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  • गर्मी से बचाव: तेज धूप और लू में कैसे रखें सेहत का ध्यान, जानिए आसान टिप्स

    गर्मी से बचाव: तेज धूप और लू में कैसे रखें सेहत का ध्यान, जानिए आसान टिप्स


    नई दिल्ली । भारत के कई हिस्सों में तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है और गर्म हवाओं यानी लू का असर भी लोगों की सेहत पर साफ दिखाई दे रहा है। गर्मियों के मौसम में सबसे ज्यादा परेशानी डिहाइड्रेशन, हीट स्ट्रोक, थकान और स्किन से जुड़ी समस्याओं की होती है। ऐसे में जरूरी है कि हम अपने रोजमर्रा के जीवन में कुछ छोटे बदलाव करके खुद को सुरक्षित रखें। विशेषज्ञों के अनुसार गर्मी में शरीर का तापमान संतुलित रखना सबसे जरूरी होता है। इसके लिए सही खानपान, पर्याप्त पानी और हल्का आहार बेहद जरूरी है।

    हाइड्रेशन है सबसे जरूरी कदम
    गर्मी में शरीर को सबसे ज्यादा पानी की जरूरत होती है। दिनभर में कम से कम 8 से 10 गिलास पानी जरूर पिएं। इसके अलावा नारियल पानी, नींबू पानी, छाछ और फलों का रस शरीर को ठंडक देने में मदद करते हैं।

    खीरा, तरबूज और संतरा जैसे फल गर्मियों में शरीर को हाइड्रेट रखते हैं और ऊर्जा भी बनाए रखते हैं। कैफीन और ज्यादा शुगर वाले ड्रिंक्स से बचना चाहिए क्योंकि ये शरीर को और ज्यादा डिहाइड्रेट कर सकते हैं।

     घरेलू उपाय जो गर्मी में देंगे राहत
    गर्मी से राहत पाने के लिए कुछ आसान घरेलू उपाय भी बहुत फायदेमंद होते हैं। जैसे रात को सोने से पहले गुलाब जल और ठंडे पानी से चेहरा धोना त्वचा को ठंडक देता है। पुदीना और बेल का शरबत शरीर को अंदर से ठंडा रखता है। वहीं एलोवेरा जूस और सत्तू भी गर्मी में ऊर्जा बनाए रखने में मदद करते हैं।

     कपड़ों का चुनाव भी है अहम
    गर्मी में हल्के और ढीले कपड़े पहनना सबसे बेहतर होता है। कॉटन के कपड़े शरीर को हवा लगने देते हैं और पसीना सोख लेते हैं। गहरे रंगों की जगह हल्के रंग जैसे सफेद, हल्का नीला या हरा पहनना ज्यादा आरामदायक रहता है।

    गर्मी में किन गलतियों से बचें
    दोपहर 12 बजे से 4 बजे तक धूप में बाहर निकलने से बचना चाहिए क्योंकि इस समय लू का खतरा सबसे ज्यादा होता है। खाली पेट बाहर जाना या बिना पानी पिए लंबे समय तक रहना भी नुकसानदायक हो सकता है। ज्यादा मसालेदार और तला हुआ खाना गर्मी में पाचन पर असर डालता है, इसलिए हल्का और ताजा भोजन लेना चाहिए।

    गर्मी का मौसम चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन सही सावधानियों और जीवनशैली में छोटे बदलाव करके इसे आरामदायक बनाया जा सकता है। शरीर को हाइड्रेट रखना, सही खानपान और धूप से बचाव ही गर्मी से बचने का सबसे आसान तरीका है।

  • भीषण गर्मी से बचाव: हीट वेव में सुरक्षित रहने के आसान और असरदार तरीके

    भीषण गर्मी से बचाव: हीट वेव में सुरक्षित रहने के आसान और असरदार तरीके


    नई दिल्ली । देश के कई हिस्सों में तापमान लगातार बढ़ रहा है और हीट वेव की स्थिति लोगों की सेहत के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण डिहाइड्रेशन, लू लगना, चक्कर आना, कमजोरी और यहां तक कि गंभीर मामलों में हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।
    विशेषज्ञों के अनुसार, गर्मी के इस चरम मौसम में थोड़ी सी लापरवाही भी स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकती है। इसलिए घर से बाहर निकलने से पहले कुछ जरूरी सावधानियां अपनाना बेहद महत्वपूर्ण है।

