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  • थकी हुई आंखें और गहरे काले घेरे बन रहे हैं परेशानी, एक्सपर्ट्स ने बताए कारण और आसान बचाव

    थकी हुई आंखें और गहरे काले घेरे बन रहे हैं परेशानी, एक्सपर्ट्स ने बताए कारण और आसान बचाव

    नई दिल्ली । गर्मियों का मौसम केवल त्वचा पर ही नहीं बल्कि आंखों के आसपास की नाजुक त्वचा पर भी गहरा प्रभाव डालता है। इस दौरान कई लोगों को आंखों के नीचे सूजन, काले घेरे और चेहरे पर लगातार थकान जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अक्सर लोग इसे केवल कम नींद का परिणाम मानते हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे कई अन्य कारण भी जिम्मेदार हो सकते हैं। बढ़ता तापमान, शरीर में पानी की कमी, अत्यधिक स्क्रीन टाइम और धूप के सीधे संपर्क जैसी स्थितियां आंखों के आसपास की त्वचा को प्रभावित करती हैं।

    आंखों के नीचे मौजूद त्वचा शरीर के अन्य हिस्सों की तुलना में अधिक पतली और संवेदनशील होती है। यही वजह है कि शरीर में होने वाले छोटे बदलाव भी यहां जल्दी दिखाई देने लगते हैं। गर्मियों में अधिक पसीना निकलने से शरीर में पानी की कमी होने लगती है। जब शरीर पर्याप्त रूप से हाइड्रेट नहीं रहता, तब आंखों के आसपास की त्वचा बेजान और थकी हुई दिखाई देने लगती है। इसके साथ ही सूजन की समस्या भी बढ़ सकती है।

    विशेषज्ञ बताते हैं कि आंखों के आसपास होने वाली सूजन को चिकित्सकीय भाषा में पेरिऑर्बिटल पफीनेस कहा जाता है। इस स्थिति में आंखों के आसपास के ऊतकों में अतिरिक्त द्रव जमा हो जाता है। अधिक नमक का सेवन, पर्याप्त आराम न मिलना, लगातार मोबाइल या कंप्यूटर स्क्रीन का उपयोग और मौसम संबंधी प्रभाव इस समस्या को बढ़ा सकते हैं। कई बार सुबह उठने के बाद यह सूजन अधिक स्पष्ट दिखाई देती है।

    डार्क सर्कल की समस्या भी आज बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित कर रही है। इसके पीछे केवल थकान ही जिम्मेदार नहीं होती। शरीर में पानी की कमी, अनियमित नींद, तनाव, बढ़ती उम्र और धूप के कारण होने वाला पिगमेंटेशन भी इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं। गर्मियों में तेज अल्ट्रावायलेट किरणों के संपर्क में आने से आंखों के नीचे की त्वचा में मेलानिन का उत्पादन बढ़ सकता है, जिससे काले घेरे अधिक गहरे दिखाई देने लगते हैं।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ सरल उपायों को अपनाकर इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। आंखों पर ठंडी सिकाई करने से सूजन कम करने में मदद मिलती है। ठंडे खीरे के टुकड़े, ठंडे चम्मच या ठंडे जेल आई मास्क का उपयोग आंखों को आराम पहुंचा सकता है। इससे रक्त वाहिकाएं सिकुड़ती हैं और सूजन में राहत मिलती है।

    ग्रीन टी या ब्लैक टी बैग्स का उपयोग भी लाभदायक माना जाता है। इनमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और कैफीन आंखों के आसपास की सूजन को अस्थायी रूप से कम करने में सहायक हो सकते हैं। हालांकि इनका उपयोग करने से पहले उन्हें अच्छी तरह ठंडा करना आवश्यक है।

    गर्मियों में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना सबसे महत्वपूर्ण उपायों में से एक है। विशेषज्ञ दिनभर नियमित अंतराल पर पानी पीने और पानी से भरपूर फलों को आहार में शामिल करने की सलाह देते हैं। खीरा, तरबूज, संतरा और नारियल पानी शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करते हैं। इससे त्वचा में नमी बनी रहती है और आंखों के नीचे की थकान कम दिखाई देती है।

