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  • दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला: प्राइवेट स्कूल 2026-27 में वसूलेंगे पिछले साल वाली फीस

    दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला: प्राइवेट स्कूल 2026-27 में वसूलेंगे पिछले साल वाली फीस


    नई दिल्ली । दिल्ली हाईकोर्ट ने प्राइवेट स्कूलों में स्कूल स्तरीय फीस विनियमन समिति गठन के दिल्ली सरकार के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के लिए प्राइवेट स्कूल वही फीस वसूलेंगे जो उन्होंने पिछले वर्ष 2025-26 में वसूली थी। हाईकोर्ट के इस आदेश से फिलहाल स्कूलों को SLFRC गठित करने की जरूरत नहीं है। कोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई 12 मार्च को निर्धारित की है।

    28 फरवरी को हुई सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की बेंच ने कहा कि सरकार द्वारा SLFRC गठन संबंधी अधिसूचना को चुनौती देने वाली याचिकाओं के लंबित रहने के दौरान कमेटी का गठन स्थगित रहेगा। बेंच ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की अत्यधिक फीस कानून के अनुसार विनियमित की जाएगी।

    यह आदेश कई स्कूल संघों की याचिकाओं पर पारित किया गया जिन्होंने दिल्ली सरकार की 1 फरवरी 2026 की अधिसूचना पर रोक लगाने की मांग की थी। उस अधिसूचना में स्कूलों को 10 दिन के भीतर SLFRC गठित करने का निर्देश दिया गया था।

    इस मामले पर आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने बीजेपी पर निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि प्राइवेट स्कूल मालिकों और बीजेपी की दिल्ली सरकार के बीच सांठगांठ हाईकोर्ट में फिर उजागर हुई। उन्होंने बताया कि इससे पहले बीजेपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में आश्वासन दिया था कि प्राइवेट फीस एक्ट 2025-26 के लिए बढ़ाई गई फीस पर लागू नहीं होगा जबकि अब हाईकोर्ट ने इसे 2026-27 के सत्र के लिए भी लागू कर दिया।

    कोर्ट के इस फैसले से स्पष्ट हो गया है कि शैक्षणिक वर्ष 2026-27 में दिल्ली के प्राइवेट स्कूल वही फीस वसूलेंगे जो उन्होंने पिछले साल वसूली थी और SLFRC गठन पर फिलहाल रोक रहेगी। इससे स्कूलों के लिए शुल्क निर्धारण में अस्थिरता टली है और कानूनी प्रक्रिया के तहत अत्यधिक फीस पर निगरानी बनी रहेगी।

  • आबकारी नीति केस: केजरीवाल-सिसोदिया को मिली राहत पर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी सीबीआई

    आबकारी नीति केस: केजरीवाल-सिसोदिया को मिली राहत पर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी सीबीआई


    नई दिल्ली। केंद्रीय जांच ब्यूरो सीबीआई ने दिल्ली आबकारी नीति मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को निचली अदालत द्वारा आरोपमुक्त किए जाने के फैसले को चुनौती देने का निर्णय लिया है। एजेंसी इस आदेश के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय में अपील दायर करेगी।

    यह कदम राउज एवेन्यू कोर्ट के उस फैसले के बाद उठाया गया है जिसमें केजरीवाल सिसोदिया सहित 21 अन्य आरोपियों को आबकारी नीति से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले में आरोपों से मुक्त कर दिया गया था। विशेष न्यायाधीश जितेंद्र सिंह ने चार्जशीट में नामित किसी भी आरोपी के विरुद्ध आरोप तय करने से इनकार कर दिया था।

    सीबीआई के प्रवक्ता का कहना है कि निचली अदालत ने जांच से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर पर्याप्त विचार नहीं किया। इसी आधार पर एजेंसी ने उच्च न्यायालय में अपील करने का फैसला लिया है।

    अदालत ने अपने आदेश में टिप्पणी की थी कि सीबीआई ने वरिष्ठ नेताओं को बिना किसी ठोस सामग्री के आरोपी बनाया। न्यायालय ने आरोपपत्र में कई खामियों की ओर संकेत करते हुए कहा कि सिसोदिया के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला नहीं बनता। साथ ही केजरीवाल को भी पर्याप्त साक्ष्यों के अभाव में इस प्रकरण में शामिल किया गया। अदालत ने जांच प्रक्रिया में कमियों को लेकर एजेंसी को फटकार भी लगाई।

