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  • तपिश से मिली बड़ी राहत, दिल्ली-एनसीआर में तेज हवाओं संग हुई बारिश; मौसम विभाग ने अगले 48 घंटे के लिए जारी किया अलर्ट

    तपिश से मिली बड़ी राहत, दिल्ली-एनसीआर में तेज हवाओं संग हुई बारिश; मौसम विभाग ने अगले 48 घंटे के लिए जारी किया अलर्ट

    नई दिल्ली । कई दिनों से भीषण गर्मी और उमस का सामना कर रहे दिल्ली-एनसीआर के लोगों को सोमवार शाम मौसम ने बड़ी राहत दी। अचानक तेज हवाएं चलने के बाद राजधानी और आसपास के कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई, जिससे तापमान में उल्लेखनीय गिरावट आई और वातावरण सुहावना हो गया। लंबे समय से गर्मी से परेशान लोगों ने राहत महसूस की और शाम के समय मौसम पूरी तरह बदला हुआ नजर आया।

    दिनभर तेज धूप और उमस के बाद शाम होते-होते आसमान में बादल छा गए। इसके बाद तेज हवा चलने लगी और कई स्थानों पर बारिश शुरू हो गई। मौसम में आए इस बदलाव से गर्मी का असर काफी कम हो गया। बारिश के चलते सड़कों पर लोगों की आवाजाही भी बढ़ी और कई इलाकों में लोगों ने खुले मौसम का आनंद लिया। हालांकि कुछ स्थानों पर तेज हवाओं के कारण यातायात की रफ्तार भी कुछ समय के लिए प्रभावित हुई।

    मौसम विभाग के अनुसार मंगलवार को भी राजधानी में राहत का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। पूरे दिन आंशिक रूप से बादल छाए रह सकते हैं। दोपहर या रात के समय हल्की बारिश के साथ गरज-चमक की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है, जबकि हवा के झोंके 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं।

    मंगलवार को अधिकतम तापमान 38 से 40 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 28 से 30 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है। सुबह पश्चिमी दिशा से हवाएं लगभग 20 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलेंगी, जो दोपहर के समय बढ़ सकती हैं। शाम और रात के दौरान हवा की रफ्तार कुछ कम होने का अनुमान है, लेकिन मौसम में नमी बनी रहेगी।

    बुधवार, 1 जुलाई को भी मौसम का मिजाज लगभग इसी तरह रहने की संभावना जताई गई है। दिनभर बादल छाए रहने के साथ कुछ स्थानों पर हल्की बारिश और गरज-चमक हो सकती है। तेज हवाओं का दौर भी जारी रह सकता है और हवा की गति 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे रहने की संभावना है। कुछ इलाकों में हवा के झोंके 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं, जिससे मौसम और अधिक सुहावना बना रहेगा।

    एक जुलाई को अधिकतम तापमान 37 से 39 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान 27 से 29 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है। सुबह उत्तर-पश्चिम दिशा से हवाएं चलेंगी, जबकि दोपहर और शाम के दौरान पश्चिमी हवाओं का प्रभाव बना रहेगा। मौसम विभाग का मानना है कि बादलों की आवाजाही और हल्की वर्षा के कारण तापमान सामान्य के आसपास बना रह सकता है।

    मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश और तेज हवाओं की वजह से लोगों को फिलहाल भीषण गर्मी से राहत मिल सकती है। हालांकि गरज-चमक और तेज हवा के दौरान खुले स्थानों, पेड़ों तथा कमजोर ढांचों के आसपास सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। आने वाले दिनों में मानसूनी गतिविधियां और सक्रिय होने की संभावना है, जिससे राजधानी और एनसीआर के कई हिस्सों में रुक-रुक कर बारिश का दौर जारी रह सकता है। इससे न केवल तापमान नियंत्रित रहेगा बल्कि लंबे समय से पड़ रही गर्मी और उमस से भी लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।

  • ड्रोन तकनीक का कमाल चलती ट्रेनों पर पत्थर फेंकने वालों की बढ़ी गिरफ्तारी आरपीएफ की सख्ती से घटी घटनाएं

    ड्रोन तकनीक का कमाल चलती ट्रेनों पर पत्थर फेंकने वालों की बढ़ी गिरफ्तारी आरपीएफ की सख्ती से घटी घटनाएं