    संतुलित आहार और सीमित नमक सेवन भी आंखों की सूजन को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अत्यधिक नमक शरीर में द्रव को रोककर सूजन बढ़ा सकता है। इसके अलावा प्रतिदिन सात से आठ घंटे की गुणवत्तापूर्ण नींद लेना भी आवश्यक माना जाता है। पर्याप्त नींद त्वचा की मरम्मत और रक्त संचार को बेहतर बनाने में मदद करती है।

    धूप से बचाव भी बेहद जरूरी है। बाहर निकलते समय UV सुरक्षा वाले सनग्लासेस और उपयुक्त सनस्क्रीन का उपयोग आंखों के आसपास की त्वचा को नुकसान से बचा सकता है। इससे पिगमेंटेशन और समय से पहले त्वचा की उम्र बढ़ने जैसी समस्याओं का खतरा भी कम होता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार यदि आंखों की सूजन लंबे समय तक बनी रहे, दर्द, लालिमा, खुजली या अचानक एक आंख में अधिक सूजन दिखाई दे तो इसे सामान्य समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षण किसी एलर्जी, संक्रमण, थायराइड संबंधी परेशानी या अन्य स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकते हैं, जिनके लिए चिकित्सकीय सलाह आवश्यक होती है।

  • 45°C की आग उगलती गर्मी में ऐसे बचाएं खुद को, नौतपा में भूलकर भी न करें ये गलतियां

    45°C की आग उगलती गर्मी में ऐसे बचाएं खुद को, नौतपा में भूलकर भी न करें ये गलतियां


    नई दिल्ली । नौतपा के नौ दिन साल के सबसे गर्म दिनों में गिने जाते हैं। इस दौरान सूरज की किरणें सीधे धरती पर पड़ती हैं और तापमान कई शहरों में 40 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। तेज धूप, गर्म हवाएं और लू शरीर पर तेजी से असर डालती हैं। ऐसे में थोड़ी सी लापरवाही भी डीहाइड्रेशन, हीट एग्जॉशन और हीट स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याओं की वजह बन सकती है। खासकर उन लोगों के लिए खतरा ज्यादा बढ़ जाता है जिन्हें रोजमर्रा के काम, नौकरी, व्यापार या यात्रा के कारण घर से बाहर निकलना पड़ता है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक नौतपा में सबसे जरूरी है कि शरीर को ज्यादा गर्म होने से बचाया जाए और पानी की कमी न होने दी जाए। डॉक्टरों का कहना है कि अगर सही सावधानी बरती जाए तो इस भीषण गर्मी के असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

    घर से बाहर निकलते समय कुछ जरूरी चीजें हमेशा साथ रखनी चाहिए। पानी की बोतल, ORS या ग्लूकोज, छाता या टोपी, सनग्लास, गमछा या कॉटन कपड़ा, हल्का स्नैक और जरूरी दवाइयां साथ रखना बेहद जरूरी माना गया है। धूप में निकलते समय सिर और चेहरे को ढंकना लू से बचाने में काफी मदद करता है।

    नौतपा के दौरान सुबह 6 बजे से 10 बजे तक और शाम 5 बजे के बाद बाहर निकलना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है। दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक का समय सबसे ज्यादा खतरनाक होता है। इस दौरान गर्म हवाएं और तेज धूप शरीर का तापमान तेजी से बढ़ा देती हैं। यदि जरूरी काम न हो तो इस समय बाहर निकलने से बचना चाहिए।

    पैदल चलने वालों और बाइक सवारों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होती है। बाइक चलाते समय फुल स्लीव कपड़े, ग्लव्स और हेलमेट का इस्तेमाल करें। हेलमेट के अंदर कॉटन का कपड़ा लगाने से सिर जल्दी गर्म नहीं होता। वहीं पैदल चलने वाले लोग बीच-बीच में छांव में रुककर आराम करें और हर 20 से 30 मिनट में पानी पीते रहें। खाली पेट बाहर निकलना भी खतरनाक हो सकता है।