    फैसले के बाद केजरीवाल ने न्यायपालिका पर भरोसा जताते हुए इसे उनकी पार्टी को कमजोर करने की राजनीतिक साजिश बताया। वहीं सिसोदिया ने कहा कि अदालत का निर्णय संविधान और कानून के शासन में उनके विश्वास को मजबूत करता है।

  • सड़क दुर्घटना में मदद करने वालों को दिल्ली सरकार देगी ₹25,000 कैश, शुरू हुई 'राह-वीर योजना'

    सड़क दुर्घटना में मदद करने वालों को दिल्ली सरकार देगी ₹25,000 कैश, शुरू हुई 'राह-वीर योजना'


    नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने रोड एक्सीडेंट्स में तुरंत मदद देने और पीड़ितों की जान बचाने के मकसद से ‘राह-वीर योजना’ की शुरुआत की है। इस स्कीम के तहत, जो भी नागरिक किसी सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल व्यक्ति की मदद करेगा और उसे अस्पताल पहुंचाएगा, उसे सरकार ₹25,000 कैश प्राइज के साथ एक सम्मान पत्र भी दिया जाएगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्कीम का ऐलान करते हुए बताया कि इसका उद्देश्य समाज में अच्छे काम करने वालों का मनोबल बढ़ाना और लोगों को तुरंत मदद के लिए प्रोत्साहित करना है।

    गोल्डन आवर में जान बचाने का मकसद
    ‘राह-वीर योजना’ का सबसे बड़ा लक्ष्य एक्सीडेंट के तुरंत बाद के शुरुआती समय यानी ‘गोल्डन आवर’ का सही इस्तेमाल करना है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि घायल व्यक्ति को एक्सीडेंट के तुरंत बाद मेडिकल मदद मिल जाए, तो उसकी जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। सरकार चाहती है कि लोग पुलिसिया कार्रवाई या कानूनी झंझटों के डर को भूलकर मानवीय आधार पर मदद के लिए आगे आएं और घायलों को समय पर अस्पताल पहुंचाएं।

    ईनाम की धनराशि और राष्ट्रीय सम्मान
    स्कीम के नियमों के अनुसार, एक ही एक्सीडेंट में अगर कोई व्यक्ति एक से अधिक पीड़ितों की सहायता करता है, तो भी उसे अधिकतम ₹25,000 की प्रोत्साहन राशि ही दी जाएगी। इसके अलावा, साल भर में चुने गए 10 सबसे बेहतरीन ‘राह-वीरों’ को केंद्र सरकार की ओर से1 लाख का राष्ट्रीय पुरस्कार और सम्मान प्रमाण पत्र देकर विशेष सम्मानित किया जाएगा।
    कानूनी डर को खत्म करने की पहल
    ‘राह-वीर योजना’ केवल वित्तीय मदद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज को यह संदेश देती है कि एक्सीडेंट पीड़ितों की मदद करना अब किसी कानूनी जोखिम का कारण नहीं बनेगा। अक्सर लोग पूछताछ और अदालती प्रक्रिया के डर से मदद करने से कतराते हैं, लेकिन इस स्कीम के तहत मददगारों को परेशान नहीं किया जाएगा और उन्हें समाज के रक्षक के रूप में सम्मानित किया जाएगा।
  • दिल्ली सरकार ने बढ़ाया आयुष्मान भारत योजना का दायरा, विधवा और दिव्यांग पेंशनधारियों को मिलेगा कैशलेस स्वास्थ्य कवच

    दिल्ली सरकार ने बढ़ाया आयुष्मान भारत योजना का दायरा, विधवा और दिव्यांग पेंशनधारियों को मिलेगा कैशलेस स्वास्थ्य कवच


    नई दिल्ली । दिल्ली सरकार ने आयुष्मान भारत योजना का दायरा बढ़ाने का बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में मंगलवार को दिल्ली सचिवालय में हुई कैबिनेट बैठक में निर्णय लिया गया कि राजधानी के विधवा और दिव्यांग पेंशनधारियों को प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना से जोड़ा जाएगा। इस कदम से लगभग 3.96 लाख विधवा महिलाओं और 1.31 लाख दिव्यांग व्यक्तियों के परिवार अब स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ उठा सकेंगे।