     शरीर को हाइड्रेट रखना सबसे जरूरी कदम
    गर्मी में सबसे पहले ध्यान रखने वाली बात है पर्याप्त पानी पीना। शरीर में पानी की कमी होने से डिहाइड्रेशन और लू लगने का खतरा बढ़ जाता है। घर से बाहर निकलने से पहले पानी जरूर पिएं और साथ में बोतल भी रखें। इसके अलावा नींबू पानी, छाछ या ओआरएस का सेवन भी शरीर को ठंडा और हाइड्रेटेड रखने में मदद करता है।

    हल्के और ढीले कपड़े पहनें
    गर्मी में तंग और गहरे रंग के कपड़े शरीर की गर्मी बढ़ा सकते हैं। इसलिए सूती, हल्के और ढीले कपड़े पहनना बेहतर होता है। सफेद या हल्के रंग के कपड़े धूप को कम अवशोषित करते हैं और शरीर को ठंडा रखने में मदद करते हैं।

    धूप से बचाव के लिए जरूरी सुरक्षा
    घर से बाहर निकलते समय सिर को ढकना बेहद जरूरी है। इसके लिए छाता, टोपी या स्कार्फ का उपयोग करें। साथ ही सनग्लासेज पहनने से आंखों को तेज धूप से सुरक्षा मिलती है। सीधे सूरज की रोशनी में लंबे समय तक रहने से बचें, खासकर दोपहर 12 से 4 बजे के बीच।

    हल्का और ताजा खाना खाएं
    गर्मी में भारी और मसालेदार भोजन शरीर में गर्मी बढ़ा सकता है। इसलिए हल्का और ताजा भोजन करें।
    फल, सलाद, दही और तरल पदार्थों को डाइट में शामिल करें ताकि शरीर को जरूरी पोषण भी मिले और गर्मी से राहत भी।

    लू लगने के लक्षण पहचानना जरूरी
    अगर किसी व्यक्ति को तेज सिरदर्द, उल्टी, चक्कर, अत्यधिक पसीना या कमजोरी महसूस हो तो यह लू के संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत ठंडी जगह पर जाएं, पानी पिएं और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से संपर्क करें।

    सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है
    हीट वेव के दौरान थोड़ी सी सावधानी आपको गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बचा सकती है। पर्याप्त पानी पीना, सही कपड़े पहनना, धूप से बचाव और हल्का भोजन करना जैसी आदतें अपनाकर आप गर्मी के कहर से खुद को सुरक्षित रख सकते हैं।

  • भीषण गर्मी में श्रमिकों की सेहत पर खतरा, हीटवेव से बचाव के लिए जरूरी सावधानियां

