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  • 1.78 लाख करोड़ के रक्षा उत्पादन और रिकॉर्ड निर्यात का दावा, राजनाथ सिंह बोले- आत्मनिर्भर भारत की ओर तेजी से बढ़ रहा देश

    1.78 लाख करोड़ के रक्षा उत्पादन और रिकॉर्ड निर्यात का दावा, राजनाथ सिंह बोले- आत्मनिर्भर भारत की ओर तेजी से बढ़ रहा देश

    नई दिल्ली । रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भारत का रक्षा उत्पादन और रक्षा निर्यात वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। उनके अनुसार यह उपलब्धि देश की बढ़ती विनिर्माण क्षमता, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान पर वैश्विक विश्वास का मजबूत संकेत है। उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में रक्षा क्षेत्र में किए गए सुधारों का सकारात्मक परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

    एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में देश का वार्षिक रक्षा उत्पादन 1.78 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया। उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा वर्ष 2014-15 की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक है। वहीं रक्षा निर्यात भी लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है और यह बढ़कर 38 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। उनके अनुसार यह वृद्धि इस बात का प्रमाण है कि भारतीय रक्षा उत्पादों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता को अंतरराष्ट्रीय बाजार में व्यापक स्वीकार्यता मिल रही है।

    राजनाथ सिंह ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत ने रक्षा क्षेत्र में आयात पर निर्भरता कम करने और घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। सरकार की नीतियों ने सार्वजनिक और निजी क्षेत्र दोनों को रक्षा विनिर्माण में निवेश और नवाचार के लिए प्रोत्साहित किया है। इससे देश में आधुनिक रक्षा उपकरणों के निर्माण की क्षमता विकसित हुई है और निर्यात के नए अवसर भी खुले हैं।

    उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में जब ‘मेक इन इंडिया’ अभियान की शुरुआत हुई थी, तब इसकी सफलता को लेकर कई तरह की आशंकाएं व्यक्त की गई थीं। हालांकि समय के साथ यह पहल विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय परिणाम देने में सफल रही। रक्षा उत्पादन के साथ-साथ मोबाइल निर्माण, ऑटोमोबाइल निर्यात, डिजिटल अवसंरचना और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में भी देश ने महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की है।

    रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार अपने तीसरे कार्यकाल में सुधार, प्रदर्शन और परिवर्तन की नीति के आधार पर विकसित भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ा रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक स्तर पर विनिर्माण, तकनीक और रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में और अधिक मजबूत स्थिति हासिल करेगा। उनके अनुसार आत्मनिर्भरता केवल आर्थिक लक्ष्य नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक क्षमता को मजबूत करने का भी महत्वपूर्ण आधार है।

    उन्होंने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में हो रही प्रगति का भी उल्लेख करते हुए कहा कि देश ने स्वदेशी चिप निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। सरकार आधुनिक औद्योगिक अवसंरचना विकसित करने के साथ उच्च तकनीक वाले क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा दे रही है, जिससे भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विनिर्माण क्षमता तैयार हो सके।

    राजनाथ सिंह ने डिजिटल क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) के माध्यम से होने वाले डिजिटल लेनदेन लगातार नए रिकॉर्ड बना रहे हैं और इसकी पहुंच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बढ़ रही है। इसके साथ ही देश में स्वदेशी 5जी नेटवर्क के विस्तार और 6जी तकनीक के विकास पर भी तेजी से काम किया जा रहा है।

    उन्होंने वस्तु एवं सेवा कर व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रारंभिक चुनौतियों के बावजूद जीएसटी अब केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय का प्रभावी माध्यम बन चुका है। रक्षा मंत्री ने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों में हुए इन सुधारों ने भारत की आर्थिक और औद्योगिक क्षमता को नई दिशा दी है तथा देश को आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बनाने की प्रक्रिया को गति प्रदान की है।

  • आत्मनिर्भरता से वैश्विक नेतृत्व तक, रक्षा निर्यात 686 करोड़ से बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये; दुनिया में मजबूत हुई भारत की पहचान

    आत्मनिर्भरता से वैश्विक नेतृत्व तक, रक्षा निर्यात 686 करोड़ से बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये; दुनिया में मजबूत हुई भारत की पहचान


