के अनुसार, यदि उन्हें पहले से इस बात का भान होता कि यह पूरी फिल्म सलमान खान की छवि के विपरीत और उनके खिलाफ केंद्रित है, तो वह कभी भी इस परियोजना का हिस्सा नहीं बनते।

    इस गंभीर और एकतरफा आरोप के सार्वजनिक होते ही फिल्म के निर्माता अमित जानी ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए अभिनेता के दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। निर्माता ने एक वीडियो संदेश के माध्यम से अपना कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि किसी भी अनुभवी और वरिष्ठ अभिनेता के साथ बिना लिखित पटकथा के तीन-चार दिनों तक लगातार अदालत के दृश्यों की शूटिंग करना व्यावहारिक रूप से असंभव है। प्रोडक्शन हाउस का स्पष्ट तर्क है कि फिल्म का शीर्षक ही ‘काला हिरण’ है, जो सीधे तौर पर वर्ष 1998 से लेकर 2018 तक जोधपुर की निचली और उच्च अदालतों में चले ऐतिहासिक मुकदमे की याद दिलाता है। ऐसे में यह कहना कि कलाकार को विषय की गहराई और संदर्भ की जानकारी नहीं थी, पूरी तरह से असत्य और हास्यास्पद है।

    निर्माता ने तकनीकी और दस्तावेजी साक्ष्यों का हवाला देते हुए बताया कि गोविंद नामदेव फिल्म में मुख्य सरकारी वकील की भूमिका निभा रहे हैं, जो अयान खान नामक चरित्र के खिलाफ अदालती पैरवी कर रहा है। शूटिंग के दौरान अभिनेता ने स्वयं कई जटिल कानूनी और प्रासंगिक संवाद बोले हैं, जिसमें जीप पर लगे खून के धब्बे और टायरों में फंसे हिरण के बालों जैसे संवेदनशील विवरणों का जिरह के दौरान उल्लेख शामिल है। प्रोडक्शन हाउस के अनुसार, सेट पर बिना किसी दबाव या गनपॉइंट के पूरी स्वेच्छा से किए गए काम को अब साक्षात्कार के माध्यम से धोखे का नाम दिया जा रहा है, जो कि केवल एक बड़े सुपरस्टार को खुश करने और उद्योग में अपने संबंधों को बचाने की एक कमजोर कोशिश मात्र है।

    इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब निर्माता अमित जानी ने दोनों पक्षों के बीच हस्ताक्षरित कानूनी अनुबंध का खुलासा किया। निर्माता के दावों के अनुसार, गोविंद नामदेव ने न केवल इस वर्तमान फिल्म के लिए बल्कि भविष्य में बनने वाले इसके दूसरे भाग के लिए भी बकायदा कानूनी एग्रीमेंट साइन किया था। अब सार्वजनिक रूप से इस तरह के विरोधाभासी बयान देना न केवल उस कानूनी अनुबंध की शर्तों का खुला उल्लंघन है, बल्कि इससे प्रोडक्शन हाउस की बाजार साख और फिल्म की व्यावसायिक छवि को भी भारी वित्तीय और नैतिक नुकसान पहुंचा है।

    इस विवाद के बाद प्रोडक्शन हाउस ने अब रक्षात्मक रुख छोड़कर पूरी तरह से आक्रामक कानूनी कार्रवाई करने का मन बना लिया है। फिल्म निर्माता ने स्पष्ट किया है कि वे इस अनुबंध उल्लंघन और मानहानि के मामले को लेकर बहुत जल्द कानूनी नोटिस जारी करने जा रहे हैं। इस मामले की आधिकारिक सुनवाई और जांच के लिए अभिनेता को नोएडा की जिला अदालत में आकर अपना जवाब दाखिल करना होगा। सिनेमा जगत के विश्लेषकों का मानना है कि इस आंतरिक कलह और आने वाले कानूनी नोटिस के बाद फिल्म के समय पर प्रदर्शन और इसके भविष्य को लेकर अनिश्चितता के बादल और अधिक गहरे हो गए हैं।

