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  • तमिलनाडु राजनीति में बड़ा संकट: AIADMK दो गुटों में बंटी, पलानीस्वामी ने बागियों पर की सख्त कार्रवाई

    तमिलनाडु राजनीति में बड़ा संकट: AIADMK दो गुटों में बंटी, पलानीस्वामी ने बागियों पर की सख्त कार्रवाई


    नई दिल्ली । तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी तूफान खड़ा हो गया है, जहां राज्य की प्रमुख विपक्षी पार्टी AIADMK गंभीर अंदरूनी संकट से गुजर रही है। हाल ही में हुए फ्लोर टेस्ट के बाद पार्टी में खुलकर बगावत सामने आई है, जिससे न केवल संगठनात्मक ढांचा हिल गया है बल्कि राज्य की राजनीतिक दिशा पर भी गहरा असर पड़ने की संभावना बन गई है। इस घटनाक्रम ने पार्टी को दो स्पष्ट गुटों में विभाजित कर दिया है, जिसमें एक ओर एडप्पादी के. पलानीस्वामी का नेतृत्व है और दूसरी ओर षणमुगम और वेलुमणि के नेतृत्व में बागी खेमे का गठन हुआ है।

    फ्लोर टेस्ट के दौरान जब 25 AIADMK विधायकों ने कथित तौर पर मुख्यमंत्री विजय की पार्टी TVK के पक्ष में क्रॉस वोट किया, तो राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम के बाद सत्ता समीकरण बदलते नजर आए और TVK की स्थिति मजबूत होती दिखाई दी। पार्टी नेतृत्व ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी।

    एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने सख्त रुख अपनाते हुए षणमुगम और वेलुमणि को उनके पदों से हटा दिया। इसके साथ ही उन्होंने दलबदल विरोधी कानून के तहत संबंधित विधायकों को अयोग्य घोषित करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। पार्टी का दावा है कि बागी विधायकों ने व्हिप का उल्लंघन किया है, जबकि दूसरी ओर बागी गुट इसे अवैध और असंवैधानिक बता रहा है।

    षणमुगम गुट ने पलटवार करते हुए कहा है कि पार्टी महासचिव को सीधे व्हिप नियुक्त करने का अधिकार नहीं है। उनके अनुसार, विधायकों की बैठक में ही नेता और व्हिप का चुनाव किया जाता है, इसलिए वर्तमान व्हिप नियुक्ति कानूनी रूप से मान्य नहीं है। इस विवाद ने पार्टी के भीतर कानूनी और राजनीतिक लड़ाई को और तेज कर दिया है, जिससे संकट गहरा गया है।

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच चेन्नई में तनाव का माहौल बन गया है। AIADMK मुख्यालय के बाहर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि किसी भी संभावित टकराव या हिंसा को रोका जा सके। 2022 में हुई हिंसक झड़पों की यादें अभी भी ताजा हैं, जब पार्टी के दो गुटों के बीच परिसर में तोड़फोड़ और मारपीट जैसी घटनाएं हुई थीं। प्रशासन इस बार किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह सतर्क है।

    पार्टी के भीतर चल रही इस खींचतान ने संगठनात्मक एकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पलानीस्वामी गुट अब आगे की रणनीति तय करने के लिए वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की तैयारी में है, वहीं बागी गुट ने साफ कर दिया है कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता, वे पार्टी मुख्यालय से दूरी बनाए रखेंगे।

    इस राजनीतिक उथल-पुथल का असर केवल AIADMK तक सीमित नहीं है, बल्कि तमिलनाडु की पूरी राजनीति पर पड़ सकता है। सत्ता समीकरण बदलने की संभावना ने अन्य दलों की रणनीति भी प्रभावित कर दी है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या पार्टी इस संकट से उबर पाती है या यह विभाजन स्थायी रूप ले लेता है।

  • AAP में बगावत पर सियासी संग्राम: 7 सांसदों के BJP में जाने पर बोले संजय सिंह, यह असंवैधानिक, सदस्यता रद्द हो

