Tag: Defense

  • दक्षिण कोरिया ने 6,174 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक रफ्तार वाले हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन का पहला सफल परीक्षण किया

    दक्षिण कोरिया ने 6,174 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक रफ्तार वाले हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन का पहला सफल परीक्षण किया

    नई दिल्ली ।दक्षिण कोरिया ने अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन (एचजीवी) का पहला सफल परीक्षण किया है। देश में विकसित इस मिसाइल ने परीक्षण के दौरान 6,174 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की गति से उड़ान भरी और रास्ते में अपनी दिशा बदलते हुए समुद्र में निर्धारित लक्ष्य को सटीक निशाना बनाया। इस परीक्षण को दक्षिण कोरिया की तकनीकी प्रगति और स्वदेशी रक्षा तकनीक विकसित करने के प्रयासों में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। हालांकि, इसके साथ ही पूर्वी एशिया में मिसाइल तकनीक को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ने की आशंका भी जताई गई है।

    इस परीक्षण को दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने भी देखा। उन्होंने हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन को कोरियाई प्रायद्वीप में महत्वपूर्ण लक्ष्यों पर अचानक और सटीक हमला करने में सक्षम रणनीतिक संपत्ति बताया। राष्ट्रपति की इस टिप्पणी से इस हथियार की रणनीतिक भूमिका का संकेत मिलता है। दक्षिण कोरिया अब इस तकनीक को और विकसित करने की तैयारी कर रहा है, ताकि अपनी रक्षा क्षमता को मजबूत बनाया जा सके।

    परीक्षण के दौरान हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन ने बूस्टर से अलग होने के बाद निर्धारित उड़ान मार्ग पूरा किया। इसके बाद यह ऊंचाई से नीचे उतरा और उड़ान के दौरान क्षैतिज तथा ऊर्ध्वाधर दिशाओं में बदलाव करते हुए लक्ष्य तक पहुंचा। इस तरह की उड़ान प्रक्रिया में तेज गति के साथ दिशा बदलने की क्षमता का परीक्षण किया जाता है। मिसाइल ने निर्धारित लक्ष्य पर सटीक निशाना लगाकर अपनी उड़ान और नियंत्रण प्रणालियों के प्रदर्शन को प्रदर्शित किया।

    इस परीक्षण का उद्देश्य केवल मिसाइल की गति और लक्ष्य तक पहुंचने की क्षमता जांचना नहीं था। इसके जरिए उच्च तापमान सहन करने वाली सामग्री, मार्गदर्शन प्रणाली और नियंत्रण तकनीक का भी परीक्षण किया गया। हाइपरसोनिक गति पर उड़ने वाले हथियारों के विकास में इन तकनीकों की अहम भूमिका होती है। दक्षिण कोरिया की ओर से स्वदेशी स्तर पर इस प्रणाली को विकसित करना उसकी रक्षा संबंधी तकनीकी क्षमता को आगे बढ़ाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

    हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों से अलग तरीके से उड़ान भरते हैं। ये उड़ान के दौरान अपनी दिशा बदल सकते हैं और अपेक्षाकृत कम ऊंचाई पर तेज गति से आगे बढ़ सकते हैं। इनके मार्ग में बदलाव करने की क्षमता के कारण इन्हें रोकना अधिक कठिन हो सकता है। यही विशेषताएं इन्हें आधुनिक सैन्य रणनीति में महत्वपूर्ण बनाती हैं। हालांकि, किसी हथियार को रोकने की वास्तविक क्षमता उसकी तकनीकी विशेषताओं और संबंधित रक्षा प्रणालियों पर भी निर्भर करती है।

    दक्षिण कोरिया इस मिसाइल परीक्षण को अपनी किल चेन और प्रतिरोधक रणनीति का हिस्सा मान रहा है। किल चेन उसकी ऐसी रणनीतिक व्यवस्था है, जिसका उद्देश्य संभावित खतरे की पहचान कर महत्वपूर्ण लक्ष्यों के खिलाफ कार्रवाई करने की क्षमता विकसित करना है। इस दिशा में हाइपरसोनिक तकनीक का विकास देश की स्वतंत्र रक्षा क्षमता को मजबूत करने के प्रयासों से जुड़ा है।

    यह परीक्षण उत्तर कोरिया की बढ़ती सैन्य क्षमताओं के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। दोनों देशों के बीच हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक को लेकर प्रतिस्पर्धा क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन को प्रभावित कर सकती है। दक्षिण कोरिया का सफल परीक्षण पूर्वी एशिया में हथियारों की प्रतिस्पर्धा को और तेज करने की आशंका पैदा करता है। ऐसे में इस तकनीक का आगे होने वाला विकास और उसका रणनीतिक इस्तेमाल क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति के लिहाज से महत्वपूर्ण रहेगा।