    डॉक्टरों के अनुसार कुछ शारीरिक संकेतों को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लगातार सिरदर्द, चक्कर आना, ज्यादा पसीना आना या अचानक पसीना बंद हो जाना, तेज कमजोरी, उल्टी, सांस लेने में दिक्कत, शरीर का तापमान बढ़ना, बेहोशी या दिल की धड़कन तेज होना हीट स्ट्रोक के संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत छांव या ठंडी जगह पर जाएं और मेडिकल मदद लें।

    नौतपा में सिर्फ पानी पीना काफी नहीं होता। शरीर से पसीने के साथ जरूरी मिनरल्स भी निकल जाते हैं। इसलिए ORS, नींबू पानी, छाछ, नारियल पानी और बेल या आम पना जैसे देसी पेय शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करते हैं। बहुत ज्यादा चाय, कॉफी, शराब और कोल्ड ड्रिंक्स से बचना चाहिए क्योंकि ये शरीर में पानी की कमी बढ़ा सकते हैं।

    बच्चों और बुजुर्गों को इस मौसम में खास देखभाल की जरूरत होती है। बच्चों को धूप में खेलने से बचाएं और उन्हें बार-बार पानी या तरल पदार्थ देते रहें। वहीं बुजुर्गों को लंबे समय तक गर्मी में न रहने दें। जिन लोगों को ब्लड प्रेशर, शुगर, हार्ट या सांस की बीमारी है उन्हें अतिरिक्त सतर्क रहने की जरूरत है।

    नौतपा के दौरान लाइफस्टाइल में भी बदलाव जरूरी है। हल्का और सुपाच्य भोजन करें। तरबूज, खरबूजा, खीरा, ककड़ी और मौसमी फल डाइट में शामिल करें। ढीले और सूती कपड़े पहनें ताकि शरीर में हवा का संचार बना रहे। पर्याप्त नींद और आराम भी शरीर को गर्मी से लड़ने की ताकत देता है। विशेषज्ञों का कहना है कि नौतपा को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है। सही सावधानी और जागरूकता ही इस भीषण गर्मी में सबसे बड़ा बचाव है।

  • बार-बार थकान महसूस हो रही है? गर्मी में शरीर दे रहा है ये चेतावनी संकेत

    बार-बार थकान महसूस हो रही है? गर्मी में शरीर दे रहा है ये चेतावनी संकेत


    नई दिल्ली । भीषण गर्मी के बीच कई लोग लगातार थकान, कमजोरी और सांस फूलने जैसी समस्याओं से परेशान हो रहे हैं। अक्सर इसे मौसम का असर मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है, लेकिन डॉक्टरों के मुताबिक यह केवल गर्मी की वजह नहीं, बल्कि शरीर में छिपी किसी गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकता है।

    डिहाइड्रेशन बन रहा सबसे बड़ा कारण
    गर्मियों में पसीने के जरिए शरीर से पानी और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स तेजी से बाहर निकल जाते हैं। अगर समय पर पानी न पिया जाए तो डिहाइड्रेशन हो सकता है, जिससे सिरदर्द, चक्कर आना, कमजोरी और लगातार थकान महसूस होने लगती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि प्यास लगने का इंतजार न करें, बल्कि थोड़ी-थोड़ी देर में पानी, नारियल पानी या नींबू पानी लेते रहें।

    खून की कमी यानी एनीमिया भी वजह
    लगातार थकान और कमजोरी का एक बड़ा कारण शरीर में आयरन की कमी यानी एनीमिया भी हो सकता है। खासकर महिलाओं में यह समस्या ज्यादा देखी जाती है। इसमें ऑक्सीजन शरीर तक सही तरीके से नहीं पहुंच पाती, जिससे जल्दी थकान, चक्कर आना, चेहरे पर पीलापन और हाथ-पैर ठंडे रहने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।

    डायबिटीज और थायरॉयड का संकेत भी संभ
    डॉक्टरों के अनुसार अगर थकान के साथ ज्यादा प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना या अचानक वजन कम होना जैसे लक्षण दिखें, तो यह डायबिटीज का संकेत हो सकता है। वहीं थायरॉयड की समस्या में शरीर सुस्त रहता है और व्यक्ति हर समय थका हुआ महसूस करता है।

