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  • दिल्ली नाबालिग गैंगरेप केस: आरोपी ड्राइवर की मां ने बेटे को बताया निर्दोष, कहा- झूठा फंसाया जा रहा

    दिल्ली नाबालिग गैंगरेप केस: आरोपी ड्राइवर की मां ने बेटे को बताया निर्दोष, कहा- झूठा फंसाया जा रहा


    नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में चलती स्लीपर बस में 16 वर्षीय नाबालिग से गैंगरेप के मामले में गिरफ्तार बस चालक कुलदीप की मां ने अपने बेटे को निर्दोष बताया है। रोते हुए उन्होंने दावा किया कि उनके बेटे को साजिश के तहत फंसाया जा रहा है। उन्होंने सरकार से मामले की निष्पक्ष जांच की अपील करते हुए कहा कि उनका परिवार बेहद गरीब है और उनके छोटे बच्चे हैं।

    कुलदीप की मां ने कहा कि करीब दो महीने पहले उनके पति की हत्या कर दी गई थी। उन्हें शक है कि पति की हत्या में शामिल लोगों ने ही उनके बेटे को इस मामले में फंसाया है। उन्होंने सरकार से हाथ जोड़कर अपील करते हुए कहा कि उनके बेटे को निर्दोष घोषित किया जाए।

    मां बोली- ‘मेरा बच्चा पूरी तरह निर्दोष’

    कुलदीप की मां के मुताबिक, “मेरा बच्चा पूरी तरह निर्दोष है। उसे झूठा फंसाया जा रहा है।” उन्होंने कहा कि उनके परिवार में बहुत छोटे बच्चे हैं और उनके पास दिल्ली जाकर अपनी बात रखने के लिए पर्याप्त साधन भी नहीं हैं। उन्होंने सरकार से मामले में सच्चाई सामने लाने की मांग की है।

    चलती बस में वारदात का आरोप

    पुलिस के मुताबिक, 4 अगस्त की रात दिल्ली-एनसीआर में 16 वर्षीय नाबालिग के साथ चलती स्लीपर बस में ड्राइवर और कंडक्टर ने कथित तौर पर दुष्कर्म किया। घटना उस समय हुई जब भारी बारिश के बीच लड़की नोएडा जाने के लिए रास्ते में थी। पुलिस ने मामले में बस चालक कुलदीप और कंडक्टर संदीप को गिरफ्तार किया है।

    बस ग्रेटर नोएडा के परी चौक से पुरानी दिल्ली के कश्मीरी गेट जा रही थी। करीब 47 किलोमीटर की यात्रा के दौरान कथित तौर पर वारदात को अंजाम दिया गया। पुलिस ने बस को जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है।

    बारिश में परी चौक पहुंची थी नाबालिग

    पुलिस सूत्रों के अनुसार, लड़की 11वीं कक्षा की छात्रा है और मैनपुरी की रहने वाली है। वह परिवार को बताए बिना नोएडा में अपने कजिन से मिलने निकली थी। भारी बारिश और अंधेरे के बीच वह रास्ता भटककर ग्रेटर नोएडा के परी चौक पहुंच गई।

    इसी दौरान वहां से गुजर रही एक खाली स्लीपर बस लड़की के इशारा करने पर रुकी। ड्राइवर और कंडक्टर ने उसे नोएडा सेक्टर-63 की तरफ जाने की बात बताकर वहां छोड़ने की पेशकश की।

    पुलिस के मुताबिक दोनों आरोपी गिरफ्तार

    लड़की के बयान के आधार पर पुलिस ने आरोप लगाया है कि बस चलने के कुछ देर बाद कंडक्टर ने उसके साथ अश्लील हरकतें शुरू कीं। इसके बाद ड्राइवर और कंडक्टर ने कथित तौर पर उसके साथ दुष्कर्म किया। विरोध करने पर उसे जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप है।

    DCP नॉर्थ निहारिका भट्ट ने सोमवार को मामले की पुष्टि करते हुए दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी दी। पुलिस के मुताबिक, 29 वर्षीय आरोपी संदीप का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं मिला है।

    अब पुलिस मामले से जुड़े सभी साक्ष्यों, पीड़िता के बयान और फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर आगे की जांच कर रही है। कुलदीप की मां के लगाए गए साजिश के आरोपों की भी जांच में स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

  • Delhi-NCR में तेजी से फैल रहा H1N1 वायरस…. गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है ये संक्रमण

    Delhi-NCR में तेजी से फैल रहा H1N1 वायरस…. गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है ये संक्रमण