    नई दिल्ली ।
    भारत का रक्षा क्षेत्र पिछले एक दशक में व्यापक बदलाव और तेज प्रगति का साक्षी बना है। स्वदेशी उत्पादन, तकनीकी नवाचार और नीतिगत सुधारों के बल पर देश ने न केवल अपनी सैन्य क्षमताओं को मजबूत किया है, बल्कि वैश्विक रक्षा बाजार में भी प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, भारत का रक्षा निर्यात वर्ष 2013-14 के 686 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 38,424 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। यह वृद्धि देश की रक्षा निर्माण क्षमता और वैश्विक स्वीकार्यता को दर्शाती है।

    रक्षा क्षेत्र में यह बदलाव आत्मनिर्भरता को केंद्र में रखकर लागू की गई विभिन्न नीतियों का परिणाम माना जा रहा है। पिछले वर्षों में स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए। रक्षा खरीद प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया, घरेलू उद्योगों को प्रोत्साहन दिया गया और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। इसके परिणामस्वरूप रक्षा निर्माण से जुड़ी गतिविधियों में उल्लेखनीय विस्तार देखने को मिला।

    आज भारत के रक्षा उत्पादों की मांग दुनिया के 80 से अधिक देशों में है। यह स्थिति उस समय से बिल्कुल अलग है जब देश मुख्य रूप से रक्षा आयात पर निर्भर माना जाता था। अब स्वदेशी रूप से विकसित सैन्य उपकरण, हथियार प्रणालियां और रक्षा तकनीकें अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहचान बना रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि भारत की तकनीकी क्षमता और उत्पादन गुणवत्ता में बढ़ते विश्वास का संकेत है।

    रक्षा अनुसंधान और विकास के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। अनुसंधान संस्थानों और उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ने से नई तकनीकों के विकास को गति मिली है। अत्याधुनिक रक्षा प्रणालियों, निगरानी तकनीकों और आधुनिक सैन्य उपकरणों के निर्माण में अनुसंधान की भूमिका लगातार बढ़ी है। इसी कारण देश की रक्षा आवश्यकताओं को स्वदेशी स्तर पर पूरा करने की क्षमता मजबूत हुई है।

    रक्षा बजट में निरंतर वृद्धि ने भी इस परिवर्तन को गति प्रदान की है। पिछले दशक में रक्षा क्षेत्र के लिए वित्तीय आवंटन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई है, जिससे सैन्य आधुनिकीकरण, अनुसंधान परियोजनाओं और उत्पादन क्षमताओं को मजबूती मिली है। रक्षा उत्पादन का कुल मूल्य भी कई गुना बढ़कर नए रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच चुका है। इससे रक्षा उद्योग से जुड़े हजारों उद्यमों और रोजगार अवसरों को भी लाभ मिला है।

    सरकार ने नवाचार को बढ़ावा देने के लिए स्टार्टअप, उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों की भागीदारी बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया है। अनुसंधान एवं विकास के लिए उपलब्ध संसाधनों का एक हिस्सा निजी क्षेत्र और नवाचार आधारित संस्थाओं के लिए खोला गया है। इससे नई तकनीकों के विकास और रक्षा क्षेत्र में उद्यमिता को प्रोत्साहन मिला है। विशेषज्ञ इसे रक्षा क्षेत्र में दीर्घकालिक आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानते हैं।

    इसके साथ ही परीक्षण और अनुसंधान सुविधाओं को अधिक सुलभ बनाकर निजी कंपनियों को भी रक्षा तकनीकों के विकास में सहयोग प्रदान किया गया है। इससे रक्षा उत्पादन का दायरा केवल सरकारी संस्थानों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि व्यापक औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण हुआ है। इस मॉडल ने देश में रक्षा निर्माण क्षमता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    विश्लेषकों का मानना है कि रक्षा निर्यात में हुई तेज वृद्धि केवल आर्थिक उपलब्धि नहीं बल्कि रणनीतिक महत्व भी रखती है। इससे भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा, सामरिक साझेदारियां और रक्षा कूटनीति को मजबूती मिली है। आने वाले वर्षों में स्वदेशी तकनीक, अनुसंधान और उत्पादन पर आधारित यह मॉडल भारत को वैश्विक रक्षा उद्योग के प्रमुख देशों में शामिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।