    इस योजना के तहत ये लाभार्थी राजधानी के 208 सूचीबद्ध सरकारी और निजी अस्पतालों में कैशलेस उपचार करा सकेंगे। राजधानी में योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद वर्ग को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है ताकि इलाज के खर्च का बोझ कम हो सके और गरीब नागरिक किसी बीमारी के चलते वंचित न रहें।

    रेखा गुप्ता ने बताया कि कैबिनेट के इस फैसले के बाद करीब 5.5 लाख अतिरिक्त परिवार अब आयुष्मान भारत योजना की सुरक्षा की छतरी के नीचे आ जाएंगे। ये परिवार पहले से योजना का लाभ ले रहे अंत्योदय अन्न योजना और प्राथमिकता PRS श्रेणी के परिवारों के अतिरिक्त होंगे। साथ ही 70 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिक आशा कार्यकर्ता आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और हेल्पर्स भी इस योजना के दायरे में शामिल रहेंगे।

    मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य है कि दिल्ली का कोई गरीब कमजोर या जरूरतमंद नागरिक इलाज के अभाव में वंचित न रहे। योजना लागू होने के बाद लाभार्थियों को निजी या सरकारी अस्पतालों में बिना किसी अग्रिम भुगतान के इलाज की सुविधा प्राप्त होगी।

    अब तक दिल्ली में आयुष्मान भारत योजना के तहत 7,23,707 कार्ड जारी किए जा चुके हैं। इनमें से 2,74,620 कार्ड वरिष्ठ नागरिकों को प्रदान किए गए हैं। राजधानी में योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए 208 अस्पतालों का नेटवर्क तैयार किया गया है जिसमें 156 निजी और 53 सरकारी अस्पताल शामिल हैं। दिल्ली राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के माध्यम से अब तक 29,120 से अधिक लाभार्थियों ने मुफ्त इलाज का लाभ प्राप्त किया है।

    इस योजना के विस्तार से न केवल विधवा और दिव्यांग पेंशनधारियों को सीधे लाभ मिलेगा बल्कि यह उनके परिवारों के लिए भी आर्थिक राहत का साधन बनेगी। कैबिनेट के निर्णय से यह स्पष्ट हो गया है कि दिल्ली सरकार स्वास्थ्य सुरक्षा को उच्च प्राथमिकता देती है और जरूरतमंद वर्ग तक इलाज की सुविधा सुनिश्चित करने के लिए निरंतर कदम उठा रही है।

    इस पहल से राजधानी के गरीब और कमजोर वर्ग को मुफ्त और विश्वसनीय स्वास्थ्य सुविधा प्राप्त होगी। योजना के तहत लाभार्थी सूचीबद्ध अस्पतालों में अस्पताल में भर्ती इलाज और आपातकालीन सेवाओं के लिए कैशलेस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। इससे स्वास्थ्य सुरक्षा का व्यापक जाल तैयार हुआ है और दिल्ली की स्वास्थ्य प्रणाली और अधिक समावेशी और प्रभावी बन रही है।

    इस तरह दिल्ली सरकार ने आयुष्मान भारत योजना के दायरे में विधवा और दिव्यांग पेंशनधारियों को जोड़कर लगभग 5.5 लाख नए परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा का कवच प्रदान किया है। यह कदम राजधानी के कमजोर और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

  • जनकपुरी सड़क हादसा: मंत्री प्रवेश वर्मा सख्त, तीन इंजीनियर सस्पेंड, उच्चस्तरीय जांच के निर्देश

    जनकपुरी सड़क हादसा: मंत्री प्रवेश वर्मा सख्त, तीन इंजीनियर सस्पेंड, उच्चस्तरीय जांच के निर्देश


    नई दिल्ली । दिल्ली के जनकपुरी स्थित जोगिंदर सिंह मार्ग पर बीती रात हुए सड़क हादसे ने निर्माण कार्यों में बरती जा रही लापरवाही को उजागर कर दिया है। मामले को गंभीरता से लेते हुए दिल्ली सरकार के कैबिनेट मंत्री प्रवेश साहिब सिंह वर्मा ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और सुरक्षा में चूक के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। साथ ही, घटना की उच्चस्तरीय जांच के आदेश भी जारी किए गए हैं।

    मंत्री वर्मा ने मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया और स्पष्ट कहा कि निर्माण कार्यों के दौरान आम लोगों की सुरक्षा से कोई समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए तत्काल और प्रभावी कदम उठाए जाएं।