    नई दिल्ली । दिल्ली एनसीआर में चलती ट्रेनों पर पत्थर फेंकने की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए रेलवे सुरक्षा बल ने जिस नई रणनीति को अपनाया है उसके सकारात्मक परिणाम अब साफ दिखाई देने लगे हैं। रेलवे पटरियों के किनारे ड्रोन से निगरानी शुरू होने के बाद न केवल ऐसी घटनाओं में कमी दर्ज की गई है बल्कि पत्थरबाजी करने वाले आरोपियों की गिरफ्तारी में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। आधुनिक तकनीक और सतर्क निगरानी के इस संयोजन ने रेल यात्रियों की सुरक्षा को पहले से कहीं अधिक मजबूत बना दिया है।

    आरपीएफ के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में मई तक चलती ट्रेनों पर पत्थरबाजी की 176 घटनाएं दर्ज की गई थीं। इनमें 144 मामले रेलवे अधिनियम के तहत दर्ज हुए थे और 32 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। वहीं वर्ष 2026 की इसी अवधि में घटनाओं की संख्या घटकर 144 रह गई जबकि 138 मामलों में कार्रवाई करते हुए 79 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इस प्रकार गिरफ्तारियों में लगभग 146 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई जो आरपीएफ की नई रणनीति की प्रभावशीलता को दर्शाती है।

    आरपीएफ अधिकारियों के अनुसार वर्तमान में संवेदनशील रेलवे मार्गों पर दो ड्रोन लगातार निगरानी कर रहे हैं। आदर्श नगर नरेला पानीपत रेलखंड को सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल किया गया है। जैसे ही कोई ट्रेन इस मार्ग से गुजरती है ड्रोन हवा में सक्रिय हो जाते हैं और आसपास की गतिविधियों पर रियल टाइम नजर रखते हैं। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिलते ही निकट मौजूद सुरक्षा दल को तुरंत अलर्ट भेजा जाता है जिससे आरोपी मौके पर ही पकड़ लिए जाते हैं।

    हालांकि आरपीएफ का मानना है कि पत्थरबाजी की हर घटना के पीछे संगठित अपराध नहीं होता। कई मामलों में रेलवे ट्रैक के आसपास रहने वाले बच्चे भी शरारत में पत्थर फेंक देते हैं। वर्ष 2025 में 37 बच्चों की संलिप्तता वाली 32 घटनाओं में कोई मामला दर्ज नहीं किया गया था जबकि इस वर्ष 11 बच्चों से जुड़ी छह घटनाएं सामने आईं। इन मामलों में भी कानूनी कार्रवाई के बजाय समझाइश और परामर्श को प्राथमिकता दी गई।

    अधिकारियों का कहना है कि रेलवे लाइन के आसपास रहने वाले कई बच्चे स्कूल नहीं जाते और अपना अधिकांश समय पटरियों के पास खेलते हुए बिताते हैं। खेल खेल में वे गुजरती ट्रेनों पर पत्थर फेंक देते हैं जिससे यात्रियों की जान जोखिम में पड़ जाती है। इस चुनौती से निपटने के लिए आरपीएफ गैर सरकारी संगठनों के सहयोग से जागरूकता अभियान चला रही है। बच्चों की काउंसलिंग की जा रही है और अभिभावकों के साथ बैठक कर उन्हें रेलवे ट्रैक के पास बच्चों को न खेलने देने की सलाह दी जा रही है।

    आरपीएफ की रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि रेलवे पटरियों के किनारे बनी अनधिकृत बस्तियां असामाजिक तत्वों की गतिविधियों का केंद्र बनी हुई हैं। कई बार शराब के नशे में लोग ट्रेनों पर पत्थर फेंक देते हैं। इसके अलावा अवैध रेलवे क्रॉसिंग का इस्तेमाल करने वाले कुछ लोग ट्रेन गुजरने के दौरान इंतजार से नाराज होकर भी इस तरह की घटनाओं को अंजाम देते हैं।