    नई दिल्ली।
    एच1एन1 (H1N1) यानी स्वाइन फ्लू (Swine Flu), इन दिनों खूब चर्चा में है। दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) सहित देश के कई राज्य इस संक्रमण से गंभीर रूप से प्रभावित देखे जा रहे हैं। दिल्ली में इस साल अब तक 2700 से ज्यादा लोग संक्रमण का शिकार हो चुके हैं। अस्पतालों में तेज बुखार, सिरदर्द, खांसी-जुकाम और सांस की समस्याओं के शिकार मरीजों को संख्या भी बढ़ती देखी जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सभी लोगों को इन दिनों श्वसन रोगों से बचाव के लिए निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए। कुछ लोगों में ये संक्रमण गंभीर और जानलेवा समस्याओं का कारण भी बन सकता है।

    हालिया जानकारियों के मुताबिक बॉलीवुड एक्टर इमरान हाशमी भी स्वाइन फ्लू यानी एच1एन1 से संक्रमित हो गए हैं। उनका स्वाइन फ्लू टेस्ट पॉजिटिव आया है। बताया जा रहा है कि हाल ही में शूटिंग के सिलसिले में लगातार यात्रा करने के बाद उनकी तबीयत खराब हो गई थी। डॉक्टरों ने उन्हें आराम करने और जरूरी सावधानियां बरतने की सलाह दी है।

    डॉक्टर कहते हैं, पहले से ही कमजोर इम्युनिटी वालों और कोमोरबिडिटी (व्यक्ति में एक ही समय पर दो या दो से अधिक बीमारियां) के शिकार लोगों में स्वाइन फ्लू से निमोनिया होने का खतरा हो सकता है। आइए जानते हैं कि इसकी पहचान कैसे की जा सकती है?

    डॉक्टर कहते हैं, एच1एन1 फ्लू के खतरों को देखते हुए इन दिनों अगर आपको तेज बुखार के साथ सिर और मांसपेशियों में दर्द हो या सांस लेने में दिक्कत हो तो इसे इग्नोर नहीं करना चाहिए। फ्लू कुछ लोगों में गंभीर रूप ले सकता है और फेफड़ों तक संक्रमण पहुंचने पर निमोनिया जैसी जटिलता पैदा हो सकती है।

    अच्छी बात यह है कि वैसे तो ज्यादातर लोग फ्लू से करीब एक सप्ताह में ठीक हो जाते हैं। लेकिन हर व्यक्ति में बीमारी का असर एक जैसा नहीं होता। छोटे बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों में जटिलताओं का खतरा ज्यादा रहता है। फ्लू के दौरान सांस लेने में परेशानी या सीने में दर्द हो, हालत तेजी से बिगड़ रही हो या ठीक होने के बाद फिर तेज बुखार शुरू हो जाए, तो इसे चेतावनी का संकेत मानना चाहिए। ऐसे मामलों में डॉक्टर से तुरंत संपर्क जरूरी है।


    कैसे पहचानें कि फ्लू गंभीर हो रहा है?

    डॉक्टर कहते हैं, सिर्फ बुखार या खांसी देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि फ्लू गंभीर है या नहीं? अगर आपके लक्षण लगातार बढ़ते जा रहे हैं और सांस से जुड़ी परेशानी हो रही है तो इसे अनदेखा न करें। सांस लेने में दिक्कत, सांस फूलना, सीने में दर्द या दबाव, चक्कर या भ्रम की स्थिति हो तो तुरंत डॉक्टरी सहायता लेनी चाहिए।

    संक्रमण बढ़ने पर बच्चों में तेज सांस लेने, होंठ या त्वचा का नीला पड़ने, सुस्ती या ठीक से प्रतिक्रिया न देने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। ये गंभीर चेतावनी संकेत हो सकते हैं। इसमें तुरंत डॉक्टर के पास ले जाना जरूरी माना जाता है।


    स्वाइन फ्लू से निमोनिया का खतरा

    स्वाइन फ्लू का संक्रमण निमोनिया का कारण बन सकता है, जो गंभीर स्थिति मानी जाती है। निमोनिया फेफड़ों में होने वाला एक संक्रमण है इसमें फेफड़ों में मौजूद छोटी-छोटी हवा की थैलियां (एल्वियोली) में सूजन आ जाती है और उनमें तरल पदार्थ या मवाद भर सकता है। निमोनिया में खांसी और सांस की परेशानी बढ़ जाती है। मरीज को सीने में दर्द, थकान, सांस लेने में दिक्कत होने के साथ बुखार और ठंड लगने की समस्या भी हो सकती है। अगर फ्लू के मरीज में निमोनिया का संदेह हो, तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए। वायरल फ्लू के लिए एंटीवायरल दवाएं इस्तेमाल की जा सकती हैं। समय रहते उपचार हो जाए तो इससे जान जाने को खतरा कम किया जा सकता है।

