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  • ग्वालियर में भाजपा ने राहुल गांधी का पुतला फूंका, कांग्रेसियों ने किया विरोध प्रदर्शन

    ग्वालियर में भाजपा ने राहुल गांधी का पुतला फूंका, कांग्रेसियों ने किया विरोध प्रदर्शन


    ग्वालियर। दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान कांग्रेस युवा इकाई द्वारा किए गए हंगामे के विरोध में शनिवार को भारतीय जनता युवा मोर्चा (भा.ज.यु.मो.) ने ग्वालियर में जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी का पुतला दहन किया। वहीं, कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन का विरोध करते हुए पार्टी कार्यालय के बाहर नारेबाजी की।

    नदी गेट से कांग्रेस कार्यालय तक रैली:
    भा.ज.यु.मो. ने संभाग स्तर पर प्रदर्शन का ऐलान किया था। रैली नदी गेट चौराहे से शिंदे की छावनी स्थित कांग्रेस कार्यालय तक निकाली गई। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने बैरिकेडिंग की थी, लेकिन कुछ कार्यकर्ता बैरिकेड तोड़ने की कोशिश करते नजर आए। दूसरी ओर, कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी कांग्रेस कार्यालय के बाहर झंडे लहराते हुए नारेबाजी की।

    दो घंटे तक तनावपूर्ण माहौल:
    करीब दो घंटे तक ग्वालियर में तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। इसके बाद भा.ज.यु.मो. के जिला अध्यक्ष जयप्रकाश राजौरिया और युवा मोर्चा जिला अध्यक्ष प्रतीक तिवारी ने राहुल गांधी का पुतला दहन किया। वहीं कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी प्रधानमंत्री का पुतला दहन करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस बल के हस्तक्षेप से वे ऐसा नहीं कर सके। पुलिस ने मौके पर तैनाती बढ़ाई और पुतला ले जाते हुए कार्यकर्ताओं को रोका।

    कांग्रेस का पलटवार:
    कांग्रेस के पूर्व प्रदेश महासचिव सुनील शर्मा ने भाजपा के प्रदर्शन को हताशा करार दिया। उन्होंने कहा, “जनता के मुद्दों पर बात करने की बजाय विपक्ष के नेताओं के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणियां करना अनुचित है।” सुनील शर्मा ने इस घटना की निंदा की और भाजपा को जवाबी हमला किया।

    पुलिस की स्थिति:
    सीएसपी मनीष यादव ने बताया कि भाजपा द्वारा आयोजित कार्यक्रम में पुलिस की मौजूदगी में सभी गतिविधियां शांतिपूर्वक संपन्न हुईं और किसी भी बड़े विवाद की स्थिति नहीं बनी। एहतियात के तौर पर कांग्रेस कार्यालय के बाहर पुलिस बल तैनात किया गया था।

  • यूथ कांग्रेस का अर्धनग्न प्रदर्शन, मायावती और BJP ने देश की गरिमा पर सवाल उठाया

    यूथ कांग्रेस का अर्धनग्न प्रदर्शन, मायावती और BJP ने देश की गरिमा पर सवाल उठाया



    नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित AI इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान उस समय सियासी भूचाल आ गया जब भारतीय युवा कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम स्थल के भीतर अर्धनग्न होकर विरोध प्रदर्शन किया। यह समिट कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के क्षेत्र में भारत की वैश्विक भूमिका को रेखांकित करने के लिए आयोजित की गई थी, जिसमें कई देशों के प्रतिनिधि और उद्योग जगत के दिग्गज शामिल थे।

    क्या हुआ था?
    प्रत्यक्षदर्शियों और सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, 8‑10 प्रदर्शनकारी अचानक मुख्य सभागार के समीप पहुंच गए, टी‑शर्ट उतारकर नारेबाजी करने लगे और कथित तौर पर भारत‑अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर विरोध जताया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ भी नारे लगाए गए।

    सुरक्षा एजेंसियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सभी प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया और कार्यक्रम बाधित हुए बिना आगे बढ़ाया गया। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति को कुछ ही मिनटों में नियंत्रित कर लिया गया और किसी प्रतिनिधि को शारीरिक नुकसान नहीं हुआ।

    मायावती की कड़ी प्रतिक्रिया
    घटना के बाद बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने सोशल मीडिया मंच X पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इस प्रदर्शन को “अत्यंत अशोभनीय और निंदनीय” बताते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर इस तरह का व्यवहार देश की गरिमा को ठेस पहुंचाता है।
    मायावती ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार है, लेकिन उसकी अभिव्यक्ति सभ्य और मर्यादित तरीके से होनी चाहिए।

    BJP का हमला
    सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने इस घटना को लेकर कांग्रेस पर सीधा हमला बोला। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि इस तरह का प्रदर्शन भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश है।
    BJP का कहना है कि जब दुनिया AI और तकनीकी प्रगति में भारत की भूमिका की सराहना कर रही है, तब ऐसे विरोध देश को बदनाम करने वाले हैं।

    कांग्रेस का पक्ष
    वहीं, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की ओर से कहा गया कि युवा कार्यकर्ताओं ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के तहत अपनी आवाज उठाई। पार्टी नेताओं ने सरकार से असहमति को देशविरोधी बताने की प्रवृत्ति पर सवाल उठाए और कहा कि लोकतंत्र में विरोध स्वाभाविक है।

    सियासी असर और आगे की राह
    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आगामी चुनावी माहौल में और गर्मी ला सकता है।

    सत्तापक्ष इसे “राष्ट्रीय गरिमा” का मुद्दा बनाकर विपक्ष को घेर सकता है।

    विपक्ष इसे “लोकतांत्रिक अधिकार” और “नीतिगत असहमति” का मामला बताकर राजनीतिक बहस को नई दिशा दे सकता है।

    दिल्ली AI समिट में हुआ यह प्रदर्शन केवल कुछ मिनटों की घटना नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक प्रतीक बन गया है। एक ओर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की तकनीकी छवि, तो दूसरी ओर घरेलू राजनीति का टकराव—दोनों के बीच यह विवाद आने वाले दिनों में और गहराने की संभावना रखता है।