    नींद और तनाव भी बढ़ा रहे समस्या
    लगातार मोबाइल का इस्तेमाल, देर रात तक जागना और 6–7 घंटे से कम नींद लेना भी शरीर की ऊर्जा को कम करता है। इसके साथ तनाव और मानसिक दबाव शरीर को अंदर से कमजोर बना देते हैं, जिससे थकान और बढ़ जाती है।

    गलत खानपान भी बड़ी वजह
    गर्मियों में जंक फूड, ज्यादा तला-भुना खाना और मीठे ड्रिंक्स शरीर को अस्थायी राहत तो देते हैं, लेकिन पोषण नहीं देते। इसके बजाय हल्का, ताजा और पौष्टिक आहार जैसे फल, दही, सलाद और घर का खाना ज्यादा फायदेमंद होता है।

    कब हो जाएं सतर्क?
    अगर कई दिनों तक लगातार थकान बनी रहे, रोजमर्रा के काम करना मुश्किल लगे या कमजोरी बढ़ती जाए, तो इसे हल्के में न लें और डॉक्टर से जांच जरूर करवाएं। समय पर जांच और सही जीवनशैली अपनाकर कई गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है।

  • शरीर में पानी की कमी बढ़ा सकती है कई गंभीर समस्याएं, जानें इसके संकेत और बचाव

    शरीर में पानी की कमी बढ़ा सकती है कई गंभीर समस्याएं, जानें इसके संकेत और बचाव


    नई दिल्ली। शरीर का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा पानी से बना होता है, इसलिए इसका संतुलन बनाए रखना अच्छे स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी माना जाता है। जब शरीर में पानी की कमी हो जाती है, तो इसे डिहाइड्रेशन कहा जाता है, जो धीरे-धीरे कई शारीरिक और मानसिक समस्याओं का कारण बन सकता है।

    पानी की कमी का सबसे पहला असर शरीर की ऊर्जा पर पड़ता है। व्यक्ति को लगातार थकान, कमजोरी और सुस्ती महसूस हो सकती है। कई मामलों में ध्यान केंद्रित करने में भी दिक्कत आने लगती है, जिससे रोजमर्रा के काम प्रभावित हो सकते हैं।

    त्वचा पर भी डिहाइड्रेशन का सीधा असर दिखाई देता है। पानी की कमी से त्वचा रूखी, बेजान और डल हो सकती है। साथ ही होंठ फटने और आंखों के नीचे काले घेरे बढ़ने की समस्या भी देखी जा सकती है।

    पाचन तंत्र पर भी इसका असर पड़ता है। पर्याप्त पानी न पीने से कब्ज, पेट भारी लगना और अपच जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। पानी आंतों के सुचारू कामकाज में अहम भूमिका निभाता है, इसलिए इसकी कमी पाचन को धीमा कर देती है।

    इसके अलावा, शरीर में पानी की कमी से सिरदर्द और चक्कर आने की समस्या भी हो सकती है। गंभीर स्थिति में डिहाइड्रेशन रक्तचाप को प्रभावित कर सकता है, जिससे स्वास्थ्य जोखिम बढ़ जाता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना जरूरी है। आमतौर पर 7-8 गिलास पानी रोजाना पीने की सलाह दी जाती है, हालांकि यह व्यक्ति की उम्र, मौसम और शारीरिक गतिविधि पर निर्भर करता है।

    पानी की कमी से बचने के लिए सिर्फ सादा पानी ही नहीं, बल्कि नारियल पानी, फलों का जूस और पानी से भरपूर फल जैसे तरबूज, खीरा और संतरा भी डाइट में शामिल करना फायदेमंद होता है।

    गर्मियों के मौसम में पसीना ज्यादा निकलने के कारण डिहाइड्रेशन का खतरा और बढ़ जाता है, इसलिए इस दौरान विशेष रूप से पानी का सेवन बढ़ाना चाहिए।

    सही मात्रा में पानी पीना न केवल शरीर को हाइड्रेट रखता है, बल्कि त्वचा, पाचन और संपूर्ण स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाए रखने में मदद करता है।