    डॉक्टर कहते हैं, गंभीर फ्लू या निमोनिया के लक्षण होने पर घर पर केवल बुखार की दवा लेकर इंतजार नहीं करना चाहिए। समय रहते डॉक्टरी सलाह और उपचार जरूरी हो जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, गंभीर लक्षणों या हाई-रिस्क लोगों में एंटीवायरल दवा जल्द शुरू करना जरूरी है। इंफ्लूएंजा वायरस या किसी बैक्टीरिया के कारण होने वाली निमोनिया जैसी गंभीर समस्या से बचे रहने के लिए विशेषज्ञ सभी लोगों को सालाना फ्लू की वैक्सीन लगवाने की सलाह देते हैं। इस बारे में अपने डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

  • उत्तराखंड के पहाड़ों तक सफर होगा और आसान, नया बरेली-हल्द्वानी एक्सप्रेसवे दिल्ली और लखनऊ को देगा सीधी रफ्तार

    उत्तराखंड के पहाड़ों तक सफर होगा और आसान, नया बरेली-हल्द्वानी एक्सप्रेसवे दिल्ली और लखनऊ को देगा सीधी रफ्तार

    नई दिल्ली ।उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों तक यात्रा को और तेज, आसान और सुविधाजनक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को जोड़ने वाला नया बरेली-हल्द्वानी ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे आने वाले समय में यात्रियों के लिए बड़ी राहत लेकर आ सकता है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद न केवल पहाड़ों का सफर आसान होगा बल्कि दिल्ली-एनसीआर और लखनऊ जैसे बड़े शहरों से आने वाले यात्रियों को भी लंबी दूरी और ट्रैफिक जाम की समस्या से काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है।

    यह प्रस्तावित एक्सप्रेसवे पूरी तरह ग्रीनफील्ड परियोजना के रूप में तैयार किया जाएगा। इसका मतलब यह है कि पुराने मार्गों का विस्तार करने के बजाय एक बिल्कुल नए मार्ग का निर्माण किया जाएगा। इससे यात्रा अधिक सुगम होगी और स्थानीय ट्रैफिक की बाधाओं से भी बचा जा सकेगा। प्रस्तावित मार्ग को नियंत्रित एक्सेस प्रणाली के तहत विकसित किया जाएगा, जिससे वाहन बिना किसी रुकावट के तेज गति से सफर कर सकेंगे।

    बताया जा रहा है कि यह एक्सप्रेसवे लगभग 100 किलोमीटर लंबा होगा और चार लेन की आधुनिक सड़क सुविधा से लैस रहेगा। इसके निर्माण के बाद बरेली से हल्द्वानी के बीच यात्रा करने वाले लोगों को बड़े शहरों और कस्बों में लगने वाले जाम से छुटकारा मिलेगा। अभी इस मार्ग पर कई ऐसे इलाके पड़ते हैं जहां अक्सर भारी ट्रैफिक देखने को मिलता है, जिसके कारण यात्रियों को लंबा इंतजार करना पड़ता है और यात्रा का समय भी बढ़ जाता है।

    नए एक्सप्रेसवे के बनने के बाद बरेली से हल्द्वानी तक पहुंचने का समय कम होने की संभावना जताई जा रही है। यात्रा के दौरान एक से डेढ़ घंटे तक की बचत हो सकती है, जो विशेष रूप से पर्यटन सीजन और छुट्टियों के दौरान बड़ी राहत साबित हो सकती है। हल्द्वानी उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र का प्रमुख प्रवेश द्वार माना जाता है और यहीं से नैनीताल समेत कई प्रसिद्ध पहाड़ी पर्यटन स्थलों की शुरुआत होती है।

    इस परियोजना का लाभ केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि दिल्ली-एनसीआर और लखनऊ जैसे बड़े शहरों के यात्रियों को भी इसका सीधा फायदा मिलेगा। वर्तमान में इन क्षेत्रों से उत्तराखंड की ओर जाने वाले मार्गों पर अक्सर भारी ट्रैफिक और जाम की स्थिति बनी रहती है। नए एक्सप्रेसवे को बड़े राजमार्ग नेटवर्क से जोड़ने की योजना बनाई गई है, जिससे यात्रा और अधिक सरल हो सकेगी।