    जांच में सामने आई गंभीर खामियां
    प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि हादसे वाली जगह पर पिछले कई महीनों से सीवर लाइन का निर्माण कार्य चल रहा था। इस दौरान करीब 6 मीटर लंबा, 4 मीटर चौड़ा और 4.25 मीटर गहरा गड्ढा खोदा गया था। कुछ स्थानों पर बैरिकेडिंग जरूर की गई थी, लेकिन सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं थे। खुदाई क्षेत्र के आसपास दोपहिया वाहनों की आवाजाही जारी रहने से आम लोगों की जान को गंभीर खतरा बना हुआ था।

    मंत्री के निरीक्षण में यह भी सामने आया कि इस तरह की लापरवाही पहले भी देखी जा चुकी है। जनवरी में नोएडा में हुए एक समान हादसे के बाद संबंधित विभागों को सतर्क किया गया था। 24 जनवरी को दिल्ली जल बोर्ड ने अधिकारियों और ठेके पर काम कर रही एजेंसियों को सुरक्षा नियमों के सख्त पालन के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद जनकपुरी की घटना ने इन आदेशों की अनदेखी को उजागर कर दिया।

    तीन इंजीनियर निलंबित, एजेंसी पर भी शिकंजा
    सुरक्षा मानकों की अनदेखी को गंभीर अपराध मानते हुए मंत्री प्रवेश साहिब सिंह वर्मा ने कार्यकारी अभियंता, सहायक अभियंता और कनिष्ठ अभियंता को तत्काल निलंबित करने के निर्देश दिए। साथ ही, निर्माण कार्य कर रही एजेंसी की भूमिका की भी जांच शुरू कर दी गई है। दोषी पाए जाने पर एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने समेत कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

    इधर, दिल्ली पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं, दिल्ली जल बोर्ड ने एक विशेष उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है, जो यह पता लगाएगी कि लापरवाही किस स्तर पर हुई और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या सुधार जरूरी हैं।

    जनता की सुरक्षा सर्वोपरि: मंत्री वर्मा
    मंत्री वर्मा ने हादसे पर दुख जताते हुए कहा कि सरकार पीड़ित परिवार के साथ पूरी संवेदना के साथ खड़ी है। उन्होंने दो टूक कहा कि जनता की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी। साथ ही, राजधानी में चल रहे सभी सीवर, सड़क निर्माण और बाढ़ नियंत्रण से जुड़े कार्यों का व्यापक सुरक्षा ऑडिट कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।

  • दिल्ली सरकार के एक साल पूरे, कल रामलीला मैदान में होगा बड़ा कार्यक्रम, नए ऐलान की संभावना

    दिल्ली सरकार के एक साल पूरे, कल रामलीला मैदान में होगा बड़ा कार्यक्रम, नए ऐलान की संभावना


    नई दिल्ली। दिल्ली सरकार 8 फरवरी को अपने एक साल के कार्यकाल पूरा होने पर रामलीला मैदान में एक बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम का आयोजन कर रही है। इस मौके पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, पूरी कैबिनेट और वरिष्ठ सरकारी अधिकारी मौजूद रहेंगे। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि होंगे।

    सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली सरकार परिवहन ढांचे को मजबूत करने के लिए 500 नई ई-बसें जोड़ने की योजना का ऐलान कर सकती है। इसके अलावा शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे और शहरी सुविधाओं से जुड़ी कई महत्वाकांक्षी योजनाओं की घोषणा भी संभव है। सरकार पर्यावरण अनुकूल परिवहन, ट्रैफिक कम करने और प्रदूषण घटाने पर विशेष ध्यान देगी। इस मंच के जरिए सरकार जनता को यह संदेश देना चाहती है कि बीते एक साल में किए गए वादों को पूरा करने के लिए ठोस कदम उठाए गए हैं और आगे राजधानी के विकास पर फोकस किया जाएगा।

    सरकार इस कार्यक्रम के माध्यम से जनता से फीडबैक भी लेगी। बीजेपी विधायक और सांसदों को अधिकतम लोगों को कार्यक्रम में शामिल करने की जिम्मेदारी दी गई है। हर कैबिनेट मंत्री को अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों की जिम्मेदारी दी गई है। इसके साथ ही दिल्ली की सभी विधानसभा सीटों पर छोटे-छोटे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि सरकार अपनी उपलब्धियां और योजनाएं जनता तक पहुंचा सके।