    ड्रोन निगरानी के साथ साथ रेलवे पटरियों के किनारे सोलर ऊर्जा से संचालित सीसीटीवी कैमरे भी तेजी से लगाए जा रहे हैं। पहले दो चरणों में 76 कैमरे लगाए जा चुके हैं और अब 50 नए कैमरे स्थापित किए जा रहे हैं। आधुनिक तकनीक मजबूत निगरानी और जनजागरूकता के संयुक्त प्रयासों से आरपीएफ को उम्मीद है कि आने वाले समय में चलती ट्रेनों पर पत्थरबाजी की घटनाओं में और अधिक कमी आएगी तथा रेल यात्रियों की सुरक्षा पहले से कहीं अधिक सुनिश्चित हो सकेगी।

  • आग बरसाता आसमान: उत्तर भारत में भीषण गर्मी का कहर, पाकिस्तान से आने वाली लू बनी बड़ी वजह

    आग बरसाता आसमान: उत्तर भारत में भीषण गर्मी का कहर, पाकिस्तान से आने वाली लू बनी बड़ी वजह

    नई दिल्ली: देश के कई हिस्सों में इस समय गर्मी अपने सबसे खतरनाक रूप में दिखाई दे रही है। दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में सूरज मानो आग बरसा रहा है। सुबह से ही तेज धूप लोगों को परेशान कर रही है, जबकि दोपहर होते-होते सड़कें तपते तवे जैसी महसूस होने लगती हैं। कई शहरों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है और आने वाले दिनों में इसके और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। लगातार बढ़ती गर्मी ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। बाजारों में भीड़ कम हो गई है, सड़कों पर सन्नाटा दिखाई दे रहा है और लोग जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं।

    मौसम विशेषज्ञों के अनुसार इस बार गर्मी सामान्य से कहीं अधिक तेज महसूस की जा रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह प्री-मॉनसून गतिविधियों का कमजोर पड़ना माना जा रहा है। आमतौर पर मई के मध्य तक उत्तर भारत में आंधी, हल्की बारिश और बादलों की आवाजाही शुरू हो जाती है, जिससे तापमान में कुछ राहत मिलती है। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो रहा है। आसमान पूरी तरह साफ है और तेज धूप सीधे धरती को गर्म कर रही है। लगातार कई दिनों तक बारिश नहीं होने से जमीन भी तेजी से तप रही है, जिसका असर तापमान पर साफ दिखाई दे रहा है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान और थार रेगिस्तान की ओर से आने वाली गर्म और सूखी हवाएं भी इस भीषण गर्मी को और खतरनाक बना रही हैं। ये हवाएं राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से होते हुए मध्य भारत तक पहुंच रही हैं। दिन के समय चलने वाली लू लोगों के लिए सबसे बड़ी परेशानी बन गई है। कई इलाकों में रात के समय भी गर्मी कम नहीं हो रही, जिससे लोगों को आराम तक नहीं मिल पा रहा है। लगातार गर्म रहने वाली रातें स्वास्थ्य के लिए भी खतरा पैदा कर रही हैं।

    मौसम की मौजूदा स्थिति के पीछे समुद्री सिस्टम का कमजोर होना भी एक बड़ा कारण बताया जा रहा है। बंगाल की खाड़ी में बना सिस्टम भारत की ओर सक्रिय असर नहीं डाल पाया, जबकि अरब सागर में बनने वाली गतिविधियां भी कमजोर बनी हुई हैं। इसके कारण नमी वाली हवाएं उत्तर भारत तक नहीं पहुंच पा रहीं। नतीजा यह है कि गर्मी को रोकने वाला कोई मजबूत मौसम तंत्र फिलहाल सक्रिय नहीं दिख रहा।

    डॉक्टरों ने भी लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। तेज धूप और लू के कारण डिहाइड्रेशन, चक्कर आना, सिरदर्द और हीट स्ट्रोक के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत बताई गई है। दिन के समय ज्यादा देर तक धूप में रहने से बचने, पर्याप्त पानी पीने और हल्के कपड़े पहनने की सलाह दी जा रही है।

    फिलहाल मौसम में तुरंत राहत मिलने के संकेत नहीं दिखाई दे रहे हैं। आने वाले कुछ दिन उत्तर भारत के लिए और अधिक चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं। यदि जल्द बारिश या आंधी जैसी गतिविधियां शुरू नहीं होतीं, तो तापमान में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। ऐसे में लोगों को सतर्क और सुरक्षित रहने की जरूरत है।