  • गर्मी का कहर: हीट स्ट्रोक से बचना है तो अपनाएं ये जरूरी उपाय

    गर्मी का कहर: हीट स्ट्रोक से बचना है तो अपनाएं ये जरूरी उपाय


    नई दिल्ली। गर्मी का मौसम अपने चरम पर पहुंचते ही सेहत पर गंभीर असर डालने लगता है। तेज धूप, लू और बढ़ता तापमान शरीर को कमजोर कर देता है, जिससे Heat Stroke यानी लू लगने का खतरा काफी बढ़ जाता है। अगर समय रहते सावधानी न बरती जाए, तो यह स्थिति गंभीर भी हो सकती है।
    जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है, शरीर का संतुलन बिगड़ने लगता है। मौसम विभाग भी आने वाले दिनों में और भीषण गर्मी की चेतावनी दे रहा है, ऐसे में खुद को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है। सबसे पहली बात—गर्मी में अपनी सेहत को नजरअंदाज बिल्कुल न करें। यदि आप असहज महसूस करते हैं, तो तुरंत ठंडी जगह पर जाएं और पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
    हीट स्ट्रोक के लक्षण पहचानें
    हीट स्ट्रोक के शुरुआती संकेतों को समझना बहुत जरूरी है। अचानक चक्कर आना, तेज सिरदर्द, मांसपेशियों में ऐंठन, अत्यधिक पसीना आना या पसीना बंद हो जाना, शरीर का तापमान बढ़ जाना ये सभी गंभीर संकेत हो सकते हैं। कई मामलों में व्यक्ति को कमजोरी, उलझन या बेहोशी भी महसूस हो सकती है। ऐसे लक्षण दिखें तो तुरंत सतर्क हो जाएं।
    हीट स्ट्रोक में तुरंत क्या करें?
    अगर किसी को लू लगने का शक हो, तो उसे तुरंत ठंडी और हवादार जगह पर ले जाएं। शरीर को ठंडा करने के लिए गीले कपड़े का इस्तेमाल करें और लगातार तापमान पर नजर रखें। इस दौरान शरीर को हाइड्रेट रखना बेहद जरूरी है। इसके लिए Oral Rehydration Solution (ओआरएस), नींबू पानी, छाछ या नमक-शक्कर का घोल देना फायदेमंद होता है।
    यदि हालत में सुधार न हो, तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, क्योंकि गंभीर स्थिति में यह जानलेवा भी हो सकता है।
    बचाव ही सबसे बड़ा उपाय
    हीट स्ट्रोक से बचने के लिए दिन के समय, खासकर दोपहर में धूप में निकलने से बचें। हल्के और ढीले कपड़े पहनें, सिर को ढककर रखें और समय-समय पर पानी पीते रहें। खानपान में तरल पदार्थ और फल शामिल करें, ताकि शरीर में पानी की कमी न हो।
    कुल मिलाकर, गर्मी के इस मौसम में थोड़ी सी लापरवाही भी भारी पड़ सकती है। इसलिए सतर्क रहें, लक्षणों को पहचानें और समय रहते सही कदम उठाकर खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रखें।
  • डिहाइड्रेशन में रामबाण उपाय ओआरएस, शरीर में तुरंत बहाल करता है पानी और नमक का संतुलन

    डिहाइड्रेशन में रामबाण उपाय ओआरएस, शरीर में तुरंत बहाल करता है पानी और नमक का संतुलन


    नई दिल्ली।

    गर्मी के मौसम में शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन एक आम लेकिन गंभीर समस्या बन जाती है। खासकर जब किसी व्यक्ति को दस्त, उल्टी या ज्यादा पसीना आने जैसी स्थिति होती है, तब शरीर तेजी से जरूरी तरल पदार्थ और नमक खोने लगता है। इस स्थिति में सही समय पर ध्यान न दिया जाए तो कमजोरी, चक्कर आना और गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।