    दिल्ली बीजेपी विधायक दल की महत्वपूर्ण बैठक आज दोपहर 3:30 बजे मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के आवास पर होगी। बैठक में एक साल पूरे होने पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की रणनीति और रूपरेखा पर चर्चा की जाएगी।दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में बीजेपी ने कई वर्षों बाद आम आदमी पार्टी को हराकर पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की थी। 70 सदस्यीय विधानसभा में बीजेपी ने 48 सीटें जीती, जबकि आम आदमी पार्टी की सीटें घटकर 22 रह गईं।

  • योगमाया मंदिर में पूजा गुरुद्वारे में मत्था टेक विकास योजनाओं के साथ महरौली दौरे पर सीएम रेखा गुप्ता

    योगमाया मंदिर में पूजा गुरुद्वारे में मत्था टेक विकास योजनाओं के साथ महरौली दौरे पर सीएम रेखा गुप्ता


    नई दिल्ली में शनिवार को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने महरौली विधानसभा क्षेत्र के विकास को नई गति देते हुए 135 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ते हुए सिद्धपीठ माता योगमाया मंदिर में पूजा अर्चना की और गुरुद्वारा बाबा बंदा सिंह बहादुर जी में मत्था टेककर आशीर्वाद लिया।

    मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने महरौली दौरे के दौरान कहा कि विकसित दिल्ली का सपना तभी साकार होगा जब हर विधानसभा हर कॉलोनी और हर घर तक विकास पहुंचे। उन्होंने कहा कि महरौली अपनी ऐतिहासिक पहचान के साथ अब आधुनिक सुविधाओं की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है। विकास योजनाओं के माध्यम से स्वच्छता आधारभूत ढांचे और नागरिक सुविधाओं को प्राथमिकता दी जा रही है।मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि महरौली की ऐतिहासिक भव्यता को सुरक्षित रखते हुए उसे इक्कीसवीं सदी की आधुनिक आवश्यकताओं से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि विरासत का संरक्षण और भविष्य का निर्माण दोनों साथ साथ किया जाएगा ताकि आने वाली पीढ़ियों को सशक्त और सुव्यवस्थित महरौली मिल सके।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने आम आदमी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि पूर्व सरकारों ने दिल्ली को केवल विज्ञापनों में चमकाने का काम किया। महरौली की विरासत स्थानीय जरूरतें और नागरिकों की अपेक्षाएं लंबे समय तक उपेक्षित रहीं। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार की राजनीति सत्ता केंद्रित नहीं बल्कि सेवा सुशासन और विकास पर आधारित है।

    रेखा गुप्ता ने कहा कि जिन परियोजनाओं का शुभारंभ किया गया है उनका उद्देश्य स्वच्छता सुनिश्चित करना आधारभूत ढांचे को मजबूत करना और नागरिकों के जीवन को अधिक सुरक्षित व्यवस्थित और सम्मानजनक बनाना है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इन योजनाओं का लाभ सीधे आम जनता तक पहुंचेगा।कार्यक्रम से पहले मुख्यमंत्री ने प्राचीन सिद्धपीठ माता योगमाया मंदिर में दर्शन कर पूजा की। उन्होंने कहा कि माता योगमाया शक्ति संरक्षण और धर्म की दिव्य चेतना हैं जिनकी कृपा से यह क्षेत्र सदियों से आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बना हुआ है। उन्होंने माता से प्रार्थना की कि हर परिवार के जीवन में सुख स्वास्थ्य और मंगल बना रहे।

    इसके बाद मुख्यमंत्री ने गुरुद्वारा बाबा बंदा सिंह बहादुर जी पहुंचकर गुरु साहिब को नमन किया। उन्होंने कहा कि गुरु साहिब की कृपा से समाज में सेवा समर्पण और समानता की भावना निरंतर बढ़ती रहे। उन्होंने इस अवसर पर सप्तम पातशाह गुरु हर राय साहिब जी के पावन प्रकाश पर्व की सभी को शुभकामनाएं भी दीं।मुख्यमंत्री के इस दौरे को महरौली के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है जिससे क्षेत्र में नई ऊर्जा और विश्वास का संचार हुआ है।