  • दिल्ली-NCR में प्रदूषण का कहर: GRAP 4 लागू, AAP ने केंद्र और दिल्ली सरकार को घेरा

    दिल्ली-NCR में प्रदूषण का कहर: GRAP 4 लागू, AAP ने केंद्र और दिल्ली सरकार को घेरा


    नई दिल्ली। दिल्ली में प्रदूषण लगातार उच्च स्तर पर बना हुआ है। आज राजधानी में AQI 500 के पार पहुंच गया है, जिससे सांस लेना मुश्किल हो गया है और विजिबिलिटी भी काफी कम हो गई है। स्थिति के मद्देनजर नेशनल कैपिटल में GRAP 4 लागू कर दिया गया है।

    AAP ने उठाया केंद्र और दिल्ली सरकार पर सवाल
    AAP के दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि “यह सरकार लगभग एक साल से सत्ता में है, लेकिन प्रदूषण को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। बंद कमरे में भी धुंध दिखाई दे रही है। CM को यह नहीं पता कि AQI क्या होता है। एक्सपर्ट्स को आगे आना चाहिए और मुख्यमंत्री को पीछे हट जाना चाहिए।”

    GRAP 4: क्या है नियम
    GRAP-IV के तहत राज्य और केंद्रीय एजेंसियों को NCR में हवा की गुणवत्ता सुधारने के उपाय तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।

    बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्कूलों में क्लास 5 तक हाइब्रिड मोड में पढ़ाई अनिवार्य कर दी गई है।

    क्लास 6 से 11 तक फिजिकल क्लास बंद करने का विकल्प भी राज्य सरकारों को दिया गया है।

    प्रदूषण का स्वास्थ्य पर असर
    दिल्ली-NCR में लोगों को सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन, गले में खराश और खांसी जैसी समस्याएं हो रही हैं।

    डॉक्टरों ने सलाह दी है कि अगर संभव हो तो अगले कुछ हफ्तों तक दिल्ली से बाहर जाने पर विचार किया जाए।

    दिल्ली में लगातार बढ़ते प्रदूषण के कारण GRAP 4 लागू किया गया है, लेकिन विपक्ष और AAP का कहना है कि केंद्र और दिल्ली सरकार इस गंभीर समस्या को गंभीरता से नहीं ले रही हैं। राजधानीवासियों के लिए फिलहाल सफर और बाहरी गतिविधियों में सावधानी बरतना आवश्यक है।

  • दिल्ली-NCR में GRAP-4 लागू, प्रदूषण संकट के बीच स्कूल हाइब्रिड मोड पर शिफ्ट…

    दिल्ली-NCR में GRAP-4 लागू, प्रदूषण संकट के बीच स्कूल हाइब्रिड मोड पर शिफ्ट…


    नई दिल्ली/ दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र NCR में वायु गुणवत्ता AQI का स्तर एक बार फिर ‘बेहद खराब’ Severe श्रेणी में पहुंचने के कारण स्थिति गंभीर हो गई है। प्रदूषण के खतरनाक स्तर को देखते हुए, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत कार्यरत वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग CAQM ने तत्काल प्रभाव से ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान GRAP के सबसे सख्त चरण, यानी चरण 4 GRAP-4 को लागू करने का आदेश दिया है।

    प्रदूषण की स्थिति और GRAP-4 की आवश्यकता

    राजधानी दिल्ली के कई निगरानी स्टेशनों पर वायु गुणवत्ता सूचकांक AQI 450 के आंकड़े को पार कर गया है, जो ‘गंभीर’ श्रेणी को दर्शाता है। यह स्थिति न केवल स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है, बल्कि इसे एक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल के करीब माना जाता है। इस भयावह स्थिति से निपटने और प्रदूषण के खतरनाक स्रोतों पर तत्काल नियंत्रण लगाने के उद्देश्य से प्रशासन ने ये कड़े कदम उठाए हैं। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले कुछ दिनों तक वायुमंडलीय स्थिरता और हवा की कम गति के कारण प्रदूषण के स्तर में किसी बड़े सुधार की संभावना कम है, जिसने स्थिति की गंभीरता को और बढ़ा दिया है।