  • विजय सरकार की योजनाओं पर सवालों के बाद कार्रवाई, चेन्नई साइबर क्राइम पुलिस ने यूट्यूबर को हिरासत में लिया

    विजय सरकार की योजनाओं पर सवालों के बाद कार्रवाई, चेन्नई साइबर क्राइम पुलिस ने यूट्यूबर को हिरासत में लिया


    नई दिल्ली ।
    तमिलनाडु में राजनीतिक और डिजिटल अभिव्यक्ति से जुड़ा मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है, जहां सरकार की नीतियों और योजनाओं पर सवाल उठाने के आरोप में एक यूट्यूबर को हिरासत में लिया गया है। चेन्नई साइबर क्राइम पुलिस ने यूट्यूबर मारिदास को उनके मदुरई स्थित आवास से हिरासत में लिया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर मुख्यमंत्री विजय और राज्य सरकार की योजनाओं के खिलाफ लगातार मानहानिकारक टिप्पणियां कीं।

    सूत्रों के अनुसार, यूट्यूबर मारिदास लंबे समय से सोशल मीडिया पर सक्रिय थे और सरकार की नई योजनाओं तथा घोषणाओं को लेकर लगातार आलोचनात्मक पोस्ट कर रहे थे। वे अक्सर आंकड़ों और तथ्यों के आधार पर यह सवाल उठाते थे कि क्या सरकार द्वारा घोषित योजनाएं वास्तविक रूप से लागू हो पाएंगी या नहीं। उनकी टिप्पणियों को लेकर समर्थन और विरोध दोनों ही तरह की प्रतिक्रियाएं सोशल मीडिया पर देखने को मिल रही थीं।

    मामले में तब गंभीर मोड़ आया जब उनके खिलाफ चेन्नई साइबर क्राइम पुलिस के पास एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि यूट्यूबर द्वारा प्रसारित की गई जानकारी झूठी और भ्रामक है, जिसका उद्देश्य सरकार और मुख्यमंत्री की छवि को नुकसान पहुंचाना है। शिकायत के बाद साइबर क्राइम विंग ने मामले की प्रारंभिक जांच शुरू की और तथ्यों का मूल्यांकन किया।

    जांच के आधार पर सोमवार को एक विशेष पुलिस टीम मदुरई पहुंची और स्थानीय पुलिस की मदद से यूट्यूबर को उनके घर से हिरासत में ले लिया गया। उन्हें आगे की पूछताछ के लिए चेन्नई ले जाया जा रहा है, जहां उनसे आरोपों को लेकर विस्तृत सवाल-जवाब किए जाएंगे। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई साइबर क्राइम विंग द्वारा दर्ज एक मामले के तहत की गई है।

    अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि मामले की जांच अभी जारी है और यह तय किया जा रहा है कि किन धाराओं के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने कहा कि सोशल मीडिया पर फैलने वाली जानकारी की सत्यता की जांच जरूरी है, खासकर तब जब वह किसी सार्वजनिक व्यक्ति या सरकार की प्रतिष्ठा से जुड़ी हो।

    वहीं, यूट्यूबर मारिदास पहले भी अपने राजनीतिक बयानों और आलोचनात्मक टिप्पणियों को लेकर विवादों में रह चुके हैं। उनके बड़े फॉलोअर्स बेस के कारण उनके पोस्ट अक्सर चर्चा में आते रहे हैं। इस ताजा कार्रवाई के बाद एक बार फिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सोशल मीडिया पर सरकार की आलोचना की सीमाओं को लेकर बहस तेज हो गई है।

    फिलहाल पुलिस हिरासत और जांच प्रक्रिया जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और स्पष्टता आने की संभावना है।

  • शिल्पा शिंदे के खुलासे पर हिना खान ने गरिमा और न्याय प्रणाली पर उठाए गंभीर सवाल