    भीषण गर्मी में श्रमिकों की सेहत पर खतरा, हीटवेव से बचाव के लिए जरूरी सावधानियां

    नई दिल्ली। देशभर में बढ़ती भीषण गर्मी और लू के प्रकोप ने आम जनजीवन को प्रभावित किया है, लेकिन इसका सबसे ज्यादा असर उन श्रमिकों पर पड़ रहा है जो खुले आसमान के नीचे काम करने को मजबूर हैं। अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस के अवसर पर यह मुद्दा और अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है कि मेहनतकश वर्ग को केवल अधिकार और सम्मान ही नहीं, बल्कि सुरक्षित और स्वस्थ कार्य वातावरण भी मिलना चाहिए।
    तेज धूप और बढ़ते तापमान के बीच निर्माण कार्य, खेतों में मेहनत और सड़कों पर काम करने वाले मजदूर सबसे ज्यादा जोखिम में हैं। दिनभर की कड़ी मेहनत के दौरान वे सीधे सूर्य की गर्मी के संपर्क में आते हैं, जिससे उनके शरीर पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। लू लगने की स्थिति में चक्कर आना, उल्टी, तेज बुखार और बेहोशी जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं, जो समय पर इलाज न मिलने पर खतरनाक साबित हो सकते हैं।
    विशेषज्ञों के अनुसार, हीटवेव से बचाव के लिए सबसे जरूरी है कि श्रमिक अपने काम के दौरान कुछ बुनियादी सावधानियों को अपनाएं। जहां तक संभव हो, काम छाया में किया जाए और अगर धूप में काम करना अनिवार्य हो, तो सिर को अच्छी तरह ढककर रखा जाए। टोपी, गमछा या हल्के कपड़े का इस्तेमाल शरीर को सीधे धूप से बचाने में मदद करता है।
    पानी का पर्याप्त सेवन भी इस मौसम में बेहद जरूरी है। शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए नियमित अंतराल पर पानी पीते रहना चाहिए, भले ही प्यास न लगी हो। छोटे-छोटे घूंट में पानी पीना शरीर के लिए ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। इसके विपरीत, ज्यादा मीठे या कैफीन युक्त पेय पदार्थों से दूरी बनाना बेहतर होता है, क्योंकि ये शरीर में पानी की कमी को बढ़ा सकते हैं।
    कपड़ों का चयन भी गर्मी से बचाव में अहम भूमिका निभाता है। हल्के रंग के ढीले और सूती कपड़े पहनने से शरीर को ठंडक मिलती है और पसीना आसानी से सूखता है। लगातार लंबे समय तक धूप में काम करने से बचना चाहिए और हर कुछ समय बाद थोड़ी देर आराम करना जरूरी होता है। यह शरीर को संतुलित रखने में मदद करता है और थकान को कम करता है।
    खानपान पर भी ध्यान देना उतना ही आवश्यक है। हल्का और सुपाच्य भोजन शरीर को गर्मी से लड़ने में मदद करता है, जबकि ज्यादा तला-भुना या मसालेदार खाना शरीर के तापमान को और बढ़ा सकता है। ऐसे में संतुलित आहार अपनाना जरूरी है।
    यदि किसी श्रमिक में लू के लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत उसे छाया में ले जाकर ठंडक पहुंचानी चाहिए और आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध करानी चाहिए। समय पर उपचार मिलने से गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है।
    इस समय यह भी जरूरी है कि नियोक्ता और संबंधित संस्थाएं श्रमिकों के लिए पर्याप्त सुविधाएं सुनिश्चित करें। काम के घंटों में लचीलापन, पीने के पानी की उपलब्धता और आराम के लिए छाया जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराना उनकी जिम्मेदारी है। जागरूकता और सहयोग के माध्यम से ही श्रमिकों को इस भीषण गर्मी से सुरक्षित रखा जा सकता है।
  • गर्मी बढ़ते ही बढ़ा हीट स्ट्रोक का खतरा, जानिए कैसे करें बचाव और रखें सेहत सुरक्षित

    गर्मी बढ़ते ही बढ़ा हीट स्ट्रोक का खतरा, जानिए कैसे करें बचाव और रखें सेहत सुरक्षित


    नई दिल्ली। देशभर के कई राज्यों में तापमान लगातार बढ़ रहा है और गर्म हवाओं (लू) ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में गर्मी और तेज हो सकती है, जिससे हीट स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे में लापरवाही भारी पड़ सकती है और सेहत पर गंभीर असर देखने को मिल सकता है।

    गर्मी का यह मौसम शरीर को तेजी से डिहाइड्रेट करता है, जिससे थकान, कमजोरी और चक्कर जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मौसम में सतर्क रहना और समय पर सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।

     हीट स्ट्रोक के शुरुआती लक्षण पहचानना जरूरी

    हीट स्ट्रोक या हीट एग्जॉर्शन की स्थिति अचानक गंभीर रूप ले सकती है। इसके शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।

    इन लक्षणों पर विशेष ध्यान दें-

    अचानक कमजोरी या अस्वस्थ महसूस होना
    चक्कर आना
    ज्यादा पसीना आना या पसीना अचानक बंद हो जाना
    मांसपेशियों में ऐंठन
    शरीर का तापमान बढ़ना

    यदि ये लक्षण दिखाई दें तो तुरंत सावधानी बरतना जरूरी है, वरना स्थिति गंभीर हो सकती है।

     हीट स्ट्रोक से बचाव के जरूरी उपाय

    गर्मी में खुद को सुरक्षित रखने के लिए कुछ आसान लेकिन प्रभावी उपाय अपनाए जा सकते हैं-

    ठंडी जगह पर रहें
    अगर अस्वस्थ महसूस हो तो तुरंत छायादार या ठंडी जगह पर जाएं।
    शरीर को हाइड्रेट रखें
    भरपूर पानी पिएं और इलेक्ट्रोलाइट्स का सेवन करें।
     ORS और घरेलू पेय का सेवन करें

    नींबू पानी, छाछ, नमक-शक्कर का घोल और ओआरएस शरीर में ऊर्जा और पानी की कमी को पूरा करते हैं।

    हल्के कपड़े पहनें

    ढीले और सूती कपड़े शरीर को ठंडा रखने में मदद करते हैं।

     हीट स्ट्रोक होने पर क्या करें?