  • दिल्ली सरकार ने एमसीडी को दिए 500 करोड़ रुपये

    दिल्ली सरकार ने एमसीडी को दिए 500 करोड़ रुपये


    नई दिल्ली।
    दिल्ली (Delhi) को साफ, स्वच्छ और प्रदूषण-मुक्त राजधानी बनाने की दिशा में दिल्ली सरकार (Delhi Government) ने बड़ा और दूरगामी कदम उठाया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (Chief Minister Rekha Gupta) ने शहर की सफाई व्यवस्था को मजबूत करने और धूल से होने वाले प्रदूषण पर काबू पाने के लिए दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) को 500 करोड़ रुपये की एकमुश्त सहायता दी है। इस धनराशि से सफाई व सड़कों की छोटी-मोटी मरम्मत कर धूल उड़ने की समस्या को कम किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने साफ कहा है कि सफाई व्यवस्था को स्थायी रूप से मजबूत बनाने के लिए सरकार आगे भी नगर निगम को हर साल 300 करोड़ रुपये की नियमित सहायता देती रहेगी।

    इस विषय को लेकर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में शुक्रवार को दिल्ली सचिवालय में उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में दिल्ली के कैबिनेट मंत्री आशीष सूद, दिल्ली के महापौर सरदार राजा इकबाल सिंह, नगर निगम की स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा, नेता सदन प्रवेश वाही, दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव राजीव वर्मा, निगम आयुक्त संजीव खिरवार सहित सरकार व नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

    बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि राजधानी को साफ और स्वच्छ रखने के लिए एमसीडी को 500 करोड़ रुपये अतिरिक्त दिए गए हैं। राशि का कुछ हिस्सा उन कंपनियों का पुराना बकाया चुकाने में खर्च होगा जो कचरा प्रबंधन का काम करती हैं ताकि वे बेहतर तरीके से अपने काम को अंजाम दे सकें। कुछ हिस्सा सफाई व्यवस्था को बिना किसी रुकावट के चलाने के लिए दिया जाएगा ताकि कचरा उठाने और उसे ले जाने में होने वाले मासिक घाटे की भरपाई की जा सके। साथ ही, कुछ हिस्सा उन खास इलाकों से कूड़ा हटाने के लिए भी दिया जाएगा जहां ठेकेदार काम नहीं करते। इसके अतिरिक्त सड़कों की छोटी-मोटी मरम्मत, जैसे गड्ढे भरने, छोटे पैच रिपेयर और धूल से होने वाले प्रदूषण को रोकने के कामों पर भी राशि खर्च की जाएगी।

    बैठक में मुख्यमंत्री ने नगर निगम को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यह पूरी राशि केवल स्वीकृत उद्देश्यों के लिए ही उपयोग की जाए और इसका किसी अन्य योजना में उपयोग नहीं किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि नगर निगम को सभी वित्तीय नियमों का पालन करते हुए खर्च की नियमित निगरानी सुनिश्चित करनी होगी और समय-समय पर प्रगति रिपोर्ट और उपयोगिता प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राजधानी को सही मायनों में विकसित दिल्ली बनाने के लिए स्वच्छ व प्रदूषण मुक्त किया जाना आवश्यक है। इसके लिए सफाई व्यवस्था का भी चाक-चौबंद रहना जरूरी है। उन्होंने कहा कि कूड़ा आदि से निकली धूल भी प्रदूषण को बढ़ाती है, इसलिए हमारी सरकार ने निर्णय लिया है कि राजधानी को साफ व स्वच्छ बनाने की व्यवस्था को प्रभावी बनाया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि नगर निगम को कूड़ा उठाने की व्यवस्था को और बेहतर बनाना होगा। दिल्ली सरकार सफाई से जुड़े आधुनिक उपकरण खरीदने के लिए निगम को अलग से पर्याप्त धनराशि दे रही है, ताकि सफाई के काम में बेहतर और तेजी से नतीजे मिल सकें। उन्होंने कूड़े से ऊर्जा बनाने वाले नए प्लांट लगाने के निर्देश दिए और मौजूदा प्लांट को अपग्रेड करने को भी कहा। साथ ही, हरित कूड़े के सही उपयोग पर जोर देते हुए प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में आधुनिक मशीनें लगाने के निर्देश एमसीडी नेताओं को दिए। उन्होंने कहा कि कूड़े का बेहतर प्रबंधन भी राजधानी को साफ-सुथरा बनाने में प्रभावी भूमिका निभा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि गीले व सूखे कूड़े का उठाने की प्रक्रिया भी सरल बनाई जाए ताकि लोगों का इस ओर रुझान बढ़े।

