Tag: delay

  • सलमान खान की ‘मातृभूमि’ अटकी अधूरी शूटिंग और VFX पर टिकी अब उम्मीद

    सलमान खान की ‘मातृभूमि’ अटकी अधूरी शूटिंग और VFX पर टिकी अब उम्मीद


    नई दिल्ली: बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान की बहुप्रतीक्षित फिल्म मातृभूमि मे वॉर रेस्ट इन पीस की रिलीज फिलहाल टाल दी गई है यह फिल्म पहले 17 अप्रैल को सिनेमाघरों में आने वाली थी लेकिन प्रोडक्शन से जुड़ी बड़ी बाधाओं के चलते मेकर्स को यह फैसला लेना पड़ा

    फिल्म की रिलीज टलने की सबसे बड़ी वजह अभिनेता और गायक प्रशांत तमांग का अचानक निधन बताया जा रहा है जनवरी 2026 में उनके देहांत के बाद फिल्म की शूटिंग पर सीधा असर पड़ा क्योंकि वे इस फिल्म में मुख्य विलेन की भूमिका निभा रहे थे उनके कई महत्वपूर्ण सीन और एक्शन सीक्वेंस अभी शूट होने बाकी थे

    सूत्रों के अनुसार फिल्म की शूटिंग अधूरी रहने के कारण तय समय पर पोस्ट प्रोडक्शन पूरा करना संभव नहीं था ऐसे में मेकर्स के पास रिलीज डेट आगे बढ़ाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा बताया जा रहा है कि तमांग ने कुछ अहम दृश्य पहले ही शूट कर लिए थे लेकिन कहानी के कई हिस्से अधूरे रह गए हैं

    अब प्रोडक्शन टीम के सामने दो बड़े विकल्प हैं पहला किसी नए अभिनेता को लेकर बचे हुए सीन को दोबारा शूट किया जाए और दूसरा आधुनिक तकनीक यानी VFX की मदद से उनके किरदार को पूरा किया जाए हालांकि VFX का रास्ता अपनाना आसान नहीं है इसके लिए परिवार की अनुमति के साथ साथ भारी बजट की जरूरत होगी जिससे फिल्म की लागत और समय दोनों बढ़ सकते हैं

    फिल्म की देरी की एक और अहम वजह सलमान खान की व्यस्तता भी मानी जा रही है शूटिंग शेड्यूल में बदलाव के कारण उनकी डेट्स को दोबारा मैनेज करना चुनौतीपूर्ण हो गया है इसके अलावा उनके किरदार के लुक और निरंतरता को बनाए रखना भी टीम के लिए एक मुश्किल काम बन गया है

    यह फिल्म पहले अपने नाम को लेकर भी चर्चा में रही थी शुरुआत में इसे बैटल ऑफ गलवान के नाम से बनाया जा रहा था जिसे बाद में बदलकर मातृभूमि मे वॉर रेस्ट इन पीस कर दिया गया फिल्म की कहानी गलवान घाटी में वर्ष 2020 में भारत और चीन के बीच हुए संघर्ष पर आधारित है

    फिल्म का निर्देशन अपूर्व लाखिया कर रहे हैं और इसमें चित्रांगदा सिंह भी अहम भूमिका में नजर आएंगी

    फिलहाल मेकर्स शूटिंग को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए सभी संभावित विकल्पों पर काम कर रहे हैं माना जा रहा है कि इस महीने के अंत तक कोई अंतिम फैसला लिया जा सकता है ताकि पोस्ट प्रोडक्शन का काम शुरू हो सके नई रिलीज डेट की घोषणा अभी नहीं की गई है लेकिन उम्मीद जताई जा रही है कि फिल्म को स्वतंत्रता दिवस के आसपास सिनेमाघरों में रिलीज किया जा सकता है जिससे इसे देशभक्ति के माहौल का भी फायदा मिल सके

  • राजस्थान उच्च न्यायालय का बड़ा फैसला: लंबे समय तक निष्क्रिय रहे कर्मचारी अदालत से राहत नहीं मांग सकते

    राजस्थान उच्च न्यायालय का बड़ा फैसला: लंबे समय तक निष्क्रिय रहे कर्मचारी अदालत से राहत नहीं मांग सकते


    जयपुर । राजस्थान उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को एक अहम निर्णय में स्पष्ट किया कि जो कर्मचारी अपने अधिकारों के लिए लंबे समय तक कोई कदम नहीं उठाते, वे बाद में अदालत से राहत की उम्मीद नहीं कर सकते। न्यायाधीश आनंद शर्मा की एकल पीठ ने कहा कि अत्यधिक देरी और निष्क्रियता किसी भी दावे की वैधता को कमजोर कर देती है और इसे कानून भी स्वीकार नहीं करता। यह निर्णय उस याचिका पर आया जिसमें एक कर्मचारी ने करीब 30 वर्ष बाद अदालत का दरवाजा खटखटाया। मामला 1994 का था, लेकिन कर्मचारी ने 2024 में जाकर याचिका दायर की।
    न्यायालय ने कहा कि इतने लंबे समय तक चुप बैठे रहने के बाद अब व्यक्ति को यह अधिकार नहीं रह जाता कि वह अदालत से तत्काल न्याय की मांग करे। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून उन लोगों की सहायता करता है जो अपने अधिकारों के प्रति सजग और सक्रिय रहते हैं। न्यायालय ने तर्क दिया कि इतने वर्षों की देरी से न केवल दस्तावेज़ और साक्ष्य कमजोर हो जाते हैं, बल्कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर भी अनावश्यक बोझ पड़ता है। इस निर्णय से स्पष्ट संदेश गया कि कर्मचारी अपने अधिकारों की रक्षा के लिए सक्रिय और समय पर कदम उठाना अनिवार्य है।

    विशेषज्ञों के अनुसार यह निर्णय सरकारी और निजी क्षेत्र दोनों में कर्मचारियों के लिए मार्गदर्शक होगा। यह न केवल न्यायिक प्रणाली पर भरोसा बनाए रखने में मदद करेगा, बल्कि ऐसे मामलों में देरी से होने वाले विवादों को भी रोकेगा। अदालत ने यह भी कहा कि कर्मचारियों को अपने अधिकारों की जानकारी और उनके लिए उपलब्ध कानूनी विकल्पों के प्रति जागरूक रहना चाहिए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की कठिनाई न आए। इस मामले में न्यायालय ने यह संकेत भी दिया कि लंबे समय तक निष्क्रिय रहने वालों को न्याय मिलने की संभावना बेहद कम होती है और ऐसे कर्मचारियों को यह समझना होगा कि समय पर कार्रवाई करना ही उनके अधिकारों की रक्षा की कुंजी है। अदालत ने अपने फैसले में प्रशासनिक दक्षता और न्यायिक प्रक्रिया की पारदर्शिता बनाए रखने के महत्व को भी रेखांकित किया।