    आधुनिक सड़क परियोजनाएं केवल दूरी कम करने तक सीमित नहीं होतीं बल्कि वे क्षेत्रीय विकास, पर्यटन, व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति देती हैं। ऐसे में बरेली-हल्द्वानी एक्सप्रेसवे को भविष्य की एक महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी परियोजना के रूप में देखा जा रहा है, जो आने वाले समय में लाखों लोगों के सफर को नई रफ्तार दे सकती है।

  • हाई-स्पीड रेल से बदलेगी NCR की तस्वीर, दिल्ली से जेवर एयरपोर्ट पहुंचना होगा महज 21 मिनट में आसान

    हाई-स्पीड रेल से बदलेगी NCR की तस्वीर, दिल्ली से जेवर एयरपोर्ट पहुंचना होगा महज 21 मिनट में आसान

    नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में परिवहन व्यवस्था को आधुनिक और तेज बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम सामने आया है। प्रस्तावित हाई-स्पीड रैपिड रेल कनेक्टिविटी योजना के तहत दिल्ली और नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के बीच यात्रा का समय घटकर मात्र 21 मिनट तक सीमित हो सकता है। इस परियोजना को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार ने अपनी मंजूरी दे दी है और अब इसे अंतिम स्वीकृति के लिए केंद्र सरकार के संबंधित मंत्रालय को भेज दिया गया है।

    इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम को दिल्ली-जेवर एयरपोर्ट कनेक्टिविटी के लिए प्रमुख माध्यम के रूप में विकसित किया जा रहा है। राज्य सरकार द्वारा तैयार की गई विस्तृत परियोजना रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख किया गया है कि यह हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर न केवल यात्रियों के लिए समय की बड़ी बचत करेगा, बल्कि पूरे क्षेत्र के आर्थिक और औद्योगिक विकास को भी नई गति देगा।

    योजना के अनुसार प्रस्तावित कॉरिडोर को एक समर्पित स्टेशन के माध्यम से सीधे एयरपोर्ट टर्मिनल से जोड़ा जाएगा, जिससे यात्रियों को बिना किसी अतिरिक्त ट्रैफिक या देरी के तेज और सुविधाजनक यात्रा का लाभ मिलेगा। यह कनेक्टिविटी दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का भी हिस्सा हो सकती है, जिससे भविष्य में इसे और व्यापक परिवहन नेटवर्क से जोड़ा जाएगा।

    अधिकारियों के अनुसार यह परियोजना यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास क्षेत्र के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है। जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के शुरू होने के बाद यह पूरा क्षेत्र लॉजिस्टिक्स, कार्गो और औद्योगिक निवेश का एक बड़ा केंद्र बनने की क्षमता रखता है। तेज रफ्तार रेल कनेक्टिविटी इस विकास को और अधिक मजबूती प्रदान करेगी।

    इस योजना का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि दिल्ली और नोएडा एयरपोर्ट के बीच मौजूदा यात्रा समय, जो सड़क मार्ग से काफी अधिक है, वह घटकर लगभग एक घंटे से भी कम होकर केवल 21 मिनट रह जाएगा। इससे न केवल यात्रियों को सुविधा मिलेगी बल्कि एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी भी अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हो सकेगी।

     विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस परियोजना को केंद्र सरकार की मंजूरी मिल जाती है तो यह एनसीआर क्षेत्र में सार्वजनिक परिवहन का चेहरा पूरी तरह बदल सकती है। इससे सड़क यातायात पर दबाव कम होगा और पर्यावरणीय दृष्टि से भी यह एक बेहतर विकल्प साबित हो सकता है।

    फिलहाल इस महत्वाकांक्षी परियोजना को अंतिम स्वीकृति का इंतजार है। मंजूरी मिलने के बाद इसके निर्माण कार्य को तेजी से आगे बढ़ाने की योजना है, जिससे आने वाले वर्षों में दिल्ली और जेवर एयरपोर्ट के बीच तेज, आधुनिक और विश्वस्तरीय रेल कनेक्टिविटी स्थापित की जा सके।

  • NCR में अपराध पर लगाम के लिए सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सुझाव, एक ही पुलिस और विशेष अदालत की वकालत

    NCR में अपराध पर लगाम के लिए सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सुझाव, एक ही पुलिस और विशेष अदालत की वकालत