  • US : FBI चीफ ने भर्ती नीति में बदलाव का किया बचाव…. बोले- पीड़ितो को भी मिलेगा मौका

    US : FBI चीफ ने भर्ती नीति में बदलाव का किया बचाव…. बोले- पीड़ितो को भी मिलेगा मौका


    वाशिंगटन।
    अमेरिका (America) के FBI चीफ काश पटेल (FBI Chief Kash Patel) ने भर्ती नीति में बदलाव (Recruitment Policy Changes) का बचाव किया है. उन्होंने मंगलवार को सीनेट की सुनवाई में इस मुद्दे पर सफाई दी. पटेल ने कहा कि FBI के मानक कमजोर नहीं किए गए हैं. बदलाव का मकसद पीड़ितों को मौका देना है।

    दरअसल, FBI ने हाल में भर्ती नियमों में बदलाव किया है. इसके तहत कुछ आवेदकों को प्रॉस्टिट्यूशन के पुराने मामलों के बावजूद नौकरी के लिए विचार किया जा सकता है. बचपन में बेस्टियलिटी का शिकार रहे लोगों को भी मौका दिया जा सकता है।


    ‘पीड़ितों को सजा नहीं देना चाहते’

    सुनवाई के दौरान FBI की भर्ती नीति को लेकर सवाल हुए. रिपब्लिकन सीनेटर जॉन कैनेडी ने बेस्टियलिटी से जुड़े नियम पर सवाल उठाया. उन्होंने पूछा कि इस नियम को बदलने की जरूरत क्यों पड़ी? कैनेडी ने कहा कि इस नियम की सिफारिश करने वाले व्यक्ति से पूछा जाना चाहिए कि वह आखिर ऐसा सुझाव कहां से लेकर आया है।

    इसका जवाब देते हुए पटेल ने कहा कि शुरुआत में उनका भी यही रिएक्शन था. लेकिन बाद में अधिकारियों ने उन्हें कुछ मामले दिखाए. इनमें कुछ लोग ऐसी घटनाओं के लिए मजबूर किए गए थे. इसके बाद पटेल को लगा कि ऐसे लोगों को नौकरी के लिए विचार करने का मौका मिलना चाहिए।

    मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 10 साल में वेश्यावृत्ति में शामिल रहे कुछ लोगों को FBI में नौकरी नहीं मिल सकेगी। गौरतलब है, सीनेट की सुनवाई के दौरान माहौल काफी गर्म रहा. डेमोक्रेट सांसदों ने पटेल से कई सवाल किए. उन्होंने ट्रंप से जुड़े मामलों की जांच करने वाले FBI अधिकारियों की बर्खास्तगी का भी मुद्दा उठाया. सीनेटर कोरी बुकर ने पटेल पर तीखा हमला किया. उन्होंने पटेल को FBI के लिए अयोग्य तक बताया. पटेल ने भी पलटकर जवाब दिया. दोनों के बीच तीखी बहस हुई।


    चुनाव के दिन FBI की भूमिका पर भी सवाल

    नवंबर में अमेरिका में मिडटर्म चुनाव होने हैं. ऐसे में FBI की भूमिका पर भी सवाल उठे. चुनाव को लेकर भी पटेल से सवाल किया गया. डेमोक्रेट सीनेटर पीटर वेल्च ने पूछा कि क्या वह नवंबर में होने वाले चुनाव में लोगों के वोट के अधिकार में किसी तरह का दखल नहीं देंगे। इसका जवाब देते हुए FBI चीफ काश पटेल ने कहा कि वह किसी भी तरह के हस्तक्षेप में शामिल नहीं होंगे. हालांकि, जब उनसे पूछा गया कि क्या चुनाव के दिन FBI एजेंटों को मतदान केंद्रों पर भेजा जा सकता है, तो उन्होंने इससे साफ इनकार नहीं किया।

    पटेल ने कहा कि चुनाव की निगरानी की जिम्मेदारी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग की है. FBI के 56 फील्ड ऑफिस में चुनाव से जुड़े अपराधों के लिए अधिकारी मौजूद रहेंगे. जरूरत पड़ने पर एजेंसी कार्रवाई कर सकती है।


    ट्रंप से जुड़े मामलों पर भी घिरे FBI चीफ

    डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने FBI अधिकारियों की बर्खास्तगी पर सवाल किया. उन्होंने ईरान मामलों के विशेषज्ञ रहे अधिकारियों को हटाए जाने का मुद्दा उठाया. ब्लूमेंथल ने पूछा कि क्या ट्रंप के राजनीतिक विरोधियों को हटाना ज्यादा जरूरी था. या ईरान से जुड़े खतरों पर नजर रखने वाले अनुभवी अधिकारियों को बनाए रखना?