    ऐसे हालात में स्वास्थ्य विशेषज्ञ ओआरएस को सबसे सरल और प्रभावी उपाय मानते हैं। ओआरएस यानी ओरल रिहाइड्रेशन साल्ट शरीर में पानी और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स जैसे सोडियम और पोटैशियम की कमी को तेजी से पूरा करने में मदद करता है। यह शरीर को तुरंत हाइड्रेट करने का काम करता है और मरीज की हालत को बिगड़ने से रोकता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, जब दस्त या उल्टी शुरू होती है, तो केवल पानी पीना पर्याप्त नहीं होता क्योंकि उससे सिर्फ प्यास बुझती है, लेकिन शरीर में खोए हुए नमक और मिनरल्स की भरपाई नहीं हो पाती। ओआरएस इसी कमी को पूरा करता है और शरीर के संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है।

    ओआरएस का इस्तेमाल बहुत आसान माना जाता है। इसे एक लीटर साफ पानी में घोलकर छोटे-छोटे घूंट में पिया जाता है, जिससे शरीर धीरे-धीरे हाइड्रेट होता रहता है। यह बच्चों, वयस्कों और बुजुर्गों सभी के लिए सुरक्षित माना जाता है, खासकर तब जब शरीर कमजोर हो रहा हो।

    डॉक्टरों का कहना है कि गर्मी के दिनों में यह समस्या और बढ़ जाती है क्योंकि पसीने के जरिए भी शरीर से काफी मात्रा में पानी और नमक बाहर निकल जाता है। ऐसे में ओआरएस शरीर को तुरंत राहत देने में मदद करता है और अस्पताल जाने की जरूरत को भी कई मामलों में कम कर सकता है।

     ओआरएस को एक ऐसा सरल और प्रभावी उपाय माना जाता है जो डिहाइड्रेशन जैसी समस्या से तेजी से राहत देने में मदद करता है और शरीर के जरूरी संतुलन को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है।

  • भीषण गर्मी में बढ़ा प्रेग्नेंसी रिस्क, समय से पहले डिलीवरी और लो बर्थ वेट का खतरा तेज..

    भीषण गर्मी में बढ़ा प्रेग्नेंसी रिस्क, समय से पहले डिलीवरी और लो बर्थ वेट का खतरा तेज..

    नई दिल्ली।
    भीषण गर्मी का असर अब सिर्फ सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसका गंभीर प्रभाव गर्भवती महिलाओं और उनके अजन्मे बच्चों पर भी देखने को मिल रहा है। देश के कई हिस्सों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच चुका है, जिससे गर्म हवाएं और लू का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है।

    चिकित्सकों के अनुसार, इस तरह की अत्यधिक गर्मी शरीर पर अतिरिक्त दबाव डालती है, जिससे गर्भवती महिलाओं में कई प्रकार की जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं। शरीर में पानी की कमी और गर्मी से होने वाला तनाव कई बार समय से पहले प्रसव का कारण बन सकता है। यह स्थिति मां और बच्चे दोनों के लिए जोखिम भरी मानी जाती है।

    गर्मी का असर केवल प्रसव प्रक्रिया तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि यह गर्भ में पल रहे शिशु के विकास को भी प्रभावित करता है। जब शरीर में पर्याप्त पोषण और रक्त प्रवाह ठीक से नहीं हो पाता, तो बच्चे का वजन जन्म के समय सामान्य से कम हो सकता है। यह स्थिति आगे चलकर नवजात के स्वास्थ्य पर असर डाल सकती है।

    इसके अलावा, लंबे समय तक तेज धूप और गर्म वातावरण में रहने से गर्भवती महिलाओं में रक्तचाप बढ़ने का खतरा भी रहता है। यह स्थिति शरीर में कमजोरी, थकान और अन्य जटिलताओं को जन्म दे सकती है, जो प्रेग्नेंसी के दौरान अधिक खतरनाक साबित हो सकती हैं।

    विशेषज्ञ इस समय विशेष सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। गर्भवती महिलाओं को दिन के सबसे गर्म समय में बाहर निकलने से बचना चाहिए और पर्याप्त मात्रा में पानी पीकर शरीर को हाइड्रेट रखना चाहिए। हल्का और संतुलित आहार तथा ठंडे वातावरण में आराम इस दौरान बेहद जरूरी माना जा रहा है।