  • दिल्ली में पीने के पानी की गुणवत्ता पर बड़ा संकट: CAG रिपोर्ट में भारी चूक, 55% सैंपल फेल

    दिल्ली में पीने के पानी की गुणवत्ता पर बड़ा संकट: CAG रिपोर्ट में भारी चूक, 55% सैंपल फेल


    नई दिल्ली । दिल्ली में पीने के पानी की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठे हैं। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताजा ऑडिट रिपोर्ट में दिल्ली जल बोर्ड (DJB) की पानी की सप्लाई, निगरानी और ट्रीटमेंट प्रणाली में बड़े स्तर की कमी उजागर हुई है। यह रिपोर्ट 7 जनवरी 2026 को विधानसभा में पेश की गई थी। इसके बाद जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया (JSAI) ने तत्काल सुधार और कार्रवाई की मांग की है।

    ऑडिट रिपोर्ट में क्या मिला?
    CAG की जांच में यह खुलासा हुआ कि 16,234 भूजल सैंपलों में से लगभग 55% पानी पीने योग्य नहीं था।

    अलग-अलग वर्षों में यह अनुपात 49% से 63% के बीच रहा है। रिपोर्ट ने चेतावनी दी कि जिन इलाकों में सैंपल फेल हुए हैं, वहां की पानी की सप्लाई सीधे जनता के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकती है।

    दिल्ली में पानी की कमी और कमजोर जांच व्यवस्था
    रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दिल्ली को रोजाना लगभग 1,680 मिलियन यूनिट पानी की जरूरत है, लेकिन सप्लाई में करीब 25% की कमी है।
    जिन इलाकों में पानी पहुंच रहा है, उसकी गुणवत्ता की सही निगरानी नहीं हो पा रही है। जांच और मॉनिटरिंग सिस्टम इतने कमजोर हैं कि यह सुनिश्चित करना मुश्किल हो गया है कि पानी स्वास्थ्य के लिहाज से सुरक्षित है या नहीं।

    BIS मानकों के अनुसार जांच नहीं
    CAG रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ कि दिल्ली जल बोर्ड की प्रयोगशालाओं में BIS (भारतीय मानक ब्यूरो) के नियमों के अनुसार पानी की जांच नहीं हुई।

    BIS मानकों के अनुसार 43 तरह की जांच आवश्यक है, लेकिन DJB केवल 12 मानकों पर ही पानी की जांच कर रहा था। इसमें आर्सेनिक, लेड और बैक्टीरिया की जांच भी शामिल नहीं थी।

    बिना ट्रीटमेंट पानी की सप्लाई
    रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पिछले पांच वर्षों में 80-90 मिलियन गैलन पानी रोजाना बिना ट्रीटमेंट के सीधे बोरवेल और रैनी वेल से लोगों तक सप्लाई किया गया।विशेषज्ञों का कहना है कि बिना शुद्धिकरण का पानी देने से डायरिया, पीलिया, टायफाइड जैसी बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है।

    पानी की सप्लाई का सही आंकड़ा नहीं
    CAG ने यह भी कहा कि दिल्ली के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट, जलाशयों और बोरवेल्स पर फ्लो मीटर नहीं लगाए गए।

    इस कारण यह पता नहीं चल पाता कि कितना पानी ट्रीट हो रहा है और कितना बिना जांच के सीधे नागरिकों तक पहुंच रहा है।

    स्वास्थ्य पर गंभीर खतरे
    विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि दूषित पानी पीने से डायरिया, पीलिया, टायफाइड, कैंसर, किडनी-लीवर की समस्याएं हो सकती हैं।आर्सेनिक और लेड जैसे जहरीले तत्व लंबे समय में गंभीर बीमारियां पैदा कर सकते हैं।

    JSAI ने सरकार से मांगा कड़ा एक्शन
    जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया ने कहा कि साफ और सुरक्षित पेयजल हर नागरिक का मौलिक अधिकार है।
    JSAI ने सरकार से मांग की है कि पानी की गुणवत्ता में लापरवाही करने वालों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई हो और हर घर तक सुरक्षित पानी पहुंचाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। साथ ही प्रयोगशालाओं को आधुनिक उपकरणों से लैस किया जाए।

