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  • IAF को मिली बड़ी रणनीतिक बढ़त 40 सुखोई लड़ाकू विमान अब ब्रह्मोस से लैस दुश्मन के ठिकाने होंगे आसान निशाना

    IAF को मिली बड़ी रणनीतिक बढ़त 40 सुखोई लड़ाकू विमान अब ब्रह्मोस से लैस दुश्मन के ठिकाने होंगे आसान निशाना


    नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना की रणनीतिक ताकत में बड़ा इजाफा हुआ है। वायुसेना के करीब 40 सुखोई 30MKI लड़ाकू विमान अब एयर लॉन्च ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों से लैस हो चुके हैं। इस नई क्षमता के साथ भारत की लंबी दूरी तक सटीक हमला करने की ताकत और अधिक मजबूत हो गई है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम हिंद महासागर क्षेत्र सहित पूरे इलाके में भारत की सामरिक स्थिति को और मजबूत करेगा।

    ब्रह्मोस एयरोस्पेस के सह निदेशक अलेक्जेंडर मैक्सिचेव ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री रक्षा प्रदर्शनी फ्लीट 2026 के दौरान जानकारी दी कि सुखोई विमानों को ब्रह्मोस मिसाइलों से लैस करने का कार्यक्रम अभी जारी है और अब तक लगभग 40 विमान इस क्षमता से सुसज्जित किए जा चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सुखोई और ब्रह्मोस के संयोजन ने अपनी प्रभावी क्षमता का प्रदर्शन किया है।

    भारतीय वायुसेना के बेड़े में फिलहाल करीब 270 सुखोई 30MKI लड़ाकू विमान शामिल हैं। इनमें से कई विमानों को चरणबद्ध तरीके से ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली से लैस किया जा रहा है। एयर लॉन्च ब्रह्मोस का वजन लगभग ढाई टन है जो जमीन से दागे जाने वाले तीन टन के संस्करण से हल्का है। इस हल्के संस्करण को सुखोई विमान के अनुरूप बनाने के लिए विमान में कई तकनीकी बदलाव और व्यापक परीक्षण किए गए हैं।

    इस मिसाइल प्रणाली की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह जमीन और समुद्र दोनों प्रकार के लक्ष्यों पर बेहद सटीक और तेज हमला करने में सक्षम है। भविष्य में इसकी मारक क्षमता को और बढ़ाने की योजना भी तैयार की जा रही है। प्रस्तावित अपग्रेड के बाद एयर लॉन्च ब्रह्मोस की रेंज लगभग 800 किलोमीटर तक पहुंच सकती है। यदि यह योजना सफल रहती है तो भारतीय लड़ाकू विमान अपनी हवाई सीमा के भीतर रहते हुए भी दुश्मन के अंदरूनी सैन्य ठिकानों पर प्रभावी हमला कर सकेंगे।

    भारतीय वायुसेना लगभग 70 पुराने सुखोई 30MKI विमानों को सुपर सुखोई अपग्रेड कार्यक्रम से अलग रखकर उन्हें भारी मिसाइल वाहक के रूप में इस्तेमाल करने की योजना पर भी काम कर रही है। इन विमानों का उपयोग भविष्य में ब्रह्मोस और अन्य स्वदेशी लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलों के संचालन के लिए किया जा सकता है।

    इसी बीच रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन और ब्रह्मोस एयरोस्पेस अगली पीढ़ी की ब्रह्मोस एनजी मिसाइल भी विकसित कर रहे हैं। यह मौजूदा मिसाइल से हल्की होगी और इसका वजन लगभग डेढ़ टन रहने की संभावना है। इसकी अनुमानित मारक क्षमता करीब 300 किलोमीटर होगी तथा इसके 2028 से 2029 के बीच सेवा में आने की उम्मीद है।

    रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रह्मोस से लैस सुखोई विमानों की बढ़ती संख्या भारतीय वायुसेना की लंबी दूरी की स्ट्राइक क्षमता को नई ऊंचाई पर ले जाएगी। इससे भारत किसी भी संभावित चुनौती का अधिक प्रभावी और तेज जवाब देने में सक्षम होगा तथा क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन में उसकी स्थिति और मजबूत होगी।

  • आईएनएस सुदर्शिनी ने लोकायन 26 से पहले पोर्ट कॉल पूरा किया, भारत ओमान समुद्री संबंधों को दी नई मजबूती

    आईएनएस सुदर्शिनी ने लोकायन 26 से पहले पोर्ट कॉल पूरा किया, भारत ओमान समुद्री संबंधों को दी नई मजबूती


    नई दिल्ली । भारतीय नौसेना की सेल ट्रेनिंग शिप आईएनएस सुदर्शिनी ने 05 फरवरी 2026 को ओमान के शहर सलालाह में अपना पहला पोर्ट कॉल सफलतापूर्वक पूरा किया। यह कदम जहाज की दस महीने लंबी महासागरीय यात्रा लोकायन 26 में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। इस यात्रा का उद्देश्य भारत की समृद्ध समुद्री विरासत को प्रदर्शित करना और वसुधैव कुटुम्बकम के सिद्धांत के माध्यम से विश्व परिवार के साथ सद्भावना को बढ़ावा देना है।

    पोर्ट कॉल के दौरान आईएनएस सुदर्शिनी के कमांडिंग ऑफिसर ने ओमान की रॉयल नेवी के साउदर्न नेवल एरिया कमांडर कैप्टन मोहम्मद अल ग़ैलेनी और रॉयल नेवी ऑफ़ ओमान के जहाज अल मोज़ेर के कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन मोहम्मद अल महारी से बातचीत की। इन वार्ताओं में दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक समुद्री संबंधों और साझा हितों पर चर्चा हुई। साथ ही दोनों नौसेनाओं के बीच मित्रता और पेशेवर सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया गया। इसके बाद रॉयल नेवी ऑफ़ ओमान के अधिकारियों के लिए भी आईएनएस सुदर्शिनी ने एक यात्रा का आयोजन किया, जिससे आपसी समझ और साझेदारी और गहरी हुई।

    सामाजिक संपर्क और जनसंपर्क के उद्देश्य से आईएनएस सुदर्शिनी को जनता के लिए खुला रखा गया। इस दौरान 600 से अधिक आगंतुकों ने तीन-मास्टेड बार्क जहाज का भ्रमण किया। इनमें स्कूल के बच्चे भी शामिल थे, जिन्हें समुद्री यात्रा और नौकायन की बारीकियों का प्रत्यक्ष अनुभव कराया गया। इस प्रकार पोर्ट कॉल ने द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ समुद्री संस्कृति और शिक्षा को भी बढ़ावा दिया।

    अब आईएनएस सुदर्शिनी लोकायन 26 के अगले चरण की ओर बढ़ रही है। यह यात्रा भारत की समुद्री विरासत को विश्व स्तर पर फैलाने के साथ-साथ मित्रता, उत्कृष्टता और समुद्री सद्भावना का संदेश देती रहेगी। पाल फहराए और उत्साह बनाये रखते हुए यह शिप समुद्री उत्कृष्टता का प्रतीक बनकर अपने मिशन को जारी रखेगी।