    शिल्पा शिंदे के खुलासे पर हिना खान ने गरिमा और न्याय प्रणाली पर उठाए गंभीर सवाल

    नई दिल्ली। टेलीविजन उद्योग में उस वक्त एक नया विवाद खड़ा हो गया जब अभिनेत्री शिल्पा शिंदे ने सालों पुराने अपने एक गंभीर आरोप को महज एक पैंतरा स्वीकार कर लिया। शिल्पा शिंदे ने हाल ही में यह चौंकाने वाला खुलासा किया कि सुपरहिट धारावाहिक ‘भाभी जी घर पर हैं’ के निर्माता संजय कोहली पर उनके द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोप पूरी तरह से मनगढ़ंत और झूठे थे। इस अप्रत्याशित कबूलनामे के बाद मनोरंजन जगत में नैतिकता और न्याय प्रणाली को लेकर नई बहस छिड़ गई है। शिल्पा के इस बयान पर उनकी समकालीन अभिनेत्री और ‘बिग बॉस’ में सह-प्रतिभागी रहीं हिना खान ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। हिना खान ने इस पूरे मामले को बेहद शर्मनाक और संवेदनशील मुद्दों का मजाक उड़ाने वाला बताया है।

    हिना खान ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी गहरी नाराजगी और असहमति व्यक्त करते हुए कहा कि यद्यपि वह आमतौर पर उन मामलों में हस्तक्षेप करने से बचती हैं जिनसे उनका सीधा सरोकार नहीं होता, परंतु इस संवेदनशील विषय पर चुप रहना उन्हें स्वीकार्य नहीं लगा। हिना ने अपने वक्तव्य में साफ किया कि किसी विवाद या आपसी मतभेद को जीतने के लिए महिला होने का अनुचित लाभ उठाना और किसी व्यक्ति की सामाजिक छवि को धूमिल करना बेहद घृणास्पद कृत्य है। उन्होंने कहा कि वास्तविक मामलों में न्याय की गुहार लगाना हर पीड़ित का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन व्यक्तिगत लाभ या सौदेबाजी के लिए गंभीर कानूनी धाराओं का दुरुपयोग करना उन वास्तविक पीड़ितों के संघर्ष को कमजोर करता है जो न्याय के लिए सालों-साल कानूनी लड़ाई लड़ते हैं।

    इस पूरे प्रकरण में हिना खान ने आरोपी बनाए गए निर्माता संजय कोहली और उनके परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की। हिना के अनुसार, असली पीड़ित वह प्रतिष्ठित निर्माता और उनका परिवार है, जिसने सालों तक समाज में इस झूठे आरोप का दंश झेला है। उन्होंने संजय कोहली को एक बेहद कर्मठ और सम्मानित निर्माता बताया जो उद्योग में लंबे समय से सक्रिय हैं। हिना ने चिंता जताते हुए कहा कि जिस व्यक्ति पर एक महिला ने इतना बड़ा और झूठा लांछन लगाया, अंततः उसी कानून और व्यवस्था की कमियों का फायदा उठाकर मामले को कोर्ट के बाहर रफा-दफा कर दिया गया।

    हिना खान ने मनोरंजन उद्योग के कुछ फैसलों पर भी हैरानी जताई कि इस प्रकार के गंभीर और बेबुनियाद आरोप लगाने के बाद भी उसी अभिनेत्री को दोबारा काम के अवसर और पहचान के नए मंच दिए गए। हिना ने इसे पूरी व्यवस्था और उद्योग के आत्मसम्मान पर एक बड़ा सवालिया निशान बताया है। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति होती है, तो इसके लिए कौन जिम्मेदार होगा। उल्लेखनीय है कि हिना खान और शिल्पा शिंदे का इतिहास पुराना रहा है और दोनों ‘बिग बॉस 11’ के ग्रैंड फिनाले में एक-दूसरे के कड़े प्रतिद्वंद्वी के रूप में नजर आई थीं, जहां शिल्पा विजेता चुनी गई थीं। वर्तमान में शिल्पा शिंदे के इस कबूलनामे और हिना खान के इस तीखे विरोध ने कॉर्पोरेट जगत और मनोरंजन उद्योग में कार्यस्थल की सुरक्षा और आंतरिक अनुशासन समिति की कार्यप्रणाली पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • कुमार सानू ने एक्स वाइफ रीता के खिलाफ दर्ज किया मानहानि का केस 30 लाख रुपये मुआवजे की मांग