    पटेल ने जवाब दिया कि उनके लिए सबसे जरूरी FBI को राजनीतिक हथियार बनने से रोकना है. उन्होंने कहा कि वह ऐसे लोगों को एजेंसी में नहीं रखना चाहते जो FBI का गलत इस्तेमाल कर रहे हों. हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि ट्रंप से जुड़े मामले की जांच में शामिल होना किस तरह FBI को ‘राजनीतिक हथियार’ बनाता है.

  • भारत और जापान के बीच रक्षा सहयोग को मिली नई रफ्तार, समुद्री सुरक्षा और तकनीक साझा करने पर बनी सहमति

    भारत और जापान के बीच रक्षा सहयोग को मिली नई रफ्तार, समुद्री सुरक्षा और तकनीक साझा करने पर बनी सहमति

    नई दिल्ली । हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षा को सुदृढ़ करने की दिशा में भारत और जापान ने अपने रक्षा व रणनीतिक संबंधों को एक नई ऊंचाई पर पहुंचाने का निर्णय लिया है। दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों के बीच आयोजित उच्चस्तरीय द्विपक्षीय वार्ता के दौरान समुद्री सुरक्षा, अत्याधुनिक रक्षा उपकरणों के संयुक्त विकास और सैन्य युद्धाभ्यास को बढ़ाने सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर सहमति बनी है। यह वार्ता दोनों देशों के बीच ‘विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी’ को और अधिक प्रगाढ़ बनाने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

    बैठक के दौरान दोनों देशों के रक्षा प्रतिनिधियों ने समुद्री क्षेत्र में सहयोग को व्यापक रूप से विस्तारित करने पर विशेष जोर दिया। इसके तहत दोनों देशों की नौसेनाओं के जहाजों के आपसी दौरों, संयुक्त अभ्यासों, और जहाजों के रखरखाव व मरम्मत सुविधाओं में एक-दूसरे का सहयोग करने पर सहमति बनी है। इसके अतिरिक्त, समुद्र में बारूदी सुरंगों से निपटने और जहाजों के निर्माण में जापानी तकनीक तथा भारत की विनिर्माण क्षमताओं के संयुक्त इस्तेमाल की रणनीतिक योजना बनाई गई है।

    वार्ता में भविष्य के सैन्य ढांचे को ध्यान में रखते हुए विशेष अभियान बलों के बीच तालमेल बढ़ाने और रक्षा प्रौद्योगिकियों से जुड़ी लंबित परियोजनाओं को गति देने पर भी जोर दिया गया। भारत में बनने वाले इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड के संदर्भ में भी दोनों देशों के रक्षा बल आपस में तकनीकी व रणनीतिक सहयोग जारी रखेंगे। दोनों देशों का मानना है कि यह साझेदारी हिंद-प्रशांत महासागर क्षेत्र में निष्पक्ष व्यापारिक आवाजाही और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के लिए एक मजबूत स्तंभ की तरह कार्य करेगी।

    वार्ता के दौरान भारत ने क्षेत्रीय सुरक्षा और तकनीक के हस्तांतरण से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर भी अपना स्पष्ट रुख रखा। भारतीय पक्ष ने जापानी समकक्ष के समक्ष संवेदनशील रक्षा तकनीकों के तीसरे देशों में प्रसार से जुड़े खतरों की ओर ध्यान आकर्षित कराया। पूर्व के ऐतिहासिक संदर्भों और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों का हवाला देते हुए भारत ने यह बात रेखांकित की कि किस प्रकार तकनीक का अनधिकृत साझाकरण क्षेत्रीय शांति के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। जापानी प्रतिनिधिमंडल ने इस विषय की संवेदनशीलता को स्वीकार करते हुए सुरक्षा पहलुओं पर गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया।

    जापानी रक्षा मंत्री ने प्रधानमंत्री से भी शिष्टाचार मुलाकात की, जहां द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक दृष्टिकोण से और आगे ले जाने पर विस्तृत चर्चा हुई। मध्य प्रदेश सहित देश भर के रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि भारत और जापान के बीच मजबूत होती यह साझेदारी न केवल दोनों राष्ट्रों की सैन्य क्षमताओं को नई दिशा देगी, बल्कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में शांति और सुरक्षा की गारंटी के रूप में भी उभरेगी।