    राजनीतिक मुद्दा बन सकता है पानी का संकट
    यह रिपोर्ट सामने आने के बाद दिल्ली विधानसभा चुनाव में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। विपक्ष ने पिछली सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया है, जबकि AAP ने इसे केंद्र सरकार की राजनीति बताया है।

    विशेषज्ञों का समाधान
    विशेषज्ञों का कहना है कि:सभी प्रयोगशालाओं को BIS मानकों के अनुसार आधुनिक बनाना होगा। पर्याप्त स्टाफ और उपकरण उपलब्ध कराए जाएं।हर ट्रीटमेंट प्लांट में फ्लो मीटर लगें, पानी की नियमित और व्यापक गुणवत्ता जांच हो,बिनाट्रीटमेंट पानी की सप्लाई तुरंत बंद हो।

  • सीएम रेखा गुप्ता ने देर रात पीतमपुरा अटल कैंटीन का लिया जायजा, ₹5 में सम्मानजनक भोजन का अनुभव किया

    सीएम रेखा गुप्ता ने देर रात पीतमपुरा अटल कैंटीन का लिया जायजा, ₹5 में सम्मानजनक भोजन का अनुभव किया


    नई दिल्ली। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के 100वें जन्मदिन के अवसर पर दिल्ली में अटल कैंटीन की शुरुआत की गई है। इस कैंटीन में लोगों को मात्र ₹5 में भरपेट और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। दिल्ली सरकार की यह पहल सिर्फ पेट भरने तक सीमित नहीं बल्कि जरूरतमंदों को सम्मान और स्वाभिमान के साथ भोजन देने का संदेश भी देती है।

    बीती रात मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पीतमपुरा स्थित अटल कैंटीन पहुंचीं। उन्होंने वहां काम कर रहे कर्मचारियों से हाल-चाल पूछा और सुनिश्चित किया कि व्यवस्थाएं सुचारु रूप से चल रही हैं। सीएम ने उपस्थित लोगों से पूछा आपको कोई दिक्कत तो नहीं है? सब ठीक है न?। इसके साथ ही उन्होंने कैंटीन में मौजूद बच्चों से भी बातचीत की जिन्होंने बताया कि उन्हें यहां अच्छा और पौष्टिक खाना मिलता है।इस दौरान कैंटीन में खड़े लोगों ने मुख्यमंत्री को देखकर रेखा गुप्ता जिंदाबाद के नारे लगाए जिससे माहौल और उत्साहपूर्ण बन गया। सीएम ने वहां भोजन कर रहे लोगों से उनके अनुभव साझा किए और यह सुनिश्चित किया कि सभी सुविधाएं सही ढंग से उपलब्ध हों।

    मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस दौरे का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी साझा किया। वीडियो में वह लोगों से संवाद करती बच्चों के साथ समय बिताती और उनके अनुभव जानती नजर आ रही हैं। उन्होंने लिखा कि अटल कैंटीन में केवल भोजन ही नहीं मिलता बल्कि लोगों को सुकून सम्मान और स्वाभिमान का भी भरोसा मिलता है।पीतमपुरा अटल कैंटीन का निरीक्षण करते हुए सीएम ने व्यवस्थाओं की समीक्षा की और वहां आए लोगों से उनके अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार की यह योजना मेहनतकश और जरूरतमंद लोगों के लिए प्रभावी और भरोसेमंद सहारा बन रही है। दिन और रात दोनों समय भोजन उपलब्ध कराने से किसी भी व्यक्ति को खाली पेट नहीं रहना पड़ता।

    मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि केवल ₹5 में सम्मान के साथ भोजन मिलने से यह सुनिश्चित होता है कि सहायता केवल सुविधा तक सीमित न रहे बल्कि गरिमा के साथ मिले। लोगों की संतुष्टि और विश्वास देखकर यह स्पष्ट हो गया है कि अटल कैंटीन योजना जमीनी स्तर पर वास्तविक बदलाव ला रही है।अटल कैंटीन की यह पहल गरीब और जरूरतमंदों के लिए भरोसेमंद विकल्प बन चुकी है। यह योजना न केवल पेट भरने की सुविधा देती है बल्कि सम्मान और स्वाभिमान के साथ भोजन उपलब्ध कराने में भी सक्षम है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का यह दौरा योजना की प्रभावशीलता और जनता में विश्वास को और मजबूत करता है।