    कुमार सानू ने एक्स वाइफ रीता के खिलाफ दर्ज किया मानहानि का केस 30 लाख रुपये मुआवजे की मांग


    नई दिल्ली । कुमार सानू ने अपनी एक्स वाइफ रीता के खिलाफ मानहानि का केस दर्ज किया है और मुआवजे के रूप में 30 लाख रुपये की मांग की है। यह मामला तब सामने आया जब रीता ने कई मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कुमार सानू पर गंभीर आरोप लगाए।

    क्या है मामला

    रीता ने अपने बयानों में दावा किया था कि कुमार सानू ने उनकी प्रेग्नेंसी के दौरान उनका बहुत बुरा व्यवहार किया था। उन्होंने यह आरोप भी लगाया था कि कुमार सानू ने उन्हें भूखा रखा किचन में बंद कर दिया और प्रेग्नेंसी के दौरान उन्हें दूध और मेडिकल केयर तक नहीं दिया। रीता का यह भी कहना था कि कुमार सानू ने इस दौरान कोर्ट के मामलों को भी जारी रखा था।

    इन आरोपों को लेकर कुमार सानू ने मानहानि की याचिका दायर की है जिसमें कहा गया है कि इन झूठे आरोपों के कारण उनकी इमेज को काफी नुकसान पहुंचा है और उन्होंने मानसिक तनाव का सामना भी किया है। कुमार सानू का कहना है कि इन आरोपों के कारण उनकी पब्लिक इमेज खराब हुई है और इसका असर उनके प्रोफेशनल करियर पर भी पड़ा है।

    याचिका में क्या कहा गया

    याचिका में कहा गया है कि इन बयानों ने सिंगर की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया है और उन्हें सोशल मीडिया पर भी निगेटिव प्रतिक्रियाओं का सामना करना पड़ा है। इस मानहानि के मामले में रीता और संबंधित मीडिया पोर्टल्स को लीगल नोटिस भेजा गया है। कुमार सानू ने यह भी कहा कि इन आरोपों से उन्हें आर्थिक और प्रतिष्ठा संबंधी भारी नुकसान हुआ है। इसके अलावा रीता ने यह भी आरोप लगाया था कि शादी के दौरान कुमार सानू के कई अफेयर थे जो मामला और पेचीदा बना रहा है।

    सना रईस खान ने लिया कुमार सानू का पक्ष

    कुमार सानू की ओर से इस मानहानि केस की याचिका वकील सना रईस खान द्वारा दायर की गई है। सना रईस खान बिग बॉस 17 की कंटेस्टेंट भी रह चुकी हैं और उन्होंने ही कुमार सानू का कानूनी प्रतिनिधित्व किया है।

    कुमार सानू और रीता का तलाक

    कुमार सानू और रीता का तलाक 2001 में हुआ था। दोनों का एक बेटा है जान कुमार सानू जो बिग बॉस 14 में बतौर कंटेस्टेंट नजर आ चुके थे। जान कुमार सानू का नाम भी इस विवाद से जुड़ा है लेकिन अभी तक उन्होंने इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है। यह विवाद सिंगर कुमार सानू और उनकी एक्स वाइफ रीता के बीच बढ़ता जा रहा है। यदि कोर्ट इस मामले में फैसला देता है तो यह देखना दिलचस्प होगा कि मानहानि के इस केस में क्या परिणति होती है और क्या कुमार सानू को मुआवजा मिलता है।