    AAP में बगावत पर सियासी संग्राम: 7 सांसदों के BJP में जाने पर बोले संजय सिंह, यह असंवैधानिक, सदस्यता रद्द हो


    नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के कई राज्यसभा सांसदों के भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की खबर के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। इस घटनाक्रम पर पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय सिंह ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे अवैध और असंवैधानिक करार दिया है।  संजय सिंह ने कहा कि राघव चड्ढा समेत सात राज्यसभा सांसदों का यह कदम संसदीय नियमों के खिलाफ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति को पत्र लिखकर इन सांसदों की सदस्यता समाप्त करने की मांग करेंगे।

    पार्टी के प्रति जिम्मेदारी पर उठाए सवाल

    संजय सिंह ने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन्हें पार्टी ने अवसर और पहचान दी, उनसे अपेक्षा थी कि वे जनता और संगठन के हित में काम करेंगे। उन्होंने खासतौर पर पंजाब के संदर्भ में कहा कि इन नेताओं को राज्य और पार्टी के विस्तार में योगदान देना चाहिए था।

    सोशल मीडिया पर भी उठाया मुद्दा

    संजय सिंह ने यह भी दावा किया कि पार्टी के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स इंस्टाग्राम और फेसबुक को निलंबित कर दिया गया है। उन्होंने समर्थकों से अपील की कि वे व्हाट्सऐप और अन्य माध्यमों के जरिए पार्टी का संदेश ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं। इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब राजनीतिक नजरें इस बात पर टिकी हैं कि राज्यसभा में इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाया जाता है और क्या वाकई इन सांसदों की सदस्यता पर कोई कार्रवाई होती है। फिलहाल इतना तय है कि यह मामला आने वाले दिनों में और ज्यादा गरमाने वाला है।
  • AAP को एक और झटका: स्वाति मालीवाल BJP में शामिल, मोदी-शाह की तारीफ कर केजरीवाल पर जमकर किए हमले

    AAP को एक और झटका: स्वाति मालीवाल BJP में शामिल, मोदी-शाह की तारीफ कर केजरीवाल पर जमकर किए हमले


    नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी को एक और बड़ा झटका देते हुए राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है। करीब दो दशक पुराने रिश्ते को खत्म करते हुए उन्होंने इस फैसले के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर भरोसा जताया।

    यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब एक दिन पहले ही राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल भी भाजपा में शामिल हो चुके हैं। उन्होंने पहले ही संकेत दिए थे कि पार्टी के कुछ और सांसद भी जल्द पाला बदल सकते हैं, जिस पर अब मालीवाल के फैसले से मुहर लग गई है। भाजपा में शामिल होने के बाद स्वाति मालीवाल ने कहा कि उन्होंने यह कदम किसी दबाव में नहीं, बल्कि अपनी राजनीतिक सोच और विश्वास के आधार पर उठाया है। उन्होंने लोगों से अपील की कि जो लोग सकारात्मक और रचनात्मक राजनीति करना चाहते हैं, वे भाजपा से जुड़ें।

    केजरीवाल पर तीखे आरोप

    इस दौरान स्वाति मालीवाल ने अरविंद केजरीवाल पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि वह 2006 से उनके साथ थीं और हर आंदोलन में सहयोग किया, लेकिन उन्हें ही अपने घर में प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। मालीवाल ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने आवाज उठाई तो उन पर दबाव बनाया गया और एफआईआर वापस लेने के लिए धमकाया गया। उन्होंने केजरीवाल को “महिला विरोधी” बताते हुए यह भी कहा कि पिछले दो वर्षों में उन्हें संसद में बोलने का अवसर तक नहीं दिया गया।

    मोदी-शाह की तारीफ

    स्वाति मालीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की नीतियों और फैसलों की सराहना की। उन्होंने कहा कि देश के विकास और बड़े निर्णयों में इनका नेतृत्व महत्वपूर्ण रहा है। कुल मिलाकर, AAP से लगातार हो रहे दलबदल ने दिल्ली की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है और आने वाले समय में इसके और असर देखने को मिल सकते हैं।