    नई दिल्ली /राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र NCR में बढ़ते संगठित अपराध और अपराधियों की बदलती रणनीतियों पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक अहम सुझाव दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि दिल्ली नोएडा गुरुग्राम फरीदाबाद और गाजियाबाद जैसे NCR के अलग-अलग इलाकों में अपराध करने वाले गिरोह अक्सर राज्य सीमाओं का फायदा उठाकर पुलिस कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया को कमजोर करते हैं। इस समस्या से निपटने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पूरे NCR में एक समान पुलिस एजेंसी और विशेष अदालत की व्यवस्था पर विचार करने की सलाह दी है।यह टिप्पणी मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट की उस पीठ ने की जिसमें मुख्य न्यायाधीश CJI सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची शामिल थे। अदालत का मानना है कि मौजूदा व्यवस्था में अलग-अलग राज्यों की पुलिस और अदालतों के अधिकार क्षेत्र के चलते संगठित अपराधियों को अनुचित लाभ मिल जाता है।

    अपराधियों की रणनीति पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

    सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि NCR में सक्रिय अपराधी गिरोह अक्सर दिल्ली में वारदात को अंजाम देने के बाद तुरंत उत्तर प्रदेश या हरियाणा के इलाकों-जैसे नोएडा गुरुग्राम या फरीदाबाद-में भाग जाते हैं। इस तरह वे गिरफ्तारी से बचने या जांच और ट्रायल में देरी करने में सफल हो जाते हैं। न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने इस ओर इशारा करते हुए कहा कि यदि कोई गैंगस्टर या संगठित गिरोह कई राज्यों में अपराध करता है तो उसके खिलाफ एक ही एजेंसी द्वारा कार्रवाई और एक ही अदालत में मुकदमा चलाया जाना ज्यादा प्रभावी होगा।

    NIA जैसी एजेंसी को अधिकार देने का सुझाव

    सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि संगठित अपराध से जुड़े मामलों में राष्ट्रीय जांच एजेंसी NIA जैसी केंद्रीय एजेंसी को पूरे NCR में जांच और ट्रायल का अधिकार दिया जा सकता है। इससे अपराधी यह तर्क नहीं दे पाएंगे कि अपराध अलग-अलग राज्यों में हुआ है और इसलिए अलग-अलग अदालतों में मुकदमा चले।अदालत ने माना कि एकीकृत व्यवस्था से जांच तेज होगी और न्यायिक प्रक्रिया ज्यादा प्रभावी बनेगी।

    विशेष अदालत बनाने की वकालत

    मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने केंद्र की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ASG ऐश्वर्य भाटी से सवाल किया कि क्यों न NCR के लिए एक विशेष अदालत बनाई जाए। उन्होंने कहा कि जिस तरह यूएपीए पीएमएलए और एनडीपीएस जैसे केंद्रीय कानूनों के तहत विशेष अदालतें बनाई गई हैं उसी तर्ज पर NCR में संगठित अपराध के मामलों के लिए भी एक सक्षम और केंद्रीकृत अदालत हो सकती है।ऐसी अदालत में यह मायने नहीं रखेगा कि अपराध किस राज्य में हुआ है बल्कि पूरा मामला एक ही जगह सुना और निपटाया जा सकेगा।

    कानूनी खामियों से अपराधियों को फायदा

    सुप्रीम कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि वर्तमान व्यवस्था में क्षेत्राधिकार जूरिस्डिक्शन की जटिलता संगठित अपराधियों के लिए फायदेमंद साबित हो रही है। अलग-अलग राज्यों में एफआईआर जांच और ट्रायल होने से मामलों में देरी होती है। इसका नतीजा यह होता है कि कई कुख्यात अपराधी जमानत पाने में सफल हो जाते हैं जो समाज और कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा है।
    समाज और जनहित के लिए जरूरी कदम
    पीठ ने जोर देकर कहा कि NCR जैसे संवेदनशील और घनी आबादी वाले क्षेत्र में अपराध नियंत्रण के लिए मजबूत और प्रभावी कानूनी ढांचे की जरूरत है। एक ही पुलिस एजेंसी और विशेष अदालत से न केवल त्वरित कार्रवाई संभव होगी बल्कि पीड़ितों को भी जल्द न्याय मिल सकेगा।सुप्रीम कोर्ट ने इसे जनहित और समाज की सुरक्षा से जुड़ा अहम मुद्दा बताते हुए कहा कि केंद्र सरकार को इस दिशा में गंभीरता से विचार करना चाहिए।फिलहाल यह एक सुझाव है लेकिन अगर इसे लागू किया जाता है तो NCR में अपराध से निपटने की रणनीति में बड़ा बदलाव आ सकता है। आने वाले समय में केंद्र सरकार इस पर क्या फैसला लेती है इस पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।