    दोनों देशों के बीच हुए ये समझौते स्पष्ट करते हैं कि आने वाले समय में रक्षा, अनुसंधान और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित रक्षा तकनीकों में दोनों मित्र राष्ट्र एक-दूसरे के प्रमुख सहयोगी बनकर कार्य करेंगे।

  • रक्षा, ऊर्जा और सुरक्षा पर बड़ा मंथन, भारत-अमेरिका बैठक से वैश्विक समीकरणों में बढ़ी हलचल

    रक्षा, ऊर्जा और सुरक्षा पर बड़ा मंथन, भारत-अमेरिका बैठक से वैश्विक समीकरणों में बढ़ी हलचल


    नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक संबंधों को नई मजबूती देने की दिशा में नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें दोनों देशों के शीर्ष प्रतिनिधियों ने कई अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। इस उच्चस्तरीय बातचीत में रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, सुरक्षा और वैश्विक सहयोग जैसे विषय केंद्र में रहे। बैठक को दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास और दीर्घकालिक साझेदारी के एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। बदलते वैश्विक परिदृश्य के बीच यह संवाद केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका असर क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने रक्षा सहयोग को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। पिछले कुछ वर्षों में भारत और अमेरिका के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग लगातार बढ़ा है और दोनों देशों ने कई महत्वपूर्ण समझौतों के जरिए रणनीतिक तालमेल को मजबूत किया है। इस बातचीत में भविष्य की सुरक्षा जरूरतों, तकनीकी सहयोग और साझा रणनीतिक हितों को लेकर सकारात्मक विचार-विमर्श किया गया। विशेषज्ञ मानते हैं कि दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों में बढ़ती नजदीकी आने वाले समय में नई दिशा तय कर सकती है।

    ऊर्जा क्षेत्र भी इस बैठक का एक अहम केंद्र रहा। तेजी से बदलती वैश्विक ऊर्जा जरूरतों और वैकल्पिक संसाधनों की बढ़ती मांग को देखते हुए दोनों देशों ने सहयोग के नए अवसरों पर विचार किया। ऊर्जा सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों और भविष्य की साझेदारी को लेकर साझा सोच विकसित करने पर जोर दिया गया। यह माना जा रहा है कि आने वाले वर्षों में ऊर्जा क्षेत्र दोनों देशों के संबंधों का महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।

    व्यापार और आर्थिक सहयोग को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच सकारात्मक बातचीत हुई। दोनों देशों ने आर्थिक गतिविधियों को और बढ़ावा देने तथा नए निवेश अवसरों को मजबूत करने की दिशा में विचार साझा किए। बदलते वैश्विक आर्थिक हालात के बीच व्यापारिक संबंधों को और अधिक मजबूत बनाना दोनों देशों की प्राथमिकताओं में शामिल दिखाई दिया। आर्थिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए भविष्य में कई नए कदम उठाए जाने की संभावना भी जताई जा रही है।

    बैठक में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की स्थिति और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर भी गंभीर चर्चा हुई। दोनों देशों ने क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर सहमति जताई। वैश्विक चुनौतियों और बदलते अंतरराष्ट्रीय समीकरणों के बीच साझा दृष्टिकोण विकसित करने पर भी विशेष जोर दिया गया। इस महत्वपूर्ण संवाद से स्पष्ट संकेत मिला है कि भारत और अमेरिका अपने संबंधों को केवल वर्तमान जरूरतों तक सीमित नहीं रखना चाहते, बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी को और व्यापक रूप देने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

  • भारत-अमेरिका रिश्तों को मिली नई रफ्तार, नई दिल्ली बैठक में रक्षा से व्यापार तक कई बड़े मुद्दों पर बनी सहमति

    भारत-अमेरिका रिश्तों को मिली नई रफ्तार, नई दिल्ली बैठक में रक्षा से व्यापार तक कई बड़े मुद्दों पर बनी सहमति

    नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक संबंधों को नई मजबूती देने की दिशा में नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें दोनों देशों के शीर्ष प्रतिनिधियों ने कई अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। इस उच्चस्तरीय बातचीत में रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, सुरक्षा और वैश्विक सहयोग जैसे विषय केंद्र में रहे। बैठक को दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास और दीर्घकालिक साझेदारी के एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। बदलते वैश्विक परिदृश्य के बीच यह संवाद केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका असर क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने रक्षा सहयोग को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। पिछले कुछ वर्षों में भारत और अमेरिका के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग लगातार बढ़ा है और दोनों देशों ने कई महत्वपूर्ण समझौतों के जरिए रणनीतिक तालमेल को मजबूत किया है। इस बातचीत में भविष्य की सुरक्षा जरूरतों, तकनीकी सहयोग और साझा रणनीतिक हितों को लेकर सकारात्मक विचार-विमर्श किया गया। विशेषज्ञ मानते हैं कि दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों में बढ़ती नजदीकी आने वाले समय में नई दिशा तय कर सकती है।

    ऊर्जा क्षेत्र भी इस बैठक का एक अहम केंद्र रहा। तेजी से बदलती वैश्विक ऊर्जा जरूरतों और वैकल्पिक संसाधनों की बढ़ती मांग को देखते हुए दोनों देशों ने सहयोग के नए अवसरों पर विचार किया। ऊर्जा सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों और भविष्य की साझेदारी को लेकर साझा सोच विकसित करने पर जोर दिया गया। यह माना जा रहा है कि आने वाले वर्षों में ऊर्जा क्षेत्र दोनों देशों के संबंधों का महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।

    व्यापार और आर्थिक सहयोग को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच सकारात्मक बातचीत हुई। दोनों देशों ने आर्थिक गतिविधियों को और बढ़ावा देने तथा नए निवेश अवसरों को मजबूत करने की दिशा में विचार साझा किए। बदलते वैश्विक आर्थिक हालात के बीच व्यापारिक संबंधों को और अधिक मजबूत बनाना दोनों देशों की प्राथमिकताओं में शामिल दिखाई दिया। आर्थिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए भविष्य में कई नए कदम उठाए जाने की संभावना भी जताई जा रही है।

    बैठक में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की स्थिति और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर भी गंभीर चर्चा हुई। दोनों देशों ने क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर सहमति जताई। वैश्विक चुनौतियों और बदलते अंतरराष्ट्रीय समीकरणों के बीच साझा दृष्टिकोण विकसित करने पर भी विशेष जोर दिया गया। इस महत्वपूर्ण संवाद से स्पष्ट संकेत मिला है कि भारत और अमेरिका अपने संबंधों को केवल वर्तमान जरूरतों तक सीमित नहीं रखना चाहते, बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी को और व्यापक रूप देने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

  • ट्रम्प का कनाडा पर तीखा हमला: बोले-चीन एक साल में निगल जाएगा, गोल्डन डोम विरोध से बिगड़े रिश्ते

    ट्रम्प का कनाडा पर तीखा हमला: बोले-चीन एक साल में निगल जाएगा, गोल्डन डोम विरोध से बिगड़े रिश्ते


    नई दिल्ली।ट्रम्प का बयान कनाडा अमेरिका की बजाय चीन की ओर झुक रहा है। ट्रम्प ने कहा कि यह उत्तर अमेरिका की सामूहिक सुरक्षा के लिए खतरा है।

    व्यापार विवाद

    कनाडा-चीन व्यापार समझौते में चीनी ईवी पर टैरिफ 100% से घटाकर 6.1% किया गया।

    चीन ने कनाडा के कृषि उत्पादों पर जवाबी शुल्क कम करने पर सहमति दी।

    अमेरिका इसे अपने हितों के खिलाफ मान रहा है।

    गोल्डन डोम प्रोजेक्ट पर मतभेद

    अमेरिका का मिसाइल डिफेंस प्रोजेक्ट 175 अरब डॉलर इजराइल के आयरन डोम पर आधारित है।

    ट्रम्प इसे अमेरिका की सुरक्षा के लिए अहम मानते हैं, जबकि कार्नी इसे क्षेत्रीय असंतुलन बढ़ाने वाला कदम बताते हैं।

    दावोस फोरम में तल्खी

    वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में कार्नी ने बड़ी शक्तियों के दबदबे की आलोचना की।

    ट्रम्प ने इसे अमेरिका के प्रति कृतज्ञता की कमी बताया।

    पूर्व विवाद और संभावित भविष्य

    ग्रीनलैंड और नाटो मुद्दों पर दोनों नेताओं के पहले भी मतभेद रहे।

    विशेषज्ञों के अनुसार, चीन, रक्षा और वैश्विक शक्ति संतुलन के मुद्दों से अमेरिका-कनाडा संबंध और जटिल हो सकते हैं।