  • US: ट्रंप ने BBC पर ठोका मानहानि का केस… 10 अरब डॉलर के हर्जाने की मांग

    US: ट्रंप ने BBC पर ठोका मानहानि का केस… 10 अरब डॉलर के हर्जाने की मांग


    वाशिंगटन।
    एक भाषण को एडिट करने को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने मीडिया हाउस बीबीसी (BBC) पर मुकदमा ठोक दिया है। उन्होंने बीबीसी से 10 अरब डॉलर के हर्जाने की मांग भी की है। उन्होंने ब्रिटिश प्रसारक पर मानहानि के साथ-साथ भ्रामक और अनुचित तरीके से व्यापार करने का आरोप लगाया। दरअसल 6 जनवरी 2021 को डोनाल्ड ट्रंप ने अपने समर्थकों को संबोधित किया था। इसके बाद उनके समर्थक कैपिटल हिल पर पहुंच गए और हिंसक हो गए।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक बीबीसी ने ट्रंप के भाषण के वीडियो में ‘फाइट लाइक हेल’ दिखाया लेकिन उनके दूसरे पार्ट को काट दिया जिसमें वह शांतिपूर्ण प्रदर्श की बात कर रहे थे। बीबीसी पर 33 पन्नों के इस मुकदमे में ट्रंप का ‘‘झूठा, मानहानिकारक, भ्रामक, अपमानजनक, भड़काऊ और दुर्भावनापूर्ण चित्रण’’ करने का आरोप लगाया गया है और इसे 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में ‘‘हस्तक्षेप करने तथा उसे प्रभावित करने की निर्लज्ज कोशिश’’ बताया गया है।

    इसमें बीसीसी पर ‘‘राष्ट्रपति ट्रंप के छह जनवरी, 2021 के भाषण के दो पूरी तरह से अलग-अलग अंशों को एक साथ जोड़ने’’ का आरोप लगाया गया ताकि ‘‘ट्रंप द्वारा कही गई बातों के अर्थ को जानबूझकर गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा सके।’’ बता दें कि बीबीसी की फंडिंग उसके दर्शकों से होती है। डोनाल्ड ट्रंप की लीगल टीम का कहना है कि बीबीसी लेफ्ट अजेंडा चलाता है और इसलिए डोनाल्ड ट्रंप को बदनाम करने की कोशिश में लगा रहता है।

    बीबीसी की तरफ इस मुकदमे को लेकर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। 2024 के राष्ट्रपति चुनाव से पहले डॉक्युमेंट्री प्रकाशित करने को लेकर बीबीसी पहले से ही संकट का सामना कर रहा है। कई सीनियर अधिकारी इस्तीा दे चुके हैं। इससे बीबीसी की छवि भी खराब हुई है और आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा है। इस डॉक्युमेंट्री को अमेरिका में नहीं प्रसारित किया गया था। अब अमेरिका में अभिव्यक्ति की आजादी वाले कानून से अपने मुद्दे को अलग करने के लिए ट्रंप को साबित करना होगा कि बीबीसी ने जो कुछ भी एडिट किया वह अपमानजनक था और दर्शकों में भ्रम फैलाने के लिए ही ऐसा किया गया था।

    बीबीसी कोर्ट में दावा कर सकता है कि उसने जो कुछ दिखाया वह सच था और जो कुछ भी ए़डिट किया गया है उससे जनता में कोई गलत संदेश नहीं गया है। डोनाल्ड ट्रंप ने न्यूयॉर्क टाइम्स और द वॉल स्ट्रीट जर्नल के खिलाफ भी केस किया था। हालांकि दोनों ने किसी भी गलती से इनकार किया है।

  • न्यायपालिका को बदनाम करने की हिम्मत कैसे हुई? रिजिजू ने DMK सांसद को लताड़ा

    न्यायपालिका को बदनाम करने की हिम्मत कैसे हुई? रिजिजू ने DMK सांसद को लताड़ा

     
    नई दिल्ली ।लोकसभा में शुक्रवार को उस समय तनाव बढ़ गया जब तमिलनाडु से DMK सांसद टी.आर. बालू ने एक मुद्दे पर बोलते हुए एक हाईकोर्ट जज को RSS जज कह दिया। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने तत्काल आपत्ति जताते हुए कहा कि यह संसद की गरिमा के खिलाफ है। उन्होंने बालू से बिना शर्त माफी की मांग की और कहा- आप न्यायपालिका पर दाग कैसे लगा सकते हैं? किसी जज के लिए असंसदीय भाषा का उपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    इंडिगो फाल्ट के मुद्दे पर विपक्ष का हंगामा
    राज्यसभा में विपक्ष ने इंडिगो एयरलाइन के स्टाफ संकट से देशभर की उड़ानें प्रभावित होने पर सरकार से जवाब मांगा। रिजिजू ने बताया कि नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू हालात की समीक्षा कर रहे हैं और यह देखा जा रहा है कि केंद्र किस तरह एयरलाइन की मदद कर सकता है। सदन के बाहर प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि यह स्थिति सरकार के मोनोपोली मॉडल की देन है। राहुल गांधी ने भी X पर इसे सरकार की नीतियों का नतीजा बताया। वक्फ संपत्तियों के रजिस्ट्रेशन पर सरकार का साफ रुख
    अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने UMEED पोर्टल पर वक्फ संपत्तियों के रजिस्ट्रेशन की समयसीमा बढ़ाने से इनकार कर दिया।