    शिक्षा पर तत्काल प्रभाव: हाइब्रिड मोड की वापसी
    GRAP-4 के लागू होते ही, दिल्ली शिक्षा निदेशालय DoE ने छात्रों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए स्कूलों के लिए विस्तृत और सख्त दिशानिर्देश जारी किए हैं। इन दिशानिर्देशों का मुख्य फोकस कक्षा 9वीं से लेकर 11वीं तक के छात्रों की शिक्षा पद्धति में परिवर्तन लाना है:हाइब्रिड मोड: कक्षा 9वीं, 10वीं और 11वीं के छात्रों के लिए पढ़ाई अब हाइब्रिड मोड में आयोजित की जाएगी। इसका अर्थ है कि शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से संचालित होगी।

    स्कूलों पर लागू: यह नई व्यवस्था दिल्ली के सभी सरकारी, सहायता प्राप्त Aided और निजी Private स्कूलों पर समान रूप से लागू होगी। स्कूलों को यह सुनिश्चित करना होगा कि जो छात्र ऑनलाइन क्लास का विकल्प चुनते हैं, उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो। अन्य कक्षाएं: हालांकि, आदेश में 12वीं कक्षा के छात्रों और छोटी कक्षाओं 8वीं तक के लिए स्पष्ट निर्देश नहीं दिए गए हैं, लेकिन यह संकेत है कि सबसे अधिक संवेदनशील आयु वर्ग को घर से पढ़ने का विकल्प दिया जा रहा है। यह कदम छात्रों को अत्यधिक प्रदूषित वातावरण में बाहर निकलने और स्कूल आने-जाने से रोकने के लिए उठाया गया है।

    कार्यालयों और परिवहन पर सख्त नियंत्रण

    प्रदूषण के स्रोतों को कम करने के लिए कार्यस्थलों और परिवहन क्षेत्र पर भी महत्वपूर्ण पाबंदियां लगाई गई हैं:सरकारी कार्यालयों में उपस्थिति पर सीमा:कर्मचारी सीमा: सरकारी कार्यालयों में कर्मचारियों की उपस्थिति को सीमित कर दिया गया है। केवल 50 प्रतिशत कर्मचारी ही भौतिक रूप से कार्यालय में उपस्थित रहेंगे। वर्क फ्रॉम होम: शेष 50 प्रतिशत कर्मचारी ‘वर्क फ्रॉम होम’ WFH मोड पर कार्य करेंगे। इस व्यवस्था का लक्ष्य सड़क पर वाहनों की संख्या को कम करना है।

    निजी दफ्तरों को निर्देश:
    निजी दफ्तरों और प्रतिष्ठानों को भी सक्रिय रूप से फ्लेक्सिबल टाइमिंग Flexible Timings अपनाने और कर्मचारियों को अधिकतम संभव सीमा तक घर से काम Work From Home करने के लिए प्रोत्साहित करने का निर्देश दिया गया है। यह व्यवस्था भीड़भाड़ वाले समय में वाहनों के आवागमन को कम करने में सहायक होगी।

    परिवहन पर पाबंदियां:
    भारी वाहनों पर रोक: दिल्ली की सीमा में बाहरी राज्यों से आने वाले ट्रकों और अन्य भारी/मध्यम मालवाहक वाहनों आवश्यक सेवाओं को छोड़कर के प्रवेश पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। यह कदम भारी वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को रोकने के लिए महत्वपूर्ण है। निर्माण कार्य पर पाबंदी: GRAP-4 के तहत पहले से ही गैर-आवश्यक निर्माण और विध्वंस गतिविधियों पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।

    आगे की राह
    प्रदूषण नियंत्रण के लिए उठाए गए ये कदम अल्पकालिक राहत प्रदान करने के उद्देश्य से हैं। दिल्ली-NCR के नागरिकों को भी दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करने की सलाह दी गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने नागरिकों से अपील की है कि वे अत्यंत आवश्यक न होने पर घर से बाहर न निकलें और N-95 जैसे मास्क का उपयोग करें। प्रशासन की ओर से लोगों से अपील की गई है कि वे निजी वाहनों के इस्तेमाल को कम करें और सार्वजनिक परिवहन, साइकिलिंग या पैदल चलने को प्राथमिकता दें, ताकि इस राष्ट्रीय संकट से मिलकर लड़ा जा सके।