    यदि किसी व्यक्ति को हीट स्ट्रोक हो जाए तो तुरंत ये कदम उठाएं-

    व्यक्ति को ठंडी और हवादार जगह पर ले जाएं
    शरीर को ठंडा करने के उपाय करें
    तरल पदार्थ पिलाएं (अगर होश में हो)
    लक्षण गंभीर होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें

    गर्मी का मौसम जितना सामान्य दिखता है, उतना ही खतरनाक भी हो सकता है। हीट स्ट्रोक जैसी स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है, लेकिन सही जानकारी और समय पर सावधानी से इससे बचा जा सकता है। शरीर को हाइड्रेट रखना, धूप से बचाव करना और शुरुआती लक्षणों को पहचानना इस मौसम में सबसे जरूरी कदम हैं।

  • गर्मी में खाली पेट बाहर निकलना पड़ सकता है भारी, जानें जरूरी सावधानियां

    गर्मी में खाली पेट बाहर निकलना पड़ सकता है भारी, जानें जरूरी सावधानियां


    नई दिल्ली घर में नवजात शिशु का जन्म खुशियों की सौगात लेकर आता है, लेकिन इस खुशी के पीछे कई बार ऐसी बुद्धिमान छिपी होती हैं, जिन पर अक्सर ध्यान नहीं जाता। आमतौर पर ‘पोस्टपार्टम डिप्रेशन’ को सिर्फ मां से जुड़कर देखा जाता है, लेकिन अब एक नई स्टडी ने इस धारणा को बदल दिया है। JAMA Network Open में प्रकाशित शोध के अनुसार, बच्चे के जन्म के बाद पिता भी मानसिक तनाव और डिप्रेशन का सामना करते हैं। यह समस्या जन्म के तुरंत बाद नहीं, बल्कि 9 से 12 महीने के भीतर ज्यादा गंभीर रूप ले सकती है, जब गर्भधारण का दबाव बढ़ जाता है।

    स्वीडन में किए गए इस बड़े अध्ययन में करीब 10 लाख पिताओं के डेटा का विश्लेषण किया गया। शोध में सामने आया कि शुरुआती महीनों में पिता लगातार सामान्य नजर आते हैं, क्योंकि उनका पूरा ध्यान मां और बच्चे की देखभाल पर होता है। वे अपनी थकान, मानसिक दबाव और भावनात्मक उतार-चढ़ाव को नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता है, काम और परिवार के बीच संतुलन बनाना कठिन हो जाता है। नींद की कमी, आर्थिक जिम्मेदारियां और बदलावों का दबाव धीरे-धीरे मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। यही कारण है कि बच्चे के जन्म के लगभग एक साल के भीतर डिप्रेशन और तनाव का खतरा 30 प्रतिशत से ज़्यादा बढ़ जाता है।

    शोध में यह भी सामने आया कि पुरुष अपनी भावनाओं को खुलकर व्यक्त नहीं कर समझता। सामाजिक दबाव और ‘मजबूत बने रहने’ की सोच के कारण वे अपनी मानसिक स्थिति के बारे में बात करने से बचते हैं। यही कारण है कि समस्या गंभीर होने तक पहचान में नहीं आती। दिव्यांगों का मानना ​​है कि यदि समय रहते इस स्थिति को समझा जाए और सही समर्थन दिया जाए, तो पिता भी इस दौर से आसानी से निकल सकते हैं। परिवार और समाज को चाहिए कि वे पिता की भावनाओं को समझें और उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखने में सहयोग करें।

    दिव्यांगों के अनुसार, पिता को अपनी दिनचर्या में संतुलन बनाए रखना चाहिए, पर्याप्त नींद लेने की कोशिश करनी चाहिए और ज़रूरत पड़ने पर सहकर्मियों या प्रोफेशनल मदद लेने से बढ़ना नहीं चाहिए। साथ ही, पार्टनर के साथ खुलकर बातचीत करना और दिव्यांगों को साझा करना भी इस समस्या को कम करने में मददगार साबित हो सकता है। यह अध्ययन इस बात का स्पष्ट संकेत देता है कि नवजात के जन्म के बाद मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल सिर्फ मां ही नहीं, बल्कि पिता के लिए भी उतनी ही जरूरी है।