    उन्होंने बताया-
    1.51 लाख वक्फ संपत्तियों का रजिस्ट्रेशन पूरा हो चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने भी समय बढ़ाने से मना किया है। तीन महीने तक देरी करने वालों पर कोई जुर्माना नहीं लगेगा। कर्नाटक सबसे आगे रहा, जहां लगभग 50,000 संपत्तियां दर्ज हुईं। सत्र में पेश होने वाले अहम बिल संसद के शीतकालीन सत्र में 10 बड़े बिल पेश होने जा रहे हैं। इनमें कुछ महत्वपूर्ण बदलाव शामिल हैं-

    1. एटॉमिक एनर्जी बिल
    न्यूक्लियर सेक्टर में पहली बार निजी कंपनियों को एंट्री का रास्ता खुलेगा। परमाणु ऊर्जा से जुड़े नियमों के लिए नया ढांचा बनेगा।

    2. हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ इंडिया बिल
    UGC, AICTE, NCTE को हटाकर एक ही आयोग बनाने का प्रस्ताव।
    उद्देश्य- विश्वविद्यालयों व कॉलेजों को अधिक स्वतंत्रता व बेहतर पारदर्शिता।

    3. नेशनल हाईवे संशोधन बिल
    भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज व पारदर्शी बनाकर हाईवे परियोजनाओं की देरी कम करना।

    4. कॉर्पोरेट लॉ अमेंडमेंट बिल, 2025
    कंपनी अधिनियम 2013 और LLP अधिनियम 2008 में सुधार करके ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बढ़ाना।

    5. सिक्योरिटीज मार्केट्स कोड बिल
    SEBI एक्ट, डिपॉजिटरीज एक्ट और सिक्योरिटीज कॉन्ट्रैक्ट्स एक्ट को मिलाकर एक ही कानून बनाना।

    6. संविधान 131वां संशोधन बिल
    चंडीगढ़ UT को संविधान के आर्टिकल 240 के दायरे में लाना, जिससे केंद्र विशेष रेगुलेशन बना सके।

    7. आर्बिट्रेशन एंड कंसिलीएशन अमेंडमेंट बिल
    मध्यस्थता मामलों के समाधान को तेज करना और फैसलों को चुनौती देने की प्रक्रिया सरल बनाना।

    पहले चार दिनों की बड़ी घटनाएँ

    1 दिसंबर: वित्त मंत्री ने 3 बिल पेश किए, मणिपुर GST संशोधन बिल पास।

    2 दिसंबर: विपक्ष SIR पर चर्चा के लिए तैयार हुआ; 9 दिसंबर को 10 घंटे की बहस।

    3 दिसंबर: PM मोदी ने बंगाल BJP सांसदों से राज्य की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की।

    4 दिसंबर: राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार विदेशी मेहमानों से विपक्ष को मिलने नहीं देती।

    जस्टिस वर्मा पर कार्रवाई की संभावना
    स्पीकर द्वारा गठित तीन-सदस्यीय कमेटी अपनी रिपोर्ट इस सत्र में पेश करेगी। यदि आरोप साबित होते हैं तो संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाया जाएगा। प्रस्ताव को पास होने के लिए दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होगी और फिर यह राष्ट्रपति को भेजा जाएगा। हालांकि माना जा रहा है कि आरोप सही पाए जाने की स्थिति में जस्टिस वर्मा खुद इस्तीफा दे सकते हैं।